Connect with us

Hi, what are you looking for?

आवाजाही

कानपुर प्रेस क्लब यानि फर्जी मेम्बरों का जमावड़ा

कानपुर प्रेस क्लब हथियाने वालों ने बनाये फर्जी पत्रकार…. कराई फर्जी वोटिंग… अंगूर बेचने वाला, वकील, दर्जनों मुकदमों में केस लड़ रहे लोग, प्रॉपर्टी डीलर, गुमटी मार्केट के कई दुकानदार, पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट, व्हाट्सअप पर ग्रुप बनाकर खुद को पत्रकार बताने वाले, चैनल के बाहर वाहनों का स्टैंड चलाने वाला, रिसेप्शन की जिम्मेदारी सँभालने वाला, चपरासी, चाय वाले आदि अब पत्रकार बन चुके हैं. ये सब कानपुर प्रेस क्लब के सदस्य हैं. मेम्बरशिप लिस्ट में इन लोगों का नाम चढ़ाकर इन्हें पत्रकारों के हर एक वो अधिकार सौंप दिए गए हैं, जिससे वह अपने आपको किसी से भी पत्रकार कह सकता है लेकिन पत्रकारिता नहीं कर सकता है.

<script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script> <script> (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-7095147807319647", enable_page_level_ads: true }); </script><p><span style="font-size: 18pt;">कानपुर प्रेस क्लब हथियाने वालों ने बनाये फर्जी पत्रकार.... कराई फर्जी वोटिंग...</span> अंगूर बेचने वाला, वकील, दर्जनों मुकदमों में केस लड़ रहे लोग, प्रॉपर्टी डीलर, गुमटी मार्केट के कई दुकानदार, पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट, व्हाट्सअप पर ग्रुप बनाकर खुद को पत्रकार बताने वाले, चैनल के बाहर वाहनों का स्टैंड चलाने वाला, रिसेप्शन की जिम्मेदारी सँभालने वाला, चपरासी, चाय वाले आदि अब पत्रकार बन चुके हैं. ये सब कानपुर प्रेस क्लब के सदस्य हैं. मेम्बरशिप लिस्ट में इन लोगों का नाम चढ़ाकर इन्हें पत्रकारों के हर एक वो अधिकार सौंप दिए गए हैं, जिससे वह अपने आपको किसी से भी पत्रकार कह सकता है लेकिन पत्रकारिता नहीं कर सकता है.</p>

कानपुर प्रेस क्लब हथियाने वालों ने बनाये फर्जी पत्रकार…. कराई फर्जी वोटिंग… अंगूर बेचने वाला, वकील, दर्जनों मुकदमों में केस लड़ रहे लोग, प्रॉपर्टी डीलर, गुमटी मार्केट के कई दुकानदार, पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट, व्हाट्सअप पर ग्रुप बनाकर खुद को पत्रकार बताने वाले, चैनल के बाहर वाहनों का स्टैंड चलाने वाला, रिसेप्शन की जिम्मेदारी सँभालने वाला, चपरासी, चाय वाले आदि अब पत्रकार बन चुके हैं. ये सब कानपुर प्रेस क्लब के सदस्य हैं. मेम्बरशिप लिस्ट में इन लोगों का नाम चढ़ाकर इन्हें पत्रकारों के हर एक वो अधिकार सौंप दिए गए हैं, जिससे वह अपने आपको किसी से भी पत्रकार कह सकता है लेकिन पत्रकारिता नहीं कर सकता है.

Advertisement. Scroll to continue reading.

