रीजनल चैनल्स के CEO पुरुषोत्तम वैष्णव समेत जी मीडिया के कई चेहरों से नकाब हटा, देखें वीडियो

कोबरा पोस्ट ने साबित कर दिया- ज़ी मीडिया पत्रकारिता की आड़ में सिर्फ हिंदुत्व और बीजेपी की सेवा कर रही है

ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानि जेडएमसीएल ने 1999 में ज़ी न्यूज़ चैनल लांच किया. आज ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के तीन नेशनल चैनल ज़ी न्यूज़, ज़ी हिन्दुस्तान और ज़ी बिजनेस हैं. इसी ग्रुप का ‘ज़ी व्योन’ अंग्रेजी का इंटरनेशनल चैनल है. इसके अलावा ज़ी मीडिया ग्रुप के ढेरों रीजनल न्यूज चैनल है. जैसे- ज़ी 24 तास (मराठी), ज़ी 24 कलक (गुजराती), ज़ी 24 घंटा (बंगाली), ज़ी मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़, ज़ी उत्तरप्रदेश/उत्तराखंड, ज़ी राजस्थान, ज़ी पंजाब/ हरियाणा/ हिमाचल, ज़ी कलिंगा न्यूज़ (उड़िया), ज़ी बिहार/ झारखंड और ज़ी सलाम (उर्दू) आदि. आज इस मीडिया ग्रुप के 19 करोड़ व्यूवर्स हैं. 9X मीडिया भी ज़ी ग्रुप का हिस्सा है जिसके अंदर 6 म्यूजिक चैनल्स और एक बॉलीवुड न्यूज़ पोर्टल है. डीएनए मुंबई आधारित अंग्रेजी समाचार पत्र है जो इसी ग्रुप का है.

26 मार्च 2018 को कोबरापोस्ट द्वारा ऑपरेशन 136 पहले पार्ट के रिलीज होने के बाद ज़ी न्यूज़ और ज़ी हिंदुस्तान ने ‘कोबरापोस्ट का काला सच नाम’ से एक सनसनीखेज़ कार्यक्रम प्रसारित किया. इस कार्यक्रम का एकमात्र उद्देश्य कोबरापोस्ट की तहकीकात को गलत साबित करने का था. हालांकि इस कार्यक्रम में ज़ी न्यूज़ ने अपने मुताबिक वीडियो और स्क्रिप्ट के जरिए खुद को पाक साफ दिखाने की पुरजोर कोशिश की. ऑपरेशन 136 पार्ट-1 में कोबरापोस्ट ने DNA और 9X Tashan के बड़े अधिकारियों का खुलासा किया था जिन्होंने हिंदुत्व को बढ़ावा देने पर अपनी सहमति जताई थी. इन अधिकारियों ने कुछ राजनीतिक नेताओं के खिलाफ चरित्र हत्या अभियान चलाने और पैसे के लिए अनुकूल कहानियां चलाने पर भी रजामंदी दी थी. 9X Tashan के सीनियर वाईस प्रेजिडेंट (एड सेल्स) राजीव शर्मा ने अपने ग्राहक पुष्प शर्मा को वादा किया था कि वो एजेंडे के अनुसार हिंदुत्व का प्रचार करेंगे.

पुष्प शर्मा ने ज़ी मीडिया ग्रुप के अलग-अलग रीजनल चैनल्स में बड़े पदों पर बैठे आठ और मार्किटिंग अधिकारियों से बातचीत की. यह देखने के लिए कि क्या उनके दुर्भावनापूर्ण प्रस्ताव को ये अधिकारी गर्मजोशी से ले रहे हैं या नहीं. हैरानी वाली बात ये है कि ये सब अधिकारी पुष्प शर्मा की मांगों से भी ऊपर जाकर इस एजेंडे पर काम करने के लिए राजी हो गए. पुष्प ने संतोष सेल्स एंड मार्किटिंग, गौरी महापात्रा हेड सेल्स एंड मार्किंग ज़ी कलिंगा; संजोय चटर्जी, बिजेनेस हेड ज़ी रीजनल ईस्ट, पुरुषोत्तम वैष्णव, सीईओ रिजनल न्यूज़ चैनल्स; सागर आरोड़ा, सीनियर मैनेजर सेल्स, ज़ी पंजाब, हिमाचल एंड हरियाणा; अमित कुमार, असिस्टेंट मैनेजर, ज़ी पुरवैया; प्रदीप कुमार सिन्हा, टर्शरी हेड सेल्स; अभिषेक पांडेय, सीनियर मैनेजर सेल्स, उत्तराखंड ज़ी न्यूज़ से बातचीत कर जी ग्रुप की सच्चाई जान ली.

भुवनेश्वर में ज़ी कलिंगा में सेल्स एंड मार्केटिंग टीम के सदस्य संतोष ज़ी न्यूज के साथ इस एजेंडे के लिए कॉर्पोरेट गठबंधन को तुरंत सहमत हो गए. संतोष बोर्ड पर अपनी वरिष्ठ गौरी महापात्रा को लाने के लिए तत्पर थे जो पत्रकार भुवनेश्वर कॉफी शॉप में मिले थे. उनके जूनियर ने ज़ी कलिंग सेल्स एंड मार्केटिंग हेड को पहले से ही इस एजेंडा के बारे में अवगत करा दिया था. अपने भारी भरकम बजट पर चर्चा करते हुए पुष्प गौरी महापात्रा को बताते हैं कि वो ओडिशा समेत तीन राज्यों में अपने मीडिया अभियान में ‘निवेश’ करना चाहते हैं, वो कहती हैं ऐसा लगता है कि यह एक भुगतान नहीं है, इसलिए यह एक और मदद होगी. पत्रकार पुष्प शर्मा कहते हैं कि यही तो वो चाहते थे। पुष्प महापात्रा से ये भी कहते हैं कि चूंकि आपका मालिक स्वयं बीजेपी से जुड़ा हुआ है, ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपका चैनल अनावश्यक रूप से हमारा पक्ष ले रहा है इसपर महापत्रा कहती हैं “हाँ, बिल्कुल … ऐसा दिखना चाहिए कि हम सभी के साथ हैं … हम हमेशा ऐसा कर सकते हैं”

