जी न्यूज के सीईओ आशीष पंडित ने साल भर में ग्रुप को अलविदा कह दिया. वे सीईओ पद पर पिछले साल सितंबर महीने में जी न्यूज आए थे. वे समीर आहलुवालिया की जगह आए थे. आशीष पंडित टेलीकॉम बैकग्राउंड के शख्स हैं. मीडिया में पहली बार आए थे. उधर एक अन्य खबर बीबीसी से है. बीबीसी के डायरेक्टर (टेलिविजन) डैन कोहेन ने इस्तीफा दे दिया है.
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amit
October 14, 2015 at 4:38 am
आशीष पंडित पर एक बड़े घोटाले के आरोप है | इन्ही आशीष पंडित की शह पर ज़ी पंजाब हिमाचल हरियाणा के संपादक दिनेश शर्मा अपनी मनमानियां कर रहे थे | आशीष पंडित की शह पर ही दिनेश शर्मा हर किसी से गाली की भाषा में बात करता है ,हर किसी से गाली में बात करता है, जो स्टाफ का सदस्य उसके गैंग का नही है उसकी ख़ूब माँ बहन एक करता है , ताकि वो नौकरी छोड के चला जाए | पुराने लोगों से दिनेश शर्मा को डर है कि कही उसकी गतिविधिओं की खबर ऊपर के लोगों तक यां मालिकों तक ना पहुंचे | आने वाले कुछ समय में दिनेश शर्मा का खुद का चैनल हिमाचल में लांच हों रहा है , तब तक ज़ी पंजाब हिमाचल हरयाणा का भट्ठा दिनेश शर्मा बिठा रहा है ताकि इसके खुद के चैनल का मुकाबला करने वाला कोई चैनल ना रहे | कभी पंजाब में नंबर १ रहने वाला ज़ी पंजाब अब सब से पीछे है | पंजाबी के कारण ही ज़ी पंजाब की विदेशों में धूम थी , अब चैनल पंजाबी के स्थान पर हिंदी अधिक हों गया है इस कारण विदेशों में भी ज़ी ग्रुप की साख को धक्का लगा है | अब देखो सुभाष चंद्रा कब जागते है , आशीष पंडित को तो थप्पड़ मार कर निकाल दिया दिनेश की मनमानियां कब तक चलती है |
vinesh
October 16, 2015 at 3:46 am
ज़ी पंजाब हिमाचल हरियाणा को दिनेश शर्मा बर्वाद करने पे तुला है , दिनेश शर्मा ने सम्पादक के कुर्सी सम्भालते ही चैनल में पुराने काम करने वाले ( जो लोग पंद्रह साल से जब चैनल की शुरूआत हुई तब से थे ) सब लोगों को निकाल बाहर किया है , सुभाष चंद्रा और मैनेजमेंट को कुछ दिखाई नही दे रहा | अगर समय रहते सुभाष चंद्रा ना जागे तो दोनों का डूबना तय है | पंजाब की न्यूज़ ज़ी पंजाब से खत्म हों रही है , क्योंकि दिनेश को सिर्फ़ हिंदी आती है , दिनेश ने अपने चापलूस भर्ती कर लिए है और अब उसकी मंशा ज़ी पंजाब को खत्म कर सिर्फ़ हरियाणा हिमाचल बनाने की है , ज़ी पंजाब के कारण ज़ी ग्रुप की पहचान विदेशों में है वो भी खत्म हों जायगी , पता चला है के दिनेश ने पंद्रह करोड़ जुटा के मैनेजमेंट को देने है , इस कारण दिनेश ब्लैकमेलरों को भर्ती कर उन के द्वारा पैसे जुटाना चाहता है | लगता है जल्दी ही ज़ी ग्रुप को नवीन जिंदल जैसे एक और स्टिंग का सामना करना पडेगा | जा सुधीर चौधरी जैसा स्टिंग में फस सकता है तो दिनेश तो सुधीर के पांव की जूती जितना काबिल भी नही है
dost
October 25, 2015 at 7:26 am
