कानपुर प्रेस क्लब के नाम पर फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन कराने वाले जालसाजों का पर्दाफाश. जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज. फर्जी रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया. श्याम नगर में बनाया गया था फर्जी प्रेस क्लब. क्लब के महामंत्री का पता भी निकला फर्जी. दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की तैयारी.
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santosh singh
December 23, 2014 at 6:11 pm
सभी कनपुरिये ही फर्जी हैं
आलोक कुमार
December 24, 2014 at 11:00 am
वैसे तो पत्रकारों का काम होता है जनता के दुख तकलीफों को सरकार तक पहुंचाना, उनके हक में आवाज उठाना पर कानपुर में इन दिनों कुछ पत्रकारों ने आम जनता का जीना दुश्वार कर दिया है। कानपुर के कुछ स्वयंभू पत्रकार नेता (सरस बाजपेई, अवनीश दीक्षित और नीरज अवस्थी) अब पैसे ले कर मकानों पर कब्जे कराने का काम करने लगे हैं। ये लोग अपने स्तर से वाहनों की चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली करते हैं, हमेशा 10-15 के गिरोह में चलते हैं, असलहा ले कर घुमते हैं, ये पत्रकार हैं या गुण्डे यही समझ नहीं आ रहा है। ये लोग पुलिस की दलाली करते हैं तो कई लोकल पुलिसवाले भी इनका ही समर्थन करते हैं और बडे अधिकारियों को इन लोगों ने लल्लो चप्पो करके या ज्यादा मीडिया कवरेज दे कर अपने पक्ष में कर रखा है । हर किसी के साथ बदतमीजी करना, सब पर धौंस जमाना इनकी आदत में शामिल है। यदि कोई व्यक्ति इनके कार्यो को गलत बताता है या इनकी मुख़ालफत करता है तो सब मिल कर उसके साथ गाली गलौज करते हैं, मारपीट करते हैं और पुलिस को पटा कर उसे किसी न किसी झूठे मामले में फंसा देते हैं।
यदि कोई अन्य पत्रकार इनका विरोध करता है और पीडित का साथ देने की कोशिश करता है तो उसे ये फर्जी बता देते हैं। इनका यह भी कहना है कि जो हमारे संगठन (कानपुर प्रेस क्लब) का सदस्य नहीं है वो पत्रकार ही नहीं है। अवैद्य रूप से कब्जा करके बने कानपुर प्रेस क्लब को इन लोगों ने ऐशगाह बना रखा है। यहां शाम ढलते ही जुंआ और शराब की महफिलें सज जाती हैं, यहां तक की आये दिन कानपुर प्रेस क्लब में वेश्याओं को बुलाया जाता है। कानपुर प्रेस क्लब सरकार को अपने भवन का कोई किराया नहीं देता है। यहां कटिया डाल के बिजली जलायी जाती है, दिन-रात कई ए.सी चलते हैं और प्रतिदिन हजारों रूपये की बिजली चोरी की जा रही है। कानपुर प्रेस क्लब में आय- व्यय का कोई हिसाब नहीं रखा जाता है कभी हिसाब किताब का आडिट नहीं कराया गया। यहां प्रेस वार्ता कराने के नाम पर, पत्रकारों को नाश्ता कराने और उनको तोहफे देने के नाम पर पब्लिक से मनमाना पैसा वसूला जाता है। ये पब्लिक को प्रेसवार्ता के रूप में सेवा उपलब्ध कराते हैं गेस्ट हाउस की तरह अपना ए.सी हाल किराये पर देते हैं पर न तो सर्विस टैक्स में इनका पंजीकरण है और न ही ये अपनी कमाई पर सरकार को कोई टैक्स देते हैं। सारी जानकारी होने के बाद भी कानपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पुलिस, सेवाकर और बिजली विभाग के लोग मूक दर्शक बने देखते रहते हैं।
कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारी अपने संगठन की सदस्यता केवल दैनिक अखबारों एंव न्यूज चैनलों को देते हैं। सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा नियमानुसार पंजीकृत और जिलाधिकारी को बाकायदा घोषणा पत्र दे कर चल रहे साप्ताहिक/मासिक अखबारों को ये सार्वजनिक रूप से फर्जी बता देते हैं। जिससे कानपुर के मीडिया पर कुछ लोगों का कब्जा हो गया है और छोटे अखबारों का भविष्य चौपट हो रहा है जो लोकतन्त्र के लिये हानिकारक है। किसी भी खबर को ये मिलजुल के पैसे लेकर मैनेज कर लेते हैं जिससे महत्वपूर्ण खबरें दब जाती हैं और पीडितों को न्याय नहीं मिल पाता। इसके कारण सरकार की छवि घूमिल हो रही है, गुण्डई पत्रकार करते हैं और बदनाम सरकार होती है। साप्ताहिक/मासिक अखबारों के पत्रकारों को ये लोग समाचार कवरेज करने से बलपूर्वक रोकते हैं छोटे पत्रकारों को बुली करते हैं, उनके साथ गाली गलौज यहां तक की कभी-कभी मारपीट तक करते हैं। विदित हो कि पूर्व में भी कानपुर प्रेस क्लब के महामंत्री कुमार त्रिपाठी जबरन मकान कब्जाने और हत्या जैसे संगीन जुर्म में जेल जा चुके हैं और उन पर मामला अभी भी विचाराधीन है।
ये दलाल पत्रकार अपने स्तर से कुछ सिपाहियों को मिला कर अनाधिकृत रूप से वाहनों की चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली करते हैं। खास तौर पर यदि कोई साप्ताहिक/मासिक अखबार का छोटा पत्रकार अपने वाहन पर प्रेस लिखाये मिल जाता है और वो इनका चेला नहीं है तो उसके द्वारा गाडी के सभी कागजात और अपना परिचय पत्र दिखाने के बाद भी ये लोग उसे फर्जी पत्रकार बता कर गाली-गलौज करते हैं, मना करने पर मार-पीट पर उतारू हो जाते हैं। फिर ये उससे रूपयों की मांग करते हैं वरना गाड़ी सीज कराने की धमकी देते हैं। किसी भी घटना-दुर्घटना के प्रकरण में फोटो छपवा कर तुमको बदनाम करवा दूंगा, ऐसा कह के ये कमजोर जनता से पैसा वसूल लेते हैं और बदनामी के डर से लोग दे भी देते हैं। दुखद है कि इस सब की शिकायत करने पर पुलिस वाले भी इनका ही साथ देते हैं।
इन पत्रकारों की निजी सम्पत्ति कुछ ही सालों में कई गुना बढ़ गयी है। सबने बडी-बडी कारें खरीद ली हैं, सबके घरों में ए.सी, हीटर आदि मंहगे आधुनिक उपकरण लगे हैं जो कटिया डाल के चलाये जाते हैं। बेनामी प्रौपर्टी बना रखी है, लाखों के जेवरात हैं और बेहिसाब कैश जमा कर रखा है और सारा कुछ काला धन है। यदि इसकी जांच करायी जाये तो बडे खुलासे होंगे।
santosh singh
December 28, 2014 at 11:18 am
सभी चोर पत्रकारों को उल्टा लटकाकर कोडे लगाने चाहिए । कानपुर के ज्यादातर पत्रकार गंवार किस्म के हैं