पुष्प महापात्रा को बताते हैं कि हमारे आश्रम में डोनेशन द्वारा मिला बहुत सारा कैश है और पूछते हैं कि क्या हम कैश में पैंमेंट कर सकते हैं महापात्रा कहती हैं “Cash is welcome हां हां यहां एक बड़ी एजेंसी है वो हमेशा ऐसा कर सकते हैं”. पुष्प आगे पूछते हैं कि अब, मुझे बताएं कि आपका चैनल इन तीन राज्यों में सरकार बनाने में हमारी मदद कैसे कर सकता है? इसपर महापात्रा कहती हैं- हमारे पास कुल FPC के दिन हैं, हम इसे FPC fixed point chart कहते हैं, जैसे कि हमें पूरे सप्ताह के लिए योजना बनानी है वही हमारा FPC है। तो हमने योजना बनाई है कि हम दूर-दराज इलाकों में जा रहे हैं। यही चेयरमैन का एजेंडा भी है। तो यह पूरी तरह से हर एक पंचायत, हर एक ब्लॉक, ओडिशा के एक-एक कोने में जाने जैसा होगा। हम कोई जगह नहीं छोड़ेंगे। तो इस तरह हम add-on कर सकते हैं जैसे आपका कहीं पर कुछ हो रहा है… जैसे हमारे 30 वरिष्ठ [स्टाफ मेंबर] सभी जगहों पर होंगे, और 30 गुणा किए जाएंगे, 100, 200 लोगों तक जा सकते हैं, इसलिए वे एक नेटवर्क में होंगे। तो अगर ये अच्छी तरह से चला जाता है, अगर यह चेयरमैन के लिए ठीक है … तो हम साझा कार्यक्रम की तरह काम करेंगे।

ज़ी रिजनल ईस्ट के बिजनेस हेड संजोय चटर्जी से पुष्प मिलते हैं. पुष्प जब चटर्जी से पूछते हैं कि वह राजस्थान में चुनाव के दौरान एजेंडा को बढ़ावा देने में कैसे मदद कर सकते हैं, तो चटर्जी कहते हैं- हम आपकी योजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक कुछ भी और सब कुछ करेंगे, यह हमारी प्रतिबद्धता है, ठीक है। इसे दिन, रात, दोपहर, शाम में फैलाना होगा क्योंकि दर्शक हर जगह हैं। आप जानते हैं उन सभी प्रकार के दर्शकों को पकड़ने के लिए जिन्हें आपको हिंदुत्व चीज़ के बारे में विश्वास कराना है। कुछ आप की तरह बात करते हैं, कुछ मुझे पसंद नहीं करते हैं, मैं भी एक ब्राहमण हूं मैं चटर्जी हूं। इसलिए ये हम भी जानते हैं कि जो हमारा देश है वो कहां जा रहा है, और मैं आपसे कोई सेल्स वाली बात नहीं कर रहा हूं… ठीक है क्योंकि सेल्स पहले ही हो चुकी है। चलिए मान लेते हैं तो ये अच्छी बात है और यहां आने से पहले हम पुरुषोत्तमजी के साथ बैठे थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आप जाइए और उन्हें बताइए कि आपकी योजना को सफल बनाने के लिए चैनल हर एक मदद के लिए तैयार है। वह एक लाइनर है जो हम आपको बता रहे हैं।

पुष्प चटर्जी को कहते हैं कि जो प्लान आपने मुझे अभी बताया उससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता लेकिन हम आपको सारी रकम कैश में देंगे जो कि आस्ट्रेलिया के एकाउंट से आपके खाते में आएगी दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यहां पुष्प ने चटर्जी से गैरकानूनी तरीके से लेन-देन की बात की जिसपर चटर्जी ने कहा- ठीक है जहां तक finance की बात है, हम क्या कर सकते हैं हम शामिल कर सकते हैं, आप जानते हैं, एक व्यक्ति बाद में देखता है ??? हमारे नोएडा कार्यालय से … ठीक है.. मेरा और उसका काम मूल रूप से आपकी आवश्यकता को समझना है, संचार करना है, बातचीत करना है और उस आवश्यकता का ध्यान रखना है, ठीक है, और कीमत 10 करोड़ नेट होना चाहिए। आप जानते हैं कि उसकी बारीकियों को मुकेश जिंदल ने कैसे किया

इसपर पुष्प चटर्जी से उस उस आदमी के बारे में पूछते हैं तो चटर्जी उस शख्स के बारे में और उसकी विशेषता के बारे में विस्तार से बताते हैं- वो हमारे नोएडा ऑफिस से है.. वह ऐसी किसी भी चीज के लिए finance को संभालता है जो हम करते हैं… वह जानता है कि हम अपने उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, इसे कैसे प्रबंधित कर सकते हैं।अपने उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए।

इन्होंने आश्वासन दिया कि ज़ी के रीजनल चैनल अपना एजेंडा चलाएंगे, पत्रकार पुष्प अब यह जानना चाहते थे कि वे नकद भुगतान कैसे समायोजित करेंगे और किस अनुपात में। इसपर पुरुषोत्तम वैष्णव अपने ग्राहक को आश्वस्त करते हैं “वो तो हमारी टीम है वो कर देगा जैसा भी होगा हमारी बात हो जाएगी” इसके बाद चटर्जी पैमेंट का अनुपात बताते हुए कहते हैं- 50 प्रतिशत नकद और 50 प्रतिशत.

