यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच करने न्यूज18 के हैदराबाद आफिस पहुंची पुलिस

हैदराबाद के न्यूज18 आफिस से एक बड़ी खबर आ रही है. न्यूज18 एमपी के एडिटर अभय कृष्ण उपाध्याय उर्फ अभय उपाध्याय पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने पुलिस चैनल के आफिस पहुंच गई. इस बाबत पीड़िता ने अपने एफबी वॉल पर आरोप लगाया है कि पुलिस उस दिन आफिस जांच करने पहुंची जब आरोपी आफिस आया ही नहीं था, यानि अवकाश पर था.

पीड़िता का कहना है कि पुलिस में कंप्लेन किए जाने और एफआईआर दर्ज होने के एक महीने ग्यारह दिन बाद पुलिस अचानक सक्रिय हुई है. पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने आरोपी का बयान दर्ज करने की बजाय उसे ही आफिस बुलाकर पूछताछ करने लगी. पीड़िता ने इस बाबत जो कुछ फेसबुक पर लिखा है, वह इस प्रकार है…

परसों एक पोस्ट fb पर डाला और FIR करने के एक महीने 11 दिन बाद पुलिस को investigation करने की याद अचानक आ गई। वो ऑफिस आ गई । जो पुलिस 1 महीने 11 दिन सोई थी, अचानक किसके इशारे पर ऑफिस आ गई? पर मौका भी देखिये पुलिस उस दिन ऑफिस में घुस पाई जिस दिन आरोपी अभय उपाध्याय सर ऑफिस से leave पर थे.  ऐसा कहा गया, हकीकत पता नहीं)।  पुलिस आई तो मुझे बुलाया गया जबकि मैंने अपना बयान 1 महीने 11 दिन पहले बाकायदा थाने जाकर दर्ज कराया। क्योंकि मुझे कहा गया कि आप थाने आएं। लेकिन जब मैंने पुलिस वालों से पूछा कि क्या अभय कृष्णा उपाध्याय जी का भी बयान दर्ज हुआ आपने बुलाया तो उनका कहना था कि नही उनको नही बुलाया, ना कुछ पूछा, क्योंकि आपने प्रूफ नही दिया । जबकि जब मैंने FIR कराई थी तो उसके अगले दिन से अभय कृष्णा उपाध्याय जी ने ऑफिस आना ही बंद कर दिया था। ये बात मैने सिर्फ मैनेजमेंट को बताई थी मेल कर के। मैनेजमेंट से पूछा था तो उन्होंने कहा पुलिस ने बताई होगी । जबकि पुलिस कह रही है हमने तो आज तक 1 महीने 11 दिन तक अभय उपाध्याय से बात ही नही की। अब तक तो सारा खेल आप सब की समझ में आगया होगा कि क्या चल रहा है।

इतना ही नहीं, फिर अभय उपाध्याय जी के 4 खास सिपहसालारों को मैनेजमेंट बुलाता है। जिनमें 2 शिफ्ट इंचार्ज और 2 female होती हैं उनको बन्द कमरे में कुछ समझाया जाता है। जहां से वो सभी खिलखिलाते हंसते बाहर निकलते हैं। ये वही खास लोग हैं जो मिस्टर अभय उपाध्याय की कारस्तानियों को अंजाम तक पहुंचाने में मदद करते हैं। इनमे जो दो शिफ्ट इंचार्ज हैं वो डेस्क की उन लड़कियों को जो अभय उपाध्यायजी के केबिन में नहीं जाती हैं, उनको केबिन तक पहुंचाते हैं। और कहते हैं केबिन में जाओ, फायदा भी मिलेगा और काम भी हो जायेगा। कुछ चली जाती हैं, लेकिन जो नहीं जातीं उनको अभय उपाध्याय का गैंग इस तरह से परेशान करता है कि बताया नहीं जा सकता है। कमेंट पास करने से लेकर, हर गैर कानूनी तरीके अपनाने से भी पीछे नहीं हटते। और जो लड़कियां केबिन में नहीं जातीं उनको केबिन में जाने वाली एंकर्स, शिफ्ट इंचार्ज अभय उपाध्याय जी के साथ मिलकर डेस्क पर टीज़ करते हैं, पूरी गैंग तरह तरह से परेशान करता है। बदले में डेस्क पर मनमानी करते हैं। सबसे ज़्यादा इंक्रीमेंट पाते हैं। जबकि मेरे साथ खड़े होने वालों को लगातार डराया धमकाया जा रहा है। उनको फंसाने की, नौकरी लेने की धमकी भी अभय उपाध्याय जी दे रहे हैं। “आखिर किसकी शह पर”?

