भास्कर के साथ क्यों खड़े हों?

ब्रह्मवीर सिंह-

भास्कर के लिए न सही, समाज देश के लिए विरोध कीजिए… छापे के संदर्भ में दो बातें हैं। पहली, किसी भी मीडिया हाउस के तेवर कई वजहों से नरम और सख्त होते रहते हैं। उसमें बड़ा कारण निजी हित होते हैं। खासतौर पर विज्ञापन या दूसरे विषय।

जब तक सहूलियत मिली नरम, नहीं तो धारदार पत्रकारिता। बहुत कम संस्थान हैं जो सदा एक जैसे बने रहते हैं। भास्कर के लिए बहुत सी बातें कही जा सकती हैं। लेकिन हिंदी पत्रकारिता को संवारने में उसकी सराहना होनी चाहिए।

दूसरी बात, सरकारें भी उपयोग करती हैं। राजनीति के अपने अपने फेवरेट मीडिया हाउस हैं। किसी को जागरण पसंद है। किसी को एनडीटीवी। किसी को आजतक किसी को इंडिया टीवी। यह सब चलता रहता है। आप तहकीकात करेंगे तो पता चलेगा कि केंद्र और राज्यों की सरकारें विचार धारा के आधार पर विज्ञापन देती हैं। बहुत सामान्य है।

भास्कर के साथ क्यों खड़े हों! क्योंकि फिलहाल छापे केवल भास्कर द्वारा की जा रही जग हंसाई की खीज है। अगर खबरें सरकार की मुसीबतें न बढ़ा रही होतीं तो सौ फीसदी छापे नहीं पड़ते। ऐसा भी नहीं है कि हिंदुस्तान के बाकी मीडिया हाउस दूध के धुले हैं। लेकिन कोई खिलाफ है उसे ठीक करना है, यह परम्परा घातक है। भास्कर के लिए नहीं, देश समाज के लिए, इसका विरोध किया जाना चाहिए। हमें यही सिखाया जाता है कि आलोचना बर्दाश्त कीजिए। इस से लोकतंत्र मजबूत होता है।

और हां, इससे भास्कर को आर्थिक नुकसान हो सकता है, लेकिन इस कार्यवाही ने उसे ब्रांडिंग का बड़ा अवसर दे दिया है। और भास्कर इसमें हमेशा से मास्टर है। कुछ दिन बाद शायद केंद्र को लगे कि बैठे बिठाए क्या मुसीबत मोल ले ली।

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं, क्लिक करेंWhatsapp Group

भड़ास के माध्यम से अपने मीडिया ब्रांड को प्रमोट करने के लिए संपर्क करें- Whatsapp 7678515849



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *