क्या मोदी सरकार कोरोना पेशेंट्स को भगवान भरोसे छोड़ने जा रही? जानिए नई गाइडलाइन की कहानी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 रोगियों के लिए अपने डिस्चार्ज दिशानिर्देशों को संशोधित किया है। नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि केवल गंभीर बीमारी वाले लोगों का परीक्षण किया जाना चाहिए (एक स्वैब परीक्षण के माध्यम से) और डिस्चार्ज से पहले उनका बस एक नकारात्मक रिपोर्ट प्राप्त करने की आवश्यकता है।

नवीनतम दिशानिर्देश में कहा गया है कि बहुत हल्के, हल्के और मध्यम लक्षण वाले रोगियों का भी अन्य रोगियों की तरह ही डिस्चार्ज से पहले परीक्षण करना जरूरी नहीं है।

दो-पृष्ठ वाले संशोधित दिशानिर्देश ने पहले के मौजूदा नियम को बदल दिया है जिसके तहत रोगियों (लैब द्वारा कंफर्म किये गये मामलों) को 14 या 21 दिन क्वारन्टीन किए जाने के दौरान दो नकारात्मक परीक्षणों के बाद ही छुट्टी दी जाती थी।

इस नये दिशानिर्देश में कहा गया है कि संशोधित नीति त्रि-स्तरीय कोविड-19 स्वास्थ्य सुविधाओं और नैदानिक गंभीरता के आधार पर हल्के, मध्यम और गंभीर मरीजों के इलाज पर भी अमल करता है।

नवीनतम दिशानिर्देश के अनुसार – हल्के, बहुत हल्के और पूर्व-रोगसूचक मामलों के तहत कोविड-19 स्वास्थ्य सुविधा में भर्ती कराये गये मरीजों का अब केवल नियमित तापमान और पल्स मोनिटरिंग ही की जायेगी।

“रोगी को लक्षण के 10 दिनों के बाद छुट्टी दी जा सकती है और अगर उन्हें तीन दिनों तक बुखार नहीं है।

संशोधित दिशानिर्देश के मुताबिक अब डिस्चार्ज से पहले परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

डिस्चार्ज के समय मरीजों को सात और दिनों के लिए घर में खुद को दूसरों से अलग रहने की सलाह दी जाएगी। इसमें यह भी कहा गया है कि डिस्चार्ज होने के बाद यदि मरीज को फिर से बुखार, खांसी या सांस लेने में कठिनाई के लक्षण विकसित होते हैं , तो उन्हें कोविड-19 केयर सेंटर या राज्य हेल्पलाइन या 1075 पर संपर्क करना होगा। 14 दिन बाद उनके स्वास्थ्य को फिर से टेली-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समझा जायेगा। कुछ मामलों में तापमान चेक किया जायेगा और आक्सीजन का इंतजाम किया जायेगा।

यदि बुखार तीन दिनों के भीतर ठीक हो जाता है और एक मरीज अगले चार दिनों (ऑक्सीजन सपोर्ट के बिना) तक 95% से अधिक ठीक रहता है, तो उसे बुखार नहीं होने की स्थिति में, उसे सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं आने पर और आक्सीजन की जरूरत न होने पर लक्षणों की शुरुआत के 10 दिनों के बाद छुट्टी दे दी जाएगी।

गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है, “डिस्चार्ज करने से पहले फिर से परीक्षण करने की जरूरत नहीं होगी, और सात दिनों के लिए घर में अलग रहने और स्वास्थ्य की जांच का सुझाव दिया जायेगा।”

परीक्षण के बिना हल्के / मध्यम मामलों के डिस्चार्ज के लिए तर्क को स्पष्ट करते हुए आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा “भारत के बाहर के अध्ययनों से पता चला है कि सकारात्मक परीक्षा परिणाम का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति अभी भी संक्रामक है। वे वायरस के लिए सकारात्मक हो सकते हैं लेकिन गैर-संक्रामक रह सकते हैं। ”

उन्होंने आगे बताया कि 10 दिनों के बाद भी लोगों में रोग का संक्रमण नहीं हो सकता है। लेकिन एक बार छुट्टी देने के बाद, उन्हें पांच दिनों के लिए घर पर रहना चाहिए। मंत्रालय का संशोधन इस तथ्य को भी ध्यान में रखता है कि अस्पताल अपनी संचालन क्षमता तक पहुँच रहे हैं।

अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने भी 6 मई को दिशानिर्देशों में संशोधन करते हुए कहा था कि अस्पताल में भर्ती व्यक्ति को छुट्टी देने से पहले वायरस के लिए किसी भी नकारात्मक परीक्षण की आवश्यकता नहीं है।

बिना जांच के मरीजों को छोड़ना खतरनाक, सामुदायिक संक्रमण फैलने का अंदेशा

कोरोना संक्रमण के फैलने के डर से भले ही लॉकडाउन की मियाद बढ़ा दी गयी है मगर सरकार की मानें तो कोरोना मरीज को अस्पताल से छुट्टी देने से पहले अब फिर से टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं। अस्पतालों से डिस्चार्ज करने के पहले सिर्फ कोरोना के गंभीर मरीजों की ही दुबारा जांच की जाएगी। उनकी नेगेटिव रिपोर्ट मिलने पर अस्पताल से छुट्टी दी जायेगी। संशोधित दिशानिर्देश ने उस नियम को बदल दिया है जिसके मुताबिक पहले यह तय किया गया था कि कोरोना से संक्रमित रोगियों को 14 वें और 21 वें दिन फिर से टेस्ट कराना होगा और संक्रमण का रिजल्ट नेगेटिव आने के बाद ही उन्हें छुट्टी दी जाएगी।

नये दिशा निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के महासचिव श्रीनिवास राजकुमार ने कहा कि बिना परीक्षण के कोविड-19 पॉजिटिव रोगियों को वापस भेजने का निर्णय खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा, “लोगों को अगर बिना परीक्षण किये वापस भेज दिया गया तो इससे समुदायिक संक्रमण फैल सकता है।”

उन्होंने सवाल किया कि आखिर पर्याप्त परीक्षण सुविधाओं की व्यवस्था के बिना सरकार 40 दिनों तक क्या कर रही थी? क्या सरकार अनुमानों के आधार पर 2 लाख भारतीयों या अधिक लोगों की जान का बलिदान करने के लिए तैयार है?”



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