पिछले कुछ माह से फोकस टीवी के विभीषण एक्टिव हो गए हैं!

फोकस न्यूज चैनल को अभी लॉन्च हुए लम्बा वक्त नहीं हुआ है।  कम समय में बहुत तेजी से इस चैनल ने बाजार में अपनी जगह बनायी है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से चैनल को जानबूझ कर बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है। और ये काम अंदर बैठे विभीषण कर रहे हैं। चैनल की कामयाबी का हिसाब इस बात से लगाया जा सकता है कि चैनल की टीआरपी तेजी से बढ़ी है और उसका टाइम सपेंड भी आईबीएन 7 से ज्यादा है। पिछले महीने ये टाइम स्पेंड ज़ी न्यूज से भी ज्यादा था।

प्राईम टाईम में आने वाला शो फोकस टू नाईट, एनडीटीवी के रवीश के शो से ज्यादा लोकप्रिय होता जा रहा है। चैनल ने शुरुआत में ही हरियाणा के राजनीतिक इतिहास पर आधारित चीफ मिनिस्टर शो बनाया था. जिससे हरियाणा में ही नहीं देश मे भी पसंद किया गय़ा। साथ ही लोकसभा चुनाव 2014 के वक्त भारतीय राजनीति के 50 वर्ष के इतिहास पर आधारित किंगमेकर शो दिखाया गया था। दोनो शो का कंटेंट किसी भी बड़े चैनल के मुकाबल बेहतर था। यूट्यूब पर इन दोनों कार्यक्रमों को कभी भी देखा जा सकता है। और अपने विवके से फैसला कर सकते हैं।

हाल में ही फोकस न्यूज पर एक क्राइम शो किलर लॉंन्च किया गया था। इस शो के दर्शकों ने जबरदस्त तारीफ की है। साथ ही इस शो की क्वालिटी डिस्कवरी लेवल की है। फोकस का क्राइम शो किलर दूसरे न्यूज चैनल के शो की परपंरा से हटकर बनाया गया था लेकिन बजट की कमी की वजह से इसे बंद कर दिया गया। न्यूज के मामले में भी फोकस आजतक, एबीपी और जी को टक्कर दे रहा है। बीबीपुर में बेटियों के गांव की कहानी भी सबसे पहले फोकस न्यजू ने ही ब्रेक की थी जिसके बाद मोदी की मुहिम शुरु हुई। जम्मू कश्मीर के अरनिया सेक्टर में पाकिस्तानी शैलिंग के लाईव शूट फोकस के रिपोर्टर ने सबसे पहले किया था। जम्मू कश्मीर के लालचौक में बाढ़ के हालात में सबसे पहले फोकस न्यूज पहुंचा था. केदारनाथ में राहुल गांधी की यात्रा को सबसे पहले फोकस ने ही दिखाया था। फोकस के कार्यक्रमों में बड़े-बड़े गेस्ट बैठे होते हैं। जो किसी भी दूसरे बड़े चैनल के मुकाबले खड़ा है। फिर भी चैनल की जबरदस्ती की आलोचना की जाती है।

दूसरी तरफ चैनल के बारे में गलत रिपोर्टिंग की जा रही है और वेबजह की आलोचना कर नेगेटिव माहौल बनाया जा रहा है। बार-बार माहौल बनाया जाता है कि नवीन जिंदल चैनल नहीं चलाना चाहते। ऐसा माहौल बनाने वाले वो लोग है जो चैनल की इमेज खराब कर खुद सत्ता हासिल कर चैनल की कुर्सियों पर बैठना चाहते हैं। ये वो लोग है जो अपनी पत्रकारिता के दौर में कभी किसी बड़े ग्रुप के साथ लंबे वक्त तक काम नहीं कर पाएं है और न ही पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी कोई पहचान रही है। आज ऐसे नाकाम लोग फोकस में आकर चैनल को बदल देने का दावा कर रहे है।