ज़ी ग्रुप के प्रादेशिक चैनल बर्बादी की और जा रहे है , बर्बादी का कारण है पुराने लोगों को निकाल कर नए लोगों को भर्ती करना , नए लोग अनुभवहीन है , वो सुभाष चंद्रा को कुछ दिन में करोड़ों कमा कर देने का वादा कर के कुर्सिओं पर काविज हों गए है , जबकि वो कुछ भी नया करके दिखा नही पाए , हाँ यह जरूर किया है कि पुराने लोगों को निकाल नए लोग भर्ती कर लिए है जो कि ज़ी ग्रुप के काबिल नही है , जिस कारण अब अच्छी खबर प्रदेशिक चैनलों पर नही चलती , सब से बुरी हालत इस समय ज़ी पंजाब हरियाणा हिमाचल की है , रिपोर्टर से संपादक बने दिनेश शर्मा का ध्यान अब खबर की तरफ कम है , मालिक को पैसे कैसे अधिक से अधिक कमा कर दिए जाए इस तरफ अधिक है , क्या ज़ी ग्रुप में एक भी ऐसा जिम्मेवार नही रहा जो पिछले सालों में चल रही ख़बरों और अब गिरते स्तर की चल रही ख़बरों में कोई फर्क देख कर कोई कारवाई कर सके , क्या पैसे ही सब कुछ है , हिन्दोस्तान से ले कर विदेशों तक बनी इज्ज़त क्या सुभाष चंद्रा के लिए कोई मतलब नही रखती , क्या सुभाष चंद्रा को हों रही बर्बादी दिखाई नही दी रही , उन को पता क्यों नही चल रहा कि ज़ी पंजाब हिमाचल हरियाणा को दिनेश शर्मा बर्वाद करने पे तुला है , दिनेश शर्मा ने सम्पादक के कुर्सी सम्भालते ही चैनल में पुराने काम करने वाले ( जो लोग पंद्रह साल से जब चैनल की शुरूआत हुई तब से थे ) सब लोगों को निकाल बाहर किया है , सुभाष चंद्रा और मैनेजमेंट को कुछ क्यों नही दिखाई नही दे रहा | अगर समय रहते सुभाष चंद्रा ना जागे तो ज़ी पंजाब हरियाणा हिमाचल का डूबना तय है | पंजाब की न्यूज़ ज़ी पंजाब से खत्म हों रही है , क्योंकि दिनेश को सिर्फ़ हिंदी आती है , दिनेश ने अपने चापलूस भर्ती कर लिए है और अब उसकी मंशा ज़ी पंजाब को खत्म कर सिर्फ़ हरियाणा हिमाचल बनाने की है , ज़ी पंजाब के कारण ज़ी ग्रुप की पहचान विदेशों में है वो भी खत्म हों जायगी , पता चला है के दिनेश ने पंद्रह करोड़ जुटा के मैनेजमेंट को देने है , इस कारण दिनेश ब्लैकमेलरों को भर्ती कर उन के द्वारा पैसे जुटाना चाहता है | लगता है जल्दी ही ज़ी ग्रुप को नवीन जिंदल जैसे एक और स्टिंग का सामना करना पडेगा | जब सुधीर चौधरी जैसा स्टिंग में फस सकता है तो दिनेश तो सुधीर के पांव की जूती जितना काबिल भी नही है, सुभाष जी जागिए , पुराने लोगों के साथ एक मीटिंग करो आप को सब सच पता चल जायगे , दिनेश शर्मा ने ज़ी के सर पर अब तक कितने कम लिए इस बात की पड़ताल करने के लिए आप को हिमाचल में जाँच करवानी पडेगी , सब सच सामने आ जायगे | इज्ज़त को सब कुछ समझने वाला गोयनका परिवार जुलम होते हुए क्यों देख रहा है क्यों दिनेश शर्मा जैसे लोगों के कारण अपनी इज्ज़त नीलाम कर रहा है | पैसे तो पहले भी आ रहे थे बस फरक इतना है कि वो इज्ज़तदार टीम द्वारा इज्ज़त के साथ कमा कर दिए जा रहे थे | दिनेश शर्मा ने अधिकतर पुराने रिपोर्टर हटा दिए उनके स्थान पर नए अनुभवहीन जो कि ब्लैकमेलरों के रूप में जाने जाते है उनकी भर्ती शुरू कर दी है , जिस कारण जल्दी ज़ी ग्रुप पर कलंक का तिलक लगना तय है , सुभाष जी आप खुद नए लोगों की जांच करे , पुराने रिपोर्टर दस पन्द्रह साल से काम कर रहे है , उनको खबर के नब्ज का भी पता है और अब तक कभी कोई कलंक नही लगने दिया , फिर किस कारण वो लोग निकाले गए , मुझे तो नए स्थान पर नौकरी मिल गई है परन्तु मैंने अपनी जवानी आप के चैनल पे लगी दी , बदले में मुझे दिनेश ने निकाल कर आप के चैनेल के बर्वादी शुरू कि जो अब तक जारी है , मैंने वफादारी से काम किया सो अब बर्बादी देखते हुए मेरी आंखे भर आती है , आप जागो , नही तो एक दिन आप की आँखों में भी आंसू होंगे |
