काटजू नैं, ईं हैं असली इलाहाबादी बकैत

बकैती की सबकी अपनी अलग-अलग परिभाएं हैं, लेकिन इलाहाबादी बकैती की बात ही निराली है। आपने अक्सर कई इलाहाबादी बकइतों के बारे में सुना भी होगा। दरअसल इलाहाबाद शहर अपनी बकइती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है। प्रो. एएन झा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. हरिवंश राय बच्चन, फिराक़ गोरखपुरी, रवीन्द्र कालीया और दूधनाथ सिंह जैसे महान बकइत इलाहाबाद से निकले हैं।

दरअसल इलाहाबाद को देश की बौद्धिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है और इन बौद्धिक लोगों के कारनामों से पूरी दुनिया में इनके परचम को ही हम इलाहाबादी बकइती कहते हैं। हाल ही में ‘यश भारती’ पुरस्कार की घोषणा हुई है। इनमें तीन इलाहाबादियों के चर्चे ज़ोरों पर हैं। पुरस्कार पाने वालों की लम्बी फेहरिस्त में इन तीनों की एक साथ उपस्थिति ने तमाम इलाहाबादियों को ख़ुशी दे दी है। इससे सभी अन्य बकइत भी फूल कर कुप्पा हैं। एक हम भी।

पहला नाम योगेश मिश्र का है जो वेब पोर्टल न्यूज़ट्रैक व अपना भारत (साप्ताहिक) के एडीटर-इन-चीफ़ हैं। इन्होने सन् 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से डी-फ़िल की है। पेशे से पत्रकार हैं। 25 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। श्री मिश्र को 2015 का मधु लिमये अवार्ड भी मिल चुका है। इन्होने अपनी लम्बी पत्रकारिता में दूरदर्शन, ई-टीवी, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, नेशनल दुनिया, नई दुनिया और आउटलुक जैसे बड़े संस्थानों के साथ काम किया है। इसके अलावा जर्मन रेडियो और वॉयस ऑफ़ अमेरिका के लिए भी ये विशेष रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री मिश्र की रचनाओं में समय पर, समय के सवाल, समय के संवाद, समय के आलेख, कशिश, खोज और जख़्म की शहादत शामिल हैं।

दूसरे, जाने-माने फ़िल्म अभिनेता दीपराज राणा हैं जो इलाहाबाद के अल्लापुर के रहने वाले हैं। ये अबी मुम्बई में रहते हैं। श्री राणा को आपने बेहद सफ़ल रही फिल्मों मंलग पाण्डेय, साथिया, साहेब बावी और गैंगस्टर, घोष्ट, चक्रव्यूह, साहेब बावी और गैंगस्टर रिटर्न्स, लूट, बुलेट राजा, गुण्डे, सिंघम रिटर्नस, क्रिएचरःथ्रीडी, प्रेम रतन धन पायो और 31 अक्टूबर में अभिनय का लोहा मनवाते देखा होगा। वो कहते हैं “मैं ठेठ इलाहाबादी हूं और उत्ते ठेठ बकइत भी।” ज़ाहिर है श्री राणा को उसी बकइता का नज़राना ‘यश भारती’ के रूप में मिला है। ये स्वभाव से बहुत ही मीठे और मिलनसार हैं। श्री राणा इलाहाबाद के एक विशेष पात्र पर केन्द्रित फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसके बारे में उन्होने अभी खुलासा करने से मना किया है। इस फ़िल्म को उनकी पत्नी जानी-मानी टीवी एक्ट्रेस नताशा प्रोड्यूस कर रही हैं।

तीसरा सबसे युवा नाम मणेन्द्र मिश्र ‘मशाल’ का है जो समाजवादी चिन्तक के तौर पर जाने जाते हैं और उत्तर प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय के मीडिया प्रभारी हैं। श्री मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एन्थोपोलॉजी विभाग से एमएससी, गणित से बीएससी पढ़ाई की है। इसके अलावा यहीं से जर्मन एवं मानवाधिकार में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इन्होने पत्रकारिता के मक्का कहे जाने वाले भारतीय जनसंचार संस्थान से हिन्दी पत्रकारित में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। इन्होने समाजवादी मॉडल के युवा ध्वजवाहकःअखिलेश, समाजवादी स्तम्भ, लोहिया और युवजन, भाषा का सवाल और डॉ. लोहिया, छोटे लोहिया जनेश्वर, समाजवाद के अनुगामी और सीमान्त लोहियाःबृजभषण पुस्तकें लिखी हैं।

लेखक अमित राजपूत से संपर्क amitrajpoot.ar@gmail.com या 7053795682 से किया जा सकता है.

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