अब मुझे वाकई अपने लिए खतरा लगने लगा है। मुझे परेशान करने के लिए कोई कसर नहीं रखा जा रहा। मेरा पीछा भी करवाया जा रहा। मुझे लग रहा ये लोग मुझे किसी भी तरह का नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन मैं बता दूं मैं अंतिम सांस तक अपनी बल्कि मेरे जैसी सभी लड़कियों के सेल्फ रेस्पेक्ट के लिए लड़ूंगी। “रसूखदारों समझ लो ये”, मैं पीछे नहीं हटने वाली हूँ।

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ये है पीड़िता का लिखा वो मूल पोस्ट जिसमें उसने घटना का खुलासा किया है….

सर एक संस्थान जहाँ कोई लड़की जॉब के लिए आती हो। अपने घर परिवार से दूर। ऐसे में माता पिता organization या चैनल पर ही भरोसा करते हैं कि वो उनकी बच्चियों को कुछ सिखाएगा, जिन बच्चियों को बड़े नाज़ों से पाला उनकी सुरक्षा करेगा। लेकिन वहीं काम करने वाला एक डेस्क इंचार्ज आपको केबिन में बुलाकर double meaning बातें करने लगे, और ऐसी बाते करने लगे जो शायद कोई लड़की सोशल साइट पर लिखना तो दूर किसी को बताने में भी झिझके। बार बार यही हरकत करने पर जब वो लड़की अपने इंचार्ज की शिकायत उच्चाधिकारियों से करे। और उसे जवाब मिले की वो इंचार्ज ऐसा नहीं है। बार बार बोलने पर कहा जाता है आप प्रूफ लाओ। उस लड़की को टारगेट किया जाने लगता है। बजाय इसके की उस इंचार्ज को भी बुलाकर पूछा जाए।

उस लड़की से कोई बात ना करे, उसको जिस काम के लिए apoint किया गया था उससे करने से रोक दिया जाता है। लड़की कुछ प्रूफ भी लाकर देती है लेकिन मामले को महीनों तक टाला जाने लगता है, लड़की को उस inchaarg के खास लोग और परेशान करने लगते है , उसपर दबाव बनाया जाने लगता है कि वो की वो शिकायत वापस ले ले। या जॉब छोड़कर चली जाए। लड़की तंग आकर पुलिस में FIR करती है । लेकिन रसूखदार इंचार्ज के खिलाफ पुलिस भी कोई कार्रवाई नही करती। लड़की महिला आयोग में शिकायत करती है । लेकिन वहां भी सुनवाई नही होती। उल्टा उसकी मदद करने वालो को आरोपी इंचार्ज बुलाकर धमकाता है, फंसाकर नॉकरी से निकालने कि धमकी देता है। खुलेआम कहता है सबके सामने की कोई विशाखा कमेटी मेरा कुछ नही बिगाड़ सकती।

खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश जे बावजूद संस्थान में कोई विशाखा कमेटी नही है। आदरणीय CJI, प्रधानमंत्री जी क्या आप बताएंगे कि आप लोगो ने जो महिलाओं को ऑफिस में सुरक्षा देने के लिए जो कानून बनाये हैं, विशाखा कमेटी, sexual hrashment in work place, इनका मतलब क्या रह जाता है जब संस्थान उसका पालन ही न करे। ये सवाल सभी से है जब तक ऐसे भेड़िये है तब तक कैसे बेटियों से रेप रुकेगा, कैसे महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी, कैसे बेटियां घर से बाहर निकलेंगी। आदरणीय सर महिलाओं की बराबरी या तरक्की को लेकर आप लोगों ने जो सपने देखे है उसपर ऐसे ही भेड़िये बाधक बनते है। आप लोग ही अब उस लड़की की मदद करिए, जो इस समय अकेले उन लोगों से लड़ रही है|

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आरोपी अभय उपाध्याय अब भी पीड़िता को खुलेआम चिढ़ा रहा है…. पढ़ें पीड़िता की ये पोस्ट….

कल मैंने fb पर एक पोस्ट करा और उस पोस्ट पर लोगो ने अपनी राय दी लेकिन जिस शख्स के खिलाफ मैंने FIR की, उसकी हिम्मत देखें आप सब कि ये कमेंट पर स्माइली बनाकर भेज रहा है। जब सोशल साइट पर ये इंसान इतनी घटिया और गिरी हरकत कर सकता है तो आप सोचें बंद केबिन में ये किस तरह की बातें और हरकतें करता होगा। ऐसे घटिया इंसान की बेशर्मी और हिम्मत मैनेजमेंट भी देखे। और क्या किया जाये, आप लोग खुद बतायें।

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