मालिकों के झगड़े में बंद हुआ C10 न्यूज चैनल, कई मीडियाकर्मियों की सेलरी बकाया

C10 न्यूज के संचालकों में आपसी झगड़े के चलते चैनल बंद हो गया है और यहां काम करने वाले कई कर्मचारियों का वेतन फंस गया है.

नोएडा के सेक्टर 63 से शुरू किया गया खबरिया चैनल सी10 अब बंद हो गया है। चैनल के दोनों निदेशकों सुभाष शर्मा और मनीष यादव के बीच लड़ाई के कारण चैनल बंदी के बाद बहुत सारे लोगों का पैसा फंस गया है. चैनल के कार्यालय से सारा सामान गायब है. कर्मचारियों का लाखों रुपए वेतन और वेंडरों के बकाए का भुगतान भी नहीं किया गया है.

गौरतलब है कि कोलकाता के सुभाष शर्मा और लखनऊ के मनीष यादव ने इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के तहत C10 न्यूज की शुरुआत बीते साल सितम्बर माह में की थी। फ़रवरी 2022 से दोनों डायरेक्टर के बीच खबरों के प्रसारण को लेकर विवाद बढ़ने लगा था। सुभाष शर्मा भाजपा की खबरों को तरजीह देने की वकालत करते थे और मनीष यादव समाजवादी पार्टी की खबरों को। मनीष यादव का एडिटोरियल पर पूरा वर्चस्व था। चैनल के मैनेजिंग एडिटर मधुर शील के नाम का इस्तेमाल प्रबंधन द्वारा किया जाता था। एडिटोरियल में मधुर शील की कोई बात नहीं सुनी जाती थी। इसी वजह से तब उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। प्रबंधन के करीब रहने के बावजूद मधुर शील कर्मचारियों का वेतन नहीं दिला सके।

अब आलम ये है कि मैनेजिंग डायरेक्टर सुभाष शर्मा, डायरेक्टर मनीष यादव और मैनेजिंग एडिटर मधुर शील कर्मचारियों और वेंडरों का फोन नहीं उठाते। कर्मचारी दर दर भटकने को विवश हैं। लाइसेंस,टेलीपोर्ट, इक्यूपमेंट सप्लायर , पेस्ट कंट्रोल प्रिंटिंग प्रेस वाले , सीसीटीवी कैमरा वाले सहित कई अन्य लोगों का बकाया है। लेकिन दोनों डायरेक्टरों द्वारा लगातार झूठ बोला जा रहा है कि कोई बकाया नहीं है। आफिस जहां चलता था वहां भी बकाए के बदले यूपीएस और दूसरे उपकरण लैंड लार्ड ने रोक रखा है।

कर्मचारियों से भी महीने तक काम लिया गया लेकिन रोज भरोसा देकर भी उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया.

नीचे वो लिस्ट है जिनकी सेलरी बकाया है…

1 Priyanka Tripathi
2 Khajan Pandey
3 Gulafsha
4 Samya Sabir
5 Abhishek Singh
6 Harshit
7 Divanshu
8 Sagarika Paul
9 Virendra Kumar
10 Prem Naryan Singh
11 Ajay Sukla
12 Bhanu Pratap Singh
13 Vijay Malik
14 Randheer Singh
15 Mohit Singh
16 Manish Kumar Yadav
17 Anuj Sharma
18 Pankaj Manral
19 Deepak Sah
20 Malay Bisht
21 Ravi Bhushan Kumar
22 Shashi Bhushan Rai
23 Prateek Saxsena
24 Surya Prakash Pandey
25 Sujit Yadav
26 Somendra
27 Sivam Patel
28 Rahul Jha
29 Rajkumar Pathak
30 Alka Singh
31 Rajni Tiwari
32 Mahendra
33 Ksamata Chahuhan
34 Akhay Anand
35 Brijesh Yadav
36 Abhimayu Kumar
37 Manish MCR
38 Tariq Shakeel
39 Amir khan
40 Paras Yadav
41 Aditi Singh
42 Kapil Chahun
43 Abrar Ahmed
44 Ramesh Yadav
45 Preeti Sagar
46 Mohit Kumar
47 Sandeep Singh
48 Garuv Kisore Sharma
49 Nitin Gautam
50 Kapil Prasad Sharma
51 Archana Singh
52 Sahebdeen Yadav
53 Manoj (Pantry)
54 BrijMohan
55 Konika Yadav
56 Ankit Trivedi
57 Dipti Agnihotri
58 Sunil Singh
59 Akshay Singh Gaur
60 MadhurSheel
61 Poonam
62 Renu
63 Aman
64 Ashok Pandey
65 Prakash Pandey
66 Pulkit Gupta
67 Bharat
68 Badal Yadav
69 Sarita (Makeup)
70 Pallavi Trivedi
71 Kishan (Social)
72 Narad Muni Pandey
73 Sourav Pandey
74 Chanchal Rawat
75 Amzad Khan
76 Manisha Upadhayaye
77 Umesh Kumar Majhi
78 Gautam
79 Sharad Pandey

बताया जा रहा है कि सुभाष शर्मा ने सी10 चैनल में पैसा इस मकसद से लगाया था कि अगर यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार आ गई तो उनका धंधा पानी चलेगा. पर जब भाजपा सरकार आ गई तो वो अपने निवेश किए पैसे को निकालने के चक्कर में पड़ गए. लेकिन जो पैसा सेलरी, प्रसारण व आफिस आदि में खर्च हो चुका है, उसे कैसे कोई लौटा सकता है. इसी के बाद दोनों निदेशकों में आरोप प्रत्यारोप शुरू हुआ.

