छत्तीसगढ़ के टीवी जर्नलिस्ट आरके गांधी को मॉरीशस में मिला मीडिया सम्मान

भारत सरकार और मॉरीशस सरकार की ओर से मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन काफी सफल रहा। इसी कड़ी में वैश्विक साहित्य – संस्कृति संस्थान ने भी मॉरीशस साहित्य महोत्सव का आयोजन 24 अगस्त को किया। इस साहित्य महोत्सव में साधना न्यूज छत्तीसगढ़ के स्टेट हेड आरके गाँधी को मीडिया सम्मान 2018 से नवाजा गया। Continue reading

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काटजू नैं, ईं हैं असली इलाहाबादी बकैत

बकैती की सबकी अपनी अलग-अलग परिभाएं हैं, लेकिन इलाहाबादी बकैती की बात ही निराली है। आपने अक्सर कई इलाहाबादी बकइतों के बारे में सुना भी होगा। दरअसल इलाहाबाद शहर अपनी बकइती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है। प्रो. एएन झा, भगवती चरण वर्मा, डॉ. हरिवंश राय बच्चन, फिराक़ गोरखपुरी, रवीन्द्र कालीया और दूधनाथ सिंह जैसे महान बकइत इलाहाबाद से निकले हैं।

दरअसल इलाहाबाद को देश की बौद्धिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है और इन बौद्धिक लोगों के कारनामों से पूरी दुनिया में इनके परचम को ही हम इलाहाबादी बकइती कहते हैं। हाल ही में ‘यश भारती’ पुरस्कार की घोषणा हुई है। इनमें तीन इलाहाबादियों के चर्चे ज़ोरों पर हैं। पुरस्कार पाने वालों की लम्बी फेहरिस्त में इन तीनों की एक साथ उपस्थिति ने तमाम इलाहाबादियों को ख़ुशी दे दी है। इससे सभी अन्य बकइत भी फूल कर कुप्पा हैं। एक हम भी।

पहला नाम योगेश मिश्र का है जो वेब पोर्टल न्यूज़ट्रैक व अपना भारत (साप्ताहिक) के एडीटर-इन-चीफ़ हैं। इन्होने सन् 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से डी-फ़िल की है। पेशे से पत्रकार हैं। 25 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं। श्री मिश्र को 2015 का मधु लिमये अवार्ड भी मिल चुका है। इन्होने अपनी लम्बी पत्रकारिता में दूरदर्शन, ई-टीवी, दैनिक जागरण, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, नेशनल दुनिया, नई दुनिया और आउटलुक जैसे बड़े संस्थानों के साथ काम किया है। इसके अलावा जर्मन रेडियो और वॉयस ऑफ़ अमेरिका के लिए भी ये विशेष रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री मिश्र की रचनाओं में समय पर, समय के सवाल, समय के संवाद, समय के आलेख, कशिश, खोज और जख़्म की शहादत शामिल हैं।

दूसरे, जाने-माने फ़िल्म अभिनेता दीपराज राणा हैं जो इलाहाबाद के अल्लापुर के रहने वाले हैं। ये अबी मुम्बई में रहते हैं। श्री राणा को आपने बेहद सफ़ल रही फिल्मों मंलग पाण्डेय, साथिया, साहेब बावी और गैंगस्टर, घोष्ट, चक्रव्यूह, साहेब बावी और गैंगस्टर रिटर्न्स, लूट, बुलेट राजा, गुण्डे, सिंघम रिटर्नस, क्रिएचरःथ्रीडी, प्रेम रतन धन पायो और 31 अक्टूबर में अभिनय का लोहा मनवाते देखा होगा। वो कहते हैं “मैं ठेठ इलाहाबादी हूं और उत्ते ठेठ बकइत भी।” ज़ाहिर है श्री राणा को उसी बकइता का नज़राना ‘यश भारती’ के रूप में मिला है। ये स्वभाव से बहुत ही मीठे और मिलनसार हैं। श्री राणा इलाहाबाद के एक विशेष पात्र पर केन्द्रित फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसके बारे में उन्होने अभी खुलासा करने से मना किया है। इस फ़िल्म को उनकी पत्नी जानी-मानी टीवी एक्ट्रेस नताशा प्रोड्यूस कर रही हैं।

तीसरा सबसे युवा नाम मणेन्द्र मिश्र ‘मशाल’ का है जो समाजवादी चिन्तक के तौर पर जाने जाते हैं और उत्तर प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष श्री माता प्रसाद पाण्डेय के मीडिया प्रभारी हैं। श्री मिश्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एन्थोपोलॉजी विभाग से एमएससी, गणित से बीएससी पढ़ाई की है। इसके अलावा यहीं से जर्मन एवं मानवाधिकार में डिप्लोमा प्राप्त किया है। इन्होने पत्रकारिता के मक्का कहे जाने वाले भारतीय जनसंचार संस्थान से हिन्दी पत्रकारित में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। इन्होने समाजवादी मॉडल के युवा ध्वजवाहकःअखिलेश, समाजवादी स्तम्भ, लोहिया और युवजन, भाषा का सवाल और डॉ. लोहिया, छोटे लोहिया जनेश्वर, समाजवाद के अनुगामी और सीमान्त लोहियाःबृजभषण पुस्तकें लिखी हैं।

लेखक अमित राजपूत से संपर्क amitrajpoot.ar@gmail.com या 7053795682 से किया जा सकता है.

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थाईलैण्ड में कई हिंदी ब्लागरों को परिकल्पना सम्मान से किया गया सम्मानित

परिकल्पना द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन 16 से 21 जनवरी के बीच थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक में आयोजित किया गया। नई दिल्ली, लखनऊ, काठमांडो (नेपाल) थिम्मू (भूटान) कोलम्बो (श्रीलंका) के सफल आयोजनों की श्रंृखला में थाईलैण्ड का सम्मेलन भी पूरे वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर थाईलैण्ड के प्रमुख शहर पटाया और राजधानी बैंकाक में सम्पन्न हुए सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में कवि सम्मेलन पुस्तक लोकार्पण, परिचर्चा एवं सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रम सम्पन्न हुए।

17 जनवरी की सायं पटाया के गोल्डन बीच होटल के सभागार में रवीन्द्र प्रभात की अध्यक्षता में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें सुनीता प्रेम यादव, डा0 विनयदास, प्रीति, ‘अज्ञात’ डा0 निर्मला सिंह ‘निर्मल’ कुसुम वर्मा, डा0 रामबहादुर मिश्र आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। 19 जनवरी को थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक के होटल सीजन स्याम के मुख्य सभागार में चार सत्रों में सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रथम उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उ0प्र0 शासन के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे थे।

अध्यक्षता श्री रवीन्द्र प्रभात ने किया विशिष्ट अतिथि के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय बाक्सिंग कोच श्री एस0एन0 मिश्र तथा अवध ज्योति के सम्पादक डा0 राम बहादुर मिश्र थे। आयोजन की परिकल्पना पर प्रकाश डालते हुए आयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने बताया हिन्दी साहित्य और ब्लागिंग के बीच सेतु निर्माण एवं योगदान देने के उद्देश्य से संस्था द्वारा 2010 में अन्तर्जाल पर उत्सव की परिकल्पना की गयी नाम दिया गया था परिकल्पना ब्लागोत्सव। हमारा उद्देश्य है एक सुन्दर एवं खुशहाल सह अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्त रूप देना। मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने अपने सम्बोधन में कहा कि परिकल्पना का उद्देश्य बहुत ही पवित्र है वह पूरी दुनिया की बेहतरी के लिए काम कर रही है। उसका उद्देश्य सह अस्तित्व और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर केन्द्रित है।

विशिष्ट अतिथि डा0 राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ब्लागरों की दस्तक ने साहित्य की दुनिया का स्वरूप बदल दिया है लेकिन लेखन के नाम पर कुछ सतही ब्लागरों की उपस्थिति ने ब्लागरों की छवि को नुकसान पहुंचाया है। लोकार्पण सत्र में मुख्य अतिथि ने सद्यः प्रकाशित साहित्यक कृतियों का लोकार्पण किया इनमें प्रमुख थी अवधी पत्रिका अवध ज्योति का अवधी कविता विशेषांक (सं0 डा0 राम बहादुर मिश्र) लफ्जों का सफर (काव्य संग्रह) डा0 अशोक गुलशन, अतुल श्रीवास्तव की पुस्तक फ्रंट पेज, डा0 अनीता श्रीवास्तव की पत्रिका रेवांत, डा0 निर्मला सिंह, निर्मल की पुस्तक दस्तक हमारी, अग्नि पुरूष की अंतिम उड़ान, शिखर की ओर, धरती रही पुकार।

तीसरा सत्र परिचर्चा का था। डा0 राम बहादुर मिश्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए प्रथम सत्र का विषय इंटरनेट पर सृजनात्मक साहित्य का विस्तार था। विषय प्रवर्तन किया डा0 संदीप रमाभाऊ ठोकल (महाराष्ट्र) ने मुख्यवक्ता डा0 रमाकांत कुशवाहा ने मुख्य विषय पर बोलते हुए कहा अभिजन की भाषा जन की भाषा पर शासन करना चाहती है किन्तु इण्टरनेट ने जन भाषा को विशेष प्रोत्साहन दिया। परिचर्चा में रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी डा0 विनयदास, डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव, डा0 उमेश कुमार पटेल आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। परिचर्चा का दूसरा सत्र साहित्य की समृद्धि में महिलाओं का योगदान विषय पर केन्द्रित था जिसकी अध्यक्षता डा0 निर्मला सिंह ने की। इस सत्र में प्रीति अज्ञात सुनीता प्रेम यादव तथा डा0 अनीता श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे, संचालन कुसुम वर्मा ने किया।