पत्रकार पुष्प कहते हैं कि मैं कुछ समझा नहीं इसके बाद चटर्जी पूरे लेन-देन के बारे में विस्तार से समझाते हैं- अगर आप चार राज्यों में देख रहे हैं तो हम 25 करोड़ लेंगे, 50% पैसा नकद में होगा और 50% चेक में होंगे। कुल मिलाकर चैक की रकम को ही दिखाना है.

पुष्प इनकी मंशा जानने के लिए फिर पूछते हैं कि इसका मतलब हम 12.5 करोड़ रूपये कैश में दे सकते हैं इसपर चटर्जी हां में जवाब देते हैं और contract sign करने की बात कहते हैं- हां, हम contract पर हस्ताक्षर करना शुरू कर देंगे, ठीक है। हम आपको देंगे कि प्रश्न कैसे डिजाइन किए जाने चाहिए।

इसके बाद पुष्प पुरुषोत्तम से पूछते हैं कि हमारे एजेंडा को चलाने के लिए जो रेट आपने हमें बताए हैं क्या उसमें थोड़ी छूट मिल सकती है इसपर पुरुषोत्तम कहते हैं “ये चीजें ये जाने मैं तो पत्रकार आदमी हूं मैं इससे ज्यादा नहीं जानता”. खुद को पत्रकार बताकर पुरुषोत्तम बड़े ही शातिराना अंदाज में खुद को मुद्दे से बचाते नज़र आते हैं.

पुष्प इन अधिकारियों से बताते हैं कि चैक द्वारा 12.5 crore रूपये का पैमेंट कर पाना उनके लिए मुश्किल भरा होगा लिहाजा बढ़िया होगा कि आप पूरी पैमेंट कैश के जरिए ले लें। इस पर पुरुषोत्तम आश्वस्त कराते हैं पुष्प को और कहते हैं ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, ये आपकी सुविधा के अनुसार हो जाएगा। पुरुषोत्तम कहते हैं “हमारी टीम है जो payments के part को देखती है वो लोग बात करेंगे आपके साथ आपके convenience पे हो जाएगा कोई बड़ा issue नहीं है …हम लोग उसके बहुत quoted unquoted commit नहीं कर सकते वो आपकी convenience पे हो जाएगा”.

ये सब देखने के बाद ये समझने की गुंजाइश ही नहीं बचती कि ज़ी समूह में एक अच्छी तरह से स्थापित तंत्र है जो अपने ग्राहकों से कैश में मिलने वाले पैसे को भी ठिकाने लगा सकता है। ये बात उस वक्त और ज्यादा पुख्ता हो जाता है जब एक वरिष्ठ पत्रकार, सीईओ और रीजनल चैनल के हैड के पद पर कार्यरत जिम्मेदार अधिकारी इस बात का आश्वासन देते हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा के चार राज्यों में अभियान चलाने के लिए पूरे दिन दो घंटे के लिए चटर्जी 25 करोड़ रुपये की बात कहते हैं और पूरा सौदा कैसे विभाजित होगा ये भी बताते हैं “25cr is the deal, okay, net … yes [excluding GST], देखिए कैश के ऊपर सवाल नहीं है 12.5जो जा रही है वो clientको देना है इसके ऊपर We will give you the deal. ये जो हमारी जो deal बनेगी वो 12.5 crore की deal बनेगी उसमें entitlement दिया जाएगा आपको and accordingly payment has to be made as full advance. Full advance means 12.5 [crore] which is 50 % is to be [paid] fully advance. That money will come from which account? Australian account?” (और उसके हिसाब से पूरा भुगतान पहले ही किया जाना है.. तो वो पैसा किस खाते से आएगा? ऑस्ट्रेलियाई खाते से? )

पुष्प चटर्जी को बताते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में मेरे खाते से धन हस्तांतरित नहीं किया जाएगा आप मुझे अपना ऑस्ट्रेलियाई खाता देते हैं तो खाते में रकम कोई और भेजेगा। चटर्जी उत्सुकता से पूछते हैं कि तो आप आस्ट्रेलिया से कब भेजेंगे इसी बीज इसके सहयोगी पुरुषोत्तम कहते हैं कि “Worldwide है जी Zee का तो” इसपर चटर्जी निश्चित रूप से मदद करने का आश्वासन देते हैं। “अगर वो Australia से नहीं हुई if in the country then obviously Zee Unimedia के नाम से cheque बनेगा” आगे पुरुषोत्तम कहते हैं कि “Zee International के नाम से deal हो जाएगी इसमें क्या है” इन अधिकारियों की बातों से पुष्प को पता लगता है कि सौदा करने के लिए ज़ी यूनिमीडिया या ज़ी इंटरनेशनल के नाम पर भुगतान स्थानांतरित किया जा सकता है।

पुष्प इन्हें बताते हैं कि ज़ी इस सौदे पर कैसे चल रहा है इस बारे में एक आवधिक समीक्षा होगी। इसपर चटर्जी आश्वासन देने हुए कहते हैं कि “वो तो कल जब मैं आपको बताया था ना कि पुरुषोत्तम जी का one liner view था मेरे को कि आपको जो भी help चाहिए from the editorial beat we have kept in mind. We will do everything.” (संपादकीय स्तर पर हमने ये ध्यान में रखा है, हम हर चीज़ करेंगे)