जब सुभाष शर्मा ने चैनल से हाथ खींच लिया तो मजबूरन मनीष यादव को भी कामकाज समेटना पड़ा. फिलहाल दोनों निदेशकों का विवाद पुलिस और कोर्ट तक पहुंच चुका है.

बताया जाता है कि सुभाष शर्मा ने सी10 से अलग होने के बाद वॉइस ऑफ भारत नामक किसी चैनल की शुरुआत करने की तैयारी की है. लोगों का कहना है कि मीडियाकर्मियों को छलने का सिलसिला जारी है. चैनल का नाम बदल बदल कर मीडियाकर्मियों का शोषण किया जाता है. ‘वॉइस ऑफ भारत’ चैनल में कार्यरत रहे एक पत्रकार ने बताया है कि यहां भी लोगों को कई माह से सेलरी नहीं मिली है.

कई मीडियाकर्मियों द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

इस पूरे मामले में सी10 चैनल के निदेशक मनीष यादव ने अपना पक्ष जो भेजा है, उसे हूबहू प्रकाशित किया जा रहा है-

यह सत्य है कि इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर सुभाष शर्मा के अड़ियल रवैए की वजह से C10 न्यूज चैनल बंद हो गया। यहां मैं स्पष्ट करता चलूं कि मैं इवनिंग स्टार में जीरो प्रतिशत स्टेक होल्डर डायरेक्टर था। मेरी कम्पनी में शेयर या हिस्सेदारी नहीं थी। लाभ हानि की जिम्मेदारी, जवाबदेही कम्पनी के एम डी सुभाष शर्मा की थी। सुभाष शर्मा ज्यादातर कोलकाता में रहते थे,इस वजह से चैनल का आपरेशन मैं देखता था। मैं भी वेतनभोगी डायरेक्टर था,चैनल का मालिक नहीं था, लिहाजा चैनल से सम्बंधित किसी प्रकार की देनदारी की जवाबदेही मेरी नहीं बनती।

अव्वल मैं तो पूरी तरह से ठगा गया हूं। मुझे चैनल में एक रुपया भी नहीं लगाना था,लेकिन ऐन चुनाव के वक्त जब चैनल को पैसे की जरुरत थी, तब सुभाष शर्मा कोलकाता जाकर बैठ गये।ऐसे में चैनल की जरुरतों को पूरी करने के लिए उपकरण, वेतनादि मद में लगभग 2करोड़ रुपए मुझे लगाने पड़े। क्योंकि कि आठ नौ माह कि अवधि के दौरान केवल दो बार‌ इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कर्मचारियों को वेतन भेजा गया। शर्मा ने जनवरी माह में फोन पर कहा कि अभी थोड़ा टाइट पोजिशन है मनीष तुम अपने स्तर पर पैसों का इंतजाम कर लो मैं वापस कर दूंगा।

अब विधानसभा चुनाव सिर पर था ऐसे में मुझे नोएडा में चैनल की जरुरत पूरी करने के लिए अपनी कीमती जमीन औने पौने भाव बेचनी पड़ी । जमीन बेचकर मैंने चैनल के नाम पर बकाया चुकाया, कर्मचारियों को वेतन दिया ,यह सोच कर कि मेरे पैसे MD सुभाष शर्मा वापस कर देंगे। पर मेरे पैसे भी शर्मा वापस नहीं कर रहा हैं। पैसे वापसी और अन्य हिसब को लेकर तीन बार बैठक हुई, मध्यस्थों के साथ बैठकें भी बेनतीजा रही । शर्मा हर बार अपनी बात से पलटता रहा। मेरा वेतन भी बाकी है। जब बार बार के अनुनय विनय के बाद शर्मा ने पैसे नहीं दिए तब मैंने अपने बकाए की राशि दिलाने के लिए माननीय न्यायालय से गुहार लगायी है। इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड के एमडी सुभाष शर्मा के खिलाफ मुकदमा दायर किया ।

मुकदमा दायर होने की सूचना के बाद बौखलाए शर्मा ने तरह तरह से मुझे प्रताड़ित करना शुरु किया। मुझे मारने के लिए पेशेवर अपराधियों को मेरे पीछे लगा दिया। जिसकी सूचना समय समय पर मैं पुलिस को देता रहा। प्रशासनिक सहायता मुझे ना मिल‌ सके इसके लिए शर्मा ने मेरी जाति को मोहरा बनाया। यादव जाति से होने के नाते मेरा संबंध एक राजनीतिक पार्टी से प्रगाढ़ होना बताया। जबकि मेरा संबंध किसी राजनीतिक दल से नहीं है। मैं पूरी तौर पर निष्पक्ष राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार हूं। मेरा किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना देना‌ नहीं है।

