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राजीव लायल से बच के रहना, कर्ज लेकर नहीं लौटाता है!

टीवी मीडिया के एक धोखेबाज का नाम है राजीव लायल. ये व्यक्ति नाम में भले लायल लगाता हो लेकिन कुछ मामलों में ये बिलकुल ‘लायल’ नहीं है. खासकर कर्ज लेकर लौटाने के मामले में. इसका कच्चा चिट्ठा भड़ास के पास पहुंच चुका है.

इसने एक शख्स से अब तक दो लाख रुपये ऐंठे हैं. आडियो और चैट स्क्रीनशाट भड़ास के पास है.

भड़ास को भेजे एक पत्र में पत्रकार ऋषि लिखते हैं-

एक सज्जन हैं राजीव लायल, इलाहाबाद के। काफी साल से नोएडा में जमे हैं। मीडिया इंडस्ट्री में सबसे बड़े धोखेबाज के तौर पर खासे मशहूर हैं। किसी मित्र के जरिए मिले। इतने लच्छेदार और मिठास से भरे कि कोई भी धोखा खा जाए। एक डील के लिए बात हुई। एक लाख एडवांस दे दिया। डील ना होनी थी नहीं हुई। अब लगभग दस महीने हो गए पैसे वापिस नहीं कर रहे। मजे की बात ये है कि इस बीच मैंने सोचा कि परेशान होंगे तो मैंने उनको मदद की और दिल्ली में एक मीडिया हाउस में ऊंचे पद पर नियुक्त करवा दिया ताकि वो मेरा पैसा दे सकें। कुछ और भी हिसाब किताब था तो रकम हो गई दो लाख रुपये। अब साहेब फोन ही नहीं रिसीव करते। इनके बहकावे में मत आइएगा। वर्ना मेरी तरह परेशान होंगे।

ऋषि पूरी कहानी यूं बताते हैं-

एक सज्जन हैं राजीव लायल, इलाहाबाद के। काफी साल से नोएडा में जमें हैं। मीडिया इंडस्ट्री में सबसे बड़े धोखेबाज के तौर पर खासे मशहूर हैं। किसी मित्र के जरिए मिले। इतने लच्छेदार और मिठास से भरे कि कोई भी धोखा खा जाए। टीवी 24 चैनल की यूपी फ्रेंचाइजी के लिए 5 लाख में बात हुई। मेरे मित्र ने 1 लाख एडवांस दे दिया। डील ना होनी थी नहीं हुई। 

राजीव पर दबाव था पैसे लौटने का। राजीव ने कहा आप अपने मित्र को 1 लाख रुपए दे दीजिए मैं आपको कुछ दिन में पैसे वापिस कर दूंगा। विश्वास करते हुए मैंने राजीव पर लोन लेकर 1 लाख रुपया अपने मित्र को लौटा दिया।

अब लगभग 10 महीने हो गए राजीव पैसे वापिस नहीं कर रहे। मेरे ऊपर काफी दवाब है। लोन भर नहीं पा रहा। मेरी बेवकूफी देखिए इसके बाद भी मैंने सोचा कि राजीव परेशान होंगे तो मैंने उनको मदद की और एक चैनल में राजीव को दिल्ली का हैड नियुक्त करवा दिया। अबतक मेरे पैसे 2 लाख 80 हजार हो चुके थे। वो ऐसे कि राजीव के एक जानने वाले ने कहा कि आपके ऊपर जो भी क़िस्त का बोझ है वो राजीव झेलेंगे। मैंने फिर विश्वास किया। और अब मेरे पास रोने के सिवा कुछ नहीं है। 

जॉब है नहीं क़िस्त बढ़ती जा रही है। रिकवरी वाले घर के चक्कर लगा रहे हैं। राजीव फोन नहीं उठाते। मैं कर्ज में दबा हूं। दिल करता है आत्महत्या कर लूं। लेकिन परिवार की सोच के डर जाता हूं। नींद नहीं आती। हमेशा डर के जी रहा हूं।

मेरी बेटी ने भी इसको कई बार कॉल की लेकिन इसका दिल नहीं पसीजा।

राजीव के जानने वालों को फोन कर रहा तो वो भी फोन नहीं उठाते हैं। राजीव का कहना है कि करने दो क्या कर लेगा मेरा।

मुझे पता चला है कि सिर्फ मैं ही नहीं राजीव लायल ने कई लोगों को अपना शिकार बनाया है।


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