अंतिम सत्र सम्मान पुरस्कार अलंकरण में मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया जिसका विवरण इस प्रकार है- परिकल्पना सार्क सम्मान 2015 कुसुम वर्मा, परिकल्पना साहित्य सम्मान 2015 प्रीति अज्ञात (अहमदाबाद), परिकल्पना ब्लाग सम्मान 2015 अतुल श्रीवास्तव (छत्तीसगढ़), परिकल्पना सृजन सम्मान 2015 डा0 निर्मला सिंह (लखनऊ), परिकल्पना अभिव्यक्ति सम्मान 2015 डा0 विनयदास (बाराबंकी), परिकल्पना हिन्दी प्रसार सम्मान 2015 डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव (कुशीनगर), परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान 2015 रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी (गोरखपुर), परिकल्पना हिन्दी भूषण सम्मान 2015 डा0 रमाकान्त कुशवाहा (देवरिया), परिकल्पना शब्द शिखर सम्मान 2015 डा0 उमेश कुमार पटेल (महराजगंज उ0प्र0) परिकल्पना पत्रकारिता सम्मान 2015 डा0 अनीता श्रीवास्तव (लखनऊ उ0प्र0)।

सांय 6 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया एक शाम कुसुम वर्मा के नाम इस सांस्कृतिक संध्या में भारत और थाईलैण्ड के प्रतिभागियों की उपस्थिति में कुसुम वर्मा की मोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया। इस प्रकार मुख्य समारोह अपने विविध आयोजनों की वैभवशाली प्रस्तुति से सम्पन्न हुआ। अगले दिन विश्व प्रसिद्ध सफारी वल्र्ड के अनेक कार्यक्रमों में पूरा दिन व्यस्त रहा और अंतिम दिन 21 जनवरी को थाईलैण्ड के धार्मिक स्थलों एवं मन्दिरों के दर्शनोपरान्त सांय 4 बजे थाईलैण्ड के सुवर्ण भूमि एयरपोर्ट से उड़ान भरते हुए प्रतिभागियों ने विदा ली।

बैंकाक से डा0 रामबहादुर मिश्र की रिपोर्ट.

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अमेरिका में ज्ञान चतुर्वेदी, चित्रा मुदगल तथा उषा प्रियंवदा को मिला साहित्‍य सम्‍मान

संयुक्त राज्य अमेरिका : ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-अमेरिका’  ने अमेरिका के मोर्रिस्विल्‍ल शहर के हिन्‍दू भवन कल्‍चरल हॉल में आयोजित एक भव्‍य समारोह में वर्ष 2014 हेतु ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ प्रदान किए। समारोह में समग्र साहित्यिक अवदान हेतु उषा प्रियंवदा को, कहानी संग्रह- ‘पेंटिंग अकेली है’ हेतु चित्रा मुद्गल को, उपन्यास-‘हम न मरब’ हेतु डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को सम्‍मानित किया गया। सम्‍मान के अंतर्गत तीनों रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, प्रत्येक को पाँच सौ डॉलर (लगभग 31 हज़ार रुपये) की सम्मान राशि, प्रदान की गई।

 

तीनों रचनाकारों को ढींगरा फाउण्‍डेशन के अध्‍यक्ष ओम ढींगरा, हिन्‍दी प्रचारिणी सभा कैनेडा के संरक्षक श्‍याम त्रिपाठी, मोर्रिस्विल्‍ल शहर के मेयर मार्क स्‍टोलमेन, काउंसलर विक्‍की जानसन, काउंसलर स्‍टीफ राव, हिन्‍दी चेतना की संपादक सुधा ओम ढींगरा ने यह सम्‍मान प्रदान किये। तीनों सम्‍मानित रचनाकारों को नार्थ कैरोलाइना के गवर्नर पैट मेकरोरी, मेयर मार्क स्‍टोलमेन तथा मेम्‍बर ऑफ कांग्रेस जार्ज होल्डिंग की ओर से भी विशेष रूप से प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गए। साहित्‍यकार पंकज सुबीर को मोर्रिस्विल्‍ल शहर की ओर से मेयर मार्क स्‍टोलमेन ने हिन्‍दी सेवा के लिए सम्‍मान पत्र प्रदान किया।  इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अमेरिका तथा भारत के राष्‍ट्रगान से हुआ तथा कुबी बाबू द्वारा कुचिपुड़ी नृत्‍य प्रस्‍तुत किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि विदेशों में रह कर हिन्‍दी की सेवा जो प्रवासी भारतीय कर रहे हैं वह बहुत प्रशंसनीय है। चित्रा मुदगल ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्‍दी को लेकर जो उत्‍साह यहां नजर आ रहा है वह सुखद है। उषा प्रियंवदा ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्‍दी ने भारत की सीमा के बाहर आकर जो स्‍थान बनाया है उसका ही प्रमाण है यह कार्यक्रम। कार्यक्रम के अगले चरण में आयोजित रचना पाठ सत्र में डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी अभिनव चतुर्वेदी तथा पंकज सुबीर ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। प्रथम सत्र का संचालन दूसरे सत्र का संचालन प्रवासी कवि अभिनव शुक्‍ल ने किया। डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी द्वारा किए गए व्‍यंग्‍य पाठ को श्रोताओं ने बहुत सराहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्‍या में भारतीय हिन्‍दी प्रेमी श्रोतागण उप‍स्थित थे। अंत में आभार प्रमोद शर्मा ने व्‍यक्‍त किया।

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रवीन्द्र जैन, प्रदीप जोशी, उपमिता वाजपेयी, अनिल माथुर, संगीता प्रणवेन्द्र को श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार

बांसवाडा (राजस्थान)। पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य और समर्पित योगदान के लिए ‘अग्निबाण’ भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन, प्रदीप जोशी, उपमिता वाजपेयी, संगीता प्रणवेन्द्र, अनिल माथुर को प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार 2015 देने की घोषणा हुई है। यह पुरस्कार पूज्य मुनि श्री पूज्यसागर महाराज की प्रेरणा से धार्मिक श्रीफल परिवार ट्रस्ट द्वारा प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है। 

धार्मिक श्रीफल परिवार के पुरस्कार संयोजक भरत जैन इन्दौर ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि इस बार श्री भट्टारक चारुकीर्ती श्रवणबेलागोला की स्मृति में श्रीफल जैन पत्रकारिता पुरस्कार अग्निबाण भोपाल के संपादक रवीन्द्र जैन को प्रदान किया जाएगा। उनके अलावा कर्पूर चंद्र कुलिश स्मृति पुरस्कार सूरत में राजस्थान पत्रिका के संपादक प्रदीप जोशी को, भगवान बाहुबली स्मृति पुरस्कार दैनिक भास्कर के नेशनल रूम में कार्यरत उपमिता वाजपेयी को, उल्लेखनीय पत्रकारिता पुरस्कार इंडिया न्यूज जयपुर की संवाददाता श्रीमती संगीता प्रणवेन्द्र को, आचार्य अभिनंदन सागर स्मृति पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार अनिल माथुर को दिया जाएगा। सम्मान समारोह 23 अगस्त को बांसवाड़ा राजस्थान में उपाध्याय श्री अनुभव सागर जी महाराज एवं मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा। पुरस्कार समारोह में सम्मानित होने वाले पत्रकारों को शॉल, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि उत्कृष्ट और समर्पित पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित श्रीफल पत्रकारिता पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी। पूर्व में हिन्दी और अंग्रेजी के अनेक जाने-माने पत्रकार और फोटो पत्रकार यह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। पुरस्कार का निर्णय पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के आधार पर श्रीफल परिवार और वरिष्ठ पत्रकारों की टीम करती है।

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अपने सम्मान समारोह में बोले कुमार सौवीर- ”पत्रकारिता को चाटुकारिता न बनाया जाए”

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर का जौनपुर में सम्मान करते स्थानीय पत्रकार.