दूसरी बात आलेख में आफिस से सामान ले जाने की बात कही गयी है, जो बेबुनियाद है। मेरा जो अपना सामान था बस उतना‌ मैं ले आया।पिछड़ी जाति से आने की वजह से लगातार मुझे प्रताड़ित किया जाता रहा ।आज मैं पूरी तरह से बर्बाद हो चुका हूं। आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गयी है,अब जमीन भी नहीं बची। बावजूद इसके मैं अपने सहयोगियों, कर्मचारियों के साथ सदैव खड़ा रहा हूं, भविष्य में भी उन्हें जहां मेरी जरूरत होगी मैं उनके साथ रहूंगा।

C10 न्यूज बन्द होने के बाद सुभाष शर्मा वायस आफ भारत एक चैनल कि शुरुआत नोएडा के सेक्टर 58 से करने वाला था। तीन चार महीने तक यूट्यूब और फेसबुक पर चैनल चला , लेकिन वहां भी इसी माह ताला‌ लटका दिया गया , शर्मा ने वहां आफिस का किराया और कर्मचारियों का वेतन आदि का लगभग 25 लाख रुपया बाकी लगाकर फरार है। ऐसा करना सुभाष शर्मा के फितरत में हैं। ठगी उसके रग रग में है। कोलकाता का बहुत बड़ा बैंक डिफाल्टर है यूनियन बैंक से ऋण के रुप में मोटी रकम लेकर गायब है। एनसीएलटी के डिफाल्टरों की लिस्ट में भी शर्मा का नाम रजिस्टर्ड है।

जिन लोगों ने C10 न्यूज में काम किया उनके दुख सुख में हमेशा खड़ा रहा हूं। कभी भी मेरी जरूरत उनलोगों को होगी मैं उनके (कर्मचारियों )साथ खड़ा मिलूंगा। सुभाष शर्मा और और उनकी कंपनियों के डिफाल्टर होने के प्रमाण स्वरूप कुछ दस्तावेज भड़ास4मीडिया को अलग से मेल कर दिया हूं.

-मनीष यादव



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Comments on “मालिकों के झगड़े में बंद हुआ C10 न्यूज चैनल, कई मीडियाकर्मियों की सेलरी बकाया

  • मधुर शील says:

    आलेख सच के करीब है इसमें कोई शक नहीं। चैनल बंद होने के लिए प्रबंधन जिम्मेवार है, कर्मचारी इसके लिए कतई जिम्मेवार नहीं हैं। पूरी देनदारी इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड की बनती है इससे इन्कार नहीं किया जा सकता।
    इस आलेख में मेरे प्रति भी कुछ टिप्पणियां की गई हैं।मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि मैं अन्य कर्मचारियों की तरह एक वेतनभोगी कर्मचारी ही था, मालिक या पार्टनर नहीं था। साथियों का फोन नं उठाने का आरोप मेरे उपर जो लगाए गए हैं वह पूरी तरह बेबुनियाद है।मैं जिन साथियों का फोन आया जरुर उनसे बात हुई है।हां जून माह के पूर्वार्द्ध में हृदयाघात (हार्ट अटैक)आया था , स्टेंट लगा था।कुछ दिन अस्पताल में था उन दिनों फोन पर बात ना करने की सलाह चिकित्सकों ने दी थी।उसके बाद सबसे बात हो रही हैं।
    दूसरा आरोप में हैं कि प्रबंधन के करीब , मैनेजिंग एडिटर के पद पर रहते हुए साथियों को वेतन नहीं दिलवाया। मुझे इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड से आठ महीने में केवल एक माह का वेतन मिला।कुछ पैसे टुकड़े टुकड़े में जैसे सबको एडिटर इन चीफ मनीष यादव ने दिए,मुझे भी दिए।अभी भी चार पांच महीने का वेतन मेरा बाकी है।अपना पूरा वेतन ले लेता और साथियों को नहीं मिलता तब ये आरोप स्वीकार्य था, लेकिन फिलवक मैं भी आप ही लोगों की कतार में हूं। आप लेबर कोर्ट या किसी दूसरे फोरम पर अपनी बात रखना चाहते हों वहां भी मैं आप सबों के साथ हूं।आपकी हक के लिए लड़ी जानेवाली हर वाजिब लड़ाई में मैं आप सबों के साथ हूं। आश्चर्य है कि आप लोगों ने मुझे अलग समझा। इवनिंग स्टार प्रोमोटर प्राइवेट लिमिटेड प्रबंधन ने गंभीर परिस्थिति में अस्पताल में भर्ती रहने पर भी मुझे पैसे नहीं दिए।

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  • कौन सही है या कौन गलत , यह कहना तो मुश्किल है पर इन लोगों ने स्ट्रिंगर का कमीशन तक नहीं दिया। मुझे तो वकील का कमीशन भी खुद अपनी जेब से देना पड़ा।

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