‘फ़ोकस न्यूज़’ का ‘न्यूज़ वर्ल्ड’ होना और शैलेष के विजन का शुरुआत में ही पिटना!

फ़ोकस न्यूज़ का नाम बदलकर न्यूज़ वर्ल्ड तो हो गया है लेकिन चैनल का कंटेंट कोई छाप नहीं छोड पाया है। विज़न का अदभुत टोटा दिखता है। केवल पचास ख़बरें, सौ ख़बरें से कोई चैनल इतने भीड़ वाले बिज़नेस में कोई जगह नहीं बना सकता । पता नहीं मालिक को दिखता है या नहीं। हाँ, शैलेश और कल्याण की जोड़ी का वश चला तो इसे आगरा-मेरठ का लोकल चैनल होने में देर नहीं लगेगी। फोकस से न्यूज वर्ल्ड बनने की यात्रा के दौरान चैनल से वर्ल्ड तो ज़रूर ग़ायब हो गया है, बड़ी ख़बरों का भी विज़न नहीं। नवीन जिंदल को न्यूज़ नेशन बनाने का सपना बेचकर फ़ोकस आए शैलेश का कोई विज़न ही नहीं है, वर्ल्ड विज़न तो भूल जाईये।

सब जानते हैं न्यूज़ नेशन की सफलता के पीछे सबसे ज़्यादा डिस्ट्रीब्यूशन और बाक़ी सर्वेश तिवारी का हाथ था। इस महीने की सबसे बड़ी ख़बर क्या थी। वही न, दादरी के एक गाँव में एक इंसान को बीफ खाने के आरोप में मार दिया गया। मुज़फ़्फ़रनगर जैसा कांड था। सारे चैनल हफ़्ते दस दिन तक इस ख़बर पर लगे रहे पर न्यूज़ वर्ल्ड के संपादक को पहले तो ख़बर छोटी लगी फिर डर के मारे चलाने को तैयार नहीं हुए। मोदी की अमेरिका यात्रा पर भी घिसा पिटा कवरेज रहा।

एक और ख़बर है जिसने पूरी दुनिया को मथ डाला। कई हफ़्ते संपादकीय से लेकर स्पेशल बनाए गए लेकिन वो खबर शैलेश के संपादकीय विज़न में ख़बर ही नहीं थी। सारे चैनल जिस ख़बर पर लगे रहे वो फ़ोकस न्यूज़ के लिए ख़बर नहीं थी। वो खबर रही आयलान की ख़बर। समुद्र के तट पर पड़े एक तीन साल के बच्चे की तस्वीर ने पूरी दुनिया को मथ दिया था। एक तस्वीर ने सीरिया की युद्ध विभीषिका, आईएस का आंतक और पूरे यूरोप में शरणार्थियों की समस्या को एक झटके में सामने ला दिया। समुद्र में डूबा तीन साल का आयलान इस विभीषिका का चेहरा बन बैठा। वाशिंगटन पोस्ट से लेकर टाईम, एबीपी न्यूज से लेकर आजतक ने इस ख़बर की मार्मिकता पर कई घंटे ख़र्च किए लेकिन संपादकीय विज़न में तंग संपादक को ख़बर समझ में ही नहीं आई। ढीढता तो देखिये, इतनी बड़ी कहानी बनने के बाद में भी इसे चलाना ठीक नहीं समझा। चैनल के लोगों ने बहुत ज़ोर डाला तो एक छोटी स्टोरी बनाने की इजाज़त मिली। स्पेशल तो भूल ही जाईये।

दूसरी मनोरंजक ख़बर बराक ओबामा की थी। पहली बार ओबामा एक सीरियल की शूटिंग के लिए अलास्का गए। सबने स्पेशल किया। महान संपादक को ख़बर समझ ही नहीं आई। सानिया मिर्ज़ा को खेल रत्न मिला। संपादकीय वरिष्ठों ने आधे घंटे का प्रोग्राम बनाने की बात की तो झिड़क दिया। बाद में ख़ुद नवीन जिंदल से झिडकी खाई तब तीन दिन बाद सानिया मिर्ज़ा पर आधे घंटे का प्रोग्राम बनवाने लगे।

