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उत्तराखंड

भाजपा सतपाल महाराज पर खेलेगी दांव!

डा. बृजेश सती, देहरादून
चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट आसन्न विधानसभा चुनाव में हाट सीट बन सकती है। भारतीय जनता पार्टी सूत्रों से छनकर आ रही जानकारी के मुताबिक भाजपा इस सीट पर सतपाल महाराज पर दांव खेल सकती है। इसकी खास वजह बदरीनाथ सीट पर पार्टी के पास कांग्रेस प्रत्यासी व कावीना मंत्री राजेन्द्र भंडारी के मुकावले में सशक्त उम्मीदवार का न होना है। मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व केविनेट मंत्री केदार सिंह फोनियां के पुत्र पूर्व विनोद फोनिया ने भाजपा से इस सीट से चुनाव लड़ने की पार्टी हाईकमान से पेशकश की थी लेकिन पार्टी संगठन की ओर से खास तवज्जो न मिलने के कारण उनके निर्दलीय ही चुनाव लडने की संभावनाएं हैं।

डा. बृजेश सती, देहरादून
चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट आसन्न विधानसभा चुनाव में हाट सीट बन सकती है। भारतीय जनता पार्टी सूत्रों से छनकर आ रही जानकारी के मुताबिक भाजपा इस सीट पर सतपाल महाराज पर दांव खेल सकती है। इसकी खास वजह बदरीनाथ सीट पर पार्टी के पास कांग्रेस प्रत्यासी व कावीना मंत्री राजेन्द्र भंडारी के मुकावले में सशक्त उम्मीदवार का न होना है। मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व केविनेट मंत्री केदार सिंह फोनियां के पुत्र पूर्व विनोद फोनिया ने भाजपा से इस सीट से चुनाव लड़ने की पार्टी हाईकमान से पेशकश की थी लेकिन पार्टी संगठन की ओर से खास तवज्जो न मिलने के कारण उनके निर्दलीय ही चुनाव लडने की संभावनाएं हैं।

ऐसी स्थिति में भाजपा इस सीट पर ऐसे प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रही है, जो न केवल यहां जीत हासिल करे बल्कि जनपद की अन्य सीटों को भी प्रभावित कर सके। इस लिहाज से भाजपा के पास एक ही चेहरे पर निगाह टिकती है और वह है सतपाज महाराज। यदि यह संभव हुआ तो यहां दिलचस्प मुकाबला होने की पूरी उम्मीद है। कभी एक साथ राजनीति करने वाले गुरू सतपाल महाराज व चेला राजेन्द्र भंडारी एक दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में आमने सामने होंगे। यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि न तो सतपाल महाराज ने इसकी पुष्टि की है और न ही भाजपा ने। इसका दोनों ने खंडन भी नहीं किया है। इससे इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि सतपाल महाराज चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

बदरीनाथ विधानसभा चुनाव में अब तक हुए तीन चुनाव में दो बार कांग्रेस व एक बार भाजपा प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल रहा। तीनों ही बार अलग अलग प्रत्याशी चुने गये। वर्ष 2002 में अप्रत्याशित ढंग से भाजपा के सीटिंग विधायक व काबीना मंत्री केदार सिंह फोनियां अपनी परम्परागत सीट कांग्रेस के डा अनुसूईया प्रसाद मैखुरी से हार गये। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में फोनियां चुनाव जीत गये। तीसरे चुनाव में कांग्रेस ने यहां से अपना प्रत्याशी बदल कर सतपाल महाराज की पंसद नन्द प्रयाग के विधायक राजेन्द्र भंडारी को मैदान में उतारा और भंडारी उनकी कसौटी पर खरा उतरे।

इस चुनाव में भाजपा ने सीटिंग विधायक केदार सिंह फोनियां का टिकट काटकर गोपेश्वर नगर पालिका के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ भट्ट को प्रत्याशी बनाया, लेकिन पार्टी का यह प्रयोग असफल साबित हुआ। भट्ट दस हजार से अधिक मतों से पराजित हुए। अब राज्य में चौथे चुनाव के लिए राजनीतिक दल प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने की कवायद में जुटे हैं। उम्मीद है कि सोमवार को दोनों ही प्रमुख दल अपनी प्रत्याशियों की सूची जारी कर सकते हैं। लेकिन इस बीच प्रतिष्ठित समझी जा रही बदरीनाथ सीट सुर्खियों के केन्द्र में आ गई है। दरअसल इस सीट पर एक दौर में राजेन्द्र भंडारी के राजनीतिक गुरू रहे सतपाल महाराज के चुनाव लडने के कयास लगाये जा रहे हैं।

इस बात को राजनीतिक प्रेक्षक इसलिए भी गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि महाराज की ओर से इसका खंडन भी नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा पार्टी भी इसको नकार नहीं रही है। यदि भाजपा इस प्रयोग को अमलीजामा पहनाती है तो बदरीनाथ सीट का न केवल राजनीतिक परिदृश्य बदलेगा बल्कि राज्यवासियों की उत्सुकता इस बात को लेकर भी रहेगी कि सियासी मुकाबले में गुरू और चेले में कौन मैदान मारता है। यक्ष प्रश्न यह है कि क्या सतपाल महाराज केवल साधारण विधायक बनने के लिए विधानसभ चुनाव लडेंगे। जाहिर सी बात है कि महाराज की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी होगी। देखना दिलचस्प होगा कि गुरू विधानसभा चुनाव में चेले को चुनौति पेश करेंगे या अपने राजनीति शिष्य की विधानसभा जाने की राह को आसान बनायेंगे।

डा. बृजेश सती
स्वतंत्र पत्रकार
देहरादून

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