अटलजी को मरा सुनने के लिए सोशल मीडिया और न्यूज चैनल वाले बेचैन…

कुछ लोग अटलजी के जल्दी न मरने को लेकर मोदी सरकार को कोसने-घेरने में लगे हैं. अरे भाई, बिना ब्रेन डेड हुए अटल जी को मरा नहीं घोषित कर सकती मेडिकल टीम. बिना मेडिकल टीम के एनाउंस किए, सरकार अपनी तरफ से मृत्यु की घोषणा नहीं कर सकती. इच्छा मृत्यु न अटलजी ने मांगी और न उनके परिजनों ने. वैसे भी भारत में इच्छा मृत्यु का कोई कानून नहीं है. इसलिए धैर्य रखिए.

लॉ एंड आर्डर एवं कई अन्य चीजों / तैयारियों को लेकर सरकार को सोचना विचारना पड़ता है. सो, कई दफे मृत्यु के बाद भी कुछ घंटे सरकार इसके पब्लिक एनाउंसमेंट को रोके रखती है.

पर ये सच जानिए, चाहें जितना कीर्तन कर-करा लें.. अटल जी की मौत देर तक रोके रखने से मोदी जी या भाजपा जी को किसी किस्म का फायदा नहीं होने वाला है… अटल एक अलहदा शख्स थे जिसका चवन्नी बराबर अंश भी किसी भजप्पआई में नहीं…

ये राजनीति का बेहद क्रूर काल है इसलिए इसके अगुवा भी हत्यारे हैं, बिना मुखौटा लगाए… अटलजी का दौर मुखौटों वाला था…

वैसे, मोदी के राष्ट्रीय चैनल डीडी न्यूज ने अटल जी को मरा घोषित किया तो इंडिया टीवी वाले भी चलाने लगे कि अटल जी मर गए… बाद में दोनों ने यू टर्न ले लिया… ये क्या करवा कर मानेंगे मोदी जी… मरते हुए आदमी पर भी खेल रहे हैं क्या… पर इन इंडिया टीवी वालों का क्या किया जाए जो नकल भी अकल से नहीं करते…

कुल मिला कर ज्यादा हाय हाय करने की जरूरत नहीं है. जो आया है वो जाएगा. सोचने की जरूरत ये है कि गरीब फट्ट से मर लेता है, निकल लेता है लेकिन बड्डे बड्डे लोगों की मौत मेडिकल साइंस के पैरामीटर्स में फंस कर देर तक फड़फड़ाती भड़भड़ाती रहती है. इसलिए, ज्यादा गरीब मत रहिए.. ज्यादा अमीर मत होइए.. दोनों होना खतरनाक होता है.. सो, मेरे साथ आइए.. और, भड़ास मार्ग पर चलते हुए मुक्ति पाइए. 🙂

जैजै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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