ये तीन बानगी बताने के लिए काफ़ी था कि वो चैनल को किस ऊँचाई पर ले जाएंगे। उधार के पीपीटी प्रजटेंशन लेकर और ग़लतियाँ निकालकर वो नवीन जिंदल को थोड़े दिन चूना लगा सकते हैं लेकिन जिस व्यक्ति का न कोई विज़न हो, न परस्पेक्टिव हो, न कोई उपलब्धि, न जिसे पावर सर्किल में कोई जानता हो, वो चैनल को क्या ब्रांड बना पाएंगे, सब जानते हैं।

उपरोक्त विश्लेषण किन्हीं राम सिंह ने मेल आईडी rams45221@gmail.com के जरिए भड़ास को भेजी है.

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फोकस टीवी बंद होगा, संजीव श्रीवास्तव ने दिया इस्तीफा

फोकस टीवी से संजीव श्रीवास्तव ने इस्तीफा दे दिया है. वे एडिटर इन चीफ हुआ करते थे. संजीव करीब दो साल से इस ग्रुप के साथ थे. बताया जा रहा है कि फोकस टीवी को बंद कर दिया जाएगा. मतंग सिंह के पाजीटिव मीडिया ग्रुप से नवीन जिंदल का जो करार था, वो खत्म हो चुका है. जिंदल अब खुद की तरफ से नया चैनल लाएंगे और फोकस के अधिकतर स्टाफ को उसमें एकोमोडेट करेंगे. संजीव श्रीवास्तव के विदा होने के बाद जिंदल अब मीडिया की कमान किसी दूसरे वरिष्ठ पत्रकार को सौंप सकते हैं. इसको लेकर कई नामों की चर्चा है.

 भड़ास तक अपनी बात आप bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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फोकस टीवी से संजीव श्रीवास्तव के जाने और शैलेश या संजीव पालीवाल के आने की चर्चा

The situation at Focus News has become more precarious and talks of exit of Group Editor Sanjeev Srivastava Ji are getting stronger. If Srivastava Ji goes, then the entire core team of focus will be in jeopardy as the main person behind the establishment of the news channel will go. There are talks of search for a new editor and it is rumored that sailesh ji or Sanjeev Paliwal Ji may take role of Srivastava ji. Indications (though remote possibility) say that Jindal company has finally offered to patch up with Sandeep Bamzai Ji, who had become whistleblower after his exit.

If bamzai ji agrees to patch up offer given by big official in jindal center, he may be back as he knows working of focus and can be better than a new editor coming in place of Srivastava ji. A decision will happen soon as focus is heading for a relaunch in August and a new editor who can turnaround the channel is being hunted rigorously. Meanwhile interference of Jspl has increased and their employees are increasing their say in day to day working of the channel inspite of the strict vigil on funding of the channel. Even anchors for every slot will now be decided at jindal office by people who have no idea of running news operation. Now reporters and cameraman also go in shared taxis for their assignments to reduce cost, if story is not ordered from jindal office.

A new appointee of JSPL is working as proxy editor and threatening other staffers to work alongwith him or risk their jobs. The entire top brass including Amit Tripathi ji are under scrutiny and have been told to perform or perish. Naveen jindal sir is rumored to have told the staff to raise TRP to 3 within one month but staff is bewildered on how to raise TRP when there is no distribution apart from Tata sky videocon and dd. even Airtel Dth is not carrying focus news.

Other employee who are performing and due for raise are also fearing salary cut let alone hike. The example if JSPL is given where staff has been reduced by 25% and no employee has got last year bonus till now and no pay hike is happening to fund focus news expenses of 50 crore. Reason given is that when JSPL staff is not getting bonus and raise, how will focus staff get raise; we should be happy with getting salary on time unlike the time of Matang Sinh ji when salary was delayed for months.