: इरादा मजबूत हो तो पत्रकार को कोई भी डिगा नहीं सकता- कुमार सौवीर : लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार का जनपद के साथियों ने किया स्वागत : जौनपुर। पत्रकार के कलम की धार तेज हो और उसका इरादा मजबूत हो तो उसे कोई भी डिगा नहीं सकता है। पत्रकारिता को चाटुकारिता न बनाया जाय, क्योंकि इसी के चलते पत्रकार जगत में निरन्तर गिरावट आ रही है।

उक्त बातें कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित पत्रकार भवन में गुरूवार को आयोजित अपने सम्मान समारोह में आये प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने कही। शाहजहांपुर सहित अन्य जगहों के पत्रकार उत्पीड़न की लड़ाई को अपनी कलम से तेज करने वाले श्री सौवीर ने ‘पत्रकार सुरक्षा अधिनियम’ नामक कानून पर बल देते हुये कहा कि यह अति आवश्यक है।

इस दौरान उपस्थित पत्रकार साथियों ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में राजकुमार सिंह, यादवेन्द्र दूबे मनोज, संजय अस्थाना, डा. ब्रजेश यदुवंशी, वीरेन्द्र पाण्डेय सहित अन्य वक्ताओं ने अपना विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर सम्पादक रामजी जायसवाल, मंगला प्रसाद तिवारी, राजेश श्रीवास्तव, हिमांशु श्रीवास्तव, संजय शुक्ला, सूर्यमणि पाण्डेय, रमेश यादव, बृजेश निषाद, राहुल सिंह, संजय शर्मा, उमेश गुप्ता, विनोद विश्वकर्मा सहित तमाम सम्पादक, पत्रकार उपस्थित रहे। अन्त में बस्ती के पत्रकार धीरज पाण्डेय के निधन पर सभी पत्रकारों ने शोक जताया।

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सप्रे संग्रहालय को महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान

भोपाल : माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल को ’महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान’ से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठतम उपलब्धियों एवं योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से यह सम्मान स्थापित किया है। महर्षि वेदव्यास राष्ट्रीय सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये सम्मान निधि, प्रशस्ति एवं सम्मान पट्टिका प्रदान की जाती है। संस्कृति विभाग की संचालक सुश्री रेनू तिवारी ने वर्ष 2012-13 के सम्मान के लिए सप्रे संग्रहालय के चयन की सूचना दी है। 

उच्चस्तरीय निर्णायक मंडल ने साहित्यकारों, पत्रकारों, शोधार्थियों और छात्रों को दुर्लभ संदर्भ उपलब्ध कराने में माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के अभूतपूर्व योगदान को रेखांकित किया है। निर्णायक मंडल ने माना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तकों और पत्रिकाओं के संग्रहण के लिए सप्रे संग्रहालय पूरे देश में अपने ढंग का अनूठा और एकमात्र संग्रहालय है। 

उल्लेखनीय है कि सप्रे संग्रहालय में 24,500 शीर्षक समाचारपत्रों एवं पत्रिकाओं की फाइलें, एक लाख से अधिक पुस्तकें, 734 पाण्डुलिपियाँ, 144 गजेटियर्स, 406 शब्दकोश, 274 अभिनन्दन ग्रंथ, साहित्यकारों, पत्रकारों आदि 4190 विशिष्टजनों के 25,000 से अधिक पत्र, अत्यंत महत्वपूर्ण 863 रिपोर्ट और विभिन्न विषयों, प्रसंगों एवं व्यक्तियों से संबंधित 4,605 संदर्भ फाइलें संग्रहीत हैं। यह विपुल शब्द सम्पदा दो करोड़ से अधिक पृष्ठों में विद्यमान है। इसमें हाल ही में सौ साल पुराने चिरंजीव पुस्तकालय आगरा से आए हजारों ग्रंथों और पत्रिकाओं की फाइलों का इजाफा हुआ है। यह संदर्भ सामग्री मुख्यतः हिन्दी और उसकी सहोदर लोक भाषाओं, अँगरेजी, संस्कृत, उर्दू , मराठी, गुजराती तथा अन्य भारतीय भाषाओं में है। सप्रे संग्रहालय की संदर्भ सामग्री का लाभ उठाते हुए विभिन्न विश्वविद्यालयों के 900 से अधिक शोध छात्रों ने विविध विषयों में अपने शोध प्रबंध पूरे किए हैं। 

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भारी विरोध के बावजूद फ़्रांसीसी व्यंग पत्रिका शार्ली हेब्दो का सम्मान

विरोध के बावजूद पैग़म्बरे इस्लाम का अपमान करने वाली फ़्रांसीसी व्यंग पत्रिका शार्ली हेब्दों को अमरीका के न्यूयार्क में सम्मानित किया गया। बताते हैं कि यह पुरस्कार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से दिया गया। पुरस्कार ‘मेमोरीज ऑफ पोरकुपाइन’ के लेखक एलाइन मबानकोऊ द्वारा प्रदान किया गया। 

पेन अमेरिकन सेंटर की ओर से आयोजित यह समारोह इसलिए भी विशेष हो गया कि इस समारोह को टेक्सास में पैगम्बरे इस्लाम (स) पर आयोजित कार्टून प्रतियोगिता के दौरान हुई गोलीबारी के मात्र दो दिनों के अंतराल पर किया गया।  टेक्सास में हुए हमले को देखते हुए समारोह के आयोजनकर्ताओं ने सुरक्षा बढ़ा दी। 

कई लेखकों के विरोध के बावजूद पेन अमेरिकन सेंटर ने यह पुरस्कार, पत्रिका शार्ली हेब्दो को ही देने का निर्णय किया। पेन ने बताया कि प्रतियोगिता से नाम वापस लेने वाली एक उपन्यासकार रिचेल कुश्नेर, शार्ली हेब्दो की सांस्कृतिक असहिष्णुता से असंतुष्ट हैं।

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हिंदी संस्थान : त्रैवार्षिक हिंदीसेवी अवार्ड घोषित, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को राहुल सांकृत्यायन अवार्ड

आगरा : केंद्रीय हिंदी संस्थान के हिंदी सेवी सम्मानों के नामों का ऐलान हो चुका है। केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा 3 वर्ष के हिंदी सेवी अवार्ड से सम्मानित होने वालों व्यक्तियों के नामों की घोषणा की है। यह पुरस्कार वर्ष 2012, 2013 तथा 2014 के लिए चयन हुए हिंदी सेवियों की लिस्ट में केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. कमलकिशोर गोयनका की अध्यक्षता में संस्थान के डायरेक्टर प्रो. मोहन ने पेश किया है।

इनमें साहित्य एकेडमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी को 2013 के राहुल सांकृत्यायन अवार्ड और राजीव कटारा को इसी वर्ष के गणेश शंकर विद्यार्थी अवार्ड के लिए चयन किया गया है। प्रो. मोहन ने बताया है कि सभी को राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति के हाथों यह अवार्ड दिया जायेगा।

उन्होंने यह भी बताया है कि, हिंदी राष्ट्रीय एकता-समन्वय की अहम कड़ी है। राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्कभाषा के रूप में कई भारतीय भाषाओं में आपसी संवाद को बढ़ावा देते हुए भारत की समावेशी संस्कृति के विकास की जिम्मेदारी संस्थान को ही रही है।

हिंदी सेवी सम्मान स्कीम में सात अवार्ड श्रेणियों के अन्तर्गत कई क्षेत्रों में हिंदी के लिए उल्लेख काम करने वाले 14 विद्वानों को हर साल नवाजा जायेगा। अवार्ड के लिए चुने गए साहित्यकारों-विद्वानों में, महेश दर्पण, डॉ. सुषम बेदी (2012); बालेंदु शर्मा दाधीच (2013); नरेंद्र कोहली, प्रो. श्योराज सिंह बेचैन, डॉ, सुरेश  गौतम, बलदेव वंशी और सुधा ओम ढींगरा (2014) भी इनमें शामिल हैं।   

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पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’

भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्व विद्यालय में गत दिनो आयोजित एक समारोह में वर्ष 2012 का ‘गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान’ वरिष्ठ पत्रकार मदन मोहन जोशी को एवं वर्ष 2013 का सम्मान युवा पत्रकार श्यामलाल यादव को प्रदान किया गया। साथ ही, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतिभा-2015 का पुरस्कार वितरण भी किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं मंचासीन अतिथियों ने साकेत दुबे की पुस्तक ‘डॉ.धर्मवीर भारती: पत्रकारिता के सिद्धान्त’ एवं मनोज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘महात्मा गांधी और संवाद कला’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है। उसने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। पत्रकारिता नहीं होती तो आज देश की राजनीति की दिशा-दशा कुछ और होती। दादा माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन हमारे लिए आज भी प्रकाश पुंज है। 

पत्रकार मदनमोहन जोशी और श्यामलाल यादव को सम्मानित करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

 

साकेत दुबे और मनोज चतुर्वेदी की पुस्तकों के प्रकाशनोत्सव की एक झलक

मुख्यमंत्री ने कहा कि मदन मोहन जोशी केवल पत्रकार नहीं, सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। श्यामलाल यादव ने कम उम्र में पत्रकारिता में बड़ी ऊंचाइयाँ हासिल की हैं, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। युवा पत्रकारों से उन्होंने सामाजिक सरोकार वाली पत्रकारिता करने का आह्वान किया। 

मदन मोहन जोशी ने कहा कि ऐसी पत्रकारिता का संकल्प लेना चाहिए जिससे व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र का भला हो सके। श्यामलाल यादव ने कहा कि मेहनत करके पत्रकारिता में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी ने कहा कि पत्रकारिता के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती मूल्यों के संरक्षण की है। सनसनीपूर्ण पत्रकारिता का बोलबाला है। पत्रकारिता में ऐसे प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे मूल्यों एवं संवेदनाओं का संरक्षण हो सके। 

माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान के अंतर्गत वैदिक मिशन ट्रस्ट के स्वामी धर्मबंधु ने कहा कि विद्यार्थी पांच संकल्प लें। प्राचीन साहित्य का अध्ययन, अपनी संस्कृति का सम्मान, राष्ट्र के प्रति प्रेम का भाव, आदर्श स्थापित करने का प्रयास कर एवं अन्याय-अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएँ। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विश्वविद्यालय की आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा करते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने किया।

