अंबेडकर की फ़ोटो लगाने वाली ‘आप’ ने एक भी दलित-आदिवासी-महिला-पिछड़े को राज्यसभा भेजने लायक़ नहीं समझा!

पुष्प रंजन-

राज्यसभा के कैंडिडेट. सारे ही ख़ास हैं. मालदार. चिकने-चमकते वीवीआईपी. ग़रीब तबके को प्रतिनिधित्व देता कोई ज़मीनी नेता हो, तो बता दो. फिर क्यों बोलते हो आम आदमी पार्टी? कार्यकर्ता फुद्दू के फुद्दू ही रहेंगे.

अशोक कुमार पांडेय-

आप पार्टी ने पंजाब में 5 राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवार दिए। इसके पहले 3 दिल्ली से हैं। इनमें एक भी दलित, पिछड़ा, महिला, मुसलमान नहीं है। ये राजनीति बदलने आए थे, बदल रहे हैं।

श्याम मीरा सिंह-

आप पार्टी ने 5 नए लोगों को राज्यसभा के लिए नामांकित किया है
-राघव चड्ढा
-हरभजन सिंह
-संजीव अरोरा
-अशोक मित्तल
-संदीप पाठक

AAP के 3 सदस्य पहले से राज्यसभा में हैं:
-संजय सिंह
-एन डी गुप्ता
-सुशील गुप्ता

हर वीडियो और तस्वीर में अंबेडकर की फ़ोटो लगाने वाली नई नवेली पार्टी ने एक भी दलित-आदिवासी-महिला-पिछड़े को राज्यसभा भेजने लायक़ नहीं समझा। सब के सब उद्योगपति या खाए-पिए लोग। अपने आप को “आम आदमी” की पार्टी का दावा करने वाली पार्टी ने सारे उद्योगपति और जमे हुए लोग राज्यसभा में भेजे हैं। उसमें बनिया-गुप्ता-खत्री का वर्चस्व रहा। बाक़ी भी ऊँची जातियों के ही पुरुष।

अशोक मित्तल, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक हैं। इतनी एलिट यूनिवर्सिटी जहां आम आदमी अपने बच्चों को पढ़ाने की सोच नहीं सकता। राज्यसभा के लिए नामांकित नए सदस्य- अशोक मित्तल पूँजीपति हैं, संजीव अरोरा उद्योगपति हैं। सुशील गुप्ता भी उद्योगपति हैं। हरभजन सिंह सेलिब्रिटी हैं। और भेजने वाली पार्टी का नाम है “आम आदमी पार्टी”।

प्रमोद पाहवा-

औरंगजेब के बाद मुग़लिया सल्तनत ए हिंद धीरे धीरे कमजोर होती चली गयी और कम्पनी बहादुर के हाथो 1857 मे ख़त्म हो गई। उसके अतिरिक्त यदि कोई सबसे शक्तिशाली शासक उभरा तो वो थे महाराजा रणजीत सिंह और उनका पंजाब साम्राज्य।।

उनकी सेना मे सभी धर्मों, जातियों के अतिरिक्त फ्रांसिसी जनरल भी थे जिससे ब्रिटिशर्स को उचित जवाब दिया जा सके।

आखिरकार महाराजा के देहांत के बाद अंग्रेज अपनी औकात पर आ गये और धोखे तथा धूर्तता से पंजाब पर कब्ज़ा कर लिया, दलीप सिंह का इतिहास पढ़े, माता जींद कौर का नेपाल की शरणार्थी होना पढ़े।।

लाला केजरीवाल ने राज्य सभा में जिसे भी भेजना चाहा उनकी मर्जी है और चार उम्मीदवारो पर कोई टिपण्णी भी नहीं करना चाहते।

लेकिन ये डाक्टर संदीप पाठक साहब अचानक विदेश से नौकरी छोड़कर पंजाब की सेवा करने आ गये जबकी मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले है और अभी तक तो पंजाब से कोई संबंध नहीं है, बेशक कल तक रिकॉर्ड भी निकल आएगा।

आपको G रे गोर मेंट या ब्लैक ताकत जैसा कुछ मालूम है, हमे भी नहीं मालूम कि बाहरी ताकतें मोहरे फिट करती रहती हैं, हम तो सीरिया को भी आजाद समझते हैं।।

पाठक साहब पी के ( वोही गुज+रात वाले शांत किशोर ) साहब बहादुर के साथ काम कर चुके हैं।।

दया शंकर राय-

राजनीति बदलने आई तथाकथित आम आदमी की पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा के लिए ये पांच नाम तय किये हैं..! इनमें एक संदीप पाठक को छोड़ दें तो बाकी के लोग समाज के किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं आप खुद ही समझ सकते हैं..! न दलित, न पिछड़ा और न ही कोई महिला..! इसके पहले इनके दिल्ली से भी तीन राज्यसभा मेम्बर हैं। उनकी पृष्ठभूमि से आप वाकिफ ही हैं..! तो ये रही राजनीति बदलने आई आपकी आप जो लगता है खुद को ही बदल रही है ..!

प्रकाश के रे-

राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी ने अच्छे उम्मीदवार नामित किया है, इनमें एकेडेमिशियन, उद्यमी, खिलाड़ी और राजनेता हैं. आशा है कि ये लोग सदन को समृद्ध करने में अपना पूरा योगदान देंगे.



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