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चिदंबरम बाप-बेटे अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ 20 बार कोर्ट से संरक्षण हासिल कर चुके हैं!

Abhishek Upadhyay : सभी कानून की पढ़ाई करने वालों को पी चिदंबरम की एक तस्वीर फ्रेम कराकर अपनी झोली में रख लेनी चाहिए। कानून का इतना फायदा आज तक आजाद भारत के इतिहास में किसी ने उठाया है क्या? ये व्यक्ति जिसके खिलाफ खुली रिश्ववतखोरी के सबूत हैं। जिसके परिवार की विदेशों में हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति के दस्तावेज सामने आ चुके हैं।

ये आदमी जिसके वित्त मंत्री रहते हुए एक के बाद दूसरे मामले में खुलेआम रिश्वत खाने की दस्तावेजी शिकायतें हैं। जिसके बेटे पर डीलरों को अपने बाप से मिलवाने तक के कमीशन खाने के संगीन आरोप हैं। आज वही आदमी कानून को अपनी जेब में लेकर घूम रहा है। पहले पूरे 15 महीने तक अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट से दनादन आर्डर हासिल करता रहा। अब गिरफ्तार होने के बाद तिहाड़ जाने से बचने के लिए भी कोर्ट की राहत के कागज जेब में डालकर बैठा है।

पिछले करीब डेढ़ सालों के दौरान ये चिदंबरम बाप-बेटे अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ 20 बार कोर्ट से संरक्षण यानि प्रोटेक्शन हासिल कर चुके हैं। 20 बार! जी हां, 20 बार!!

सीबीआई गिरफ्तार करती है तो ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा देते हैं और गिरफ्तारी से राहत भी ले आते हैं। आप सोचिए कि पी चिदंबरम पिछले साल जुलाई में ही एयरसेल मैक्सिस मामले में चार्जशीटेड हो चुके हैं मगर इस मामले में सीबीआई उन्हें आज तक गिरफ्तार नही कर सकी है।

आलम ये है कि सीबीआई चिदंबरम के बेटे कार्ति के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करती है तो छोटा चिदंबरम उसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट से राहत ले आता है। जिस देश में एक आम आदमी जेल भेजे जाने के बाद सालहा साल जमानत के लिए तरस जाता है।

जिस देश में एक आम आदमी जमानत के पैसे इकट्ठे न कर सकने के कारण सालहा साल जेल में सड़कर मर जाता है। वहां चिदंबरम जैसे धनपशुओं का यूं कानून को अपनी जेब में लेकर घूमना, बस इतना ही साबित करता है कि इस देश की जेलों में सड़ रहे हर गरीब को अगले जनम में चिदंबरम बन जाने की मनौती मांगनी चाहिए। लानत है ऐसे लोकतंत्र पर!

टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की एफबी वॉल से.

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