समारोह में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों के दल ने समाज में व्याप्त बुराइयों पर केन्द्रित लघु नाटिका ‘पागलों की दुनिया’ प्रस्तुत की। छात्राओं के कालबेलिया नृत्य पर लोग झूम उठे। विश्वविद्यालय बैण्ड ने भी मन मोहन लिया। इस दौरान प्रतिभा-2015 के दौरान सम्पन्न निबंध प्रतियोगिता, फीचर लेखन प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता, तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, एनीमेशन, पोस्टर, कार्टून, पावर पाइंट निर्माण प्रतियोगिता, नाट्य प्रतियोगिता, नृत्य प्रतियोगिता तथा क्विज़ प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरित किए गए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला, हिमालच विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेयी, वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा, रमेश शर्मा एवं वरिष्ठ साहित्यकार कैलाशचन्द्र पंत उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें –  

Journalism has given new direction to country’s politics: Shivraj Singh Chouhan : Lecture of Swami Dharmbandhu of Vedi Mission Trust was organised during Makhanlal Chaturvedi Memorial Lecture by Journalism University

Bhopal : Journalism is essential for democracy. Journalism has given a new direction to the country’s politics. Had journalism not been there, the political scenario would have been entirely different in the country. Life of Makhanlal Chaturvedi even today, is a great source of inspiration for us. These views were expressed by Chief Minister Shri Shivraj Singh Chouhan while addressing the Makhanlal Chaturvedi Memorial lecture and Ganesh Shankar Vidyarthi Award ceremony organised by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication in Bhopal on Tuesday.

The Ganesh Shankar Vidyarthi award for the year 2012 was conferred upon senior journalist, Shri Madan Mohan Joshi while award for the year 2013 was conferred upon young journalist, Shri Shyamlal Yadav. On this occasion, Chief Minister said that Madan Mohan Joshi is not only a journalist but also a social worker. About Shyamlal Yadav, Chouhan said that he has reached a great height in the field of journalism at a very young age which is a great source of inspiration for the youths. He called upon the student to work hard and do not escape from working hard and should keep their goals big. He said that there is no bigger service than serving others and no bigger sin than harming others. Youths should practice journalism in such a way that they shine in the sky like stars. Giving four sutras of success to the students, he said that they should have ‘Paon Mein Chakkar’, ‘Muh Mein Shakkar’, ‘Sine Mein Aag’ and ‘Mathe Pe Barf’ and exhorted them to practice journalism which is in the interest of the society.

Speaking on the occasion, Madan Mohan Joshi said that journalism should take resolution to be in a kind of journalism that is in the interest of individual, society and nation. Shyamlal Yadav, in his address, said that anything could be achieved in journalism by dint of hard work and the young generation should not refrain from hard work. VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee said that the biggest challenge before the journalism today is to preserve the journalistic values. There is the need to encourage efforts which could help in preservation of values and sensitivity. The vice-chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, on this occasion talked about the upcoming programmes of the university and expressed gratitude towards the guests. The entire programme was coordinated by head of the Mass Communication Department, Sanjay Dwivedi.

Sufferings could be fought by increasing capabilities: Swami Dharmbandhu

The biggest characteristics of the human life is humanity. When there is lack of capability in humans, they will have mroe jealousy. Today people are not unhappy because of their own inefficiencies but because of efficiencies of others. To be able to get rid of their sufferings, people should become more capable. Today, there is need to emphasize on internal purification. We should focus on purity of body, mind, soul and conscience. Stregnths could be increased by creating knowledge. These views were expressed by the founder of Vedic Mission Trust, Swami Dharmbandhu.

He said that the problems of the modern age were determined by the heads of different countries of the world in 2005 wherein they said that world should come out of wars and give stress on better management. Today, the biggest problem before the humab beings is the problem of character. Today, even those nations which are ruling the international platforms too seem to be admitting this fact that development is not possible without peace. He said that the renowned educationist of the country, BS Kothari advocated of an education system which could promote the spirity of humanity. Quoting the great philosopher, Russeau, he Dharmbandhu said that everything given to us by the nature is sacred but it is destroyed when it reaches the hands of the human beings. Knowledge should be taken and learnt even from the enemies. Giving knowledge is the biggest charity. Today the G-8 nations consititute 19 per cent of the total population of the world while they have 75 per cent of the world resources in under their possession.

In his addres, Swami Dharmbandhu mentioned about 5 resolutions that students should take. First, studying the ancient literature, second: respecting our culture, third: feeling of affection towards the nation, fourth: try to establish ideals and fifth: raising voice against injustice and atrocities. He exhorted the student to live a hard working life and said that those not doing hard works in their lives do not have the right to pray to the almighty. Similarly, those who do not perspire should not have the right to relax. He said that a person is known by his thoughts and to be able role model for others it is important that one becomes patient, stay away from greed and should bring humility in one’s behaviour. Talking about the books authored by the great souls of the world, he appealed the students to go through them.

Students enjoy cultural activities, cheer prize winners

Prize distribution for cultural and sports event Pratibha-2015 : The prize distribution ceremony for annual cultural and sports fest Pratibha-2015 was also organised during the function. Students also presented cultural activities like skit titled, ‘Paagalon Ki Duniya’ to highlight the corruptions and irregularities prevailing in the society. The folk dance, Kalbeliya, presented by the students also enthralled the audience. The Universiy Band too mesmerised the audience with their musical instruments. During this, the winners of different competitions like essay, feature writing, debate, extempore, animation, cartoon, poster, powerpoint presentation, play, dance, quiz and others were also given away felicitated with prizes. Vice-Chancellor of the university, Prof. Brij Kishore Kuthiala, VC of Himachal University, Prof. ADN Bajpayee, senior journalist Radheshyam Sharma and senior litterteur, Kailashchandra Pant were present to give away the prizes to the winners of the competitions.

During the function, two books published by the Publication Department of the University were released by Chief Minister Shivraj Singh Chouhan and other dignitaries present on the dais. The book authored by Saket Dubey, ‘Dharmvir Bharti: Patrakarita Ke Siddhant’ and ‘Mahatma Gandhi Aur Samvad Kala’ written by Manoj Chaturvedi were released on  the occasion.  

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लखनऊ के डा. सुरेश को मुंबई में चौथा अनुष्का सम्मान देकर सम्मानित किया गया

मुंबई : ”जिस देश में हर बच्चे का मां से लोरी सुनना शाश्वत सत्य है, वहां कविता कितनी भी प्रगतिशील हो जाय, गीत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. छंद का पताका फहरानेवाली अनुष्का जैसी पत्रिकायें अपने आपमें एक आंदोलन हैं जिनमें भाग लेकर हमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिये.” उक्त बातें नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने हिन्दी के वरिष्ठ गीतकार डॉ.सुरेश (लखनऊ) को चौथा अनुष्का सम्मान प्रदान करते हुये कही.

 

दोपहर का सामना के संपादक प्रेम शुक्ल ने कहा कि विभिन्न धर्मों ने अपनी भाषा की सर्वोत्तम कृतियों को अपने धर्मग्रंथों के रूप में चुना जो छंदबद्ध हैं. हमारे युगों की धरोहर छंदों में ही सन्निहित है. अनुष्का द्वारा दिया जा रहा यह सम्मान उसी परंपरा का सम्मान है. आधुनिक कविता तो मुंबई के यातायात व्यवस्था की तरह जटिल होती जा रही है. अनुष्का के संपादक रासबिहारी पाण्डेय ने गीत को अप्रासंगिक बताये जानेवाले वक्तव्यों पर तंज करते हुये कहा कि जिन कविताओं को लिखने वाले स्वयं याद नहीं रख पाते उन्हें समाज कैसे याद रख पायेगा.

तकनीक के विकास के साथ साथ गीत का दायरा और भी व्यापक होता जा रहा है. हिंदी सिनेमा में सौ वर्षों बाद भी गीत की जगह कोई अन्य विधा नहीं ले पायी है. इस अवसर पर डॉ. सुरेश ने लगभग एक घंटे तक अपने गीतों के मधुर पाठ से उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया. समारोह में पं.किरण मिश्र, अभिजीत राणे, ओमप्रकाश तिवारी, उमाकांत वाजपेयी, राजेश विक्रांत, आफतब आलम समेत मुंबई महानगर में कला, साहित्य एवं संस्कृति जगत से जुड़ी अनेक शख्सियतों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही. समारोह का संचालन आलोक भट्टाचार्य ने किया.     