प्रेस क्लब चुनाव 2017 की हुंकार के बाद पदाधिकारियों ने ऐसा काम किया. ग्यारह साल से काबिज प्रेस क्लब पदाधिकारियों से लड़ाई करते हुए चुनाव कराने का ऐलान हुआ. कानपुर के सभी पत्रकारों ने एक तरफ़ा वोटिंग करते हुए उनको कानपुर प्रेस क्लब की कुर्सी दिलवा दी. पता चला कि ये पदाधिकारी ही पत्रकारों को सबकी नजरों में गिराने में जुटे हुए हैं. इनकी नीयत थी कि किसी तरह कानपुर प्रेस क्लब में काबिज रहें. इसके लिए उन्होंने 2017 प्रेस क्लब चुनावों से पहले मेंबर लिस्ट जारी की जिसमे कई पत्रकारों के नाम जान बूझकर काट दिए गए.

एक हफ्ते में हुयी आपत्ति के बाद उन्होंने पत्रकारों के नाम तो लिस्ट में जारी कर दिए लेकिन कई ऐसे नाम खुलकर सामने आये जिनका जिक्र कभी सुना भी नहीं गया था. साथ ही दो साल के अंदर ही पत्रकारों की संख्या 650 से बढ़कर 1591 हो गयी. 21 मई को हुयी वोटिंग के दिन वोट तो डाले गए लेकिन वोट देने वाले फर्जी दिखाई दे रहे थे. खुलेआम हो रही फर्जी वोटिंग को देख प्रशासनिक अधिकारी भी शांत थे क्योंकि जिसको वह टोक रहे थे, फर्जी वोटिंग के मैनेजमेंट करने वाले उसे पहचानने का हवाला देते हुए आगे जाने का अधिकार दे देते थे.

Advertisement. Scroll to continue reading.

इस बात का कई वरिष्ठ पत्रकारों ने विरोध किया तो उनको पुरानी दोस्ती और उनसे बातचीत करने के दौरान अपराधियों से पैर छुआ कर धमकी देने जैसा काम करना शुरू कर दिया गया. चुनाव अधिकारी अंदर फर्जीवाड़ा करने में जुटे थे, जिसमे वह फर्जी बनाये गए पत्रकारों के बैलट पेपर को बोलकर भरवा रहे थे. जब असली पत्रकार को देख लेते थे तो कहते थे कि इस बार बढ़िया होगा.

दूसरी तरफ असली पत्रकारों को बैलट पेपर देने में देरी कर रहे थे. फर्जी वोटिंग कराने का तरीका भी अनोखा था. जब देख लेते थे कि अब पचास के करीब उनके फर्जी मेंबर आ चुके हैं तो कोई न कोई विवाद खड़ा कर देते थे जिसमें सभी उसमे उलझ जाते थे, जिसका फायदा उठाते हुए उनके लोग वोटिंग कर देते. जब रिजल्ट आया तो कोई भी ऐसा पत्रकार नहीं जीता था जिसने सिर्फ पत्रकारों से वोट माँगा था. कुछ ऐसे लोग भी जीत गए थे जो फर्जी पत्रकारों के वोट हासिल करने के लिए पैनल में शामिल हुए थे, साथ ही इसके लिए उनसे मोटी रकम भी ली गयी थी.

Advertisement. Scroll to continue reading.

Ambrish Tripathi
[email protected]

Advertisement. Scroll to continue reading.
Click to comment

0 Comments

  1. Sanjay Shukla

    June 8, 2017 at 10:04 am

    प्रत्यक्ष को किसी प्रमाण की ज़रूरत नहीं होती, वाकई काम बोलता है. दिसम्बर 2013 में सरस बाजपेई के अध्यक्ष और अवनीश दीक्षित के भारी बहुमत से महामंत्री चुने जाने के बाद जीर्ण-शीर्ण हालात में पहुंच चुके कानपुर प्रेस क्लब का कायाकल्प हो गया है। आम लोगों को और आम पत्रकारों को भी प्रेस क्लब में प्रतिनिधित्व मिला, वर्ना हाल ये था कि सन् 2000 से 2013 तक कानपुर प्रेस क्लब में 14 बरस तक चुनाव नहीं कराए गए थे। आम पत्रकारों को अंदर तक नहीं आने दिया जाता था, सदस्यता तो दूर की बात है।

