अर्नब गोस्वामी पर मुकदमों का बदला है विनोद दुआ पर मुकदमा!

शीतल पी सिंह

विनोद दुआ पर बदले की कार्रवाई की जा रही है, दक्षिणी टोले की टिप्पणियों से पता चलता है कि वे अर्नब गोस्वामी के खिलाफ महाराष्ट्र में दर्ज़ हो रहे मुकदमों का बदला लेने के लिए यह सब कर रहे हैं।

उनका सवाल है कि अर्नब गोस्वामी पर हुए” जुल्म” पर यह लोग चुप रहे/खुश हुए?

अर्नब गोस्वामी पर मामले लिखवाने वाले उनके विरोधी पत्रकार नहीं हैं बल्कि कांग्रेस और दीगर विपक्षी दल और उनके समर्थक हैं। अर्नब गोस्वामी अपनी च्वायस से पत्रकारिता छोड़कर मौजूदा सरकार के लिए खुली आपराधिक किस्म की बैटिंग कर रहे हैं जिससे हमारे संविधान के अनुसार आपराधिक मामले सचमुच बनते हैं।

जबकि विनोद दुआ पत्रकारिता कर रहे हैं जीवन भर करते रहे हैं। हमेशा उस वक्त की सरकार से सवाल करते रहे हैं चाहे दूरदर्शन पर ही क्यों न हो। उनके विचार किसी से टकरा सकते हैं पर उन्होंने पत्रकारिता का आचार नष्ट नहीं किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन पर हुई पहली FIR की स्क्रूटिनी करके रिलीफ़ देते समय इसे दर्ज किया है।

अर्नब गोस्वामी के पक्ष में वही बोल सकते हैं जो उनके किये को पत्रकारिता मानते हैं।अब कोई पत्रकार उसे पत्रकारिता नहीं मानता बल्कि वह जो हैं वही कहता जानता है। एडीटर्स गिल्ड समेत सभी साझा फोरम से वे खुद ही खुद को अलग करके दूसरे फोरम में चले आये हैं। पहले भी तमाम पत्रकार ऐसे प्रयास कर चुके हैं पर वे उन सबसे बहुत ही अलग और बहुत आगे बढ़ चुके हैं।

अर्नब गोस्वामी के मामले की सुप्रीम कोर्ट तक में उनकी सुविधा से स्क्रुटिनी हो चुकी है, हाईकोर्ट में भी हुई है पर कहीं किसी ने उन्हें उत्पीड़ित नहीं माना, हां उन्हें यह सुविधा जरूर दे दी कि उनके मामले की एक जगह जांच हो प्रहसन न हो, जो ठीक निर्णय है।

अर्नब गोस्वामी के लिए देश के सबसे बड़े वकील लड़ रहे हैं लड़ेंगे पर पत्रकार विनोद दुआ के लिए पत्रकारों को लड़ना होगा!

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One comment on “अर्नब गोस्वामी पर मुकदमों का बदला है विनोद दुआ पर मुकदमा!”

  • सर, थोड़ा मजीठिया वेज बोर्ड के चलते अपनी जॉब गवां बैठे साथियों के लिए भी लिख दें। पत्रकारों को संस्थानों से निकाल फेंक दिया गया लेकिन कुछ लोगों (यशवंत और रवीशजी को थैंक्स) के अलावा कोई नहीं बोला। आज जॉब से निकाले गए साथियों का घर चलाना मुश्किल हो गया है। विनोद जी और अर्णब के लिए ग्रुप बन गए, लेकिन सताए गए लोगों के लिए कोई नहीं, क्यों….
    वाह !

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