प्रेस विज्ञप्ति

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दिनकर कुमार को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान

मास्को : मानवीय सरोकारों के पैरोकार हिन्दी के जाने-माने कवि और अनुवादक दिनकर कुमार को रूस का अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान-2012 दिए जाने की घोषणा की गई है। रूस के ‘भारत मित्र समाज’ की ओर से प्रतिवर्ष हिन्दी के एक प्रसिद्ध कवि-लेखक को मास्को में हिन्दी-साहित्य का यह महत्वपूर्ण अन्तरराष्ट्रीय सम्मान दिया जाता है। इस क्रम में समकालीन भारतीय लेखकों में अपना विशिष्ट स्थान रखने वाले और कविता के प्रति विशेष रूप से समर्पित दिनकर कुमार को जल्द ही यह सम्मान मास्को में आयोजित होने वाले गरिमापूर्ण कार्यक्रम में दिया जाएगा।

मूल रूप से मानवीय संवेदना के पक्ष में खड़े नज़र आने वाली कवि दिनकर कुमार का जन्म 5 अक्तूबर 1967 को बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से गाँव ब्रहमपुरा में हुआ था और अब तक उनके चार कविता-संग्रह, दो उपन्यास, दो जीवनियाँ एवं असमिया भाषा से पचास से अधिक पुस्तकों का अनुवाद प्रकाशित हो चुका है। इस भरी-पूरी साहित्यिक सम्पदा वाले कवि-लेखक दिनकर कुमार की राष्ट्रीय ख्याति का अन्दाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी अनेक कविताओं का मराठी, बंगाली, मलयालम, पंजाबी, कन्नड़, उर्दू, गुजराती, तमिल, असमिया आदि भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

हिन्दी साहित्य के सोमदत्त सम्मान, जस्टिस शारदाचरण मित्र स्मृति भाषा सेतु सम्मान, जयप्रकाश भारती पत्रकारिता सम्मान एवं शब्द भारती का अनुवादश्री सम्मान जैसे अनेक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित दिनकर कुमार गुवाहाटी (असम) में प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक सेण्टिनल के सम्पादक हैं।

‘भारत मित्र’ समाज के महासचिव अनिल जनविजय ने मास्को से जारी विज्ञप्ति में यह सूचना दी है कि प्रसिद्ध रूसी कवि अलेक्सान्दर सेंकेविच की अध्यक्षता में हिन्दी साहित्य के रूसी अध्येताओं व विद्वानों की पाँच सदस्यीय निर्णायक-समिति ने कवि दिनकर कुमार को वर्ष 2012 के अन्तरराष्ट्रीय पूश्किन सम्मान के लिए चुना है। इस निर्णायक-समिति में हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध रूसी विद्वान ल्युदमीला ख़ख़लोवा, रूसी कवि अनातोली परपरा, कवयित्री और हिन्दी साहित्य की विद्वान अनस्तसीया गूरिया, कवि सेर्गेय स्त्रोकन और लेखक व पत्रकार स्वेतलाना कुज़्मिना शामिल थे। सम्मान के अन्तर्गत दिनकर कुमार को पन्द्रह दिन की रूस-यात्रा पर बुलाया जाएगा। उन्हें रूस के कुछ नगरों की साहित्यिक-यात्रा कराई जाएगी तथा रूसी लेखकों से उनकी मुलाक़ातें आयोजित की जाएँगी।

कवि दिनकर कुमार से पहले यह सम्मान हिन्दी के कवि विश्वनाथप्रसाद तिवारी, उदयप्रकाश, लीलाधर मण्डलोई, स्वप्निल श्रीवास्तव, आलोक श्रीवास्तव, बुद्धिनाथ मिश्र, भारत यायावर, पवन करण, कहानीकार महेश दर्पण, हरि भटनागर आदि को दिया जा चुका है। दिनकर कुमार से dinkar.mail@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है।

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मदन मोहन जोशी और श्यामलाल यादव को गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान

भोपाल : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2012-13 के लिए दिये जाने वाले प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की घोषणा कर दी गई है.  वर्ष 2012 के लिए यह सम्मान देश के जाने-माने पत्रकार मदन मोहन जोशी को एवं  वर्ष 2013 के लिए यह पुरस्कार प्रख्यात पत्रकार श्यामलाल यादव को प्रदान किया जायेगा। सम्मान समारोह का आयोजन 7 अप्रैल 2015 को भोपाल में किया जाएगा।

भारतीय भाषायी पत्रकारिता के माध्यम से सृजनात्मक योगदान के लिये माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की स्थापना की गई है। यह सम्मान किसी एक कृति या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिये देय है। विगत वर्षों में इस सम्मान से आलोक मेहता, राजेंद्र शर्मा, डा. नंदकिशोर त्रिखा, रामबहादुर राय, रमेश नैयर को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान के अंतर्गत दो लाख रूपए प्रदान किए जाते हैं।

वर्ष 2012 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री मदनमोहन जोशी नवभारत, क्रोनिकल तथा नईदुनिया जैसे प्रतिष्ठत समाचारपत्रों से जुड़े रहे हैं। नईदुनिया में एक संवाददाता के रूप से कार्य प्रारम्भ कर वे उसी संस्थान में सम्पादक रहे हैं। उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी के दो साप्ताहिक स्तम्भों के 20 वर्षों तक लेखन का कीर्तिमान बनाया। देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनके 5000 से अधिक आलेख, रिर्पोताज प्रकाशित हुए। उन्होंने एक दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं। पुस्तकों के अतिरिक्त उनके निबन्ध संग्रह एवं कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए। वे भोपाल स्थित जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र के संस्थापक भी रहे हैं। उन्हें अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से विभूषित किया जा चुका है।

वर्ष 2013 के लिए सम्मानित श्री श्यामलाल यादव हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में पत्रकारिता करते हुए सतत लेखन कर रहे हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से 1992-93 में पत्रकारिता की पढ़ाई पूर्ण की। वे जनसत्ता, अमर उजाला, इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस जैसे समाचारपत्रों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे हैं। उन्हें रूरल रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित स्टेट्समेन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। खोजी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें ‘रामनाथ गोयनका, अवॉर्ड मिला है। पी.सी.आर.एफ. एवं एन.डी.टी.वी. द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय आर.टी.आई. पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2010 में उन्हें लारेन्जो नेताली अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है।

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

Ganesh Shankar Vidyarthi Award to be conferred upon Madan Mohan Joshi and Shyamlal Yadav

Bhopal : Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication has announced the prestigious Ganesh Shankar Vidyarthi Awards for the year 2012 and 2013. For the year 2012, the award will be conferred upon the noted journalist of the country, Shri Madan Mohan Joshi while for the year 2013 the award will be conferred upon renowned journalist Shri Shyamlal Yadav. The award ceremony would be organized on April 7, 2015 in Bhopal.

It may be noted that the prestigious Ganesh Sankhar Vidyarthi Awards were constituted by Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication for creative contribution in establishment and promotion of values, searching for truth, working for people, social uplift and independent conscience through language journalism. This award is given away not for one story or achievement but for sustained dedication and achievement. The previous recipients of the award are – Alok Mehta, Rajendra Sharma, Dr. Nandkishore Trikha, Rambahadur Rai and Ramesh Nayyar. The award covers an amount of Rs 2,00,000 cash and a citation.

Shri Madanmohan Joshi who is conferred with Ganesh Shankar Award for the year 2012 has been associated with prestigious newspapers like Navbharat, Chronicle and Naidunia. He started his career as a correspondent with Naidunia and went on to become editor of the same organization. He credited with writing weekly columns in both Hindi and English languages for 20 continuous years. More than 5000 articles and reportages of Joshi have been published in well-known newspapers and magazines of the country. He has also authored 12 books. Besides, his essays compilations and poetries have also been published. He has also been the founder of Bhopal-based Jawaharlal Nehru Cancer Hospital and Research Center. He has also been conferred with various others awards and recognitions.

Shri Shyamlal Yadav who has been conferred with the award for the year 2013 has done journalism in both Hindi and English language and has been continuously engaged with writing works. He studied from Makhanlal Chaturvedi University in 1992-93. He then worked with Jansatta, Amar Ujala, India Today and Indian Express served at senior positions. At present he is working as Senior Editor with prestigious English daily Indian Express. He has been conferred with prestigious ‘Statesman’ Award for rural reporting. He is also a recipient of Ramnath Goenka Award for investigative journalism. He has also been felicitated with National RTI Awards by PCRF and NDTV. In 2010 he was also conferred with Lorenzo Natali International Award for journalism.

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प्रसून शुक्ला के व्यक्तित्व के बारे में क्या कहा वैदिक, यशवंत, रुबी, विकास आदि ने, आप भी सुनिए…

पिछले दिनों न्यूज एक्सप्रेस चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ प्रसून शुक्ला का सम्मान उनके गृह जनपद बस्ती में एक संगठन ‘बस्ती विकास मंच’ द्वारा किया गया. इस मौके पर दिल्ली से गए कई पत्रकारों ने प्रसून शुक्ला के जीवन, करियर और सोच को लेकर अपने अपने विचार व्यक्त किए. डा. वेद प्रताप वैदिक, योगेश मिश्र, यशवंत सिंह, रुबी अरुण, सुधीर सुधाकर, विकास झा, बृजमोहन सिंह आदि ने प्रसून की पर्सनाल्टी के विविध पक्षों को उकेरा.

इस पूरे आयोजन और सबके भाषण को आप इस वीडियो लिंक पर क्लिक करके देख सुन सकते हैं…

https://www.youtube.com/watch?v=IK7_UhVVRME

इस आयोजन के बारे में बस्ती के स्थानीय अखबारों में जो कुछ छपा है, उसकी कतरन उपर नीचे प्रकाशित है जिसे पढ़कर पूरे आयोजन के बारे में विस्तार से जाना जा सकता है….

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तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम….

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तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम….