This way the channel will die it’s slow death and Many of us will get jobless due to mis management. Many employee hope Naveen jindal ji will get free from troubles and give free hand to experienced newsmen to run the channel rather than cutting budget and putting JSPL officers to manage news channel.  In hope of a focus to come soon.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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पिछले कुछ माह से फोकस टीवी के विभीषण एक्टिव हो गए हैं!

फोकस न्यूज चैनल को अभी लॉन्च हुए लम्बा वक्त नहीं हुआ है।  कम समय में बहुत तेजी से इस चैनल ने बाजार में अपनी जगह बनायी है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से चैनल को जानबूझ कर बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है। और ये काम अंदर बैठे विभीषण कर रहे हैं। चैनल की कामयाबी का हिसाब इस बात से लगाया जा सकता है कि चैनल की टीआरपी तेजी से बढ़ी है और उसका टाइम सपेंड भी आईबीएन 7 से ज्यादा है। पिछले महीने ये टाइम स्पेंड ज़ी न्यूज से भी ज्यादा था।

प्राईम टाईम में आने वाला शो फोकस टू नाईट, एनडीटीवी के रवीश के शो से ज्यादा लोकप्रिय होता जा रहा है। चैनल ने शुरुआत में ही हरियाणा के राजनीतिक इतिहास पर आधारित चीफ मिनिस्टर शो बनाया था. जिससे हरियाणा में ही नहीं देश मे भी पसंद किया गय़ा। साथ ही लोकसभा चुनाव 2014 के वक्त भारतीय राजनीति के 50 वर्ष के इतिहास पर आधारित किंगमेकर शो दिखाया गया था। दोनो शो का कंटेंट किसी भी बड़े चैनल के मुकाबल बेहतर था। यूट्यूब पर इन दोनों कार्यक्रमों को कभी भी देखा जा सकता है। और अपने विवके से फैसला कर सकते हैं।

हाल में ही फोकस न्यूज पर एक क्राइम शो किलर लॉंन्च किया गया था। इस शो के दर्शकों ने जबरदस्त तारीफ की है। साथ ही इस शो की क्वालिटी डिस्कवरी लेवल की है। फोकस का क्राइम शो किलर दूसरे न्यूज चैनल के शो की परपंरा से हटकर बनाया गया था लेकिन बजट की कमी की वजह से इसे बंद कर दिया गया। न्यूज के मामले में भी फोकस आजतक, एबीपी और जी को टक्कर दे रहा है। बीबीपुर में बेटियों के गांव की कहानी भी सबसे पहले फोकस न्यजू ने ही ब्रेक की थी जिसके बाद मोदी की मुहिम शुरु हुई। जम्मू कश्मीर के अरनिया सेक्टर में पाकिस्तानी शैलिंग के लाईव शूट फोकस के रिपोर्टर ने सबसे पहले किया था। जम्मू कश्मीर के लालचौक में बाढ़ के हालात में सबसे पहले फोकस न्यूज पहुंचा था. केदारनाथ में राहुल गांधी की यात्रा को सबसे पहले फोकस ने ही दिखाया था। फोकस के कार्यक्रमों में बड़े-बड़े गेस्ट बैठे होते हैं। जो किसी भी दूसरे बड़े चैनल के मुकाबले खड़ा है। फिर भी चैनल की जबरदस्ती की आलोचना की जाती है।

दूसरी तरफ चैनल के बारे में गलत रिपोर्टिंग की जा रही है और वेबजह की आलोचना कर नेगेटिव माहौल बनाया जा रहा है। बार-बार माहौल बनाया जाता है कि नवीन जिंदल चैनल नहीं चलाना चाहते। ऐसा माहौल बनाने वाले वो लोग है जो चैनल की इमेज खराब कर खुद सत्ता हासिल कर चैनल की कुर्सियों पर बैठना चाहते हैं। ये वो लोग है जो अपनी पत्रकारिता के दौर में कभी किसी बड़े ग्रुप के साथ लंबे वक्त तक काम नहीं कर पाएं है और न ही पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी कोई पहचान रही है। आज ऐसे नाकाम लोग फोकस में आकर चैनल को बदल देने का दावा कर रहे है।