आगे बढ़कर पुरुषोत्तम पुष्प को आश्वस्त कराते हैं कि उनकी टीम पुष्प के एजेंडा को पूरा करने के लिए कुछ investigative stories भी चलाने को तैयार है “Content में जो आपकी तरफ से input आएगा वो absorb हो जाएगा …हमारी तरफ से जो content generate होगा investigative journalism हम लोग करते हैं करवा देंगे जितना हम लोगों ने किया है उतना किसी ने नहीं किया होगा वो हम लोग करेंगे”

जाहिर है ज़ी मीडिया के दोनों अधिकारी चटर्जी और पुरुषोत्तम एजेंडा को बहुत अच्छी तरह समझ चुके हैं और उन्होंने अपने कार्यों को भी बांट लिया है मसलन पेमेंट का लेने-देन चटर्जी संभालेंगे और संपादकीय स्तर पर पुरुषोत्तम मदद करने के लिए तैयार दिखे.

पत्रकार के पूछने पर कि कैसे वो investigative stories के जरिए हमारे एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे इसपर पुरुषोत्तम बताते हैं कि वो इस तंत्र का उपयोग कैसे करेंगे- “ये सारे AFP के part ही part रहेंगे … उसको screen पर किस तौर पर लेकर आना है वो script में देखेंगे तो आपको लग जाएगा.”

पुष्प इनसे ये भी पूछते है कि क्या वो विज्ञापन या किसी प्रायोजित कार्यक्रम की तरह टैगलाइन चलाकर इसकी घोषणा करेंगे कि ये कार्यक्रम प्रायोजित है इसपर पुरुषोत्तम आश्वस्त करते हैं कि “वो आप छोड़ दीजिए” इसपर पुरुषोत्तम के सहयोगी चटर्जी बताते है कि वो कैसे इस तंत्र का इस्तेमाल करेंगे “वो newspaper में आता है advertorial लिखा हुआ … लेकिन TV में ऐसा नहीं आता”

पत्रकार पुष्प कहते हैं कि चुनाव से कुछ महीने पहले आपको हमारे एजेंडा पर और ज्यादा aggressive होना होगा इसपर पुरुषोत्तम आश्वासन देते हैं कि “वो तो जो plan आप चाहें … election के time में तो वैसे भी इतनी अग्नि प्रजवलित हो चुकी होती है कि वो ऊर्जा अलग होती है ”

ये पुष्टि करने के लिए ये अधिकारी हमारे एजेंडा को अच्छी तरह से समझ चुके हैं और इसे चलाने के लिए भी तैयार हैं पत्रकार उन्हें फिर से बताते हैं कि उनके एजेंडे के चार अंक हैं। पुष्प एक बार फिर कहते हैं कि चुनाव के दौरान उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को टारगेट करना होगा ताकि हवाओं का रुख बदला जा सके इसपर पुरुषोत्तम कहते हैं कि “Done.”

पुष्प शर्मा का अगला पड़ाव था ज़ी मीडिया का चंडीगढ़ दफ्तर। यहीं से ज़ी के पंजाब, हरियाणा और हिमाचल रीजनल चैनल का संचालन होता है। यहां पुष्प की मुलाकात होती है सीनियर सेल्स मैनेजर सागर अरोड़ा से। पुष्प सागर को अपना एजेंडा समाझते हैं और उन्हें बताते हैं कि चुनाव में ध्रुवीकरण के लिए वो हिंदुत्व का प्रमोशन चाहते हैं, कट्टर हिंदूवादी नेताओं के भाषणों का प्रचार चाहते हैं और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का चरित्र हरण कराना चाहते हैं। व्यंग्यात्मक तरीके से पप्पू और बहनजी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उनकी छवि खराब की जा सके। पुष्प उन्हें बताते हैं कि उनकी पार्टी के लिए पंजाब में एक जमीन तलाशना सबसे महत्वपूर्ण है और इसके लिए हमारे मीडिया अभियान के माध्यम से अकालियों को उखाड़ फेंकना जरूरी है, और ये काम हम आपके चैनल को सौंपेंगे। तो वो investigative stories के जरिए कैसे उनकी मदद कर सकते हैं।

इसपर सागर अरोड़ कहते हैं कि “सर वो तो निकालते रहते हैं अभी इन्होंने बहुत लगाया बहुत पैसा कमाया है और election time में अगर हमारा चैनल closely watch किया हो पंजाब में.. हमारे चैनल ने अकालियों की जो बैंड बजाई है आप सोच नहीं सकते”

पुष्प पूछते हैं कि क्या वाकई आपने ऐसा किया है इसपर सागर कहते हैं कि “हां that is there …इन्होंने अकालियों को बिल्कुल नहीं छोड़ा.. इनके पांच-छह दिनों में एकदम change कर दिया और कुछ वोट convert भी हुई ”

अरोड़ा पुष्प को जिस तरीके से बता रहे हैं उससे अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि आज के दौर में मीडिया कितना शक्तिशाली हो सकता है, मीडिया किसी की किस्मत, राजनीतिक या व्यक्ति को बना भी सकता है और मार भी सकता है।

