अवैध कब्ज़ा मामले में लोकसभा टीवी एंकर अनुराग दीक्षित और उनके परिजनों की हुई हार

बुलंदशहर के जहांगीराबाद में नगर पालिका ने विवेकानंद स्थल से कब्जा हटाया

बुलंदशहर : जहांगीराबाद के विवेकानंद प्रतिमा स्थल पर मालिकाना हक को लेकर नगर पालिका परिषद और मानव कल्याण समिति के बीच चल रही लड़ाई में नगर पालिका ने विजय हासिल की। लोकसभा चैनल में एंकर अनुराग दीक्षित, इनके पिता सुरेन्द्र दीक्षित व बड़े भाई सुनील दीक्षित नगर पालिका से इस लड़ाई को लड़ रहे थे। मण्डलायुक्त मेरठ व उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देश पर अनूपशहर एसडीएम अरुण कुमार द्वारा गठित कमेटी के सदस्यों नायाब तहसीलदार नरेंद्र सिंह, कोतवाली प्रभारी प्रभात वर्मा, अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण, सभासद विनय अग्रवाल व प्रवीन शिशौदिया ने पुलिस बल व पालिका कर्मियों के साथ विवेकानन्द प्रतिमा स्थल पर पहुँच कर नगर पालिका की लाखों की भूमि से मानव कल्याण समिति द्वारा किये गए अवैध कब्ज़े को हटवाया।

कार्यवाही के दौरान गेट पर लगे ताले को गैस कटर से कटवाया गया, प्रतिमा स्थल पर लगे समिति के शिलापट को कर्मचारियों ने ध्वस्त कर दिया व पालिका कर्मियों ने प्रतिमा स्थल पर रखे सामान को ज़ब्त कर लिया। नगरवासियों ने ख़ुशी का इज़हार करते हुए ढोल बजवा कर मिठाई बांट कर आतिशबाज़ी छोड़ी और स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराया। पालिका के ईओ, सभासदों व स्थानीय निवासियों ने फूलमाला पहन कर स्वामी जी के जयकारे लगाये।

बताते चलें कि 30 मार्च 2015 को मोहल्ला रोगनग्रान के निवासियों की शिकायत पर सभासद विनय अग्रवाल ने मानव कल्याण समिति द्वारा स्वामी विवेकानन्द प्रतिमा स्थल पर साहित्य केंद्र की आड़ में किये गए अवैध कब्ज़े को हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कराया था। लोकसभा चैनल में एंकर अनुराग दीक्षित के पिता व समिति के संरक्षक ने जिला प्रशासन से अपने पक्ष में रिपोर्ट लगवाकर मण्डलायुक्त मेरठ से उक्त प्रस्ताव को ख़ारिज करवा दिया था। 28 दिसंबर 2015 को पुनः नगर पालिका की बोर्ड की मीटिंग में उपस्थित सभी सभसदों ने मानव कल्याण समिति की अवैध कब्ज़े को हटाकर वहां पुस्तकालय का संचालन नगर पालिका से कराने का प्रस्ताव पुनः सर्वसम्मति से पास करवाया था।

लोकसभा टीवी चैनल के एंकर अनुराग दीक्षित के बड़े भाई सुनील दीक्षित पुत्र सुरेन्द्र दीक्षित ने नगर पालिका के इस प्रस्ताव के विरुद्ध स्थगन आदेश लेने के लिए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दायर की थी। उच्च न्ययालय ने इस मामले की जाँच के आदेश मण्डलायुक्त मेरठ को दिए थे। मण्डलायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी बुलन्दशहर ने उक्त मामले की जाँच की। जाँच के दौरान ही कुछ लोगों ने समिति के पदाधिकारियों द्वारा पूर्व की जाँच में उनके नाम से लगाये गए दस्तावेजों को फ़र्ज़ी बताते हुए अपने शपथ पत्र जिलाधिकारी को दिए थे। जिसके बाद यह पाया गया कि इस मामले में समिति के पदाधिकारियों ने जाँच को प्रभावित करने का प्रयास किया था।

