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भास्कर चला टेलीग्राफ बनने, देखें कितनी सफल हुई कोशिश

अंग्रेजी का द टेलीग्राफ अखबार अपने तेवर, प्रजेंटेशन, कंटेंट, मुहवारों के कारण लगातार चर्चा में है. ऐसे वक्त में जब सत्ता के घोषित-अघोषित भय के कारण लगभग सारे अखबार चैनल तलवे चाटने लगे हैं, मुंह बंद कर चुके हैं, तेवर तालाब में डाल चुके हैं, रचनाधर्मिता को खूंटी पर टांग चुके हैं, द टेलीग्राफ इतिहास रच रहा है.

वह सत्ताधारियों की गलत नीतियों का लगातार बखिया उधेड़ रहा है. देखादेखी कुछ एक हिंदी अखबार भी इस राह पर चल पड़े हैं.

दैनिक भास्कर ने हेडिंग में प्रयोग करने की कोशिश की है आज. इसे लेकर सोशल मीडिया पर थोड़ी बहुत चर्चाएं हैं.

देखें आज के दैनिक भास्कर की लीड स्टोरी और इस पर आए कुछ फेसबुक कमेंट्स…

साथ ही सबसे नीचे है आज का टेलीग्राफ और इंदौर से प्रकाशित नया अखबार प्रजातंत्र…

आज का दैनिक भास्कर

उपरोक्त प्रयोग पर आईं कुछ प्रतिक्रियाएं देखें…

Sanjaya Kumar Singh फूहड़ है। नकल के लिए भी अक्ल चाहिए। ये लोग अंग्रेजी शब्दों से ही खेल करेंगे।

Ratan Pandit दलाली सोचने कहाँ देती है… भास्कर की टेलीग्राफ जैसी हेडिंग की कोशिश पर खून की दलाली फॉन्ट तक ही पहुंची शब्द चयन की जगह…

Manish Singh टेलीग्राफ के किसी Weak and Ass अप्रेन्टिस को बुलाकर एडिटोरियल चेयर दिये हैं। इनकी अपनी औकात तो “दे धनाधन” की है बस ..

C P Parmar लगता है इनकी दिहाड़ी बन्द हो गयी है वरना चाटूकारिता की सब हदे पार कर चुका है यह पेपर

Atul Vidyawati Mishra दैनिक भास्कर की हेडिंग्स मैं गजब का अंतर आ रहा है ,अबकी बार खो दी सरकार और आज फिर

Dipti Gupta Rewatkar aspiring to be ” The Telegraph” of Hindi news papers


आज का टेलीग्राफ

आज का प्रजातंत्र…


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