ईमानदार पाठक भी वस्तुत: बहुत बड़ा कवि होता है : विष्णु खरे

नयी दिल्ली। हिंदी के सबसे बड़े कवि जनता के साथ खड़े रहे हैं। उनकी कविता का जनता के साथ होना उनके बड़े कवि होने का भी प्रमाण है। अमीर खुसरो, ममीर तक़ी मीर, ग़ालिब, निराला, मुक्तिबोध, कुंवर नारायण, केदारनाथ सिंह और चंद्रकांत देवताले की कुछ चर्चित-अचर्चित कविताओं को उद्धृत करते हुए सुप्रसिद्ध कवि और हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष विष्णु खरे ने कहा कि यदि कोई पाठक ठीक से कविता पढ़ना जानता है तो वह भी सत्तर फीसद कवि है या कवि हो सकता है। खरे ने ‘कविता को पढ़ना – पढ़ाना’ विषय पर हिन्दू कालेज की हिंदी साहित्य सभा का उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि ईमानदार पाठक भी वस्तुत: बहुत बड़ा कवि होता है।

उन्होंने युवा श्रोताओं का आह्वान करते हुए कहा कि कविता पढ़ना बहुत परिश्रम की मांग करता है और इसके लिए विश्व पाठक बनना होगा। उन्होंने महानतम पाठक उसे बताया जिसकी स्वयं कवि प्रतीक्षा करे। उन्होंने अपने व्याख्यान के साथ अनेक कविताओं की चर्चा की जिनमें मुख्यत: अमीर खुसरो के दोहे – ‘गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भाई चहुँ देस’ की विशद चर्चा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गई।

उन्होंने कवि मुक्तिबोध की कविता ‘रात चलते हैं अकेले ही सितारे’ तथा कुंवर नारायण की कविता ‘दिल्ली की तरफ’ के अंशों का पाठ भी किया। वहीं केदारनाथ सिंह की प्रसिद्ध कविता ‘मोड़ पर विदाई’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हर कवि की कवितायेँ उनकी बेटियां होती हैं। चंद्रकांत देवताले की बहुचर्चित कविता ‘बाई दरद ले’ के पाठ के साथ उन्होंने अपना व्याख्यान पूरा किया।

आयोजन के प्रारम्भ में विभाग की ओर से डॉ विजया सती ने पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया और डॉ रामेश्वर राय ने विष्णु खरे का परिचय देते हुए समकालीन काव्य जगत में उनके अवदान और महत्त्व की चर्चा की। विभाग की प्रभारी डॉ रचना सिंह ने सत्र 2018-19 के लिए हिंदी साहित्य सभा के पदाधिकारियों की घोषणा की जिनमें अध्यक्ष – वागीश शुक्ल, एम ए उत्तरार्ध, उपाध्यक्ष – प्रत्यूष यादव, एम ए पूर्वार्ध, महासचिव एवं मीडिया प्रभारी – राहुल कसौधन, तृतीय वर्ष और कोमल, तृतीय वर्ष, संयोजक- अभिषेक कुमार मिश्र, तृतीय वर्ष, कोषाध्यक्ष – पूजा, द्वितीय वर्ष, सचिव- चेतन सचान, द्वितीय वर्ष, सह सचिव – प्रणव सचान, प्रथम वर्ष होंगे।

इससे पहले खरे ने हिंदी विभाग की भित्ति पत्रिकाओं ‘अभिव्यक्ति’ और ‘लहर’ के नए अंकों का अनावरण भी किया। आयोजन में विभाग के अध्यापक डॉ अभय रंजन, डॉ पल्लव सहित कवि विनोद विट्ठल और बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा शोधार्थी उपस्थित थे।

रिपोर्ट – अभिषेक कुमार मिश्र

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