दिग्विजयी दांव के सामने चुनाव को धर्म युद्ध बनाने की कवायद!

कांग्रेस द्वारा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद हाई प्रोफ़ाइल हुए इस सीट पर भाजपा में यह खलबली मची थी कि आखिर पार्टी का कौन सा नेता उन्हें चुनावी मैदान में कड़ी टक्कर देने में सक्षम हो सकता है। पार्टी के अंदर बहुत से नामों पर विचार किया गया ,परन्तु किसी पर सहमति नहीं बन सकी तो कोई स्वयं ही दिग्विजय सिंह की चुनौती स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ। अंत में यह चुनौती स्वीकारी साध्वी प्रज्ञा भारती ने, जिन्होंने भोपाल से पार्टी प्रत्याशी बनने के लिए दो दिन पूर्व ही पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। साध्वी प्रज्ञा भारती ने पहले ही पार्टी नेताओं के समक्ष अपनी यह इच्छा व्यक्त की थी कि वह दिग्विजय सिंह के सामने भोपाल से खड़ा होना चाहती हूँ।

दरअसल प्रज्ञा भारती को भोपाल से उम्मीदवार बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं संघ ने महती भूमिका निभाई है, जिसके कारण ही उन्हें भाजपा ने भोपाल से उम्मीदवार बनाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि दिग्विजय के मुकाबले के लिए भाजपा ने सक्षम उम्मीदवार चुनने में इतना अधिक वक्त लगाया कि विपक्ष सहित मतदाता भी इसे पार्टी की कमजोरी के रूप में देखने लगे है। लगभग 20 से दिनों के मंथन के बाद पार्टी ने साध्वी प्रज्ञा भारती पर दांव लगाया है। हालांकि प्रज्ञा भारती भाजपा की न तो प्राथमिक सदस्य रही है और न ही उन्हें स्थानीय कहा जा सकता है ,लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सभी पार्टी कार्यक्रताओं का पूरा सहयोग मिलेगा। साध्वी प्रज्ञा भारती का यह आत्मविश्वास अपनी जगह सही है, परन्तु पार्टी भी इस हकीकत से वाकिफ है कि भोपाल जैसी हाईप्रोफाइल सीट पर उसे अपना उम्मीदवार तय करने में वक्त लगाकर उसने कांग्रेस को चुनावी तैयारी करने में परोक्ष मदद की है।

भाजपा ने जब प्रज्ञा भारती को अपना उम्मीदवार घोषित किया तब तक दिग्विजय सिंह चुनव जीतने के लिए अपनी रणनीति तय कर चुके थे और चुनावी मैदान में अपनी व्यूह रचना को अंतिम रूप देने में भी वे सफल होते दिख रहे है। भाजपा प्रत्याशी की घोषणा में हुआ अप्रत्याशित एवं आश्चर्य जनक विलंब पार्टी कार्यकताओं के लिए भी उलझन का कारण बना रहा है । दरअसल कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे थे कि जब पार्टी का नेतृत्व यहां से प्रत्याशी तय करने में इस तरह अनिर्णय का शिकार बना हुआ है तब उनसे ऐसी अपेक्षा कैसे की जा सकती है कि वे पार्टी के प्रचार अभियान में अपना योगदान जोर शोर से देते रहे। इसके विपरीत कांग्रेस पार्टी ने शुरू में ही पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता दिग्विजय को भोपाल सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया ,जिसके बाद पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं में उमंग और उल्लास की लहर दौड़ गई और वे बिना देरी किए पार्टी के प्रचार अभियान में जुट गए थे। यही कारण है कि 1991 से ही भाजपा का गढ़ बनी हुए भोपाल लोकसभा सीट पर कांग्रेस की चुनौती ने भाजपा को चिंता में डाल रखा है। राज्य की पूर्ववती भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जो मौजूदा चुनाव में राज्य में पार्टी के प्रचार अभियान की बागडौर थामे हुए है, ने सभी पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से साध्वी को जिताने के लिए आपसी मतभेद भूलकर एकजुट होने की अपील की है, परन्तु वे भी इस सच्चाई से अनजान नहीं है कि देरी से प्रत्याशी घोषित होना जीत की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा भारती को भोपाल सीट से उतारकर मुकाबलें को हार्डकोर हिंदुत्व बनाम सॉफ्ट हिंदुत्व में बदल दिया है, जिससे दिग्विजय सिंह एवं कांग्रेस पार्टी दुरी बनाकर चल रही थी। अब साध्वी के मैदान में आने के बाद हिंदुत्व के मुद्दे से कांग्रेस एवं दिग्विजय सिंह को दो चार होना ही पड़ेगा। साध्वी प्रज्ञा की गिनती दिग्विजय सिंह के प्रमुख आलोचकों में होती है। उन्होंने टिकट मिलने के बाद कहा भी था कि यह चुनाव नहीं बल्कि धर्मयुद्ध है। उधर दिग्विजय सिंह ने बड़े ही सधे ही अंजाम में कहा कि कि साध्वी जी “जो बोले उन्हें बोलने दे” यह उनका हक है। मै मां नर्मदा से प्राथना करता हूँ कि हम सब सत्य अहिंसा एवं धर्म के मार्ग पर चले।

