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उत्तर प्रदेश

आम्रपाली वाले चोर बिल्डर अनिल शर्मा के पूरे गिरोह का पर्दाफाश करना जरूरी : सुप्रीम कोर्ट

चोर बिल्डर अनिल शर्मा के जेल जाने की तारीख धीरे धीरे नजदीक आती जा रही है. इसके कारनामें खुलने लगे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चोर बिल्डर अनिल शर्मा ने आम्रपाली कंपनी के जरिए खरीदारों से पैसे लेकर उसे यहां वहां ठिकाने लगाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ”रियल एस्टेट बिजनस के आम्रपाली कंपनी समूह ने खरीदारों से जुटाए पैसे को हेराफेरी कर दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया है. इस बड़ी धोखाधड़ी में शामिल बड़े गिरोह को सामने लाना ही होगा. समूह द्वारा इधर-उधर किए गए धन को वापस निकालना होगा। इसी के लिए यह फरेंसिक ऑडिट है और यह इसलिए भी है कि इस सबके पीछे जिम्मेदार लोगों को पकड़ा जाए और जरूरी हो तो उन्हें जेल भेजा जाए।”

जस्टिस अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ को खातों में आपराधिक हेराफेरी की जांच करने वाले ऑडिटरों ने बताया कि कंपनी के दस्तावेज बताते हैं कि समूह की एक कंपनी द्वारा गौरीसूत इन्फ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड को 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हेराफेरी से पहुंचाई गई. फरेंसिक आडिटरों ने यह भी कहा कि कानून के तहत नियुक्त कंपनी के ऑडिटरों ने भी गड़बड़ियां की हैं. वे अपने कर्तव्य पालन में पूरी तरह विफल रहे. गौरीसूत के डायरेक्टर आशीष जैन और विवेक मित्तल समूह के कानूनन नियुक्त ऑडिटरों के रिश्तेदार बताए जाते हैं.

उन्होंने पीठ बताया कि आम्रपाली ग्रुप के सीईओ चंदर वाधवा मामले में सहयोग नहीं कर रहे हैं. फारेंसिक ऑडिटरों रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल ने न्यायालय को बताया- वाधवा को यह याद है कि उनकी शादी कब हुई. उसे अन्य निजी बातें भी याद हैं. बस यह याद नहीं है कि वह आम्रपाली ग्रुप से कब जुड़े थे. आडियरों के मुताबिक उन्हें समूह की कुछ कंपनियों द्वारा घर खरीदारों के पैसे का हेरफेर करने की जानकारी मिली है और इसके लिए कुछ मुखौटा कंपनियां भी बनाई गई थीं.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने यह सब सुन कर कहा, ‘यह एक बड़ा गिरोह है जिसका पर्दाफाश जरूरी है। आम्रपाली समूह ने बड़ी धोखाधड़ी की है। हम देखते हैं कि क्या किया जा सकता है।’

इस बीच, फारेंसिक ऑडिटरों ने आम्रपाली ग्रुप की कंपनियों के वित्तीय गड़बड़झाले की जांच को लेकर अपनी पहली रिपोर्ट पेश की. ऑडिटरों ने रिपोर्ट में विस्तार से बताया है कि किस तरह होमबायर्स के पैसों को निर्माण और हाउजिंग प्रॉजेक्ट्स के बजाय दूसरे उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि होमबायर्स के पैसों का एक बड़ा हिस्सा प्रफेशनल चार्जेज के नाम पर डायरेक्टरों की जेब में गया. इस तरह डायरेक्टरों को करोड़ों रुपये दिए गए.

सुप्रीम कोर्ट ने ऑडिटर रवि भाटिया और पवन कुमार अग्रवाल को यह जिम्मेदारी दी है कि वे पता लगाएं कि होमबायर्स के 2,765 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसों को किस तरह दूसरे उद्देश्यों के लिए खर्च किया गया. ऑडिटरों को आम्रपाली ग्रुप की सभी 46 कंपनियों की फरेंसिक ऑडिट के लिए कहा गया है। ऑडिटरों की रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि होमबायर्स ने जो पैसे दिए, उनसे प्रॉजेक्ट्स आसानी से और समय पर तैयार हो सकते थे लेकिन कंपनी ने उन पैसों को दूसरे उद्देश्यों के लिए डायवर्ट कर दिया, जिस वजह से हाउजिंग प्रॉजेक्ट्स वित्तीय संकट से जूझने लगें और निर्माण में देरी हुई.

ऑडिटरों ने इस रिपोर्ट को ग्रुप की 46 में से 2 कंपनियों- आम्रपाली सैफायर डिवेलपर्स लिमिटेड और आम्रपाली जोडिएक डिवेलपर प्राइवेट लिमिटेड के लेनदेन विवरणों की जांच के बाद तैयार किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि आम्रपाली सैफायर ने ग्रुप कंपनियों में 129 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. ये पैसे किस उद्देश्य से दिए गए, इसकी जांच अभी होनी है. रिपोर्ट के मुताबिक होमबायर्स के 100 करोड़ रुपयों को आम्रपाली इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयरों में निवेश किया गया और 36 करोड़ रुपये दूसरी कंपनियों को दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल शर्मा और डायरेक्टर शिव प्रिया को कंपनी की तरफ से प्रोफेशनल चार्जेज के रूप में 2.41 करोड़ रुपये दिए गए. आम्रपाली जोडिएक के होमबायर्स के करीब 242 करोड़ रुपये को दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर किया गया.

इस बीच, वकील एम. एल. लाहोटी ने एक याचिका दाखिल की है, जिसमें आम्रपाली ग्रुप पर आरोप लगाया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सभी 46 कंपनियों के सभी डायरेक्टरों के नामों का खुलासा नहीं कर रहा है. होमबायर्स की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए लाहोटी ने कहा कि आम्रपाली ग्रुप की कंपनियों में कम से कम 102 डायरेक्टर/एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं, न कि 92, जैसा कि ग्रुप दावा कर रहा है. होमबायर्स ने अपनी याचिका में कहा है कि लाहोटी को पता चला है कि कंपनी में कम से कम 102 डायरेक्टर/एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं और ऐसा लगता है कि 16 नामों को ग्रुप जानबूझकर छिपा रहा है. याचिका में कहा गया है कि इन 16 डायरेक्टरों में आम्रपाली सीएमडी अनिल शर्मा की दो बेटियों स्वप्निल शिखा और दीपशिखा, उनकी पत्नी पल्लवी मिश्रा समेत प्रमोटरों और डायरेक्टरों के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं.

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