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यूपी में एक और पत्रकार पर दर्ज हो गया गम्भीर धाराओं में फर्जी मुकदमा

अयोध्या । गोसाईगंज थाने की पुलिस ने जनसंदेश टाइम्‍स के पत्रकार सुनील यादव के खिलाफ फर्जी मुकदमा लिख दिया है। पुलिस का आरोप है कि सुनील यादव ने थाने में घुस कर मुख्य आरक्षी शेषनाथ सिंह और कांस्टेबल छोटू पासवान के साथ अभद्रता की और आरक्षी की वर्दी फाड़ कर बेइज्जत कर दिया। आरोप तो यह भी है कि वहां मौजूद एक महिला कांस्टेबल के साथ अभद्रता करते हुए सुनील यादव ने अश्लील हरकत भी की। मतलब शस्त्र से लैस पुलिसकर्मी अपने ही थाने में एक पत्रकार के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराते हुए जान माल का खतरा बताते हुए डर जता रहे हैं!

पत्रकार सुनील यादव का कहना है कि मुख्य आरक्षी शेषनाथ, कांस्टेबल छोटेलाल, महिला आरक्षी सहित अन्य पुलिसकर्मी थाने में थे तो क्या एक अकेला पत्रकार इतने लोगों से बदतमीजी कर सकता है? थानाध्यक्ष ने सीसीटीवी फुटेज ही गायब करवा दिया है। पत्रकार सुनील यादव के मुताबिक थानाध्यक्ष ने सीसीटीवी फुटेज डिलीट करा दी है। अब हालत यह है कि फर्जी मुकदमा लिखे जाने के बाद पुलिसकर्मी ही जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

सुनील का आरोप है कि उसने कई खबरें गोसाईगंज पुलिस की करतूतों पर छापी हैं। इससे नाराज पुलिस कर्मियों द्वारा छेड़खानी सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर दिया गया है।

थाने में कई पुलिसकर्मी हथियारों के साथ रहते हैं। ऐसे में एक निहत्था पत्रकार पर छेड़खानी सहित अन्य गंभीर मामलों में फर्जी मुकदमा दर्ज कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। उक्त मामले को लेकर पत्रकारों में काफी रोष है। एक निहत्था पत्रकार थाने में जाकर कई पुलिसकर्मियों से कैसे अभद्रता कर सकता है। एक पत्रकार कैसे कई पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट कर सकता है। वह भी थाना प्रांगण में मारपीट करने के बाद सकुशल घर वापस लौट सकता है? पत्रकारों की मांग है कि घटना के दिन की गोसाईगंज थाने की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए।

पुलिस द्वारा सुनील के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 326/20 धारा 323, 332, 353, 504, 506, 354 अनुसूचित जाति व अनुसूचित 3/2(va) पंजीकृत कर दिया गया है। सुनील यादव ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य उच्चाधिकारियों को इस मामले में तत्‍काल हस्‍तक्षेप करने की मांग की है।

देखें एफआईआर-

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1 Comment

1 Comment

  1. Ajai Singh Bhadauria

    July 21, 2020 at 7:24 pm

    यूपी पुलिस को पत्रकार ही असली दुश्मन लगते हैं। क्योंकि पत्रकार की जानकारी में कोई घटना आ जाती है तो उनकी कमाई में बाधा पहुंचती है। हां अलग बात है कि उपलब्धि छपाने के लिए मिन्नतें करने पर पत्रकार सब भूल जाते हैं। पत्रकारों को चाहिए कि पुलिस-प्रशासन की खबरों का छापना बंद कर देना चाहिए और उसके स्थान पर खबर के पीछे की खबर खोज कर छापना चाहिए, लेकिन यह संभव नहीं, क्योंकि पत्रकार ही पत्रकार के विरोधी हो गये हैं। उन्हें यह नहीं पता आज उसकी तो कल आपकी भी बारी होगी। घटना की कटु निंदा होनी चाहिए।

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