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इन सेमी पोर्न चैनलों के घटिया मर्दों के चेहरों पर थूकने का इंतजार है…

Sheetal P Singh : वह स्त्री… जो इस हंगामे से बाहर है पर जो इस हंगामे की मुख्य शिकार है! संदीप कुमार की सीडी में एक स्त्री भी है। दूसरी सीडी नितांत फ़र्ज़ी है। पुरुष कोई अन्य है संदीप नहीं पर संदीप कुमार को “लंपट” साबित करने के लिये एकाधिक स्त्रियों से संबंध बनाते सबूत पेश करने के लिये इसे नत्थी कर दिया गया! और इस पर चटखारे ले रहे थे एबीपी न्यूज़ के “दिबांग” जो पत्रकारिता में हैं, कुछ पुराने हैं, दिल्ली से हैं… इस वाक्य का संदर्भ समझ गये होंगे!

Sheetal P Singh : वह स्त्री… जो इस हंगामे से बाहर है पर जो इस हंगामे की मुख्य शिकार है! संदीप कुमार की सीडी में एक स्त्री भी है। दूसरी सीडी नितांत फ़र्ज़ी है। पुरुष कोई अन्य है संदीप नहीं पर संदीप कुमार को “लंपट” साबित करने के लिये एकाधिक स्त्रियों से संबंध बनाते सबूत पेश करने के लिये इसे नत्थी कर दिया गया! और इस पर चटखारे ले रहे थे एबीपी न्यूज़ के “दिबांग” जो पत्रकारिता में हैं, कुछ पुराने हैं, दिल्ली से हैं… इस वाक्य का संदर्भ समझ गये होंगे!

कम से कम तीन पुरुषों के फोन्स में मुझे ही यह क्लिप मिलीं जिन्होंने यह तकनीकी वृतान्त बताया, फिर मित्र राजीव बहुगुणा ने बहुत बेबाक़ ढंग से लिखा कि देश भर के “पत्नीव्रता मर्दों” के फोन्स में वायरल हुई यह क्लिप उन तक गढ़वाल में पहुँच चुकी है! इन क्लिप्स में कोई सेंसर नहीं है, उस स्त्री की पहचान जारी कर दी गई है। सेक्सुअल एक्ट में स्त्री की पहचान जारी करना / फैलाना / बेचना गंभीर अपराध है । घोषित / स्वीकृत तौर पर यह क्लिप शिकायतकर्ता के पास थी जिसने इसे चैनलों / एल जी के पास भेजा। निश्चय ही इसके वायरल होने के तीन ज्ञात श्रोत हैं : शिकायतकर्ता / चैनल्स / एलजी। तो इस स्त्री के यौनिक अपमान के दोष में इन तीन ज्ञात / स्वीकृत स्त्रोतों की आपराधिक जाँच क्यों न हो?

उस स्त्री के अधिकारों के प्रवक्ता बनने (कि वह शोषित हुई, बलत्कृत हुई, सहमति से सेक्स में शामिल थी या कुछ और) का हक बीजेपी / कांग्रेस के प्रवक्ताओं को किसने किस अधिकार से दिया? क्योंकि मैंने तो नहीं देखा कि कोई प्रवक्ता किसी बहस में उस स्त्री का नोटीफाइड affidavit लेकर पहुँचा हो कि जिसके आधार पर साबित करे कि उसकी ओर से टीवी डिबेट करने का अधिकार उसके पास है!

सिंघवी प्रकरण में तो महिला एक वक़ील थीं पर वे तक इस मर्दवादी समाज की कुँठाओं पर अपने मानवीय हक के पक्ष में सार्वजनिक चुनौती लेकर पेश न हुईं तो इन अनाम महिला से क्या उम्मीद करें? पर शायद कभी किसी सीडी / क्लिप को तोड़कर इस अपराधी कुंठित मर्दवादी बाज़ार को ललकारती कोई स्त्री इस दुखद “मोरल प्रहसन” की अनवरतता के अंत की खुली शुरुआत करे, इन सेमी पोर्न चैनलों के घटिया मर्दों के चेहरों पर थूककर! प्रतीक्षारत….

इंडिया टुडे समेत कई अखबारों-मैग्जीन्स में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह की एफबी वॉल से.

उपरोक्त स्टेटस पर आए कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं…

Sandeep Verma चैनलों ने अपना गन्दा चेहरा दिखाना शुरू किया है . उसको नकारने का एक मात्र तरीका केजरीवाल द्वारा मंत्री को इस्तीफा /बर्खास्तगी निरस्त करने से ही होगी . यह केजरीवाल की कमजोरी दिखा रहा है और चैनेल इसी लिए गुंडागर्दी पर उतारू हैं

Manoj Singh Gautam चैनलो के मालिको को मोदी ने बांध कर रखा हुआ है वे वही खबर बनायेंगे जो मोदी कहेगे भले ही उनके एंकर बेईज्ज़ती कराते रहे ।

Uday B Yadav आप पार्टी ने मंत्री को निकालकर दिखावा किया है चलो मान लिया बाकी के संविधान बचाने वाले तथाकथित सेवक गण दोषियों पर कार्यवाई करके दिखावा ही करो

Sunil Dwivedi ये चैनल और दिबांग जैसे पत्रकारों से इससे अच्छी उम्मीद और क्या किया जा सकता है बिकाऊ चैनल है ,जिस पत्रकारिता मीडिया का उदाहरण देकर संदेश समाज को दिया जाता था कुछ अच्छे बदलाव की उम्मीद की जाती थी ! आज वही दिवांग जैसे लोग मीडिया की विश्वसनीयता पर प्राश्न चिन्ह लगा दिया है ! आखिर केजरीवाल की सरकार को बदनाम करने का ठेका ले रखा है !

Shashank Kumar Mishra Dibang jaise dalalo ki saza tay honi chahiye.. Yahi dibang BJP ya Raj thakre ke samne mew mew karta hai.. Aur aap ke samne sher ban jata Hai

राकेश मौर्य नाम से दिबांग है, करतूत और नैतिकता में तो दिव्यांग!

Om Parkash शीतल जी वाह. पाखंडियों का क्या चीर हरण किया है !

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1 Comment

1 Comment

  1. divya prakash

    September 13, 2016 at 9:58 am

    फिर आप मिडिया के बोलने की वकालत क्यों करते हैं . कहिये न सीधे की नेताओं के कथित स्कैंडल , खासकर उस नेता की जिसने खुद को पत्नीव्रता कहा था , यदि मिडिया न न दिखाया होता तो अच्छा होता .
    समर्थक महोदय , शायद ही आप यह नियम प्रेस कौंसिल में बना पायें . वैसे भी यदि एक पत्रकार के द्वारा उस खबर पर बोलना नारी का अपमान है तो वही करना कितना बड़ा अपमान है वह भी तब जब की यह उनकी पत्नी से छुपा कर किया गया था . आप तो इतनी चापलूसी में उस परिप्रेक्ष्य को भी भूल गये की हांल ही में कीथ वाज का इस्तीफा इन्ही कारणों से दिया गया था . महोदय , बात नैतिकता की है और उस आदर्श की जिसकी शपथ लेने ये नेता बड़े उत्साह से जाते हैं

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