
सरकारी एजेंसियों के तोता बनने की बानगियाँ आ रही सामने…. विपक्षी नेता पर कार्रवाई कर सुनिश्चित किया सीबीडीटी चेयरमैन का पद….चिदम्बरम का जोरबाग वाले घर का कब्जा नहीं मिलेगा ईडी को
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई, आयकर जैसी केन्द्रीय सरकारी एजेंसियां वास्तव में सरकार का तोता बन गयी हैं और इसके आला अधिकारी अपनी अपनी कुर्सी बचाने के लिए राजनीतिक प्रतिशोध के लिए अपना दुरूपयोग करा रहे हैं। अब आये दिन इनके दुरूपयोग की बानगियाँ सामने आ रही हैं। सीबीडीटी चेयरमैन ने केंद्रीय कर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपना शीर्ष पद सिर्फ इसलिए सुरक्षित कर लिया क्योंकि उन्होंने एक विपक्षी नेता के खिलाफ कार्रवाई करने में सफलता हासिल की। यह आरोप केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की एक महिला अधिकारी ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर लगाया है। इसी तरह कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की इजाजत कोलकाता हाईकोर्ट ने नहीं दी क्योंकि सीबीआई की केस डायरी में ऐसा कुछ मिला ही नहीं जिससे हिरासत में पूछताछ को न्यायोचित ठहराया जा सके। ईडी का हाल भी कुछ ऐसा ही है और उसकी जाँच कापी पेस्ट पर चल रही है। इस देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने अधिकारियों को कॉपी-पेस्ट के बजाय मौलिक जांच पड़ताल करने का निर्देश दिया है।
सीबीडीटी चेयरमैन प्रमोद चंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए महिला कर अधिकारी अलका त्यागी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, प्रधानमंत्री कार्यालय, सीवीसी और कैबिनेट सचिव को बीते जून में पत्र लिखा था। हालांकि, शिकायत के दो महीने बाद सरकार ने सीबीडीटी चेयरमैन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया जबकि अल्का त्यागी का नागपुर ट्रांसफर कर दिया।
मुम्बई में मुख्य आयकर आयुक्त (यूनिट 2) पद पर कार्यरत त्यागी ने दावा किया कि प्रमोद चंद्र मोदी ने केंद्रीय कर बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपना शीर्ष पद सिर्फ इसलिए सुरक्षित कर लिया क्योंकि उन्होंने एक विपक्षी नेता के खिलाफ कार्रवाई करने में सफलता हासिल की। त्यागी के नौ पेज के शिकायती पत्र से पता चलता है कि प्रमोद चंद्र मोदी ने उन पर जबरदस्त दबाव डाला था। उन्होंने लगभग एक समान शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सूचना आयोग (सीवीसी) और कैबिनेट सचिव को भेजी है। इसी महीने त्यागी के दफ्तर में चोरी हुई थी। उन्होंने इसकी लिखित शिकायत अपने वरिष्ठ प्रिंसिपल चीफ आयुक्त एसके गुप्ता से की थी।
1984 बैच की आईआरएस अधिकारी त्यागी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ़ एक पुराने मामले को प्रमोद चंद्र मोदी ने दोबारा खोल दिया और उन्होंने उसका इस्तेमाल उनकी पोस्टिंग को रोकने में ब्लैकमेल करने के लिए किया। हालांकि, इससे पहले प्रमोद चंद्र मोदी ने उस मामले को खुद खारिज कर दिया था और क्लीन चिट दी थी। त्यागी की शिकायत में कई तरह की अनियमितताओं का जिक्र है। इसमें बताया गया है कि कैसे सीबीडीटी चेयरमैन ने लगातार त्यागी को गंभीर आरोपों से जुड़े एक संवेदनशील मामले में जारी प्रक्रियाओं को रोकने के लिए कहा। त्यागी के अनुसार अप्रैल 2019 के आखिरी सप्ताह और मई की शुरुआत में सीबीडीटी चेयरमैन ने उनसे कहा कि संवेदनशील मामलों में चल रही कार्रवाइयों को खत्म कर दिया जाए और इस काम को मई 2019 से पहले पूरा कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह निर्देश बेहद आश्चर्यजनक था लेकिन मेरे लगातार ऐसा न कर पाने की मुश्किलों के बावजूद उसे बार-बार मेरे पास भेजा गया।
दरअसल ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए छापे मारती है और आधे अधूरे कागजातों के आधार पर जब्ती की कार्रवाई करती है लेकिन जब इसकी पुष्टि के लिए मामला निर्णयन प्राधिकारी (एडजुडिकेटिंग अथारिटी) और फिर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए ) अपीलीय न्यायाधिकरण के सामने जाता है तो ईडी सुनवाई में या तो उपस्थित नहीं होती या जवाब तलब करने पर समय से जवाब दाखिल नहीं करती। नतीजतन जब्ती की कार्रवाई निरस्त हो जाती है। ऐसा ही एक मामला संदेसरा ग्रुप ऑफ कम्पनीज से जुड़े स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आया है जहां ईडी को जब्त सोने के सिक्कों को वापस लौटाने का निर्देश दिया गया है। पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) द्वारा पिछले साल वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल के करीबी सहयोगी के निवास से जब्त किए गए सोने के सिक्कों को वापस करने का आदेश दिया है। अहमद पटेल गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव हैं।ईडी ने सोने के सिक्कों को “अपराध की आय” करार दिया था ।
