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झूठ बोलने वालों की पार्टी को फैक्ट चेक यूनिट चाहिये, गोमांस पर बदलता स्टैंड   

गोवा में गोमांस की कमी नहीं होने देने का आश्वासन देने वाली पार्टी के प्रचारक कह रहे हैं कि बीफ निर्यातक गोमांस निर्यात नहीं करते, भारत में गोमांस प्रतिबंधित है, पहले की घटनाएं-खबरें भूल गये, गोदी वालों को कोई मतलब ही नहीं है

संजय कुमार सिंह

आरटीआई, पारदर्शिता और लोकतंत्र की ऐसी-तैसी कर चुकी बीजे पार्टी एक सरकारी फैक्ट चेक यूनिट चाहती है। इसके बाद कानून यह होगा कि एफसीयू जिस खबर को गलत कह दे उसे हटाना होगा। यानी जो भी खबर अनुकूल हो उसे रहने दिया जायेगा और नुकसान की आशंका हो उसे हटवाया जा सकेगा। इसके लिए सरकारी पार्टी के पास ट्रोल सेना है और यह पुरानी खबर है। हम सब उसका काम देख चुके हैं और उसपर पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की एक किताब है, आई एम अ ट्रोल।

आज ही सिंगापुर के चैनल न्यूज एशिया ने भारत के फेक न्यूज इंडस्ट्री पर एक डॉक्यूमेंट्री जारी की है। @zoo_bear ने इसे साझा करते हुए अवश्य देखने योग्य कहा है। इसके अनुसार इलेक्टोरल बांड से अरबों कमा चुकी सत्तारूढ़ पार्टी का आईटी सेल फ्री लांसर्स की सेवा लेता है उन्हें 40-50 रुपये महीने देता है और सरकार के पक्ष में तथा विपक्षी नेताओं के खिलाफ खबर करवाता है। दूसरी ओर, @HindutvaWatchIn के  @raqib_naik ने कहा है कि सरकार के अनुरोध पर एक्स की उनकी आईडी को रोक दिया गया है।

एक तरफ तो सोशल मीडिया, वेब पोर्टल और डिजिटल माध्यम को रोकने और स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देने की कोशिश चल रही है, दूसरी ओर मुख्य धारा का मीडिया सिर्फ प्रचार कर रहा है और अब पता चला है कि सरकार ऐसे लोगों को अपना काम करने से रोक रही है। इसमें दिलचस्प तथ्य यह है कि हाल में एक खबर आई थी कि सरकार ने बीफ निर्यात करने वाली कंपनी से भी चंदा या दान लिया है। भक्त प्रचारकों ने यह कहना शुरू कर दिया कि बीफ मतलब भैंस के मांस से है और भारत में तो गो हत्या होती ही नहीं है।

यहां दिलचस्प यह है कि केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू संसद में कह चुके हैं, “मैं बीफ खाता हूं और अरुणाचल प्रदेश से हूं, क्या कोई मुझे ऐसा करने से रोक सकता है? जाहिर है वे गोमांस की ही बात कर रहे थे और तब अखबारों में छपा था कि जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और आंध्र प्रदेश में गोमांस प्रतिबंधित है। इनमें से कुछ राज्यों में भैंस या बैल का मांस प्रतिबंधित नहीं है, बशर्ते इसकी स्थानीय प्रशासन से इजाजत हो या जानवर बीमार हो।

इसके साथ ही, केरल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजारेम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश में गोमांस पर प्रतिबंध नहीं है। पश्चिम बंगाल में गाय या भैंस के मांस के लिए फिट फॉर स्लॉटर होना जरूरी है। यही नहीं दिल्ली में गोमांस की शिकायत पर केरल हाउस की तलाशी हो चुकी है। शिकायत तब के प्रभावशाली प्रचारक की थी हालांकि बाद में शिकायतकर्ता को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अब प्रचारक सफाई दे रहे हैं कि चंदा भैंस का मांस निर्यात करने वालों से लिया गया है। हालांकि तकलीफ मछली खाने के वीडियो से भी होती है। इसलिए, सरकार को फैक्ट चेक यूनिट की जरूरत महसूस हो रही है। कारण साफ है, स्थितियां बदल गई हैं, ज्यादा ताकत चाहिये या हासिल करना संभव है।

इतना ही नहीं, कांग्रेस नेता के सवाल के जवाब में गोवा के पशुपालन मंत्री भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार में मंत्री मौविन गोडिन्हो लिखित जवाब में कह चुके हैं, “ (गोमांस की) कमी की कोई सूचना नहीं है।” राज्य के मांस कारोबारियों ने गोमांस की कमी की चेतावनी दी है। उन्होंने मवेशियों को बूचड़खाने ले जाने के दौरान गोरक्षकों द्वारा उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया। इस वजह से वे गोवा में गोमांस बेचने के लिए फ्रोजन गोमांस आयात करने को मजबूर हैं। कांग्रेस विधायक फ्रांसिस्को सिल्वेरिया के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि गोवा में गोमांस की कोई कमी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि राज्य का एक मात्र वैध बूचड़खाना अपनी पूरी क्षमता के साथ नहीं चल रहा है।

भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह 2015 में कह चुके हैं कि गोमांस पर देश भर में प्रतिबंध नहीं है। तब कहा गया था कि इस संबंध में राज्यों को जनसंवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना है। अमित शाह ने कहा था, ‘जहां भी भाजपा सरकार है, हम गोमांस पर प्रतिबंध लगाने से पहले लोगों की संवदेनाओं पर विचार करेंगे। हमने नहीं कहा कि हम पूरे देश में गोमांस पर प्रतिबंध लगायेंगे।’ महाराष्ट्र और हरियाणा की भाजपा सरकारों ने गोमांस पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन शाह ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में भाजपा सरकारें है, पार्टी उन राज्यों में गोमांस पर प्रतिबंध लगाने पर जोर नहीं देगी और इस संबंध में संबंधित सरकारों को जनसंवेदनाओ को ध्यान में रखकर उचित निर्णय लेना है।

सभी खबरें इंटरनेट पर मौजूद हैं और फिर भी प्रचारक कह रहे हैं कि गोमांस निर्यात नहीं होता है और बीफ निर्यात करने वालों से शाकाहार का प्रचार करने वाली पार्टी का इलेक्टोरल बांड से पैसा लेना गलत या अनैतिक नहीं है।

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