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मेरी इस सुंदर-सी फेसबुक दोस्त ने कल आधी रात के बाद सुसाइड कर लिया और मैं अनजान रहा…

Yashwant Singh : मेरी इस सुंदर-सी फेसबुक दोस्त ने कल आधी रात के बाद सुसाइड कर लिया और मैं अनजान रहा… अपने फेसबुक फ्रेंड और प्रतिभाशाली युवा लिक्खाड़ नितिन ठाकुर की पोस्ट पढ़कर ठिठक गया. दुबारा-तिबारा पढ़ा. अंशु सचदेवा ने खुदकुशी कर ली. उन्होंने यह जानकारी देते हुए अंशु का फरवरी महीने का एक स्टेटस शेयर किया जिसमें अंशु सचदेवा ने लिखा है: ”वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ दे के छोड़ना अच्छा”. यह सब पढ़ के सोचा कि देखूं, कहीं अंशु सचदेवा मेरी फ्रेंड लिस्ट में तो नहीं. देखा तो ऐसा ही निकला. अंशु सचदेवा मेरी फेसबुक फ्रेंड हैं. 16 अप्रैल तक उन्होंने अपना स्टेटस अपडेट किया हुआ है. उनकी वॉल और उनकी पोस्ट्स और उनकी तस्वीरें देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह खूबसूरत संगीतमय लड़की अचानक सुसाइड कर लेगी.

Yashwant Singh : मेरी इस सुंदर-सी फेसबुक दोस्त ने कल आधी रात के बाद सुसाइड कर लिया और मैं अनजान रहा… अपने फेसबुक फ्रेंड और प्रतिभाशाली युवा लिक्खाड़ नितिन ठाकुर की पोस्ट पढ़कर ठिठक गया. दुबारा-तिबारा पढ़ा. अंशु सचदेवा ने खुदकुशी कर ली. उन्होंने यह जानकारी देते हुए अंशु का फरवरी महीने का एक स्टेटस शेयर किया जिसमें अंशु सचदेवा ने लिखा है: ”वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ दे के छोड़ना अच्छा”. यह सब पढ़ के सोचा कि देखूं, कहीं अंशु सचदेवा मेरी फ्रेंड लिस्ट में तो नहीं. देखा तो ऐसा ही निकला. अंशु सचदेवा मेरी फेसबुक फ्रेंड हैं. 16 अप्रैल तक उन्होंने अपना स्टेटस अपडेट किया हुआ है. उनकी वॉल और उनकी पोस्ट्स और उनकी तस्वीरें देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह खूबसूरत संगीतमय लड़की अचानक सुसाइड कर लेगी.

और हां, मेरे जैसे लोग, जो उनके फेसबुक फ्रेंड हैं लेकिन आजतक कभी एक भी उनसे न चैट की न परिचय पूछा न हालचाल जाना और न भावनात्मक रिश्ता कायम किया, अब जब वो नहीं रहीं तो बेहद अफसोस कर रहे हैं. कि, शायद अगर वो मुश्किल में होती और मुझसे खुलकर अपनी बात कहती तो उसे उसके दुखों से उबरने उबारने का कोई तरकीब सुझा पाता, थोड़ा हंसा पाता, थोड़ा समझा पाता. पर अब पछताए क्या होता है.

अब तो बस एक ही काम करूंगा वो ये कि धीरे से अंशू को अपनी फ्रेंडलिस्ट से हटा दूंगा, अनफ्रेंड कर दूंगा. ये क्रूरता न जाने मैं क्यों करता आया हूं. जिनके जाने की खबर मिल जाती है, वो अगर फेसबुक पर मेरे मित्र हुए तो उन्हें अनफ्रेंड कर देता हूं. वो शायद भले पूछने न आएं कि भाई, ऐसा क्या कर दिया कि अनफ्रेंड कर दिया. पर मैं जवाब तैयार रखता हूं. गुरु, अब रुह बनकर ही मिलेंगे और रुहों की फेसबुकी दुनिया क्रिएट कर उसमें धड़ाधड़ फ्रेंड बनाए जाएंगे. फिलहाल मैं अंशू की तस्वीरें देख रहा हूं, वो तस्वीरें जिसे उन्होंने अपनी प्रोफाइल पिक्स बनाई हुई हैं.

ढेर सारी तस्वीरें है और सब एक से बढ़कर एक खूबसूरत. लेकिन सच यह भी है कि जो चेहरे से जाहिर है, उसे छुपाया भी जा सकता है. जो छुपा हुआ है अंदर, उसे चेहरे से जाहिर नहीं भी किया जा सकता है. फसल तबाह होने से किसानों की आत्महत्याओं और हार्ट अटैक के दुख-दर्द को तो समझा जा सकता है, लेकिन अंशू जैसों की आत्महत्या की वजह की पड़ताल कैसे की जाए. किसान अगर सत्ता सृजित ग्रामीण विडंबनाओं के कारण मर रहे हैं तो कहीं अंशू जैसे लोग कॉर्पोरट created महानगरी अवसाद की भेंट तो नहीं चढ़ जा रहे.

नीचे नितिन ठाकुर का ताजा और अंशु सचदेवा का फरवरी महीने का स्टेटस दे रहा हूं. साथ ही नितिन ठाकुर के स्टेटस पर आए कुलदीप मिश्रा के कमेंट को भी दे रहा हूं जो अंशु के क्लासमेट हुआ करते थे और उनके सुसाइड से स्तब्ध हैं.


Nitin Thakur : नीचे अंशु सचदेवा का एक पोस्ट शेयर कर रहा हूं जिसे उन्होंने फरवरी में लिखा था. दीपा के बाद अब अंशु ने भी खुदकुशी कर ली. अंशु मेरी मित्रसूची में तो नहीं थी लेकिन मेरे कई दोस्तों की दोस्त ज़रूर थी. आसपास इतनी भीड़ होने के बावजूद ना तो यहां सबकुछ कहा जा सकता और ना ही कोई समझेगा.. दीपा और अंशु ये बात शायद समझते थे इसलिए अंजाम पर नहीं पहुंचे.. मोड़ से ही लौट गए. अंशु सचदेवा के दोस्तों के मुताबिक अंशु ने कल आधी रात के बाद आत्महत्या कर ली.

Anshu Sachdeva : Wo afsaana jisay anjaam tak laana na ho mumkin…usay ik khubsurat morr de k chhorna achha.

Kuldeep Mishra : मेरी क्लासमेट थी अंशु। बेहद मिलनसार और विनम्र। 4 साल में उसे जितना जाना, यक़ीन नहीं होता कि वो लड़की अपनी जान ले सकती है। सुबह से उसका मुस्कुराता चेहरा आंखों के आगे घूम रहा है।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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1 Comment

1 Comment

  1. mamta yadav

    April 20, 2015 at 9:56 am

    मीडिया की दुनिया का ये बहुत बड़ा काला सच है यशवंतजी सब अपने-अपने अकेलेपन और परेशनियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं जूझ रहे हैं. कहने को हजारों दोस्त है मगर सिर्फ ऑनलाइन। ज्यादातर ऐसे है जिनके पास एक ऐसा खास दोस्त नही है जिससे अपने मन की बात शेयर कर कर सकें। सही है चेहरा बहुत कुछ छुपा लेता है मगर ऐसे ही चेहरे लेकर जीना पड़ता है यहाँ और जब असहनीय हो जाये तो रास्ता नही सूझता किसे क्या कहें और क्या सुनाएँ समझेगा कौन ?

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