भोजपुरी में ज़ी मीडिया का प्रयास 2015 में ज़ी पुरवैया के लॉन्च के साथ शुरू हुआ था। भोजपुरी भाषा अधिकतर पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल तराई के इलाकों में बोली जाती है। आज देश में भोजपुरी भाषा के दर्जनों समाचार और मनोरंजन चैनल हैं इन्हीं में से एक है ज़ी पुरवैया। ये चैनल ज्यादातर बिहार और झारखंड के मुद्दों को उठाता है। पुष्प शर्मा ज़ी पुरवैया के पटना ऑफिस में जा पहुंचे यहां इनकी मुलाकात एसिस्टेंट मैनेजर अमित कुमार से हुई। पुष्प इनसे पूछते हैं कि क्या वो इनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों जैसे कांग्रेस, RJD, सपा और बसपा के खिलाफ अपने चैनल पर कंटेंट चला सकते हैं। पुष्प के सवाल पर अमित कहते हैं कि उनका चैनल pro-BJP है यानी चैनल की विचारधारा बीजेपी के पक्ष में है। “लाख हम कहें या दुनिया कहे कि हम भाजपा से supported हैं या भाजपा minded हैं जो कुछ भी हो but as a channel आपको अपनी विश्वसनियता को बनाए रखना होता है ठीक है मेरे मन में जो बात है वो तो कहीं न कहीं से निकलेगी और लोग समझते भी हैं इस चीज को pro होना ये लोग समझते हैं but directly नहीं बोलते”

यह सुझाव देते हुए कि यदि हम पैनल चर्चा के दौरान अपने विरोधियों पर हावी होना चाहते हैं हमारे पास मजबूत मुद्दे होना चाहिए और इसमें अनिवार्य कौशल होना चाहिए इसपर उन्होंने वादा किया कि वो इस संबंध में चैनल के क्षेत्रीय प्रमुख (regional head) से बात करेंगे “वही-वही वाकपटुता चाहिए वो तो ये चीज मैं Resident Director साहिब से बात कर लूंगा..आवश्यकता पड़ी तो मैं आपकी बात भी करा दूंगा वो उस level पर हमारी पूरी कोशिश रहेगी पैरवी रहेगी कि इन्हें chance दिया जाए Hope they may consider”(उम्मीद है कि वे इसपर विचार कर सकते हैं)

पुष्प की अगली मुलाकात प्रदीप कुमार सिन्हा से होती है। प्रदीप ज़ी पुरवैया चैनल में Territory Sales Head के पद पर कार्यरत हैं। पुष्प इन्हें बताते हैं कि वो अपने मीडिया अभियान को चैनल पर चलाने के बदले जो पेमेंट देंगे वो कैश में होगा इस पर सिन्हा कहते हैं कि इसके लिए उन्हें किसी तीसरी पार्टी को बीच में शामिल करना पड़ेगा “इसमें तो हमें फिर एजेंसी को involve करना पड़ेगा क्योंकि होगा क्या हमारे यहां क्या है ना कि सब आपके GST number, PAN card जैसे ही डालेंगे ना तो white money …या अगर हम यहां से agency involve करते हैं तो कुछ हमें agencyसे रास्ता निकालना पड़ेगा” तुम्हारा मतलब है कि परेशानी हो सकती है ?

यह जानने के बाद कि उनके पास कुछ एजेंसी है जो उन्हें उनके ग्राहकों से भुगतान के लिए मिलने वाले मोटे कैश को कम करने में मदद कर सकती है पुष्प ने इनसे अगला सवाल पूछा कि क्या वो बिहार और झारखंड दोनों में अपनी पैनल चर्चाओं में प्रतिद्वंदी राजनीतिक दलों को झुका सकते हैं इस पर सिन्हा कहते हैं कि हम ऐसा केवल ज़ी के पटना स्टेशन पर ही कर सकते हैं “ये तो यहीं से होगा वो तो हो जाएगा सर ये चैनल it covers Bihar and Jharkhand दोनों”

आगे ये हमें बताते हैं कि “जब हमारा negotiations सब चीज़ हो जाएगा तो we can manage that… वहां पर लोग different party के बैठेंगे जो representativeहोंगे उनको भी बिठाएंगे..वो कोई दिक्कत नहीं है… वो identify कर देंगे कि किनके कैसे करना है किनके तो clear picture हो जाएगा”

जब एक territory sales head जैसे पद पर बैठा उच्च अधिकारी इस एजेंडा पर काम करने के लिए राजी हो जाता है इसके बाद शक की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है कि ज़ी मीडिया एक जिम्मेदार पत्रकारिता की कसौटी पर कितना खरा उतर रहा है।

सिन्हा ये भी आश्वासन देते हैं कि वो पुष्प के एजेंडा को पूरी कवरेज देने के लिए चैनल कुछ रिपोर्टर भी नियुक्त करेगा “जहां जहां आप करोगे वहां हमारा रिपोर्टर पहुंच जाएगा हर जगह Even then प्रखंड level पर हमारा रिपोर्टर है, block में है, district में है हर जगह”

ज़ी समूह के ये कर्मचारी इस सौदे को पक्का करने के लिए इतने उत्सुक थे कि इन्होंने शर्मा को प्रस्तावित एजेंडा को चलाने के लिए बाकायदा प्रपोजल भी भेजे। लेकिन जब पुष्प ने इनके email का कुछ कारणों की वजह से जवाब नहीं दिया तो अमित कुमार ने पुष्प को फोन कर इस एजेंडे को चलाने की बात कही “हां एक revert कर दिया जाए मैं call arrangeकरता हूं बाकी सारी details मैंने अपने deed के साथ आपने देखा होगा banking details वगैरह सब दिया हुआ था उसमें”

पुष्प ने अमित से कहा कि वो इस एजेंडा के बारे में अपने सीईओ पुरुषोत्तम से बात करें, इसपर अमित ने कहा कि “मैं वो बिल्कुल discuss कर लूंगा सर आज ही मैं arrange करा दूंगा आपकी call.”

