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भारत का मीडिया TRP के लिए दंगा, फसाद, हत्या, बलात्कार, धरना-प्रदर्शन, आगजनी और लूट के कार्यक्रम प्रायोजित करेगा!

Ajit Singh : पकिस्तान जब भारत से हारा तो पाकिस्तानियों ने अपने TV फोड़ दिए। ऐसा हमको मीडिया ने बताया। हम लोगों ने भी खूब चटखारे लिए। पाकिस्तानियों को इसी बहाने certified चूतिया घोषित कर दिया। बड़ा मज़ा आया। अब मीडिया ने दिखाया कि हिन्दुस्तान में भी लोगों ने TV फोड़ दिए। मैंने इस खबर को बड़े गौर से देखा। मीडिया ने ये भी बताया कि लोग आंसू बहा रहे हैं। उनके आंसू भी देखे । लोग tv सड़कों पे पटक रहे हैं। प्रश्न ये है कि लोग news channel के कैमरा को दिखाने के लिए टीवी फोड़ रहे हैं क्या ? लोगों ने tv खुद फोड़े या मीडिया ने स्टोरी बनाने के लिए फुड़वाये? पुराने टंडीरा TV हैं। साफ़ दिखाई दे रहा है। क्या ये नहीं खोजा जाना चाहिए कि ये नाटक किसने कराया? क्यों कराया? टीवी फोड़ने की घटना किसने शूट की? टीवी कहाँ से आये? कौन लोग थे जिनने अपना TV फोड़ा। जिन लोगों ने TV फोड़ा उन ने अपने घर से कभी संडास का mug भी फेंका है? रोने वालों में कुछ लोग तो स्टेडियम में बैठे हैं। बाकी जो बाहरी लोग दिल्ली मुम्बई में दिखाए जा रहे है वो बहुत घटिया acting कर रहे हैं। मीडिया वाले अपनी दुकानदारी चमकाने के चक्कर में सारी दुनिया को ये बताना चाहते है की सिर्फ पाकिस्तानी ही नहीं हम हिन्दुस्तानी भी certified चूतिया हैं ……ISO मार्का ….. हम भी किरकिट जैसे फर्जीवाड़े पे अपना TV फोड़ सकते हैं।

<p><img class=" size-full wp-image-16630" src="http://www.bhadas4media.com/wp-content/uploads/2015/03/images_abc_news2_00000000ajitsinghgzp.jpg" alt="" width="829" height="303" /></p> <p>Ajit Singh : पकिस्तान जब भारत से हारा तो पाकिस्तानियों ने अपने TV फोड़ दिए। ऐसा हमको मीडिया ने बताया। हम लोगों ने भी खूब चटखारे लिए। पाकिस्तानियों को इसी बहाने certified चूतिया घोषित कर दिया। बड़ा मज़ा आया। अब मीडिया ने दिखाया कि हिन्दुस्तान में भी लोगों ने TV फोड़ दिए। मैंने इस खबर को बड़े गौर से देखा। मीडिया ने ये भी बताया कि लोग आंसू बहा रहे हैं। उनके आंसू भी देखे । लोग tv सड़कों पे पटक रहे हैं। प्रश्न ये है कि लोग news channel के कैमरा को दिखाने के लिए टीवी फोड़ रहे हैं क्या ? लोगों ने tv खुद फोड़े या मीडिया ने स्टोरी बनाने के लिए फुड़वाये? पुराने टंडीरा TV हैं। साफ़ दिखाई दे रहा है। क्या ये नहीं खोजा जाना चाहिए कि ये नाटक किसने कराया? क्यों कराया? टीवी फोड़ने की घटना किसने शूट की? टीवी कहाँ से आये? कौन लोग थे जिनने अपना TV फोड़ा। जिन लोगों ने TV फोड़ा उन ने अपने घर से कभी संडास का mug भी फेंका है? रोने वालों में कुछ लोग तो स्टेडियम में बैठे हैं। बाकी जो बाहरी लोग दिल्ली मुम्बई में दिखाए जा रहे है वो बहुत घटिया acting कर रहे हैं। मीडिया वाले अपनी दुकानदारी चमकाने के चक्कर में सारी दुनिया को ये बताना चाहते है की सिर्फ पाकिस्तानी ही नहीं हम हिन्दुस्तानी भी certified चूतिया हैं ......ISO मार्का ..... हम भी किरकिट जैसे फर्जीवाड़े पे अपना TV फोड़ सकते हैं।</p>

Ajit Singh : पकिस्तान जब भारत से हारा तो पाकिस्तानियों ने अपने TV फोड़ दिए। ऐसा हमको मीडिया ने बताया। हम लोगों ने भी खूब चटखारे लिए। पाकिस्तानियों को इसी बहाने certified चूतिया घोषित कर दिया। बड़ा मज़ा आया। अब मीडिया ने दिखाया कि हिन्दुस्तान में भी लोगों ने TV फोड़ दिए। मैंने इस खबर को बड़े गौर से देखा। मीडिया ने ये भी बताया कि लोग आंसू बहा रहे हैं। उनके आंसू भी देखे । लोग tv सड़कों पे पटक रहे हैं। प्रश्न ये है कि लोग news channel के कैमरा को दिखाने के लिए टीवी फोड़ रहे हैं क्या ? लोगों ने tv खुद फोड़े या मीडिया ने स्टोरी बनाने के लिए फुड़वाये? पुराने टंडीरा TV हैं। साफ़ दिखाई दे रहा है। क्या ये नहीं खोजा जाना चाहिए कि ये नाटक किसने कराया? क्यों कराया? टीवी फोड़ने की घटना किसने शूट की? टीवी कहाँ से आये? कौन लोग थे जिनने अपना TV फोड़ा। जिन लोगों ने TV फोड़ा उन ने अपने घर से कभी संडास का mug भी फेंका है? रोने वालों में कुछ लोग तो स्टेडियम में बैठे हैं। बाकी जो बाहरी लोग दिल्ली मुम्बई में दिखाए जा रहे है वो बहुत घटिया acting कर रहे हैं। मीडिया वाले अपनी दुकानदारी चमकाने के चक्कर में सारी दुनिया को ये बताना चाहते है की सिर्फ पाकिस्तानी ही नहीं हम हिन्दुस्तानी भी certified चूतिया हैं ……ISO मार्का ….. हम भी किरकिट जैसे फर्जीवाड़े पे अपना TV फोड़ सकते हैं।