इसके बाद जिलाधिकारी ने मानव कल्याण समिति द्वारा साहित्य केंद्र की आड़ में विवेकानन्द स्थल पर अवैध कब्ज़ा होने की रिपोर्ट मण्डलायुक्त को सौंपी थी। मण्डलायुक्त मेरठ ने जिला प्रशासन की जाँच के बाद 28 दिसंबर 2015 के प्रस्ताव को जनहित में मानते हुये कार्यवाही करने के निर्देश जिलाधिकारी बुलंदशहर को दिए थे। असलियत सामने आने पर कार्यवाही होता देख लोकसभा टीवी एंकर अनुराग दीक्षित के पिता सुरेन्द्र दीक्षित व एक अन्य पदाधिकारी ने एडीएम बुलंदशहर को एक शपथपत्र देकर किसी व्यक्ति द्वारा मंडलायुक्त के निर्णय के खिलाफ पुनः उच्च न्यायालय में रिट दाखिल करने की जानकारी देते हुए सुनवाई होने तक कार्यवाही स्थगित करने का निवेदन किया था।

2 मई 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट दाखिल करने वाले व्यक्ति ने हलफनामा देकर चीफ जस्टिस के सामने बताया कि सुनील कुमार दीक्षित ने उसे गुमराह कर धोखे से मानव कल्याण समिति के पक्ष में रिट दाखिल करा दी है। मामले की गंभीरता को समझते हुए चीफ जस्टिस ने मानव कल्याण समिति को फ्रॉड बताते हुए समिति पर 25000 रुपए का जुर्माना लगाते् हुए उच्च न्यायालय में जमा कराने का सख्त निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय के इस निर्देश के बावज़ूद भी मानव कल्याण समिति के पदाधिकारी सुरेन्द्र दीक्षित व अन्य पदाधिकारियों ने पुनः एडीएम बुलन्दशहर के पास जाकर कुछ दिन का समय और माँगा। लेकिन अधिशासी अधिकारी द्वारा उच्च न्यायालय का आदेश दिखाने पर एडीएम ने मामले की गंभीरता को देख तत्काल मानव कल्याण समिति के अवैध कब्ज़े को हटाने के निर्देश दिए।

पूर्व में मानव कल्याण समिति के पदाधिकारियों द्वारा फ़र्ज़ी साक्ष्य और अपने रसूख का दुरूपयोग कर मण्डलायुक्त द्वारा नगर पालिका का प्रस्ताव निरस्त करा लेने के बाद अपने द्वारा पोषित समाचार पत्र चरित्र दर्पण में प्रमुखता से अपने पक्ष में समाचार प्रकाशित कर अपनी जीत का भरपूर गुणगान किया था और समस्त नगर पालिका को भ्रष्ट बताते हुए नगर पालिका के उस प्रस्ताव को तालिबानी प्रस्ताव की संज्ञा दी थी और अपने फर्ज़ीवाड़े को सत्यमेव जयते का चोला ओढ़ाने का कुसंगित प्रयास किया था। नगर के कुछ भोले भाले लोगों के कन्धे पर कमान रख कर कंटीले तीर नगर पालिका पर चलाये थे तथा समिति के कार्यों को जनहित में बताते हुए जुलुस निकालकर स्वामी विवेकानन्द से जुड़े साहित्य को नगर की जनता में वितरित कर अपनी झूठ की बुनियाद पर टिकी जीत का एहसास कराया था जिसमें लोकसभा टीवी के एंकर अनुराग दीक्षित भी प्रमुखता से समिति के संरक्षक अपने पिता व भाई के कन्धे से कन्धा मिला कर चल रहे थे।

जहांगीराबाद मण्डी समिति में लोकसभा टीवी चैनल के एंकर अनुराग दीक्षित के बड़े भाई सुनील दीक्षित ने पत्रकारिता का दुरूपयोग करते हुए नियम विरुद्ध एक दुकान का आवंटन मण्डी समिति के द्वारा करा कर लाखों रुपए में बेचने का प्रयास किया था। सभासद विनय अग्रवाल की शिकायत पर मण्डी परिषद के अपर निदेशक लखनऊ ने डीडीए मेरठ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी से दुकान आवंटन प्रकरण की जांच करायी। कमेटी द्वारा प्रेषित जाँच रिपोर्ट में नियम विरुद्ध आवंटन पाये जाने की पुष्टि होने के बाद मण्डी सचिव अरूण कुमार जहाँगीराबाद ने अवैध दुकान को ध्वस्त करने के दो नोटिस सुनील दीक्षित के नाम जारी कर दिए हैं। लेकिन प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपर निदेशक से पुनः जाँच कराने के निर्देश करा लिए हैं।