भारत में असफलता की सबसे बड़ी वजह होती है जब मैनेजमेंट कान का कच्चा हो। किसी भी चैनल के डूबने की सबसे बड़ी वजह होती है जब मालिक के आसपास रहने वाले लोग चैनल के कंटेंट और पत्रकारिता की बात करने लगते है। चैनल की कमिया गिना कर बेहतर करने के दावे करने लगते है। दुर्भाग्य की बात मैनेजमेंट ऐसे लोगो पर विश्वास भी करने लगता है और जिम्मेदारियां भी सौंप देता है। यहीं से चैनल की हार शुरु होती है। फोकस में भी यहीं सब होने लगा है। अब जेएसपीएल के अधिकारी पत्रकार बन गए है। बाहर से बैठकर बाते करना सबसे आसान काम होता है। इतिहास गवाह है कि भारत में जितने भी चैनल बंद हुए है उनके पीछे की वजह मालिक के आसपास बैठ विभीषण है। जिनकी बातों पर मालिक लोग विश्वास कर रहे होते है ओर सही दिशा में बढ़ रहे चैनल का भी बेढ़ागरक कर बैठते है। शायद, नवीन जिंदल भी ऐसे ही लोगों से घिरे है। पिछले तीन-चार महीनों से फोकस के विभीषण एक्टिव हो गये हैं। जो चैनल को आगे बढ़ाने के नाम पर मालिक को कमिया गिनाकर हिरो बन रहे है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “पिछले कुछ माह से फोकस टीवी के विभीषण एक्टिव हो गए हैं!

  • Vishal Nagpal says:

    बेहद सोच समझकर खुद के बचाव के लिए लिखी गयी इस स्क्रिप्ट को पढ़कर ही ये अनुमान हो जाता है कि प्रोग्रामिंग और कंटेंट के लिए ज़िम्मेदार लोग कितने काबिल हैं। भाई साहब कम से कम ये स्क्रिप्ट तो आप ठीक से लिख लेते। इसमें भी हवाई पुल बाँध दिए आपने। माना कि आप सालों तक बीबीसी, डिस्कवरी और सीएनएन में काम करके फोकस टीवी पहुंचे हैं, लेकिन जनाब यहाँ आपकी काबलियत तो आपके काम से ही परखी जाएगी। झूठे दावों से कब तक बेहलाएंगे आप अपने आपको? कभी अपने बनाए प्रोग्राम खुद बैठकर देखिये आपका सच से सामना हो जाएगा।

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  • shalini sinha says:

    इतने बड़े जिंदल ग्रुप का चैनल, जिसमें संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी गयी . अत्याधुनिक तकनीकी से सुसज्जित न्यूज़रूम और भव्य स्टूडियो, देश भर में नेट्वर्किंग और महंगी न्यूज़ एजेंसी की सेवाएं, देश भर में डिस्ट्रीब्यूशन, आखिर किस बात की कमी थी कि इतने लंबे समय में भी आप इस चैनल को पहचान तक नहीं दिला पाए। टीआरपी की बात आपने की है तो ज़रा ये भी बता दीजिये कि टीआरपी में फोकस टीवी किस पायदान पर खड़ा है? आपने जिन प्रोग्रामों का नाम लिया है एक बार खुद भी देख लीजिये कि यूट्यूब पर ही उन्हें कितनी हिट्स मिली हैं? किसी ने कभी नाम भी नहीं सुना इन कार्यक्रमों का जिनको आप डिस्कवरी से बेहतर बता रहे हैं।

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  • nidhi sethi says:

    मालिक के साथ विभीषण बैठे हैं जो मालिक को बर्बाद कर रहे हैं। इशारा तो कर ही दिया है आपने अब नाम भी ले लीजिये आपकी नज़र में रावण कौन है?

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  • केशव says:

    फोकस टूनाईट एक बेहद नीरस, बोरिंग और पिटा हुआ प्रोग्राम है जिसकी तुलना एनडीटीवी के रवीश के शो से करके स्वयं को हंसी का पात्र बना रहे हैं। आपके मुताबिक़ आप एनडीटीवी, ज़ी न्यूज़, आईबीएन7 सबसे आगे हैं। फिर भी आप टीआरपी में कहीं नहीं। चैनल को कोई पहचानता तक नहीं। कोई बड़ा नेता चैनल की माइक आईडी पर बाईट देने को तैयार नहीं होता। आपके कार्यक्रमों की टीआरपी इकाई में भी नहीं है। चैनल का कहीं ज़िक्र नहीं। इतनेलंबे वक्त में एक ऐसी एक्सक्लूसिव स्टोरी नहीं दिखा पाए जो चैनल को पहचान दिला सकती। लेकिन तुलना सीधे डिस्कवरी, और आईबीएन7 से, एनडीटीवी और रवीश कुमार को भी पीछे बता दिया खुद से। भाई साहब फेंकने की भी एक हद होती है। क्या ऐसे ही झूठे दावे करके अपनी कुर्सी बचाए हुए हैं अबतक? आपके इस हुनर का जवाब नहीं। 65