देवास मल्टीमीडिया मामले में पीएमएलए अपीलीय ट्रिब्यूनल के तत्कालीन अध्यक्ष जस्टिस मनमोहन सिंह और सदस्य जीसी मिश्रा ने एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा ईडी को देवास मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड की संपत्ति जब्त करने की इजाजत देने के आदेश को खारिज कर दिया और मामले को ऐडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है।
इसी तरह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 11 महीने में भी कार्ति चिदंबरम के दिल्ली के जोरबाग स्थित बंगले को आईएनएक्स मीडिया से अर्जित आय से खरीदे जाने का कोई पुख्ता सबूत नहीं जुटा पायी है। ईडी पिछले पांच महीने से स्पष्ट निर्देश के बावजूद पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष जवाब दाखिल नहीं कर सकी है। इससे इस आरोप को बल मिल रहा है की चिदंबरम परिवार पर राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाने पर लिया गया है। पीएमएलए अपीलीय न्यायाधिकरण ने चिदंबरम के जोर बाग के घर को खाली करने के ईडी के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए हैं लेकिन कुर्की बरकरार रहेगी। न्यायाधिकरण ने कहा कि सीबीआई द्वारा कोई चार्जशीट दायर नहीं की गई है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा है कि ऐसा कोई सबूत नहीं दिया गया है जिससे पता चलता हो कि कार्ति चिदंबरम के सह-स्वामित्व वाले जोर बाग हाउस को अपराध से अर्जित आय से खरीदा गया था। इस टिप्पणी को पी चिदंबरम और उनके परिवार के लिए अंतरिम राहत माना जा रहा है।गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने एक अगस्त को कार्ति को नोटिस जारी कर 10 दिनों में जोर बाग घर खाली करने को कहा था।
जेपी सिंह की रिपोर्ट.
एक और मोदी की सफलता का ‘राज’ सामने आया?

इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर छपी एक खबर के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को देश के सर्वोच्च टैक्स प्रशासक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ टैक्सेज के चेयरमैन, प्रमोद चंद्र मोदी के खिलाफ भेजी गई एक अभूतपूर्व शिकायत में मुंबई में आयकर (यूनिट टू) की कमिश्नर रही अल्का त्यागी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने (उन्हें) एक “चौंकानेवाला” निर्देश दिया था कि वे एक “संवेदनशील” मामले को दबा दें।
21 जून के अपने पत्र में त्यागी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने (मोदी) दावा किया कि विपक्ष के एक नेता के खिलाफ सफल “तलाशी अभियान ” चलाकर उन्होंने शिखर पर अपनी स्थिति “हासिल” की है। त्यागी ने लगभग ऐसी ही शिकायत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय खुफिया आयुक्त और मंत्रिमंडल सचिव को भी भेजी है।
इंडियन एक्सप्रेस ने इस महीने के शुरू में खबर दी थी कि त्यागी ने अपने कार्यालय में ब्रेक इन (ताला तोड़कर घुसने/चोरी) की रिपोर्ट दी थी। और अपने सीनियर प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर एसके गुप्ता को इस बारे में लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत के दो महीने बाद सरकार ने मोदी का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया। और गुरुवार को आयकर की प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर के रूप में तैनात किए जाने की बजाय त्यागी को नागपुर भेज दिया गया। अब वे आयकर की प्रिंसिपल डायरेक्टर जनरल (प्रशिक्षण) बनाई गई हैं।
त्यागी का कार्यालय जो संवेदनशील मामले देख रहा था उनमें दीपक कोचर – आईसीसीआई बैंक केस, मुकेश अंबानी के परिवार को भेजे गए नोटिस, जेट एयरवेज का मामला और कई अन्य ऐसे महत्वपूर्ण मामले हैं।
संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट.