Yashwant Singh : कल और परसों जिला बस्ती (उत्तर प्रदेश) में रहूंगा. अपने घनिष्ठ मित्र Prasoon Shukla के सम्मान समारोह में. पेड और प्रायोजित पुरस्कारों की भीड़ में जब कोई अपनी ही माटी के लोगों के हाथों अपनी ही जमीन पर सम्मानित किया जाता है तो उसका सुख सबसे अलग और अलहदा होता है. बस्ती के रहने वाले हैं प्रसून शुक्ला. शुरुआती पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ लड़ने भिड़ने जूझने और अंतत: जीत जाने की ट्रेनिंग भी इसी धरती ने दी है.

प्रसून के सम्मान समारोह में शिरकत करने के लिए मुझे भी न्योता मिला. समारोहों-आयोजनों के निमंत्रण तो बहुत मिलते रहते हैं लेकिन अपनी व्यस्तताओं, आलस्य और उदासीन मन:स्थिति के कारण शिरकत नहीं कर पाता. पर बस्ती दो वजहों से जा रहा हूं. एक तो दोस्ती-मित्रता का धर्म कहता है कि मित्र-दोस्त के उत्सव और मुश्किल, दोनों का हिस्सा बनो, बिना शर्त और बिना किंतु परंतु के. दूसरा एक बेहद जमीनी और मौलिक आयोजन को जीना-समझना, जिसे न कोई पीआर कंपनी आयोजित करा रही है और न इसके पीछे कोई इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की सक्रियता है. ये उन लोगों का आयोजन है जो अपने जिले से निकलने और दूर शहरों के आसमान में जाकर चमक बिखेरने वाले सितारों को अपनी जमीन पर बुलाकर उसे दाद, सपोर्ट, समर्थन, सम्मान देकर ‘अच्छे लोगों के बिखरकर खुशबू के यत्र तत्र सर्वत्र फैला देने’ की परंपरा का आत्मिक और ममत्व भरा जयगान करते हैं.

बस्ती तक जा रहा हूं तो गाजीपुर कैसे न जाउंगा. चार घंटे का रास्ता होगा ज्यादा से ज्यादा. जब गाजीपुर जाता हूं तो पाता हूं कि वही माटी, वही रास्ते, वही लोग, वही मौसम है यहां का जबसे सांस लेना शुरू किया और आसपास को अपने अंदर के समग्र में चेतन-अवचेतन हालात में समेटना सहेजना शुरू किया. ऐसा लगता है जैसे ब्लड प्रेशर खुद ब खुद लो हो गया. ऐसा लगता है जैसे उत्साह और उल्लास खुद ब खुद अंदर हिलोरें लेने लगा. प्रोफेशनल दिनचर्याओं में कैद शरीर से कोट टाई उतार कर फेंकते हुए घुड़दौड़ी महानगर को दूर छोड़ना तभी संभव है जब आप अपनी मिट्टी, अपनी धरती, अपने गांव-जवार से बिना शर्त सम्मोहित होते रहते हैं. ये वो जगह है जहां ठठाकर बात-बात में हंसने के पीछ कोई कार्य-कारण सिद्धांत काम नहीं किया करते. ये वो जगह है जहां मौन होकर चलने जीने में भी एक इनविजिबिल पाजिटिव एनर्जी आसपास होने का फील दिया करती है. तो आप बस्ती के हों या गाजीपुर के, आप छपरा के हों या होशंगाबाद के, आप जहां के हों, वहां जरूर जाएं. बिना वजह जाएं. उब जाएं महानगरी घुड़दौड़ से तो बिना वजह भाग के जाएं. और, जाएं तो बिना मकसद मिलें, भटकें, खाएं, जिएं. मन-शरीर का इससे बड़ी इनर-आउटर हीलिंग और किसी तरीके से संभव नहीं. तो, मैं अब चला अपने गांव, सबको राम राम राम. 🙂

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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शलभ मणि त्रिपाठी, गिरीश पांडेय, प्रकाश नारायण सिंह समेत पांच लोग गोरखपुर में 30 नवंबर को होंगे सम्मानित

नया मीडिया पर उपस्थिति, सक्रियता, कार्य अनुभव, पत्रकारिता अनुभव, रचनाकर्म को ध्यान में रखते हुए नया मीडिया मंच द्वारा गोरखपुर में एक आयोजन में पांच जनो को सम्मानित करने की घोषणा की गई है. इनके नाम क्रमश: शलभ मणि त्रिपाठी (ब्यूरो चीफ यूपी, आईबीएन 7), गिरीश पाण्डेय (वरिष्ठ संवाददाता, दैनिक जागरण गोरखपुर), प्रकाश नारायण सिंह (एबीपी न्यूज़), पश्यन्ती शुक्ला (ब्लॉगर, पूर्व टीवी पत्रकार), अर्चना मालवीय (लेखिका) हैं. नया मीडिया मंच का दावा है कि ये पांचो ही नाम सोशल मीडिया पर सशक्त उपस्थिति रखते हैं.

नया मीडिया मंच की तरफ से गोरखपुर में 30 नवम्बर को ‘समाज, राजनीति एवं नया मीडिया’ विषय पर संगोष्ठी होगी. इसकी अध्यक्षता दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के पूर्व कुलपति डॉ. राधे मोहन मिश्र करेंगे.  कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी इस आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहेंगे. कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य वरिष्ठ पत्रकार एन.के सिंह (पूर्व प्रधान सम्पादक, लाइव इण्डिया) का होना है. बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व सचिव मानवाधिकार संतोष द्विवेदी एवं आईआरएएस अष्टानन्द पाठक उपस्थित रहेंगे. विशिष्ट वक्ता के तौर पर दीन दयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर में राजनीति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी एवं छत्तीसगढ़ भाजपा के मुखपत्र दीपकमल के सम्पादक पंकज कुमार झा उपथित रहेंगे.

नया मीडिया मंच गोरखपुर में ‘पं. विद्यानिवास मिश्र नया मीडिया सम्मान’ के नाम पांच लोगों को सम्मानित करेगा. आयोजन के संरक्षण का दायित्व नया मीडिया मंच संस्थापक स्वयं सेवी डॉ दिनेश मणि त्रिपाठी के कन्धों पर हैं. जबकि नया मीडिया मंच के संस्थापक स्वयंसेवी डॉ सौरभ मालवीय एवं श्री प्रवीण शुक्ल पृथक इस आयोजन में संयोजक की भूमिका में हैं.

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रवीश कुमार को मिलेगा छत्रपति सम्मान-2014

साहित्यिक संस्था संवाद, सिरसा द्वारा छत्रपति सम्मान-2014 एनडीटीवी के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार को दिया जाएगा। सम्मान समारोह शहीद पत्रकार छत्रपति की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 22 नवम्बर को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में ‘संवाद’ की एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता ‘संवाद’ के अध्यक्ष परमानंद शास्त्री ने की। इस संबंध में संस्था के सचिव डा. हरविंद्र सिंह ने बताया कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति 21 नवम्बर को शहीद हुए। उनकी स्मृति में ‘संवाद’ द्वारा छत्रपति सम्मान प्रत्येक वर्ष देश की किसी महान शख्सियत को दिया जाता है।

इस बार सम्मान समारोह का आयोजन 22 नवम्बर को होगा। समारोह में एनडीटीवी इंडिया के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार को छत्रपति सम्मान-2014 दिया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता बठिंडा के केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. चमन लाल करेंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के लिए स्थान का निर्धारण शीघ्र ही कर लिया जाएगा। इसके अलावा बैठक में विभिन्न सदस्यों को कार्यभार सौंपा गया।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व छत्रपति सम्मान से ब्रिटेन में भारत के पूर्व राजनयिक एवं चिंतक पत्रकार कुलदीप नैयर, प्रख्यात लेखक विष्णु नागर, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नाटककार एवं रंगकर्मी प्रो. अजमेर सिंह औलख, ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त मूर्धन्य साहित्यकार प्रो. गुरदयाल सिंह को नवाजा जा चुका है। बैठक में ‘संवाद’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरभगवान चावला, लेखराज ढोट, डा. राम जी, गुरबख्श मोंगा, अंशुल छत्रपति, पूर्व सरपंच शिवराम सिंह, राजकुमार शेखूपुरिया आदि मौजूद थे

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हरिवंश को भव्य समागम में 2014 के आचार्य तुलसी सम्मान से सम्मानित किया गया

अध्यात्म साधना केंद्र, छतरपुर (नयी दिल्ली) में जैन परंपरा और सादगी के साथ आयोजित भव्य समागम में प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश को 2014 के ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ से सम्मानित किया गया.  अनुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में आयोजित समारोह में गुजरात के राज्यपाल ओम प्रकाश कोहली ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. इस मौके पर 2013 का ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ स्व. भूपतभाई वडोदरीया को प्रदान किया गया. समभाव ग्रुप के संस्थापक पत्रकार वडोदरीया ने गुजरात दंगों के दौरान साहसिक रिपोर्टिग की थी.

