यूपी में 12 की बजाय 11 विस सीटों को ही खाली बता रहा है नवभारत टाइम्‍स

नवभारत टाइम्‍स, लखनऊ में उसके रिपोर्टर की कम जानकारी अखबार की साख पर भारी पड़ी. उत्‍तर प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव को लेकर एक स्‍टोरी लखनऊ से प्रकाशित नवभारत टाइम्‍स के फ्रंट पेज पर छापी गई है. ‘बीजेपी का लिटमस व सपा का फिटनेस टेस्‍ट’ शीषर्क से प्रकाशित यह खबर भारतीय जनता पार्टी की बीट देखने वाले रिपोर्टर प्रेमशंकर मिश्र ने लिखी है.

मिश्रजी की गलती पूरे अखबार की साख पर भारी पड़ गई है. यूपी में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिनमें 11 भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के सांसद बन जाने तथा रोहनियां से अपना दल की विधायक अनुप्रिया पटेल के सांसद बन जाने के बाद रिक्‍त हुई है. मिश्राजी ने अल्‍पज्ञान में केवल 11 विधानसभा सीटों पर ही उपचुनाव होने की बात लिखी है. और सभी को भाजपा की जीती हुई सीट बता डाली है.

जबकि भाजपा के लिहाज से सबसे महत्‍वपूर्ण तथा विधानसभा में भाजपा के नेता रहे हुकुम सिंह की कैराना सीट को भूल गए हैं. फिलहाल इस सीट पर चुनाव की घोषणा आयोग ने अभी नहीं की है. इस पर बाद में निर्णय लिया जाएगा. यूपी में लखनऊ पूर्व, बिजनौर, निघासन, ठाकुरद्वारा, बलहा, सहारनपुर नगर, नोएडा, हमीरपुर, चरखारी, सिराथू तथा रोहनियां विधानसभा तथा मैनपुरी लोकसभा के लिए उपचुनाव की घोषणा आयोग ने की है. लेकिन मिश्रजी इसकी जानकारी नहीं देकर चुनाव वाले सभी सीटों को भाजपा की बता दिया है.  

जबकि कैराना सीट पर आयोग बाद में निर्णय लेगा. लिहाजा जिन 11 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें दस सीटें भाजपा की तथा रोहनिया सीट अपना दल की है. मिश्रजी की अज्ञानता के बाद खबर को लेकर अखबार की साख पर लोग सवाल उठाने लगे हैं. मिश्रजी को वरिष्‍ठ पत्रकार तथा लेखक अनिल यादव की जगह बीजेपी समेत अन्‍य विभागों की जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वे उनकी तरह खरे नहीं उतर सके हैं.

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Comments on “यूपी में 12 की बजाय 11 विस सीटों को ही खाली बता रहा है नवभारत टाइम्‍स

  • सलमान says:

    इन पत्रकार महोदय पर एनबीटी ने भरोसा किया वो बहुत बड़ी बात है वरना ये अपने उस संस्‍थान को छोड़कर आये जिसने अपने कई सीनियर और पुराने पत्रकारों पर तरजीह देकर इन्‍हें नियमविरुद़ तरक्‍की दी और ई पुरबिया निकले दोगुले छोड़कर इहां भाग आये। खैर अब इन मिसरा जी का का किया भी मिसरा जी ही भरेंगे। जब नाव डूब ही रही है तो एक और छेद ही सही। सुना है ई फिर से पुराने घर लौटने की फिराक में है। चीफ रिर्पोटरी की दौड़ में है। बकायदा परदेसी संपादक जी को उनके चीफ रिपोर्टर की कमी के बारे में अगले दिन इंगित कर ही देते हैं। आदत से मजबूर जो ठहरे ये साबित करते रहते हैं कि क्‍यों पुरबिया को लोग बैठाने से बचते हैं।

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