इधर दिग्विजय सिंह ने गत वर्ष नर्मदा परिक्रमा कर एवं विगत दिनों में विभिन्न मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर पूजा कर अपनी छवि सॉफ्ट हिंदुत्व की कोशिश की है । उन्हें विश्वास है कि चुनाव में उनकी यह छवि मतदाताओं का विश्वास जीतने में सहायक साबित होगी। गौरतलब है कि केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल में भगवा आतंकवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाने वाले कांग्रेस नेताओं में दिग्विजय सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इसीलिए संघ की विशेष पहल पर दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को उतारा गया है, जो कट्टर हिंदुत्व में अपनी आस्था को उजागर करने में कोई संकोच नहीं करती है।

भोपाल लोकसभा सीट अब हाईप्रोफाइल होने के कारण इसके चुनाव परिणाम पर अब सारे देश की नजरे टिकी हुई है। भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा भारती को उम्मीदवार बनाकर वोटो के ध्रुवीकरण का जो प्रयास किया है उसमे उन्हें कितनी सफलता मिलती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन जिस तरह से साध्वी प्रज्ञा ने इसे धर्मयुद्ध करार दिया है उससे तो यही अनुमान अब लगाया जा रहा है कि भाजपा यहाँ हिंदुत्व के मुद्दे को प्रमुखता से अपने प्रचार का हिस्सा बनाएगी। वैसे साध्वी ने यह भी कहा है कि भोपाल को एजुकेशन हब बनांने एवं विकास एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि के साथ ही अपराधों की रोकथाम उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होगी।

दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने भोपाल को केपिटल रीजन का निर्माता ,शहर के आसपास सेटेलाइट टाउनशिप का विकास, भोपाल से लगे सीहोर में मेडिकल कालेज एवं भोपाल को किसान हब बनाने के साथ -साथ महिलाओं की सुरक्षा को अपने विजन डॉक्युमेंट में प्रमुखता से शामिल किया है। कुल मिलाकर भोपाल में पिछले तीन दशक से जो एक पक्षीय मुकाबला देखने को मिलता था वह अब नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि भाजपा की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि जब कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह का चुनावी अभियान पूरी तरह जोर पकड़ चूका है तब भाजपा को अपने अभियान का श्रीगणेश करना है ,लेकिन पार्टी को बूथ स्तर तक फैले अपने कार्यकर्ताओ पर पूरा भरोसा है। अतः अब देखना है कि भाजपा उन्हें कितनी जल्दी तैयार कर पाती है।

लेखक कृष्णमोहन झा IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक हैं.

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