 

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खुशवंत सिंह ने एक बार लिखा था। किसी शहर के लोगों का बौद्धिक स्तर आंकना हो तो उसकी bookshops देखो। बड़ा सटीक आकलन है। इसी प्रकार किसी कौम, किसी मुल्क का बौद्धिक स्तर नापना हो तो उसका tv देखो, उसके entertainment चैनल देखो, उसके news channels देखो। सुविख्यात अंग्रेजी उपन्यासकार Arthur Hailey ने News, पत्रकारिता और पत्रकारों की दुनिया पे एक बेहतरीन उपन्यास लिखा है- The evening news. ये उन दिनों की कहानी है जब रोज़ाना शाम को tv पे या रेडियो पे 15 मिनट के समाचार आया करते थे। उपन्यास में ये जद्दोजहद दिखाई है की किस प्रकार मात्र 15 मिनट में दिन भर की और देस और दुनिया जहान की खबरें दिखानी होती थी। उसमे कितनी ही महत्वपूर्ण खबरें छूट जाती थीं। कितनी काट छाँट दी जाती। इसके लिए Arthur Hailey ने एक टिप्पणी की थी- its like putting 10 pounds of shit in an 8 pound carry bag . It keeps coming out. अब ज़माना बदल गया है। भारत देश में तो न्यूज़ का स्तर इस कदर गिर चुका है की जिस खबर को डेढ़ मिनट में दिखा के खत्म करना चाहिए उसे आधे घंटे में दिखाया जाता है। एक ही clipping बार बार हर बार रिपीट होती रहती है. । एक ही वाक्य को 3 -3 बार बोलते हैं anchor. Indian media carries a spoon ful of shit in a 10 pound carry bag.

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70 के दशक में मशहूर उपन्यासकार Irving Wallace ने एक उपन्यास लिखा था। The Almighty. Almighty का अर्थ होता है सर्वशक्तिमान। ईश्वर को सर्वशक्तिमान कहा जाता है। उपन्यास का कथानक कुछ यूँ है कि एक मीडिया tycoon अपने अखबार और न्यूज़ channel की TRP बढ़ाने के लिए पहले जघन्य हत्याएं और अपराध करवाता है और फिर अन्य अखबारों और news channels से पहले प्रसारित कर के TRP अर्जित करता है। पिछले दिनों देश में बेमौसमी बरसात हुई। ओले पड़े। फसलों को भी नुक्सान हुआ। मीडिया ने खूब घड़ियाली आंसू बहाये। अपने खेत की मेढ़ पे सिर पकडे बैठे किसान दिखाए। मेरी समझ में ये नहीं आया कि किसान और मीडिया का कैमरा एक साथ खेत पे पहुंचे कैसे? भारत मैच हार गया ऑस्ट्रेलिया से। मीडिया ने कबाड़ी की दूकान से कबाड़ के TV फोड़ने का प्रायोजित कार्यक्रम करवा के प्रसारित किया। लोग आंसू बहा रहे हैं। किरकिट के खेल में हार के देस शोक मगन है। इससे पहले हमारा मीडिया फ़र्ज़ी sting operation दिखाता आया है। एक चैनल ने इसी प्रकार दिल्ली की एक स्कूल टीचर पे human traffiking और prostitution में लिप्त होने का फ़र्ज़ी आरोप एक फ़र्ज़ी स्टूडेंट द्वारा लगवाया था। इसका नतीजा ये हुआ कि उस girls school के अभिभावक वो फ़र्ज़ी खबर देख के उस स्कूल के गेट पे एकत्र हो गए और उन्होंने उस बेचारी निर्दोष स्कूल टीचर से मारपीट की। और उस चैनल ने ये पूरा तमाशा लाइव दिखाया। इस फ़र्ज़ी sting और इस प्रायोजित आक्रोश और मारपीट का नतीजा ये निकला कि उस महिला और उनके परिवार भर का दिल्ली में रहना दूभर हो गया। कल्पना कीजिये कि एक मीडिया चैनल की बदमाशी के कारण आपके घर की माँ बहन बेटी बहू देश भर में वेश्या और वेश्याओं की दलाल घोषित हो जाए। बाद में जब जांच हुई तो पाया गया कि एक भांड चैनल ने एक free lancer सड़क छाप पत्रकार द्वारा एक फ़र्ज़ी प्रशिक्षु पत्रकार को उस स्कूल की फ़र्ज़ी छात्रा बना कर फ़र्ज़ी झूठे आरोप लगाए थे। बाद में दोनों पत्रकारों की गिरफ्तारी भी हुई और चैनल सिर्फ माफ़ी मांग के बच निकला। वो दिन दूर नहीं जब भारत का मीडिया TRP के लिए दंगा, फसाद, हत्या, बलात्कार, धरना, प्रदर्शन, आगजनी और लूट के कार्यक्रम (घटना) भी आयोजित प्रायोजित करेगा।

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सोशल एक्टिविस्ट अजीत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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