अपने आशीर्वचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि पत्रकार हवा के समान होते हैं. जैसे हवा सुगंध को वातावरण में फैलाने का काम करती है, वैसे ही पत्रकार सद्विचारों को समाज में फैलाते हैं. एक बेहतर समाज के निर्माण में पत्रकारों का अहम योगदान होता है.  गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने कहा कि आचार्य तुलसी ने आत्मा को न सिर्फ व्याख्यायित किया, बल्कि उसे जीया भी. वे जीवन मूल्यों के सृजन और साधना में आजीवन लगे रहे. सच्चे जीवन मूल्यों को चुन कर उसे आत्मसात करनेवाला साधु बन जाता है. इन मूल्यों को चुनने में पत्रकार और साहित्यकार समाज की मदद करते हैं. इसीलिए आचार्य तुलसी सम्मान के लिए ऐसे पत्रकारों का चयन किया जाता है, जिन्होंने बिना किसी प्रलोभन के निष्पक्ष और सरोकारी पत्रकारिता में अपना जीवन खपाया है. साध्वी कनकप्रभा ने कहा कि आज समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है. ऐसे में पत्रकार और साहित्यकार का दायित्व है कि वे देश और समाज को दिशा देते रहें.

मुनि गुरु सुमेरलाल जी स्वामी ने कहा कि प्रलोभन को ठुकराने वाले व्यक्ति विरले होते हैं. नैतिक मूल्यों के साथ सत्य पर चलनेवाले व्यक्ति आचार्य तुलसी को प्रिय थे. वरिष्ठ पत्रकार एवं सांसद हरिवंश ने कहा कि देश में चरित्र, नैतिकता और जीवन मूल्यों का संकट है. ऐसे वक्त में आचार्य तुलसी के विचार और मागदर्शन देश को नयी दिशा दे सकते हैं. इस मौके पर ‘आचार्य तुलसी सम्मान’ के रूप में उन्हें एक लाख रुपये, शॉल, शील्ड, चांदी का नारियल आदि देकर सम्मानित किया गया.

श्री हरिवंश ने कहा कि वे सम्मान के साथ प्राप्त राशि को फिक्स डिपोजिट के रूप में जमा करा देंगे और हर साल उससे मिलनेवाले ब्याज की राशि को गरीब बच्चों की पढ़ाई एवं इलाज आदि में खर्च करेंगे. समारोह को नवनीत के संपादक एवं नवभारत टाइम्स व धर्मयुग के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, नूतन सवेरा के संपादक व ब्लिट्ज के पूर्व संपादक नंदकिशोर नौटियाल, सांसद अश्विनी कुमार चौबे आदि ने भी संबोधित किया. इससे पहले स्वागत भाषण आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ विचार मंच के अध्यक्ष राजकुमार पुगलिया ने किया.

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इलाहाबाद के पत्रकार शिवाशंकर पांडेय को पत्रकारिता गौरव सम्मान

इलाहाबाद। पत्रकारिता क्षेत्र में विशिष्ट कार्य के लिए शिवाशंकर पांडेय को बायोवेद मर्यादा पुरूषोत्तम पत्रकारिता गौरव सम्मान के लिए चयन किया गया है। पच्चीस साल से पत्रकारिता से जुड़े श्री पांडेय दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान अखबारों में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कई साल तक कार्य कर चुके हैं।

स्वतंत्र चेतना, जनमोर्चा और प्रयागराज टाइम्स में पथिक की डायरी, दैनिक जागरण में गांव की ओर, सामर्थ्य पत्रिका में मीडियावाच आदि कॉलम चर्चित रहे। कथादेश, वागर्थ जनसत्ता में कई कहानियां, उपन्यास प्रकाशित हुए। श्री पांडेय को राष्ट्रीय रामायण मेला श्रृंग्वेरपुरधाम के रजत जयंती समारोह में 5 नवंबर को सम्मानित किया जाएगा।  

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डा. कविता वाचक्नवी को मिलेगा “हरिवंश राय बच्चन लेखन सम्मान एवं पुरस्कार”

लंदन से खबर है कि इंडियन हाईकमीशन द्वारा समग्र एवं सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक अवदान हेतु हरिवंश राय बच्चन के शताब्दी वर्ष पर स्थापित “हरिवंश राय बच्चन लेखन सम्मान एवं पुरस्कार” (2014)  डा. कविता वाचक्नवी को देने की घोषणा की गई है. यह पुरस्कार समारोह 5 दिसम्बर 2014 को इण्डिया हाऊस, लन्दन में आयोजित होगा।

ध्यातव्य है कि डा. कविता वाचक्नवी को भारतीय उच्चायोग द्वारा हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ अवदान (2011 हेतु)   “आचार्य महावीर प्रसाद पत्रकारिता सम्मान” भी  प्रदान किया जा चुका है।  इंडियन हाई कमीशन, इण्डिया हाऊस, लन्दन द्वारा चार पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। हरिवंश राय बच्चन लेखन सम्मान ( सर्वश्रेष्ठ समग्र लेखन हेतु / व्यक्ति को),  आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान – सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता सेवाओं हेतु / व्यक्ति को), जॉन गिलक्रिस्ट यू॰ के॰ हिन्दी शिक्षण सम्मान ( सर्वश्रेष्ठ हिन्दी शिक्षण हेतु / व्यक्ति को) और फ़्रेडरिक पिंकाट हिन्दी प्रचार- प्रसार सम्मान (संस्था को)। 

पुरस्कार मिलने पर डा. कविता वाचक्नवी ने ईश्वर, अपने माता-पिता-परिवार, अपने शिक्षकों-आचार्यों और सभी सुहृद मित्रों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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पिंकसिटी प्रेस क्लब स्थापना दिवस में युवा, प्रतिभाशाली एवं वरिष्ठों पत्रकारों का हुआ सम्मान

जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब के 23वें  स्थापना दिवस मुख्य समारोह का आयोजन सोमवार प्रेस क्लब सभागार में आयोजित किया।  समारोह की अध्यक्षता भाजपा के वरिष्ठ नेता रामदास अग्रवाल ने की। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, कार्यक्रम में विषिष्ट अतिथि महापौर ज्योति खण्डेलवाल, प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी और जयपुर सांसद रामचरण बोहरा थे।

इस दौरान क्लब अध्यक्ष राधारमण शर्मा, महासचिव रोशन लाल शर्मा, कोषाध्यक्ष डी सी जैन सहित प्रबन्ध कार्यकारिणी सदस्यों ने अतिथियों को मार्ल्यापण, स्मृति चिन्ह, साफा पहनाकर सम्मानित किया। इस मौके पर लाईफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड वरिष्ठ पत्रकार बृजमोहन शर्मा, रमेश व्यास, सुभाष नाहर, सुधांशु मिश्रा, और सुरेन्द्र जैन पारस को दिया। बेस्ट फोटोजर्नलिस्ट अवार्ड दैनिक भास्कर के राजेश कुमावत, बेस्ट इलै. रिपोर्टर अवार्ड ईटीवी राजस्थान के शिवेन्द्र परमार, बेस्ट रिपोर्टर अवार्ड दैनिक भास्कर के नरेश कुमार वशिष्ठ को दिया।

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सुशांत सिंह, हृदयेश जोशी, सुशील बहुगुणा, मीनाक्षी राणा, सुनील तिवारी समेत कइयों को देहरादून में सम्मानित किया गया

देहरादून में ओएनजीसी के एएमएन घोष ऑडिटोरियम में तृतीय यूथ आइकॉन नेशनल मीडिया अवॉर्ड का आयोजन किया गया. इसमें कई कलाकारों, स्तंभकारों, समाज सेवियों व विशेषकर उत्तराखंड आपदा ग्रस्त जनपदों में खासा योगदान देने वाले अधिकारियों व पत्रकारों को सम्मानित किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि ऐसे आयोजन से देश-दुनिया में उत्तराखंड के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है. वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह ने कहा कि पत्रकारों के सम्मान के लिए अभी तक इस तरह के आयोजन दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में हुआ करते थे, लेकिन पर्वतीय राज्य में भी शानदार पहल हुई है.

इस दौरान वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, पर्यटन मंत्री दिनेश धनै के अलावा यूथ अवॉर्ड के अध्यक्ष डा. महेश कुडि़याल, निर्णायक मंडल के वरिष्ठ सदस्य डा. आर के जैन सहित कई गणमान्य मौजूद रहे. इससे पहले यूथ आइकॉन अवॉर्ड के संस्थापक निदेशक शशि भूषण मैठाणी ‘पारस’ ने अपने स्वागत भाषण में संस्था के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कहा कि उनका उद्देश्य इस आयोजन के जरिए युवाओं को जागरुक व जिम्मेदार बनाना है. संचालन मिस्टर इंडिया व‌र्ल्ड वाइड एवं शुभांकू भट्ट व ज्योतिका लाल ने किया.