    14 बरस तक लोकतंत्र को बंधक बनाए रखा गया था। जब वादों और उम्मीदों से बढ़कर विकास हुआ तो ही इसके जिम्मेदारों को कानपुर के पत्रकारों ने भारी संख्या में वोट देकर इस बार फिर जिताया। दिसम्बर 2013 में में बम्पर जीत के बाद तत्कालीन अध्यक्ष सरस बाजपेई के मार्गदर्शन और महामंत्री अवनीश दीक्षित की अगुवाई में प्रेस क्लब में जबरदस्त विकास कार्य हुए। सबसे पहले जर्जर भवन का जीर्णोद्धार करके इसको आधुनिक रूप दिया गया। पहली बार पूरा प्रेस क्लब परिसर सीसीटीवी कैमरों से लैस कर दिया गया। आधुनिक पत्रकारिता की ज़रूरतों के अनुसार पूरे परिसर में वाई-फाई इंटरनेट सुविधा भी दी गई। ये इंटरनेट सुविधा अब यहां हर एक के लिए उपलब्ध है। साथ ही एक मल्टीमीडिया कम्प्यूटर रूम भी स्थापित किया गया। जिसमें पत्रकारों को समाचार लेखन एवं प्रेषण की सुविधा उपलब्ध है।

    हर वक्त समाचारों से बाबस्ता रहने के लिए नवीन एलसीडी टेलीविजन की व्यवस्था की गई। वहीं समाचार संकलन हेतु दिनभर लू और गर्मी में परेशान होने वाले पत्रकार भाईयों को राहत के लिए बेहतर “वातानुकूलन” की व्यवस्था भी की गई। नया वाशरूम बनाया गया, पूर्व में तो ये हाल था कि प्रेस क्लब में शौचालय तक खराब हाल में था। वहीं आम श्रमजीवी पत्रकारों को नेतृत्व मिल सके, इसके लिए ही स्क्रीनिंग कमेटी ने सदस्यता के दौरान सभी कार्यरत पत्रकारों को सदस्यता दी। कार्यकारिणी में युवाओं को भी अवसर दिया गया। अबकी बार भारी मतों से अध्यक्ष चुने गए अवनीश दीक्षित कहते हैं “अब सदस्य पत्रकार भाइयों के लिए एक बेहतर, साधन संपन्न डिजिटल व मैन्युअल लाइब्रेरी का प्रस्ताव है, वहीं आयोजनों के लिए परिसर के ऊपर हॉल के निर्माण के लिए कवायद शुरू होन जा रही है”।

    उल्लेखनीय है कि ये सब किया गया अध्यक्ष सरस बाजपेई और महामंत्री अवनीश दीक्षित के निजी प्रयासों से, क्योंकि उनको विरासत में ‘प्रेस क्लब का खजाना खाली’ मिला था। उनके प्रयासों से ही सामाजिक लोगों, संस्थाओं, संगठनों और सरकारी संस्थानों तक से प्रेसक्लब के इस जीर्णोद्धार व कायाकल्प के लिए सहयोग मिला। इतना सब करवाने के बाद भी ये आरोप लगाये जा रहे हैं कुछ मानसिक रूप से विक्षिप्‍त, दारूबाज तथाकथित पत्रकार नेताओं के द्वारा जिनका खुद का कोई आधार नहीं है। ये अगर जीत जाते तो यहां रामराज्‍य था पर हार गये तो इतनी गडबडी दिख रही है।

    कमाल है भाई यशवन्‍त आपका भी स्‍तर इतना गिर गया है, या खबरों का अकाल पडा है ???

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

भड़ास को मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप ग्रुप से जुड़ें- Bhadasi_Group_one

Advertisement

Latest 100 भड़ास

व्हाट्सअप पर भड़ास चैनल से जुड़ें : Bhadas_Channel

वाट्सअप के भड़ासी ग्रुप के सदस्य बनें- Bhadasi_Group

भड़ास की ताकत बनें, ऐसे करें भला- Donate

Advertisement