यूपी के इस नौकरशाह का कुख्यात आम्रपाली बिल्डर्स की कंपनी में बड़ा शेयर है!

सूर्य प्रताप सिंह

Surya Pratap Singh IAS : योगी सरकार में भृष्टाचार के सरगना इन कुख्यात IAS अधिकारियों को छूने की हिम्मत क्यों नहीं हो रही? NOIDA के साथ-२ यमुना व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में पिछली दो सरकारों में भू-आवंटन घोटालों में शामिल बिहार मूल के एक IAS नौकरशाह की जांच तो दूर उन्हें छूने तक की हिम्मत योगी सरकार मे नहीँ है. पिछली दो सरकारों में समान रुप से प्रिय रहे इस IAS/नौकरशाह ने 7 बड़े बिल्डर्स की अर्थदंड व ब्याज माफ़ी कर व दिल्ली में विराजमान एक नेता के कहने पर ठेके देने में रु. 51,000 करोड़ का चूना लगाया गया. यह खुलासा हाल ही कि CAG रिपोर्ट में होने वाला है. कच्ची रिपोर्ट बन चुकी है.

योगी जी को याद होना चाहिए कि जब पूर्व केंद्र सरकार के दो नंबर की हैसियत वाले तत्कालीन मंत्री ने उन्हें एक फटकार भरी धमकी दी थी कि बिहार मूल के इस IAS, नौकरशाह को न छुआ जाए. ये अधिकारी मायावती व अखिलेश दोनों का एक समान नाक का बाल रहा तथा इसी ने महाभृष्ट नोएडा इंजीनियर यादव सिंह को न केवल प्रोन्नति दी अपितु तीनों प्राधिकरण के मुख्य अभियंता भी बना दिया। आज इस नौकरशाह को भाजपा संगठन का भी वरदहस्त कैसे प्राप्त हो गया, यह अहम प्रश्न है?

इसी नौकरशाह का कुख्यात आम्रपाली बिल्डर्स की कंपनी में भी बड़ा शेयर भी है बल्कि बिहार से निवेशक लाकर आम्रपाली कंपनी बनवाई थी. इसी नौकरशाह ने नोएडा एक्सटेंशन क्षेत्र में तमाम बड़े-२ बिल्डर्स को पैसे लेकर भूमि आवंटित किया और नियम विरुद्ध भू उपयोग परिवर्तन किया गया, जिसके कारण आज ये तीनों प्राधिकरण औद्योगिक से आवासीय प्राधिकरण में बदल गए। हाल ही में कावेरी बिल्डर की जिस बिल्डिंग की गिराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, उसका नक्शा पास करने व निर्माण की अनुमति इसी नौकरशाह ने दी। जिनके कारण कावेरी सोसाइटी की टावर्स में रह रहे 12,000 परिवारों/लोगों के मेहनत की कमाई मिट्टी में मिलने वाली है।

पिछली दो सरकारों मे औद्योगिक भूमि का आवंटन व भू उपयोग परिवर्तन एक प्लास्टिक किंग के नाम से कुख्यात उद्योगपति जिन्हें कस्टम विभाग के चेयरमैन के नाम से करोड़ों रुपये की रिश्वत ली थी, और CBI ने गिरफ्तार किया था, की नोएडा स्थित फैक्ट्री में बैठकर उक्त नौकरशाह लेन देन की डील किया करता था। जो पैसा आवंटियों से वसूला जाता था, उसे इस उद्योगपति के प्राइवेट जेट से ही लखनऊ लाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों व उनके परिवारों के सुपुर्द कर दिया जाता था।

आज इस नौकरशाह की जांच तो दूर योगी सरकार ने इनके भ्रष्टाचार के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। क्या अभी भी आप योगी सरकार से अपेक्षा करेंगे कि वे NOIDA व दो अन्य प्राधिकरणों के घोटालों की जॉच कराएंगे….पिंजरे में बंद मुख्यमंत्री जी? कौन नहीं जानता कि उक्त तीनों प्राधिकरणों में सभी दलों के नेताओं व उनके परिवारों का काला धन का निवेश है..

सच बता दूं कि सत्ताधारी दाल चाहे कोई भी आ जाये, इन प्राधिकरणों के घोटाले को छूने वाला नहीं है…… बातें खूब होंगी ताकि भ्रष्ट नौकरशाहों/इंजीनियर्स को ब्लैकमेल कर पार्टी फण्ड के नाम या स्वमं की जेब भरने के लिए नेताओं द्वारा इन भृष्ट अधिकारियों को दुहा जा सके। भ्रष्ट इंजीनियर यादव सिंह की जांच सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के निर्देश पर हुई है, किसी सरकार ने नहीं कराई … सरकारें तो उसे बचाती रहीं। यदि एक पूर्व मुख्यमंत्री के भाई पर ED की कार्यवाही को छोड़ दें तो योगी सरकार ने NOIDA और यमुना व ग्रेटर नोएडा के घोटालों की किसी जांच के आदेश क्यों नहीं दिए? यह विचारणीय प्रश्न है।

योगी जी ने आम्रपाली सहित बड़े बिल्डर्स के साथ-साथ इन प्राधिकरणों के घोटालों में दोषी भ्रष्ट अधिकारियों की जांच के लिए आदेश दिए हैं, देखते है कि क्या कुछ होता है. छोटे ही पकड़े जाएंगे या फिर मोटे भी फंसेंगे… या फिर उ. प्र. लोकसेवा आयोग व गोमती बंधे की जांच की तरह सब कुछ लच्छेदार बातों के साथ ठंडे बस्ते में चला जायेगा.

क्या पूर्व मुख्यमंत्री व उनके प्रिय नौकरशाहों में से कोई जेल जाएगा? क्या योगी जी अपनी ईमानदार छवि के टैग से ही संतुष्ट रहकर भृष्टाचार को बर्दाश्त करने के लिए विवश रहेंगे ….या फिर बड़े चोर नौकरशाहों की पकड़ने की हिम्मत भी दिखाएंगे? जय हिंद, जय भारत।

यूपी कैडर के आईएएस अफसर रहे सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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