पुष्प ने कहा कि आप प्रपोजल में उल्लेख नहीं कर सकते हैं कि आपका हिंदुत्व के प्रति एजेंडा और प्रतिद्वंदी झुकाव रहेगा लेकिन यह आपके बॉस पुरुषोत्तम के संज्ञान में होना चाहिए। यहां अमित कहते हैं कि “बिल्कुल मैं बिल्कुल आज ही call arrange कराऊंगा वो तो वैसे भी written में नहीं आएगा वो तो verbally चलेगा” अमित कहता है कि उन्हें पुष्प के प्रस्ताव की स्वीकृति है कि “हां तो आप एक revert कर दें सर मैं फिर पुरुषोत्तम जी से बात करा दूंगा आपकी बात करा….”

उत्तराखंड ज़ी न्यूज़ के सीनियर मैनेजर सेल्स अभिषेक पांडे से भी पुष्प की मुलाकात हुई इन्होंने भी एजेंडा को सुना और हर बात पर तैयार दिखे जैसा भी पूरे ज़ी समूह में देखा गया है। पत्रकार के साथ अपनी बातचीत में, पांडे ने फिर से समर्थक हिंदुत्व और समर्थक भाजपा के बारे में बताया। पुष्प ने पांडेय को पप्पू वाले FM jingles सुनाए और पूछा कि क्या आप इस तरह का मीडिया कैंपन चला सकते हैं। पांडेय को इसमें कोई गुरेज नहीं था वो बोले “Indirect way में है वो तो.. कोई दिक्कत नहीं है उसमें”

पांडेय की बात से ये साफ जाहिर था कि उन्हें पुष्प के प्रतिद्वंदियों के चरित्र हरण में भी कोई गुरेज नहीं है आगे पुष्प ने पांडेय को बताया कि सपा और बसपा जैसे प्रतिद्वंदी दलों के खिलाफ आक्रामक झुकाव होना चाहिए। पांडेय ने सहमति जताते हुए कहा कि “इन्होंने ही सबसे ज्यादा dent मारा है हिंदुत्व पे” अब पुष्प पांडेय से कहते हैं कि वो इस बात को लिखें कि शुरुआती तीन महीने उन्हें soft Hindutva का एजेंडा चलाना है लेकिन जैसे ही चुनाव नज़दीक आएगा वो चाहेंगे कि ज़ी उनके अभियान को उग्र तरीके से चलाए ताकि सांप्रदायिक लाइनों पर मतदाताओं को ध्रुवीकरण किया जा सके। इसपर पांडेय ने तुरंत जवाब दिया कि “ठीक है.. हां हां ठीक है”

आगे पुष्प ने पांडेय से मांग की कि आपको एसपी, बीएसपी और कांग्रेस के खिलाफ investigative stories चलानी होंगी इस पर पांडेय ने हां में जवाब दिया “जी जी जी हूं ठीक है..हूं हूं”

ज़ी के इस अधिकारी को पुष्प बताते हैं कि इस सौदे में संपादकीय व्यवस्था का हिस्सा होगा लेकिन हम इस बारे में संपादकीय टीम से चर्चा नहीं करेंगे इसी बीच पांडे कहते हैं कि “नहीं नहीं वो हम करेंगे”. पुष्प कहते हैं कि जब हमारे किसी भी नेताओं या उनके रिश्तेदारों के खिलाफ मीडिया में कहानियां दिखाई देती हैं, तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है तो पांडेय कहते हैं कि “ठीक बात है.. नहीं हम वहीं करते हैं सर ज़ी को तो आप जानते ही हैं soft Hindutva और भाजपा”. पत्रकार पुष्प एक बार फिर इन्हें इनका वायदा याद दिलाते हैं और बतातें है कि उन्हें ऐसे नेताओं और पार्टियों पर खास ध्यान देना होगा जो उनके खिलाफ हैं इसपर पांडेय कहते हैं “हां हम देख लेंगे” पुष्प पांडेय को याद दिलाते हैं कि उनके चैनल को खास तौर पर तीन प्रतिद्वंदी पार्टियों की बैंड बजानी होगी इस पर पांडेय कहते हैं कि “ठीक है वो तो बज जाएगी.. खूब बज जाएगी”. इस सौदे को हासिल करने की उत्सुकता में, ज़ी अधिकारियों ने अपने संभावित ग्राहक पुष्प शर्मा को तीन प्रस्ताव (प्रपोजल) भेजे। इससे से स्पष्ट हो जाता है कि ज़ी मीडिया पत्रकारिता की आड़ में सिर्फ हिंदुत्व और बीजेपी की सेवा कर रही है।

