Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

इंटरव्यू

PCI Election : बादशाह सेन और शाहिद फरीदी का इंटरव्यू देखें

प्रेस क्लब आफ इंडिया का सालाना चुनाव पच्चीस नवंबर को होना है. इस बार खास ये है कि जो गुट लगातार सात साल से येन केन प्रकारेण प्रेस क्लब पर काबिज है, उसे हटाने के वास्ते मुकाबले को  केवल एक ही पैनल चुनाव मैदान में है. आम पत्रकारों के प्रतीक इस पैनल में प्रेसीडेंट पद के लिए वरिष्ठ पत्रकार बादशाह सेन लड़ रहे हैं. सेक्रेट्री जनरल पद के लिए जाने-माने पत्रकार शाहिद फरीदी मैदान में हैं. इन दोनों का वीडियो इंटरव्यू इत्मीनान से देखें और वोट देने के पहले अच्छे से तय करें कि क्या आंखों पर पट्टी बांधकर वोट देना है या लोकतंत्र में जिंदा रहने वाले किसी आजाद शख्स की तरह मत का प्रयोग बेहतरी, सरोकार और बदलाव के लिए करना है…

प्रेस क्लब आफ इंडिया का सालाना चुनाव पच्चीस नवंबर को होना है. इस बार खास ये है कि जो गुट लगातार सात साल से येन केन प्रकारेण प्रेस क्लब पर काबिज है, उसे हटाने के वास्ते मुकाबले को  केवल एक ही पैनल चुनाव मैदान में है. आम पत्रकारों के प्रतीक इस पैनल में प्रेसीडेंट पद के लिए वरिष्ठ पत्रकार बादशाह सेन लड़ रहे हैं. सेक्रेट्री जनरल पद के लिए जाने-माने पत्रकार शाहिद फरीदी मैदान में हैं. इन दोनों का वीडियो इंटरव्यू इत्मीनान से देखें और वोट देने के पहले अच्छे से तय करें कि क्या आंखों पर पट्टी बांधकर वोट देना है या लोकतंत्र में जिंदा रहने वाले किसी आजाद शख्स की तरह मत का प्रयोग बेहतरी, सरोकार और बदलाव के लिए करना है…

उल्लेखनीय है कि इसी पैनल से भड़ास के संपादक यशवंत सिंह भी मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए चुनाव मैदान में हैं. पैनल में कौन-कौन किस पद पर लड़ रहा है, उसकी पूरी लिस्ट उपर है. नीचे बादशाह सेन और शाहिद फरीदी के इंटरव्यू के वीडियो हैं… एक-एक कर क्लिक करें :

इसे भी पढ़ें :

Local News Community
1 Comment

1 Comment

  1. sandip thakur

    November 20, 2017 at 3:03 pm

    प्रेस क्लब के चुनाव काे पब्लिक करने के लिए भड़ास का यह प्रयास सराहनीय है। पब्लिक मतलब…भड़ास द्वारा लिए गए इस इंटरव्यू काे काेई भी देख सकता है। प्रमुख पद के दाेनाें उम्मीदवाराें ने अपनी अपनी बात रखी लेकिन खुद काे बचाते हुए। सही भी है..हार जीत एक चीज है …लेकिन आपस में एक दूसरे की छीछालेदर करना पत्रकाराें काे शाेभा नहीं देता। फिर पत्रकार आैर नेता में क्या अंतर रह जाएगा। इस अंतर काे बरकरार रखते हुए प्रत्याशियाें द्वारा अपनी बात रखना स्वागत याेग्य है। दरअसल क्लब से मैं विगत 25 सालाें से भी अधिक समय से जुड़ा हुआ हूं। क्लब के नेचर से वाकिफ हूं..इतना दावा ताे कर ही सकता हूं। जहां तक क्लब में सुधार करने की बात है ताे यह दावा ठीक उसी तरह का है जैसे काेई सिस्टम से भष्टाचार दूर करने का दावा करे। क्लब काे चेहरा ताे चमका दिया गया है लेकिन खाने के आइटम,टेस्ट आैर प्राइस काे झेलना मेंम्बरस् की मजबूरी है। कई एेसे आइटम इंट्राेड्यूस किए जा सकते हैं जाे पॉकेट फ्रेंडली हाेने के साथ साथ लजीज भी हाेंगे। लेकिन चुनाव जीतने के बाद इस तरफ साेचने का वक्त शायद पदाधिकारियाें काे नहीं मिलता हाेगा। चुनाव के दाैरान कई एेसे चेहरे क्लब में दिखते हैं जाे चुनाव के बाद कभी नहीं दिखते। एेसे लाेगाें काे जीताने से बचना चाहिए। जाे क्लब में दिखे,उसे प्यार करे आैर प्रर्याप्त समय दे पाए..एेसे ही लाेगाें काे जीताया जाए ताे अच्छा हाेगा। मीडिया से जुड़े हर व्यक्ति काे क्लब में आने की इजाजत देना तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता। चेक एंड बैलेंस ताे हाेना ही चाहुिए। आज इतना ही। आगली किस्त कुछ दिनाें बाद….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन