ब्राह्मणों के बहिष्कार की अपील की तो सीएम ने अपने बाप को ही जेल भेज दिया, देखें तस्वीरें और वीडियो

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Vinay Pandey-

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता की गिरफ्तारी और जेल जाने की खबर। मेरी जानकारी के अनुसार यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की पहली घटना है वर्ना यहां कई सांसद, विधायक के अलावा मामूली कार्यकर्ता पर रेप, मर्डर के आरोप होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। सिर्फ इसलिए क्योंकि वे सत्ताधारी पार्टी के होते हैं। भूपेश बघेल ने एक प्रतिमान स्थापित किया है। कानून का राज है और उसपर उनकी प्रतिबद्धता है।

कोई दूसरा उदाहरण ऐसा हो तो बताएं।

वैसे एक बात और जब भाजपा सरकार थी और डॉ रमन सिंह मुख्यमंत्री थे तब भी इनके बयानों को लेकर हंगामा हुआ करता था। उस समय भी तत्कालीन सरकार ने इनकी गिरफ्तारी तो दूर इनपर FIR तक दर्ज नहीं करवाई थी।

वैसे नंदकुमार बघेल भी वैचारिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने संभवतः 2001 में एक पुस्तक लिखी थी “रावण ब्राह्मण कुमार को मत मारो”, उस समय भी काफी विवाद हुआ था। लेकिन उस समय भी इन्हें कोई छू नही सका था।

गिरफ्तारी के बाद उन्होंने अपना जमानत लेने से इनकार कर दिया और जेल जाना उचित समझा। यह राजनीतिक रूप से कितना बड़ा मास्टर स्ट्रोक होगा यह तो पता नहीं लेकिन इस घटना ने देश और समाज में बड़ा संदेश दिया है।


Satyendra PS-

नंद कुमार बघेल 86 साल के हैं। इस उम्र में उनके भीतर जो ऊर्जा है, बहुत बिरले लोगों में पाई जाती है। छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली और लखनऊ तक जहां भी आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों की समस्याओं को लेकर धरने प्रदर्शन होते हैं, वहां बघेल पहुँचते रहे हैं। हाल ही में वह उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षकों की भर्ती में हुए ओबीसी सीटों के घोटाले के खिलाफ चल रहे आंदोलन में शरीक हुए थे।

वंचित तबके के लिए उनके दिल में जो स्थान है, सबसे ऊपर है। वंचित तबके के शोषण के खिलाफ जो आग उनके सीने में है, वह किसी से छिपा नहीं है।

वह बोलते हैं और खुलकर बोलते हैं। आदिवासियों के शोषण के खिलाफ, ओबीसी आरक्षण खा जाने के खिलाफ, छुआछूत के खिलाफ हमेशा उनकी आवाज बुलंद रही है।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों का बहिष्कार करें। वह वोल्गा से आये हैं उन्हें वोल्गा जाना पड़ेगा। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कोई सशस्त्र विद्रोह कर दिया है या कोई ऐसी बात कह दी है जिसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया जाए। आर्य/ब्राह्मण वोल्गा से आये हैं, यह थियरी नन्द कुमार बघेल की नहीं है, इसके जन्मदाता बाल गंगाधर तिलक हैं। तिलक को उस समय काले नेटिव्स से अलग खुद को अंग्रेजों का पट्टीदार दिखाना था इसलिए उन्होंने आर्यन थियरी दी थी। अगर नंद कुमार बघेल को लगता है कि ब्राह्मण विदेशी हैं और उन्होंने भारत के संसाधनों पर कब्जा कर रखा है तो यह कहने का उन्हें हक है। अंग्रेजों के खिलाफ महात्मा गांधी ने इसी बात को लेकर आंदोलन चलाया था कि वो विदेशी हैं और हम पर राज नहीं कर सकते, चाहे वह जितने भी काबिल क्यों न हों। गांधी ने भी अंग्रेजों भारत छोड़ो, अंग्रेजों का बहिष्कार, अंग्रेज सरकार से असहयोग, अंग्रेजों के कानूनों के खिलाफ अवज्ञा आंदोलन चलाए। अगर किसी को लगता है कि कोई विदेशी (या स्वदेशी भी) कार्टेल बनाकर कब्जिया कर बड़े समुदाय या आबादी का शोषण कर रहा है तो वह आंदोलन चला सकता है, उस कार्टेल के बहिष्कार का आह्वान कर सकता है। गांधी ने भी यही किया था और तमाम अंग्रेजों ने उनका साथ भी दिया था। इसी तरह तमाम न्यायप्रिय ब्राह्मण नंद कुमार बघेल के साथ खड़े नजर आते हैं।

खैर यह तो तथ्यों की बात है। सबसे निराशाजनक यह है कि 86 साल का जिंदादिल युवा आज जेल में है। जिन वंचितों के लिए उन्होंने आजीवन लड़ाई लड़ी, वह सांस डकार तक नहीं ले रहे हैं कि इस गिरफ्तारी के खिलाफ एक भी शब्द बोलें, कहें या लिखें। चौतरफा सन्नाटा है। उनके साथ सेल्फी खिंचाने के आतुर लोग भी सीन में नहीं हैं।

अगर यही हाल रहा तो दलितों पिछड़ों आदिवासियों के हित में बोलने की हिम्मत कौन करेगा? कभी भी किसी को भी किसी केस में एक एफआईआर दर्ज कराकर उठवा लिये जाएगा और एफआईआर कराने वालों के प्रशासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक बैठे रिश्तेदार पट्टीदार उसे जेल में रगेद देंगे।

वैसे मेरा व्यक्तिगत रूप मानना है कि दलित पिछड़ों का समर्थन करना या उनके फेवर में लिखना सबसे बड़ी मूर्खता है। वह आपको अपने लेवल पर लाकर आपकी जाति ढूँढेंगे, आपको किसी जाति का घोषित करेंगे, और फिर उसी में आपको लथेड़ेंगे, जहां वह खुद घिसट रहे हैं।

खैर नंद कुमार बघेल को मेरा समर्थन है। वह एक योद्धा हैं, जो एक सम्पन्न, सबल जाति और परिवार के होते हुए भी वंचितों की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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  • @सत्येंद्र पीएस— तो आप कहना यह चाहते हो कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य के बीज बोना और किसी जाति या वर्ग विशेष के विरुद्ध भड़काना या अंट शंट बकना एक महान काम है। लेकिन यही शब्द अगर उसने तुम्हारे कथित दलित बंधुओं को लेकर बके होते तो तुम जैसे समर्थक और तुम जैसों के समर्थक जमीन पर लोट लोट कर विरोध जताते और विरोध में चिल्ला चिल्ला कर हकलान हो गए होते।

  • Aapne second last paragraph mein jo baat kahi hai wo sahi hai.... inki aawaaz aap jitni uthayein inke liye jitni qurbaniyan dein inhein ehsas tk nhi.... ye log self centred hain n apne caste se aage ki sochte hi nhi...har nafa nuqsan caste pe aaker khatm...

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