VISHAL
November 5, 2015 at 5:31 am
पहले तो मै उस ( उन ) लोगों को बधाई देना चाहता हूं जो दूसरों के नाम से इस साईट पर कमेंट लिख रहे हैं. …… उन चूतिये के पठठो को ये पता होना चाहिए कि चुतियापे की इस हुनर में हर आम और खास अपना हाथ आजमा सकता है …… रही बात जी पंजाब हरियाणा हिमाचल में 15 साल से काम कर रहे लोगों कि जिन्हे बाहर का रास्ता दिखाया गया तो उनके बारे में ये पता चला कि वो लोग 15 साल से चैनल नहीं अपनी अपनी दलाली चला रहे थे …. किसी ने अपने शहर में केबल का धंधा जमा लिया ,,और जी के नाम का इस्तेमाल करके अपने साले के नाम पर बसें निकाल ली …… किसी ने कंपनी की जानकारी के बाहर पता नहीं कितने स्क्रोल चला कर पैसे कमा लिए …… अब दलालों को 15 साल दलाली करने के बाद जब काम करने के लिए कहा जाने लगा तो तो उनकी मां बहन होने लगी ….. और पिछले पंद्रह साल से इन दलालों ने जान बूझ कर चैनल को गर्क में हाल रखा था ताकि ये अपनी दलाली चैनल पर चलाते रहें और किसी को पता भी ना चले …….. लेकिन दलालों की किस्मत एक दिन फूटी और दलालों के दलाली के सबूत बाहर आने लगें …… जिस रफतार से जी पंजाब हरियाणा हिमाचल में पिछले कई सालों से काम ( सिर्फ दलाली) करने वाले दलालों की दलाली के सबूत बाहल ाने लगे उसी रफतार से उन्हें कुत्तों की तरह चैनल से निकाल कर बाहर कर दिया गया ……. अब वो देश के अलग अलग ड.का टीवी, भोकाल न्यूज , डम डम डिगा डिगा टाईम्स सरीखे संस्थानों में काम कर रहे हैं और रात के सस्ती दारु पी कर अपनी फ्रसट्रेशन निकाल रहे हैं …….. नोट —– अप दलाल दो कौड़ी के संस्थान में काम कर रहे हैं लिहाजा कम तन्ख्वाह मिलने की वजह से सस्ती शराब पी रहे हैं …… मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं ………..
naval
November 5, 2015 at 5:36 am
आप 15 साल पुराने चैनल के दलालों ने क्या गंद मचा रखी थी ये किसी से छुपा थोड़े ना है ……… बाकी ्पनी अपनी प्रॉप्रटी का आप 15 साल पुराने दलाल खुद ही आंकलन लगा लें ………
sanjeev
November 5, 2015 at 8:38 am
जी पंजाब हरियाणा हिमाचल के बारे में उटपटांग लिख रहे दलालों की जानकारी के लि —— 15 साल से जिस चैनल से सैलेरी लेकर यहां काम करने वाले कुछ दलालों ने चैनल को जिस गर्क में धकेला हुआ था वो चैनल को पिछले एक साल के अंदर पूरे पंजाब हरियाणा हिमाचल में नंबर 1 हो गया है ……. रेहड़ी पटरी की स्टोरी चला कर दलाली से पैसे कमाने वाले कुछ दलाल ये भी देखें कि अब चैनल का कंटेंट कितना सुधर गया है ….. पूरे रीजन में अब लोग इसी चैनल को देखते है …… यही नहीं विदेशों में भी जिन लोगों ने गुरबाणी की वजह से पीटीसी सब्सक्राईब किया हुआ था वो दर्शक भी अब कंटेंट की वजह से जी पंजाब हरियाणा हिमाचल को देखना ही पसंद कर रहे हैं …… हो भी क्यों ना अब दलाल इस चैनल में रहे नहीं तो कंटेंट को अच्छा होना ही था …….
ashok
November 5, 2015 at 8:41 am
मैने तो ये भी सुना है कि स्ट्रींगर के तौर पर इस चैनल में आए एक दलाल ने कुछ ही सालों में करोड़ों की संपत्ती बना ली …… और कुछ दूसरे स्ट्रिंगर के साथ मिल कर एड एजेंसी खोली और जी पंजाब हरियाणा हिमाचल के नाम पर करोड़ों की एड के रकम अपनी जेबों में डाल ली ……..