कौन है ये जी ग्रुप

ज़ी न्यूज़ अपनी कट्टर हिंदूवादी मानसिकता को लेकर चर्चा में रहता है. ज़ी न्यूज़ और जिंदल प्रकरण में ज़ी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ़ सुधीर चौधरी और उनके सहयोगी समीर आहुवालिया जिंदल समूह से 100 करोड़ रुपए की रिश्वत लेते देखे गए थे. फिर भी ये खुद को राष्ट्रवादी चैनल घोषित करते रहते हैं. जिंदल प्रकरण मे तो जी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ़ सुधीर चौधरी और समीर आहुवालिया को दिल्ली पुलिस ने 2012 मे गिरफ्तार भी किया था. जितना संभव हो उतनी आंखों को आकर्षित करने के उत्साह में सुधीर चौधरी ने एक फर्जी स्टिंग ऑपरेशन को भी अंजाम दिया था. सितंबर 2007 में सुधीर चौधरी लाइव इंडिया के सीइओ और एडिटर थे. ये स्टिंग ऑपरेशन एक महिला के खिलाफ था जो दिल्ली के सरकारी स्कूल में टीचर थी. इस स्टिंग ऑपरेशन में उस महिला को वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाली के रूप में दिखाया गया था. इस फर्जी वीडियो को चैनल पर दिखाए जाने के बाद महिला को ना सिर्फ समाज में बदनामी का दंश झेलना पड़ा बल्कि गुस्साई भीड़ ने उसपर हमला तक कर दिया था. हालांकि जब जांच में स्टिंग ऑपरेशन के फर्जी होने की सच्चाई सामने आई तो इस स्टिंग ऑपरेशन को करने वाले सुधीर चौधरी के सहयोगी प्रकाश सिंह को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और झूठी खबर दिखाने के आरोप में चैनल को भी तीन महीने के लिए ब्लैक आउट किया गया था.

पिछले कुछ वर्षों में ज़ी न्यूज राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का एक सम्मानित चैंपियन बनने की कोशिश में लगा है खासतौर पर बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद ज़ी समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्र ने बीजेपी के सपोर्ट से राज्यसभा में जगह बनाई. फरवरी 2016 में भी दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी को सत्तारूढ़ पार्टी और उसकी सरकार द्वारा निंदा का सामना करना पड़ा इसकी वजह थी ज़ी न्यूज पर प्रसारित किया गया वो सिद्धांतिक वीडियो जिसमें कुछ जेएनयू छात्रों को भारत विरोधी नारे लगाते दिखाया गया था. वीडियो प्रसारित होने के तुरंत बाद जेएनयू के छात्रों और छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस हरकत में आ गई हालांकि पुलिस अभी तक इस वीडिया की प्रमाणिकता का पता नहीं लगा पाई कि वाकई ये वीडियो वास्तविक था भी या नहीं.

देखें संबंधित वीडियो…

साभार- कोबरा पोस्ट
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Comments on “रीजनल चैनल्स के CEO पुरुषोत्तम वैष्णव समेत जी मीडिया के कई चेहरों से नकाब हटा, देखें वीडियो

  • Kritil Mahadev says:

    दुष्कर्म करते रंगे हाथ पकड़ी जाने वाली औरत यही शोर मचाकर अपनी इज़्ज़त बचाती है कि मेरे साथ बलात्कार हो रहा था.

    BREAKING – Actually BJP President Shri Bangaru Laxman was conducting “reverse sting” on Tehelka reporter while accepting cash for defence deals.
    Note- Zee and Vinit jain claims conducting reverse sting on Acharya Atal

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  • Kritil Mahadev says:

    पुरुषोत्तम वैष्णव नाम के इस आदमी को देखकर लगता है ये कोई दलाल ही होगा. आग से खेलने का शोक पूरा हुआ ? भाई आग से खेलते खेलते इज़्ज़त लुटवा बैठा. पुष्प शर्मा और कोबरा ने बलात्कार कर दिया ज़ी गेंग का. और इस दलाल का भी . पुरुषोत्तम जैसा फिल्मो चोर कैरेक्टर सिर्फ सनसनी मचा रहा था. सिक्के का दूसरा पहलु देखकर तस्वीर साफ़ हो जाती है.
    जरा ये सब देखिये. धन्यवाद् भड़ास

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    • लगता है तेरे दिमाग में भूसा भरा होगा, तभी सिक्के का पहला पहलु ठीक से नहीं देखा , मूर्ख इंसान भी समझ सकता है कि रिवर्स स्टिंग उसी का होता है जिसकी संदिग्ध बातों को सुनकर कान खड़ा हो जाए, लेकिन तूझे खबरों से ज्यादा इंटरेस्ट पुरुषोत्तम वैष्णव में है, जिससे जाहिर होता है कि तू फर्जी का इंसान है और फेक आईडी बनाकर यहां कूद पड़ा है और हां तू किसी आका के इशारे पर नाच रहा है

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      • Kritil Mahadev says:

        पुरुषोत्तम अपने राष्ट्रवादी चैनल पर राष्ट्रवादी पत्रकारिता सीखा रहा था और अगर तेरी बात को सच भी मान लूँ तो बच्चे भुवनेश्वर की चार मीटिंग के चार वीडियो दिखा. खली एक वीडियो पर बन्दर की तरह से उछलता रहेगा क्या. या तू भी राष्ट्रवादी पत्रकारिता पढ़के आया है ? पुरुषोत्तम बेटे से जाकर बोल वो जाकर टूशन लेले स्टिंग करने की.चंडीगढ़ का स्टिंग फिर पटना का स्टिंग अबे ज़ी की दुकान खुली हुई थी कोई भी जायके इंजेक्शन लगा आया और अब भी सफाई दे रहा है राष्ट्रवादी पत्रकारिता की. गोली देना बन कर चल पे टी एम् कर.

