B2B, B2C, D2C क्या होता है?

वैभव अग्रवाल-

कल अलग अलग तरह के मार्केटिंग मॉडल के बारे में कुछ मित्र कंफ्यूज थे, उनकी जानकारी के लिये … B2B, B2C यह दोनो भारत मे सबसे मुख्य मॉडल थे, पर अब इनमें एक मॉडल और जुड़ गया है , जो कि है D2C.

इनके अलावा और भी मॉडल है जैसे C2C, C2A, पर वो मुख्यत: e-कॉमर्स में यूज़ होते है। अधिक कॉम्प्लिकेटेड न करते हुए हम इसकी चर्चा नही करेंगे।

इन मॉडल को समझने के लिये हम एक कॉमन example लेते है, जैसे मान लीजिए आपके मोबाइल में लगी आने वाले बैटरी..

अगर हम किसी मोबाइल बनाने वाली कंपनी (जैसे Samsung, Vivo आदि) से एक मोबाइल खरीदते है, तो साथ मे एक बैटरी फिट आती है। … जरुरी नही, मोबाइल कंपनी खुद उसे बनाये, सम्भव है वो किसी दूसरी कंपनी से बैटरी बनबा कर ले। … इस प्रकार से एक बिज़नेस द्वारा जो मैटेरियल दूसरे बिज़नेस को बेचा जाता है, वो B2B कहलाता है। … नोरेक्स का बिज़नेस डोमेन अधिकतम B2B है। जैसे हम अपने प्रोडक्ट, टूथपेस्ट, दवाई, फ़ूड, biscuit, केक बनाने वाली कंपनियों को बेचते है।

क़ई बार ऐसा होता है वह बैटरी खराब होने पर आप बाजार में मोबाइल कंपनी के डीलर या फोन शॉप से बैटरी खरीद कर लाते है। … ऐसे में आप consumer हुए और मोबाइल कंपनी एक बिज़नेस, यह ट्रांसक्शन B2C कहलाती है। .. इसमे मोबाइल कंपनी, पहले बैटरी अपने स्टॉकिस्ट को देती है, स्टॉकिस्ट आपके शहर के रिटेलर को, और उस रिटेलर से आप खरीद कर लाते है।

आजकल सबसे ज्यादा पॉपुलर है D2C मॉडल, यह वैसे B2C का ही एक मोडिफाइड पार्ट है। … जिसमे डायरेक्ट 2 consumer बिज़नेस होता है। … अगर आप मोबाइल कंपनी की वेबसाइट से, या उसके ऐमज़ॉन , फ्लिपकार्ट स्टोर से सीधे ऑनलाइन बैटरी खरीद लेते है तो इसमे बीच में स्टॉकिस्ट, रिटेलर सबका मार्जिन, हैंडलिंग बच जाती है, यह सीधे Direct to consumer sale कहलाती है। … इसमे कस्टमर को फास्टर सर्विस मिलती है, और स्टॉकिस्ट और रिटेलर का मार्जिन कम होने से, बिज़नेस को प्रॉफिट अधिक मिलता है। ..पर उसे सीधे consumer को आकर्षित करने के लिये मार्केटिंग पर खर्च भी अधिक करना पड़ता है।

उम्मीद है मैं आपको B2B, B2C, D2C सही से समझा पाया हूँ।



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