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सोमवार को सर्वर क्‍या बैठा, जागरण प्रबंधन का तो जैसे आत्‍मविश्‍वास ही बैठ गया

सोमवार को दिन में दैनिक जागरण की नोएडा यूनिट का सर्वर बैठ गया और चापलूसी का रिकार्ड बना चुके प्रबंधकों की रूह कांप गई। उन्‍हें लगा कि हड़ताल के भूकंप का यह पहला झटका है। फिर क्‍या था, आनन फानन में पुलिस बुला ली गई। दरअसल, जब मन में चोर बसा होता है तो ऐसा ही होता है। प्रबंधकों को यह पता है कि उन्‍होंने क्‍या क्‍या गुनाह किए हैं, किस प्रकार कर्मचारियों को पाई पाई के लिए तरसाया है, किस तरह भेदभाव करके काबिल लोगों को कुंठित किया है।

सोमवार को दिन में दैनिक जागरण की नोएडा यूनिट का सर्वर बैठ गया और चापलूसी का रिकार्ड बना चुके प्रबंधकों की रूह कांप गई। उन्‍हें लगा कि हड़ताल के भूकंप का यह पहला झटका है। फिर क्‍या था, आनन फानन में पुलिस बुला ली गई। दरअसल, जब मन में चोर बसा होता है तो ऐसा ही होता है। प्रबंधकों को यह पता है कि उन्‍होंने क्‍या क्‍या गुनाह किए हैं, किस प्रकार कर्मचारियों को पाई पाई के लिए तरसाया है, किस तरह भेदभाव करके काबिल लोगों को कुंठित किया है।

हालत यह है कि दैनिक जागरण के मालिकान का भरोसा जवाब दे रहा है। उन्‍हें न तो अब सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा रहा, न अपने वकीलों पर, न सरकार पर और न ही अपने कर्मचारियों पर। उन्‍हें पता है कि जो ऊपर से चापलूसी कर रहे हैं, उनका भी कोई बहुत ज्‍यादा भला नहीं किया है। अंदरखाते वे भी कुढ़ रहे हैं कि अपना जमीर भी बेचा, चापलूसी भी की और मन को मार कर नौकरी की। फिर भी कोई खास भला नहीं हुआ।

शायद यही वजह है कि दैनिक जागरण कर्मचारियों की यूनियन की पहली बैठक में साढ़े तीन सौ लोग जुट गए। साफ है कि पब्लिक ऑपीनियन दैनिक जागरण के मालिकान के खिलाफ है। कई राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री भी दैनिक जागरण की वाट लगाने के लिए तैयार बैठे हैं। तभी तो दैनिक जागरण जैसा अखबार बटरिंग पर उतर आया है। अब उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह अपने पाठकों का ध्‍यान रखे या बटरिंग करते हुए डमडम टाइम्‍स जैसा अखबार बन जाए।

दैनिक जागरण प्रबंधन को समझ नहीं आ रहा है कि करे तो क्‍या करे। अरे भाई, झूठ के लाखों रस्‍ते हैं पर सच्‍चाई की एक डगर। सच को स्‍वीकार करो। कर्मचारियों को उनका हक दे दो। जिन्‍हें प्रताडि़त कर रहे हो, उनकी प्रताड़ना बंद कर दो। और सो जाओ चैन की नींद। इसके अलावा और कोई दूसरा उपाय है ही नहीं। आप किस मुंह से पुलिस को बुला लेते हो। नोएडा पुलिस आपको बुलाती है तो रंगबाजी पर उतर आते हो और जांच में कोई सहयोग नहीं करते। चलो, कम से कम तुम अपनी औकात में आ रहे हो और पुलिस के तलवे चाटने को मजबूर हो रहे हो।

फोर्थपिलर एफबी वॉल से

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