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  • ADITYA JHA says:

    झांसे में आना उसे कहते हैं जब कोई सामने वालों की बातों को सच मान ले और उसकी शर्तों पर हामी भर दे, लेकिन ज़ी वालों ने पुष्प शर्मा की मंशा को पहले ही भांप लिया था और उल्टे उसका ही स्टिंग कर डाला। इतनी ही हिम्मत थी तो क्यों नहीं पुष्प शर्मा के स्टिंग का खरीदार कोबरापोस्ट ने बताया कि पुष्प शर्मा को वहां मुंह की खानी पड़ी थी और उनका ही स्टिंग हो चुका था। स्टिंग का नियम भी तो यही कहता है कि सामने वालों के मन मुताबिक बात कर उसकी मंशा या राज उगलवाया जाए। जी वालों ने तो भी यही किया कैमरे लगाकर स्टिंग करते रहे और पुष्प शर्मा को शब्दों के जाल में फंसाकर उसका राज उगलवाने की कोशिश में लगे रहे। बेवकूफ से बेवकूफ इस बात को समझ सकता है लेकिन जिसकी मंशा ही हो एक खास संस्थान के खिलाफ एजेंडा चलाना तो उसे पत्रकारिता नहीं दलाली कहेंगे।

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    • Kritil Mahadev says:

      झा सबसे पहले टेप्स देख ले .ज़ी ने सिर्फ एक वीडियो चलाया और कोबरापोस्ट ने भुवनेश्वर की चार मीटिंग्स के वीडियो दिखाए.
      सबसे पहला संतोष का ज़ी के ऑफिस मैं दूसरा गौरी का कैफे कोफ़ी डे मैं , तीसरा चटर्जी का होटल मैं और लास्ट वाला जो दोनों के किये ज़ी ने भी और पुष्प ने भी.
      बाकि के तीन वीडियो भी हैं या सिर्फ ज़ी न्यूज़ का तिहाड़ी है क्या जो राष्ट्रवादी पत्रकारिता की आध मैं सिर्फ धंधा करती है

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    • Kritil Mahadev says:

      भुवनेश्वर की ४ मीटिंग और चार वीडिओज़ के चार विज़ुअल और ज़ी ने एक वीडियो चलाया क्यों?
      बाकि क्या पैसा उघाने के लिए संभाल कर रखे थे?
      ज़ी रीजनल का हीरो टपोरी पुरुषोत्तम एक भीगी बिल्ली बनके अपना स्टिंग करवा रहा था वहां? दूर कोने मैं कैमरे लगाए वो भी एक ही मीटिंग मैं और पुष्प तो सामने से कैमरे लगा कर स्टिंग कर रहा था. नविन जिंदल का भी स्टिंग करने गए थे न तुम लोग ? अपना करवा के आये थे ?
      बाकि तीन मीटिंग के वीडियो है तो वो दिखा अब या 1 ही वीडियो की बात करके सफाई देगा?

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  • यशवंत जी बिना वेरिफाई किए और दूसरे पक्ष के विचार जाने बिना खबरों को अपनी वेबसाइट पर जगह नहीं देना चाहिए थे

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    • Kritil Mahadev says:

      यशवंत को बेवकूफ समझा है क्या ? एक एक वीडियो का सच देखा जा चुका है. अपनी कहानी राष्ट्रवादी चैनल पे चला भड़ास पे अपना दर्द मत रो.

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  • Kritil Mahadev says:

    The Cobrapost sting operation 136
    In fact, the sting operation provides an explanation for the warped coverage we have been seeing in the last four years on several television channels as well as in sections of the print media. Be it the agrarian crisis, unemployment, Dalit issues, demonetisation, Love Jihad, communal tension, Indo-Pak relations or Kashmir, the motivated stories (sometimes fake or twisted) were obviously run unfiltered probably on orders from top bosses in media organisations. So, is it not within the realm of possibility that deals, like the one discussed in the sting operation, were negotiated between newspaper CEOs and the government or the BJP?

    Let us for a moment imagine that in the sting operation, the client was not an undercover reporter but someone negotiating on behalf of the government or the BJP. Would the managements have obliged him or her? It is safe to assume that they would have rolled out the veritable red carpet. And as a quid pro quo may have readily settled for a healthy quantum of government ads and an audience with key members of the ruling dispensation. Payments would thus be through a clever and covert ‘be our friend and reap the rewards later’ scheme.

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  • Kritil Mahadev says:

    All Hail Acharya Atal!

    By holding up a mirror to those who are meant to hold a mirror to power, Cobrapost’s Acharya Atal has emerged a true guru of our times. Those stung by the Cobrapost expose may scramble for cover, rush for court injunctions and take-down orders, or valiantly pretend that they went along with the Cobrapost sting only in order to sting them back, but the manner in which they succumbed to the Acharya’s gilded plan of peddling media content that reflects a Hindutva-fuelled, opposition-mukt politics indicates that they are by no means unfamiliar with such proposals. So, perhaps, far from being the figment of the Cobrapost’s imagination, such multi-crore allurements may well have become part of the business model of some of the biggest media players of democratic India. The persuasive skills of many an acharya could be behind the hitherto inexplicable discarding of basic journalistic norms that stamps media content today. The Radia Tapes episode, which broke in 2011, had indicated that ‘acharyas’ come in all shapes, sizes, gender, and have been around a while. But the mainstream journalism on view since the run up to the 2014 election and thereafter, which is not just biased but appears to flow directly from the government’s publicity machine, could only have been shaped by multiple acharyas turning on the spigots.

    Will this surgical sting lead to some introspection in media ranks? As the writer of The Wire piece, ‘Forget the Cobra That Stings, We Need to Worry About the Media That Poisons’ argues, “Instead of retreating into a shell of denial, the Indian media needs to use this occasion to stem and reverse the rot which lies exposed.” But that will not happen if the business model of these gargantuan empires continue to remain beyond scrutiny and reform. The Wire ran with the story from the moment Dainik Bhaskar, which prides itself on its “trustworthiness” going by the logo, sought an ex-parte injunction to restrain Cobrapost. Which is just as well, because it is precisely because the mainstream media is what it is, that news portals like this one that don’t engage with acharyas, are emerging as credible news alternatives.

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