सम्मान पाने वालों में कला कौशल से समाज के सम्मुख आपराधिक मानसिकता की नई व्याख्या देने वालों में एंकर सुशांत सिंह, उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए हृदयेश जोशी, विशेष पत्रकारिता सम्मान के लिए सुशील बहुगुणा, युवा लेखिका के तौर पर डा. मीनाक्षी राणा, नवोदित स्तंभकार के तौर पर सुनील तिवारी, क्षेत्रीय भाषा संरक्षण के लिए मोहिनी ध्यानी पटनी, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान के लिए दिनेश बड़थ्वाल, चिकित्सा सेवा के लिए डा. अजीत गैरोला, डा. सुमिता प्रभाकर, उत्कृष्ट लोक सेवा के लिए आईएएस दिलीप जावलकर, आईपीएस जीएस मार्तोलिया, वरिंदर जीत सिंह, कलात्मक व्यवसाय के लिए चंद्र शेखर मेहरवाल, अदम्य साहस के लिए वृज मोहन सिंह बिष्ट, योगेंद्र राणा, कम्यूटर साइंस के लिए हिमांशु चावला, अभिलाश सेमवाल, विज्ञान अनुसंधान के लिए विजय सिंह, नृत्य शैली के लिए डा. प्रियंका सिंह, सहित्य के लिए प्रेम चंद सकलानी, छोटी उम्र में ख्याति पाने वाली मनस्विनी पंत, बेस्ट लिटिल डायमंड मास्टर पार्थ रतूड़ी शामिल रहे. वहीं पत्रकारिता के लिए अजय कुमार, दिनेश मानसेरा, अमिताभ श्रीवास्तव, अवनीश प्रेमी, कैमरामैन मुकेश राजपूत, संदीप गुसांई, सोनू सिंह, मयंक राय, दिलीप सिंह बिष्ट, आफताब अजमत, केदार दत्त आदि शामिल रहे. केदारनाथ त्रासदी के एक वर्ष पूरे होने पर बेहतरीन कवरेज के लिए आई नेक्स्ट देहरादून को भी उत्कृष्ट पत्रकारिता सम्मान से नवाजा गया है. कहा गया है कि आई नेक्स्ट ने अपनी बरसी की कवरेज पर सटीक व तथ्यपरक खबरें पाठकों तक पहुंचाई.

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तृतीय उत्तराखंड यूथ आईकॉन नेशनल मीडिया अवार्ड सेरेमनी का आयोजन रविवार को किया गया। सेरेमनी में विभिन्न क्षेत्रों की 72 शख्सियतों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। गत वर्ष जून में आई आपदा में बेहतरीन काम करने वाले पत्रकारों और अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया। हिमाचल के बस कंडक्टर की आईपीएस बेटी शालिनी अग्निहोत्री और एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी का सम्मान भी खास आकर्षण का केंद्र रहा। दोनों ही बेटियां अपनी-अपनी वजह से अलग पहचान रखती हैं। खुद सीएम हरीश रावत ने भी दोनों बेटियों के योगदान को सराहा। इन्हें मिला सम्मान….

सुशील बहुगुणा: विशेष पत्रकारिता सम्मान
हृदयेश जोशी: लेखन के क्षेत्र में सृजन सम्मान
हृदयेश जोशी: एनडीटीवी
अजय कुमार: न्यूज नेशन
डॉ. मीनाक्षी राणा: युवा लेखिका
देवेंद्र रावत: दैनिक जागरण
पूरण भिलंगवाल: हिंदुस्तान
सुरेंद्र रावत: समाचार प्लस
मोहित डिमरी: राष्ट्रीय सहारा
बद्री नौटियाल: हिन्दुस्तान
संतोष भट्ट: हिन्दुस्तान
शाल सिंह दत्ताल: पत्रकार धारचुला
कृष्णा गर्बियाल: पत्रकार पिथौरागढ
दिनेश मानसेरा: एनडीटीवी नैनीताल
सुशांत सिंह: सावधान इंडिया क्राइम शो के एंकर
अमिताभ श्रीवास्तव: वरिष्ठ पत्रकार
सुनील तिवारी: सर्वश्रेष्ठ नवोदित स्तंभकार
रिजुल अल्पना बख्शी: गायन
डॉ. स्वाती रॉय: चिकित्सक
डॉ. साक्षी नरूला: चिकित्सक
डॉ. प्रियंका सिंह: चिकित्सक
रविंद्र धनकड़: प्रकाशन जगत
लक्ष्मी: एसिड अटैक की पीड़ित
मोहिनी ध्यानी पटनी: क्षेत्रीय भाषा संरक्षण एवं संवर्धन
त्विसा संधू: अभिनय
अवनीश प्रेमी: सहारा समय
मुकेश राजपूत: सहारा समय
आई नेक्स्ट: समाचार पत्र
दिलीप बिष्ट: आई नेक्स्ट
मयंक राय: समाचार प्लस
नेटवर्क 10: न्यूज चैनल
संदीप गुंसाई: साधना न्यूज चैनल
पर्वत जन: पत्रिका
देहरादून टाइम्स: समाचार पत्र
सोनू सिंह: जी न्यूज
राहुल शेखावत: समाचार प्लस
डॉ. सुमिता प्रभाकर: चिकित्सा
प्रेम चंद्र सकलानी: साहित्यकार
आत्म प्रकाश डिमरी: राजकीय शिक्षक
दिनेश बड़थ्वाल: उप प्रधानाचार्य, दून इंटरनेशनल स्कूल
जय प्रकाश पंवार: रचनात्मक कार्य
डॉ. अजीत गैरोला: चिकित्सा
तुषार कुमार: समाज सेवा
सिनमिट कम्यूनिकेशन: सृजनात्मक कार्य
कैप्टन भूपेंद्र: अदम्य साहस
वृज मोहन सिंह बिष्ट: अदम्य साहस
योगेन्द्र राणा: अदम्य साहस
दिलीप जावलकर: उत्कृष्ट लोक सेवा
जीएस मर्तोलिया: उत्कृष्ठ लोक सेवा
वरिंदर जीत सिंह: उत्कृष्ठ लोक सेवा
चन्द्र शेखर मेहरवाल: सृजन सम्मान
हिमांशु चावला: विज्ञान अनुसंधान सम्मान
विजय सिंह: विज्ञान अनुसंधान सम्मान
अभिलाष सेमवाल: विज्ञान अनुसंधान सम्मान
अजय कुमार: समाज सेवा
नवज्योत कौर: न्यूज एंकर, आईबीएन 7
केदार दत्त: दैनिक जागरण
प्रशांत रॉय: ईटीवी
मास्टर पार्थ रतूड़ी: नृत्य
मनस्विनी पन्त: नृत्य

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पत्रकार और शिक्षक गोविंद सिंह ने एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि अपने गांव के छात्रों के नाम की

नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, हिंदुस्तान आदि में उच्च पदों पर गरिमामयी सेवाएं दे चुके और आजकल उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह ने पुरस्कार में मिली एक लाख की ईनामी राशि अपने गांव (सौगांव) पिथौरागढ़ के हाईस्कूल में छात्रवृत्ति के लिए दान की है. यह राशि उन्हें हाल में राष्ट्रपति के हाथों मिले गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार के तहत मिली थी. पुरस्कार राशि का इससे बेहतर सदुपयोग कुछ और नहीं हो सकता.

मैं ये सोच रहा हूँ कि यदि ऐसा और भी लोग करें तो कितना अच्छा लगेगा. हर स्कूल से कोई न कोई प्रतिभा तो निकलती ही है या हर आदमी का कहीं न कहीं तो गाँव होता ही है. स्कूलों को सरकार की सदबुद्धि का इंतजार तो है ही, समाज से भी सहयोग की जरूरत है… गोविंद सिंह जी न्यूज और आजतक जैसे चैनलों में काम कर चुके हैं और आजकल के कई नामचीन पत्रकारों के शिक्षक भी रह चुके हैं…

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिन्दी भाषा के प्रसार और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए पिछले दिनों पांच पत्रकारों और दो वैज्ञानिकों सहित 28 लोगों को ‘हिन्दी सेवा सम्मान’ से नवाज़ा… हिंदी पत्रकारिता और रचनात्मक साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए 2011 का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह और डॉ. शिवनारायण को दिया गया. वहीं 2010 का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार और दिलीप कुमार चौबे को दिया गया.  उसी समय प्रो.गोविंद सिंह ने कहा कि वे पुरस्कार में मिली धनराशि से अपने गांव के राजकीय हाई स्कूल सौगाँव, पिथोरागढ़ के गरीब व होनहार बच्चों को छात्रवृत्ति देंगे. उन्होंने यह छात्रवृत्ति अपनी मां के नाम पर शुरू की है. यह हर वर्ष दी जाएगी.

गोविंद सिंह का जन्म 28 जून, 1959 को हुआ. पत्रकारीय स्वतंत्र लेखन 1978 से शुरू किया. 1982 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप में प्रशिक्षार्थी पत्रकार के रूप में शुरुआत की. धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में प्रशिक्षण के बाद नवभारत टाइम्स, मुंबई में उप संपादक बने. 1990 से 1999 तक नवभारत टाइम्स दिल्ली में सहायक संपादक रहे.1999 से 2002 तक जी न्यूज और आजतक चैनलों में क्रमशः डिप्टी एडिटर और सीनियर प्रोड्यूसर रहे और उनके अनुसंधान विभागों के प्रभारी के तौर पर कार्य किया. 2002 में ‘आउटलुक’ साप्ताहिक शुरू होने पर वहां बतौर असोसिएट एडिटर जुड़े. 2003 में अमेरिकी दूतावास से प्रकाशित पत्रिका स्पैन के हिन्दी संस्करण के संपादक बने. 2005 से दैनिक अमर उजाला और बाद में हिन्दुस्तान और कादम्बिनी में कार्यकारी संपादक का दायित्व संभाला. दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैम्पस में पिछले 15 वर्षों से विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर पत्रकारिता अध्यापन का कार्य भी कर रहे हैं. अगस्त 2011 से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत हैं.

लेखक दिनेश मानसेरा एनडीटीवी से जुड़े हुए हैं.

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