Categories: सुख-दुख

एक बहुराष्ट्रीय कंपनी से छप्पन इंची सरकार की साँस फूली

Share

सत्येंद्र पीएस-

घुटने टेके, क़ानून ख़त्म किया, हजारों करोड़ का रिफंड भी देंगे!

सरकार किस तरह कानून बना रही है और देश कैसे चल रहा है, इसका एक मजेदार उदाहरण है केयर्न मामला। यह मामला लम्बे समय से चल रहा है। मैं शार्ट में बताने की कोशिश करता हूँ।

सरकार रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लॉ लाई। ब्रिटेन की कम्पनी केयर्न इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय पंचाट में चली गई।

केयर्न मुकदमा जीत गई। उसने भारत सरकार पर दबाव बनाया क़ि वह पैसे दे । भारत सरकार ने सुस्ती दिखाई तो उसने ऑर्डर कराया कि विदेश में भारत की सरकारी संपत्तियों/कम्पनियों को बेचकर उसे हर्जाना दिया जाए।

वित्त मंत्राणी ने बहुत फूं-फां किया कि यह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। हम अपील करेंगे। अंतिम सांस तक लड़ेंगे। मजे की बात है कि जिन अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय पंचाट में पैरबी करनी थी, उस पद पर कई साल से नियुक्ति ही नहीं हुई।

आखिरकार सरकार की सांस टूट गई।

हाल ही में सरकार ने संसद में कानून लाकर रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स खतम कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारोबार सुगमता की दिशा में इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया।

अब भारत सरकार 7,900 करोड़ रुपये केयर्न को हर्जाना देकर समझौता करने जा रही है।

बाकी खुद ही गूगल पर खोजकर पढ़ डालें कि यह पूरा मामला क्या था।

खैर….

एक कहानी इस सरकार पर फिट बैठती है। एक व्यक्ति को किसी अपराध में 3 सजा चुनने का विकल्प दिया गया। 100 प्याज खा लो, 100 जूते खा लो या 100 स्वर्णमुद्राएँ दे दो। व्यक्ति ने 100 प्याज का विकल्प चुना। सोचा कि इसमें तो खाना ही है, नुकसान क्या है? 40 प्याज खाते खाते जान निकलने लगी तो बोला कि 100 जूते वाला विकल्प दिया जाए। 65 जूते पड़ने के बाद जब जान निकलने लगी तो उसने कहा कि 100 रुपये जुर्माना दूंगा।

अब सरकार केयर्न को 7,900 करोड़ रुपये जुर्माना देने जा रही है।

Latest 100 भड़ास