देखिये एक मोदी समर्थक इस किसान की मौत को कैसे विश्लेषित करता है…

Ajit Singh : मैं हमेशा से ये लिखता कहता आया हूँ कि ये जो किसान के नाम पे फ़र्ज़ी आत्महत्या दिखाई जा रही है और ये जो फ़र्ज़ी किसान दिखाए जा रहे हैं ये फर्जीवाड़ा बंद होना चाहिए। आज तक जितनी भी किसान आत्म ह्त्या हुई हैं उनकी वृहद् जांच होनी चाहिए। उससे पता चलेगा कि कितनी ही natural deaths को किसान द्वारा आत्म ह्त्या बता दिया जाता है। न जाने कितने लोग depression के मरीज हो के और बाकी अन्य निजी कारणों से आत्मह्त्या करते हैं। उन्हें किसान द्वारा आत्महत्या नहीं माना जा सकता। मैं हमेशा कहता हूँ की प्रत्येक किसान आत्महत्या को कायदे से study कर एक श्वेत पत्र लाया जाए जिस से समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सके।

भारत का मीडिया TRP के लिए दंगा, फसाद, हत्या, बलात्कार, धरना-प्रदर्शन, आगजनी और लूट के कार्यक्रम प्रायोजित करेगा!

Ajit Singh : पकिस्तान जब भारत से हारा तो पाकिस्तानियों ने अपने TV फोड़ दिए। ऐसा हमको मीडिया ने बताया। हम लोगों ने भी खूब चटखारे लिए। पाकिस्तानियों को इसी बहाने certified चूतिया घोषित कर दिया। बड़ा मज़ा आया। अब मीडिया ने दिखाया कि हिन्दुस्तान में भी लोगों ने TV फोड़ दिए। मैंने इस खबर को बड़े गौर से देखा। मीडिया ने ये भी बताया कि लोग आंसू बहा रहे हैं। उनके आंसू भी देखे । लोग tv सड़कों पे पटक रहे हैं। प्रश्न ये है कि लोग news channel के कैमरा को दिखाने के लिए टीवी फोड़ रहे हैं क्या ? लोगों ने tv खुद फोड़े या मीडिया ने स्टोरी बनाने के लिए फुड़वाये? पुराने टंडीरा TV हैं। साफ़ दिखाई दे रहा है। क्या ये नहीं खोजा जाना चाहिए कि ये नाटक किसने कराया? क्यों कराया? टीवी फोड़ने की घटना किसने शूट की? टीवी कहाँ से आये? कौन लोग थे जिनने अपना TV फोड़ा। जिन लोगों ने TV फोड़ा उन ने अपने घर से कभी संडास का mug भी फेंका है? रोने वालों में कुछ लोग तो स्टेडियम में बैठे हैं। बाकी जो बाहरी लोग दिल्ली मुम्बई में दिखाए जा रहे है वो बहुत घटिया acting कर रहे हैं। मीडिया वाले अपनी दुकानदारी चमकाने के चक्कर में सारी दुनिया को ये बताना चाहते है की सिर्फ पाकिस्तानी ही नहीं हम हिन्दुस्तानी भी certified चूतिया हैं ……ISO मार्का ….. हम भी किरकिट जैसे फर्जीवाड़े पे अपना TV फोड़ सकते हैं।

प्लेटफार्म टिकट के बढ़े दाम को जायज ठहराने के लिए बिहारियों को गाली दे रहे नमो भक्त!

जिला गाजीपुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले अजीत सिंह वैसे तो फेसबुक पर बेबाक लिखते पढते बोलते हैं लेकिन जब बात नरेंद्र मोदी की आती है तो वो हर हाल में उनके पक्ष में तर्क जुटा लेते हैं. ताजा मामला प्लेटफार्म टिकट बढ़ाने का है. इसे जायज ठहराने के लिए अजीत सिंह बिहारियों को गरियाने से भी नहीं चूके. अजीत सिंह सोशल एक्टिविस्ट हैं. ‘उदयन’ नामक संस्था चलाकर गरीबों का कल्याण करते हैं. शिक्षण से लेकर आंदोलन तक के काम को बखूबी निभाते हैं. पर जब बात मोदी की आती है तो वो किसी की कुछ नहीं सुनते, सिर्फ अपनी फेंकते हैं. पढ़िए वो क्या लिखते हैं और इस मसले यानि प्लेटफार्म टिकट बढ़ाने के मुद्दे पर कुछ अन्य पत्रकार साथी क्या लिखते हैं…

मां ने समझाया, पुत्र निश्चिन्त रहो, अब तुम सूअरों के देश में हो…

Ajit Singh : मेरी एक साली साहिबा हैं । UK में रहती हैं । उत्तराखंड में नही united kingdom में । दो बच्चे हैं उनके । वहीं UK के ही जन्मे पले हैं । साली साहिबा सपरिवार छुट्टी मनाने देस आयीं । अमृतसर एअरपोर्ट पे उतरीं । Innova से जालंधर आ रही थी । हिन्दुस्तानी केतनो बिदेस रह जाए, स्वदेश आते ही उसका सूअरत्व जाग जाता है और वह भारत भूमि को छूते ही मनुष्य योनि से पुनः शूकर योनि को प्राप्त हो जाता है।

आओ बेटा, पब्लिक अप्राकृतिक इलाज करने को तैयार बैठी है….

Ajit Singh :  मेरी साली साहिब …..छोटी वाली …..एक बार विपासना कर आई । और कर क्या आई भैया , एकदम आशिक हो गयी । जब देखो तब विपासना । सोते जागते उठते बैठते खाते पीते बस विपासना । विपासना ये विपासना वो ……और मैं …..जस जस सुनूं मेरा खून खौले ……अबे साले पागल हो बे ? सुबह 4 बजे आँख मून के बैठ जाओ और रात 10 बजे तक बैठे रहो ……ध्यान करो …..और सबसे बड़ी बात …..10 दिन मौन …..

सोनिया और मनमोहन वो दिन भूले न होंगे जब SIT ने मोदी से CM रहते 8 घंटे पूछताछ की थी

Ajit Singh : बहुत पहले सुविख्यात उपन्यासकार Ken Follet का एक उपन्यास आया था ….. JackDaws …… बड़ा फाडू उपन्यास था। मेरी माँ हॉस्पिटल में भर्ती थी। उनकी पथरी की सर्जरी हुई थी। मैं और धर्मपत्नी उनके पास गए। रस्ते से मैंने ये किताब खरीद ली। किताब इतनी जबरदस्त की छोड़ी न जाए। ऊपर से धर्मपत्नी बार बार रोक टोक करे। माँ की सेवा करने आये हो या किताब पढ़ने। अंत में मैंने तंग आ के उनसे कहा की अब सास की सेवा तुम करो 3 घंटा। मैं अभी आया। और अस्पताल के बाहर फुटपाथ पे बैठ के मैंने 3 घंटे में Jackdaws खत्म की। ज़बरदस्त किताब थी। एक बार अगर शुरू कर दी तो छोड़ नहीं सकते।