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  • Haan mac sood thik keh rahe hain. Keshav jaise bakvas karne valon kam se kam in female anchors se hi knowledge le lo

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  • केशव says:

    हैरान हूँ भाई जिन लोगों ने फोकस टीवी की लुटिया ही डुबो दी वो मैनेजमेंट को कान का कच्चा, रावण, नासमझ बता रहे हैं। जेएसपीएल के अधिकारियों की समझ पर सवाल उठाने से पहल थोडा अपनी समझदारी का परिचय भी देते। आपको इसी मैनेजमेंट ने फ्री हैंड दिया था, जब आपने बड़े बड़े वादे किये थे कि आप चैनल को टॉप चैनलों में शुमार कर देंगे। लेकिन एक अरसा बीत जाने के बाद भी आपसे कुछ हो ना सका। टीआरपी, मार्केट शेयर, ब्रांडिंग, रेवेन्यू, प्रोग्रामिंग, एडिटोरियल, कंटेंट, किसी भी मामले में चैनल अपनी पहचान नहीं बना पाया। दुसरे चैनलों से मुकाबला तो दूर की बात है।

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  • मोहित शर्मा says:

    च्विंगम साहब आप जिनपर निशाना साध रहे हैं वो देश के सबसे बड़े न्यूज़ चैनल से यहाँ आए हैं। उन्हें किसी पहचान की ज़रूरत ना थी ना होगी। क्योंकि उनका काम ही उनकी पहचान है। वो पैराशूट प्राइम मिनिस्टर नहीं हैं, जिन्हें प्रोग्रामिंग की एबीसी भी नहीं पता हो।

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  • akhil kumar singh says:

    जिन एक आदमी के आने की वजह से फोकस का बेडा गर्क कर चुका गैंग डरा हुआ है वो देश के सबसे बड़े अखबारों में से एक में सालों तक संपादक रहे हैं. जो उन्हें सिर्फ कॉरपोरेट का आदमी बता रहे हैं उनकी समझ पर हंसी आ रही है. इन्हे शर्म नहीं आती की देश से बड़े से बड़े चैनलों में भी जितनी सेलरी ना मिलती हो उतनी सेलरी ले लोग डेढ़ साल से ले रहे हैं और दिल्ली तक में चैनल तो छोड़िये चार पत्रकार भी इन महान लोगों का नाम नहीं जानते। इन्होने एक अच्छे भले चैनल का बेड़ा गर्क कर दिया और घटिया षड्यंत्र रच कर फोकस हरियाणा जैसा नम्बर वन चैनल बंद करवा दिया। इन्हे मालिक ने इशारा भी कर दिया है की ये चैनल से विदा हो जाएँ, लेकिन ये ऐसे नहीं जायेंगे क्यूंकि इनके पास ना दूसरी नौकरी है ना उसकी उम्मीद है.

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  • संदीप सेठी says:

    देश के सबसे बड़े अखबारों में काम करने और न्यूज़ चैनल को सफल बनाने में ज़मीन आसमान का अंतर है। देश में ऐसे वयोवृद्ध पत्रकारों की कोई कमी नहीं है जो बरसों बड़े अखबारों में काम करते रहे लेकिन वो सिर्फ स्टूडियो चर्चा की शोभा ही शोभा ही बढ़ाते हैं चैनल नहीं चलाते। चैनल तो वही टीम चलाती है जिसके पास चैनल चलाने का अनुभव हो।

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  • कोई अंदर वाला नवीन जिंदल को वर्बाद करने पे तुला है , ज़ी पंजाब हिमाचल हरियाणा को दिनेश शर्मा बर्वाद करने पे तुला है , पता चला है कि दिनेश शर्मा ज़ी पंजाब हिमाचल हरियाणा का भट्ठा बिठा कर हिमाचल में अपना नया चैनल खोलने जा रहा है | दिनेश शर्मा ने सम्पादक के कुर्सी सम्भालते ही चैनल में पुराने कम करने वाले ( जो तेरह साल से भी अधिक पुराने है , जब चैनल शुरू हुआ था ) सब लोगों को निकाल बाहर किया है , सुभाष चंद्रा और मैनेजमेंट को कुछ दिखाई नही दे रहा | अगर समय रहते ना संभले तो जिंदल और सुभाष दोनों का डूबना तय है |

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