भारत में असफलता की सबसे बड़ी वजह होती है जब मैनेजमेंट कान का कच्चा हो। किसी भी चैनल के डूबने की सबसे बड़ी वजह होती है जब मालिक के आसपास रहने वाले लोग चैनल के कंटेंट और पत्रकारिता की बात करने लगते है। चैनल की कमिया गिना कर बेहतर करने के दावे करने लगते है। दुर्भाग्य की बात मैनेजमेंट ऐसे लोगो पर विश्वास भी करने लगता है और जिम्मेदारियां भी सौंप देता है। यहीं से चैनल की हार शुरु होती है। फोकस में भी यहीं सब होने लगा है। अब जेएसपीएल के अधिकारी पत्रकार बन गए है। बाहर से बैठकर बाते करना सबसे आसान काम होता है। इतिहास गवाह है कि भारत में जितने भी चैनल बंद हुए है उनके पीछे की वजह मालिक के आसपास बैठ विभीषण है। जिनकी बातों पर मालिक लोग विश्वास कर रहे होते है ओर सही दिशा में बढ़ रहे चैनल का भी बेढ़ागरक कर बैठते है। शायद, नवीन जिंदल भी ऐसे ही लोगों से घिरे है। पिछले तीन-चार महीनों से फोकस के विभीषण एक्टिव हो गये हैं। जो चैनल को आगे बढ़ाने के नाम पर मालिक को कमिया गिनाकर हिरो बन रहे है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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The situation inside Focus office at noida is very grim… All colleagues are scared of loosing their jobs…

Dear Bhadaas4Media team, The recent happenings at Focus News and regional channels have been carried by your website, especially the closure of the regional channels and clouds of uncertainities on the 2 balance channels. The fate of the 2 channels is also heading to a closure in few weeks as the whistle blown by veteran journalist Sandeep bamzai has made agencies like CBI take note of relation between Matang Sinh ji and Naveen Jindal considering the funding of channels of Focus group owned by Matang Sinh Ji on paper.

Sandeep bamzai who joined Focus as Managing Editor for one month at a crore ruppe salary annually left igniting a dispute between him and Naveen jindal. Sandeep bamzai claims that his dues are not cleared on instructions of Jindal whereas people close to Jindal claim that all contractual dues have been paid in full. Once Bamzai Ji realize that he is not going to get full and final settlement as per his calculation, he went live on Twitter exposing funding pattern of Focus Group. Due to Company Law Board order on petition of Manoranjana Sinh, the ownership transfer of Focus Tv Group to Naveen Jindal from Matang Sinh Ji did not materialise. But the money of Rs 150 cr paid to Matang sinh Ji was shown as loan. Later for 2 years, focus tv group got funding from Naveen Jindal of rs 200 cr. bamzai Ji uses sarada scam arrestee in place of Matang sinh Ji and coal scam chargesheeted for Naveen jindal in his tweets, calling attention of CBI to investigate the nexus.

After Bamzai Ji blew the whistle in Lalit Modi style, he is understood to have provided money trail information to agencies for collecting evidence. According to focus colleagues attempts are on to shift the 2 balance channels on a different license for which Focus Group editor Sanjiv Srivastava has been doing rounds of I&B ministry for approvals. This need came after sensing the investigations in progress on ownership and fund trail which can result in cancellation of license to black out Focus Tv group. With Modi Govt against Naveen jindal chances of favourable decision to change Focus channels on a Matang sinh free license is remote.

Recently focus gave pink slips to employees of 4 channels to reduce staff by 700 people and monthly burden by 5 crore. The pink slip gave 4 months salary as golden handshake which further irked Bamzai Ji who claims to have been sent only one month cheque, and thus becoming whistle blower. Only a part of funding thru advertisements can be seen by us as all focus channels were running Jindal group ads in every break. Now suddenly the Jindal group ads have also decreased sensing the upcoming issues which Jindal wants to avoid due to his already long list of problems.

