जिसने भड़ास पढ़ने के कारण पत्रकार को नौकरी नहीं दी वह खुद ही छिप-छिप कर भड़ास पढ़ता है!

यशवंत भाई

सादर प्रणाम,

एक खबर bhadas4media.com पर पढ़ने को मिला कि एक पत्रकार साथी को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह भड़ास का रीडर है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह जिसने पत्रकार साथी को नौकरी नहीं दी, वह अभी तक अपने पद पर कैसे बना है? उसे भी तो संस्थान को निकाल देना चाहिए था. क्योंकि हकीकत तो यह है वह भी भड़ास पढ़ता है, भले ही छुप छुप कर पढ़ता हो. यह सच्चाई है कि मीडिया से जुड़ा हर आदमी.. चाहे कैमरामैन हो, पत्रकार हो यहां तक सफाई कर्मचारी भी भड़ास के रीडर हैं.

अरे भाई वही हाल है जैसे ‘द डर्टी पिक्चर में’ फिल्म में विद्या बालन जी कहती हैं कि वैसी फिल्म (ब्लैक मूवी) सब देखते हैं. बूढ़े, जवान सभी लेकिन सब छिप-छिप कर अवार्ड भी दिया जाता है लेकिन कोई खुलकर यह नहीं बोलता कि मैं ऐसी फिल्में खुलेआम देखता हूं. अरे भाई यदि वह बोलेगा तो लोग उसे गलत नजर से देखेंगे… पता नहीं क्या-क्या कहेंगे… वही हाल यहां पर है. bhadas4media को सभी चैनलो के संपादक भी पढ़ते हैं. आदरणीय एसएन विनोद (जिया न्यूज के पूर्व चैनल हेड) खुद भड़ास पर खबर चलने पर सफाई देते हैं.. लेकिन जब कोई पत्रकार भड़ास को पढ़ता है तो उसे नौकरी से ही निकाल दिया जाता है. किसी का नाम भड़ास पर जाता है तो भी उसे नौकरी नहीं मिलती… लेकिन जब संस्थान पत्रकारों की सैलरी रोकता है तो उन्हें भड़ास याद आता है.

भड़ास… मतलब दुख में ही भड़ास का सुमिरन लोग करते हैं. बाकी यशवंत भइया, भड़ास को सफाई कर्मतारी से लेकर एडिटर इन चीफ तक पढ़ता है. अब सबको नौकरी से निकाल दो… भड़ास को सभी संस्थानों में ब्लाक करके रखा जाता है. स्पेशल आईटी डिपार्टमेंट में सीधा आर्डर रहता है कि www.bhadas4media.com को ब्लॉक कर दो ताकि कोई भड़ास को पढ़ न सके लेकिन शायद संस्थान भूल जाता है कि हमारे पास टेबलेट और दूसरे आधुनिक यंत्र हैं जो भड़ास से हमें जोड़कर रखते हैं….. अब एयरटेल की सर्विस न लें क्योंकि जो एयरटेल, वोडाफोन और दूसरी सर्विस लेता है उसपर भड़ास खुलता है… सालों सुधर जाओ.. जिसने उस पत्रकार को नौकरी नहीं दी वह खुद ही भड़ास छिप-छिपकर पढ़ता है… उसका मालिक भी पढ़ता है लेकिन छिप-छिपकर….  

भड़ास के बिना पत्रकार अधूरा है.. अब आपके पास दो रास्ते हैं… या तो पत्रकार रखना बंद कर दो.. या फिर यह बर्दाश्त करो कि पत्रकार चाहे छोटा हो या बड़ा…. बिना भड़ास के नहीं रह सकता… अपना सुख दूख भड़ास से ही कहता है… संस्थान को सैलरी भी नहीं देते टाइम पर…. तो भड़ास से पत्रकार हैं…. पत्रकार से भड़ास नहीं….

शैलेंद्र कुमार

shailendra1990shukla@gmail.com


मूल खबर पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें>

भड़ास का रीडर होने के कारण राजस्थान पत्रिका ने नौकरी देने से मना कर दिया!



भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *