नेटवर्क18 से अनिल राय टर्मिनेट, रमा रमण की कार और ठग संरक्षक आईपीएस अफसरों का रहस्य क्या है?

अनिल राय की नौकरी भी चली गयी। 9 करोड़ से ज्यादा रुपए ठगने के एक मामले में अनिल को यूपी पुलिस की एसटीएफ ने अरेस्ट किया और बाद में जेल भेज दिया। अनिल नेटवर्क18 ग्रुप के चैनल न्यूज़18इंडिया के डिजिटल विंग में काम करते थे। जब उन्होंने ये ग्रुप जॉइन किया तब उनका पद एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) था।

बताया जाता है कि अनिल राय आईएएस अधिकारी रमा रमण की कार अपने पास रखते थे और उसी से चलते थे। जब एसटीएफ ने अनिल को उठाया उस वक़्त भी वे रमा रमण की होंडा अमेज कार ड्राइव कर रहे थे।

एसटीएफ ने जब कार नम्बर के आधार पर गाड़ी के डिटेल निकाले तो ये आईएएस अधिकारी के नाम की गाड़ी निकली। जाहिर है, इस गाड़ी को सीन से गायब होना ही था।

एसटीएफ ने गिरफ्तारी के बाद जो प्रेस रिलीज जारी की है, उसमें बरामद सामानों में इस गाड़ी का जिक्र नहीं है। ऐसा लगता है कि गाड़ी को गाड़ी मालिक तक सकुशल पहुंचा दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि रमा रमण जब नोएडा प्राधिकरण के मुखिया थे तब अनिल राय उनके अघोषित उगाही केंद्र थे। आम्रपाली समेत दर्जनों बिल्डरों से लेनदेन, डील, उगाही आदि के कामकाज अनिल राय देखते थे।

रमा रमण के आंख के तारे रहे अनिल राय ने उस समय भी काफी सम्पत्ति बटोरी। रमा रमण की कार का अनिल राय के पास मिलना कोई इत्तफाक नहीं बल्कि दोनों के बीच के मजबूत दोस्ताने का प्रतीक है।

योगी सरकार को रमा रमण जैसे अफसरों की कुंडली भी खोलनी चाहिए ताकि अतीत के पाप उजागर हो सकें। अनिल राय जैसे लगे छोटी मछलियां हैं। इनके आका तो अब भी सत्ता सिस्टम का हिस्सा बने हुए हैं और चैन की रोटी तोड़ रहे हैं।

ज्ञात हो कि 9 करोड़ ठगी मामले में आईपीएस अफसरों का भी नाम चर्चा में है पर एसटीएफ शायद ही इन दागी अफसरों को अपनी जांच में शामिल कर पूछताछ करे। इसमें एक अफसर के नाम के आखिर में यादव लगा हुआ है और ये उन दिनों सीबीसीआईडी के एसपी हुआ करते थे।

सवाल है कि क्या जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली योगी सरकार की एसटीएफ इन आईएएस और आईपीएस अफसरों को छुवेगी या सिर्फ छोटी मछलियों को अंदर कर अपनी पीठ थपथपायेगी?

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