A source says that bamzai Ji has provided details of 80 cr funding that is questionable by law and will put Naveen jindal in problem if investigators catch evidence thru banking transfer.  To resolve matters recently former Zee Ceo vijay jindal was brought to oversee focus tv group by Naveen jindal. According to sources, vijay jindal has given advise to close down focus TV group temporarily to avoid issues. Vijay jindal in his report is heard to have brought up the matter of no advertising prospects which will force Naveen jindal to pump 60-65 crore every year in loss making Focus TV group.

The situation inside Focus office at noida is very grim. All colleagues are scared of loosing their jobs. Some bigwigs have been asked to resign and others face salary cuts and delays. The day is not far when Focus National News and Focus Odisha also face voluntary or forced closure, either by Naveen jindal himself or from cancellation of news license. The channel is taken off from Airtel DTH and all cable networks due to funding issues.

Naveen Jindal is also heard to be trying hard to patch up with zee boss Subhash Chandra to end their feud after which focus will have no great relevance to him. If jindal is successful in making peace with BJP top brass, then his need for a mouthpiece will not exist anymore. Either way, focus is headed for closure as jindal firms are hit hard financially and cannot afford to pay crores every month in loss making venture with no possibility of returns. But will the balance employees of focus national news and focus Odisha get 4 months salary with pink slip as closure cost of focus TV group itself is said to be 23 crore. With no TV channel jobs in the market as P7, sahara and news express staff is already waiting for new jobs, getting jobs for focus TV employees will not be easy.

Even top TV channels are looking to cut costs and don’t have vacancies to absorb staff of 4 national news channels and 4 regional channels. The future of focus staff is getting uncertain and bleaker by the day as every experiment tried to make a mark has failed. Only two hopes for many is bamzai Ji who became popular in short time at focus and is likely to be part of a new English channel founding team. And other is Matang Sinh Ji who after getting bail is back with his capability to run the channel at lower cost on his own.

The uncertainty is killing many and needs to be ended as the ones still left at focus are more worried for their futures, as their old colleagues who got pink slips are atleast clear that they have to find alternate jobs soon.

Yours sincerely
Unfocused at Focus
unfocussed@yandex.com

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फोकस न्यूज पर शुरू होगा नया क्राइम शो- ‘किलर’

​6 जून से फोकस न्यूज़ पर शुरू हो रहा है एक क्राइम शो – किलर। हिंदी न्यूज चैनल पर चल रहे क्राइम शो से हटकर बनाने की कोशिश की गयी है। अपराध की कहानियां भी ऐसी है और उनको बताने का तरीका भी नया है। सनसनी और बेवजह का ड्रामा नहीं बनाया गया है।

मुंबई के तीन बड़े टीवी कलाकार इस शो का हिस्सा हैं। ये न तो सनसनी जैसा है और ना सावधान इंडिया का कॉपी। इसलिए आप सभी से गुजारिश है एक बार जरूर देखे और अपना फीडबैक दें। इस शो का कॉन्सेप्ट और डायरेक्शन फ्रेंकलिन निगम का है. लेखकों की टीम में है सपना सिंगला, सौम्या चतर्थ और अभिषेक दुबे.

प्रेस रिलीज

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फोकस चैनल के मालिक नवीन जिंदल और उनके बेटे-बेटी-पत्नी के खिलाफ ईडी ने फेमा के तहत केस दर्ज किया

फोकस न्यूज चैनल के मालिक और कांग्रेस नेता नवीन जिंदल पर इनफोरसमेंट डायरेक्टोरेट यानि ईडी ने केस दर्ज कर लिया है. इनके चार परिजनों के खिलाफ भी ईडी ने मामला दर्ज किया है. ऐसा रिजर्व बैंक को जानकारी दिए बिना सिंगापुर के बैंक में बैंक खाता खोलने के कारण किया गया है. निदेशालय जल्द ही इन सभी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजेगा. जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है उनमें नवीन जिंदल के अलावा उनकी पत्नी शालू जिंदल, बेटी यशस्विनी और बेटे वेंकटेश हैं. इन सभी के खिलाफ फेमा के तहत केस दर्ज कर लिया गया है.