जहांगीराबाद नगरपालिका के विरुद्ध चरित्र दर्पण अख़बार के सम्पादक एस के दीक्षित द्वारा शासन में लगातार की जा रही शिकायतों की जांच के दौरान बुलंदशहर की डीएम रही बी चन्द्रकला ने अखबार और उसके सम्पादक के विरुद्ध शासन को रिपोर्ट भेजी थी। मानव कल्याण समिति के संरक्षक द्वारा चरित्र दर्पण अख़बार के 22 साल पूरे होने पर आयोजित सम्वाद में बतौर मुख्य अथिति डीएम बुलंदशहर बी चन्द्रकला को बुलाया था। लोकसभा टीवी के एंकर अनुराग दीक्षित ने समिति के संवाद कार्यक्रम में मुख्य अथिति बी चन्द्रकला की शान में कसीदे पढ़े थे। इन्हीं डीएम बी चन्द्रकला ने चरित्र दर्पण के सम्पादक एस के दीक्षित की शिकायत के जवाब में शासन को लिखा है कि शिकायतकर्ता का समाचार पत्र चरित्र दर्पण शासन से सरकारी विज्ञापन हेतु मान्यता प्राप्त ना होने के बाद भी विज्ञापन देने का दबाव बनाने व शिकायत कर्ता के विरुद्ध नगर पालिका द्वारा प्रस्ताव होने से क्षुब्ध होकर शिकायत की गयी है। अंत में शिकायत को द्वेष भावना व निजी स्वार्थ से प्रेरित होने व निराधार होना अंकित किया गया है।

थाना खानपुर के गांव लड़ाना के एक इंटर कॉलेज में लोकसभा टीवी चैनल के एंकर अनुराग दीक्षित के बड़े भाई सुनील दीक्षित के शिक्षक के पद पर नियुक्ति होने पर बवाल मचा हुआ है। लड़ाना के ग्रामीण इस नियुक्ति को अवैध बताते हुए एक माह से भी ज्यादा समय से जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठे हैं। जिलाधिकारी द्वारा इस मामले की करायी गयी जाँच में तत्कालीन स्याना एसडीएम ने नियुक्ति में अनियमितता बरते जाने की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। फ़िलहाल मामले की जाँच अपर निदेशक बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही है। किन्तु ग्रामीण अब भी इस नियुक्ति को अवैध बताते हुए जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठे हुए हैं। सभी ग्रामीणों को अभी अपर निदेशक बेसिक शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतज़ार है।

उधर, लोकसभा टीवी एंकर अनुराग दीक्षित के करीबी लोगों का कहना है कि बुलंदशहर जिले की भ्रष्ट व्यवस्था के नेक्सस का एक और आतंक आज भी महसूस किया गया। आज से करीब 25 साल पहले अनुराग के पिता और शहर के कुछ सम्भान्त लोगों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा की स्थापना करवाई थी। वहीँ निशुल्क लाइब्रेरी थी। कुछ साल पहले अनुराग के बड़े भाी ने अपने अख़बार में पालिका के भ्रष्टाचार की पोल खोलनी शुरू की तो पालिका के चंद भ्रष्ट लोगों द्वारा मानसिक शोषण शुरू हो गया। पालिका ने प्रस्ताव पारित कर प्रतिमा के संचालन को समिति से छीनने का प्रयास किया।

एक बार मंडल आयुक्त ने पालिका के प्रस्ताव को विद्वेषपूर्ण बताकर ख़ारिज कर दिया लेकिन पालिका नहीं मानी। कुछ समय बाद दुबारा वही प्रस्ताव पारित किया और प्रशासन को अपने ‘पक्ष’ में कर स्वीकृति भी दिला दी! उन्ही आयुक्त ने पूर्व में स्वयं द्वारा खारिज प्रस्ताव को दोबारा में स्वीकृत कर दिया! समिति के अध्यक्ष रामा शंकर शर्मा (80 वर्ष) हाइकोर्ट गए तो वहां तारीख से ठीक एक दिन पहले समिति के पैरोकार को ना जाने क्या करके समिति के खिलाफ ही खड़ाकर समिति की याचिका को खारिज करवा दिया। जो पैरोकार स्वयं ट्रेन से इलाहाबाद जाकर अपने फ़ोटो खिंचवाकर अपने फिंगर प्रिंट देकर पैरोकार बना था वो अचानक मामले से पीछे हट गया। सब कुछ फ़िल्मी टाइप! जिस प्रतिमा का संचालन समिति पिछले 25 वर्षों से करती आ रही थी वो अब अचानक से अवैध हो गयी। सिर्फ इसलिए क्योंकि अख़बार में पालिका का झूठ उजागर किया गया! परिवार और समिति के बाकी बुजुर्ग सदस्यों के लिए मानसिक प्रताड़ना का आज एक और यादगार दिन रहा.

ध्वस्तीकरण से संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें…

https://www.youtube.com/watch?v=e2_8XqZfDAc



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