प्रवर्तन निदेशालय को फाइनेंसियल इंटेलिजेस यूनिट से सूचना मिली थी कि नवीन जिंदल और उनके परिजनों ने सिंगापुर के एक प्राइवेट बैंक में साल 2010 में खाते खुलवाए थे. एफआईयू की रिपोर्ट में इन बैंक खातों के बाकायदा नंबर भी भेजे गए थे. सूचना के आधार पर ईडी ने रिजर्व बैंक से पता किया कि नवीन जिंदल और उनके परिजनो के इन बैंक खातो की उसके पास कोई सूचना है, तो आऱबीआई ने साफ तौर पर इनकार कर दिया.

सूत्रों के मुताबिक, सिंगापुर के प्राइवेट बैंक जूलियस बीर एंड कंपनी में अकाउंट खुलवाते वक्त चारों अकाउंट दस-दस हजार डॉलर जमा कराए गए थे. प्रवर्तन निदेशालय जानना चाहता है कि इन खातो में जिंदल ने कब कब कितना पैसा जमा कराया, इस खाते में पैसा कहां-कहां से आया, भारत के किन बैंकों से इस खाते में पैसा गया और इस पैसे का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, इस समय खाते में कितना पैसा है और इस बारे में जिदल ने आरबीआई को सूचना क्यों नहीं दी.

ये तमाम ऎसे सवाल हैं जिनका जवाब ईडी जिंदल से जानने की कोशिश करेगा. उधर, नवीन जिंदल की कंपनी जेएसपीएल का कहना है कि कुछ भी गलत नहीं किया गया है. सब कुछ अधिकारिक तौर पर है हुआ. जिंदल का बहुत सा कारोबार विदेशों में भी है. नोटिस मिलने पर जांच एजेंसियों को जवाब दे दिया जाएगा. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने नवीन जिंदल के खिलाफ कोयला घोटाला मामले में भी लगभग आधा दर्जन केस दर्ज कर रखा है, जिनकी जांच जारी है.

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‘फोकस’ के सारे रीजनल न्यूज चैनल बंद!

नवीन जिंदल को धीरे धीरे समझ में आने लगा है कि मतंग सिंह ने उन्हें अच्छी खासी टोपी पहना दी है. फोकस समेत ढेर सारे न्यूज चैनल मतंग सिंह से खरीदने के कुछ महीनों बाद नवीन जिंदल को लगने लगा कि पैसा तो आ नहीं रहा, उपर से करोड़ों घर से जा रहा है. जिंदल ने चैनल खरीदा सुभाष चंद्रा और जी ग्रुप को सबक सिखाने के लिए. लेकिन ये ढेर सारे चैनल हाथी के पेट की तरह काफी पैसा खाते हैं.

बांग्ला से लेकर असमिया तक चैनलों की पूरी श्रृंखला खरीदने के बाद नवीन जिंदल ने फैसला लिया है कि वे केवल नेशनल न्यूज चैनल चलाएंगे और बाकी बंद कर देंगे. इसी क्रम में फोकस न्यूज को छोड़कर बाकी सारे रीजनल न्यूज चैनलों को बंद करने का फरमान जारी कर दिया गया है. इस कारण सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए हैं. ये लोग दूसरे चैनलों में नौकरी तलाशने लगे हैं. (कानाफूसी)

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ईडी ने मतंग सिंह के 100 करोड़ मूल्‍य की संपत्ति जब्‍त की

कोलकाता : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह की लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति शुक्रवार को जब्त कर ली। साथ ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिग की जांच को लेकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद अर्पिता घोष और मतंग सिंह के दो सहयोगियों को नया समन भी जारी किया है। संपत्ति जब्त करने की यह कार्रवाई सारदा घोटाले में मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है। 

ईडी ने 100 करोड़ रुपये से की जिन संपत्तियों को जब्‍त की है, उनमें एक बंगला व एक फ्लैट दिल्ली के पॉश कॉलोनी में हैं, जबकि नोएडा में एक बिल्डिंग है। सूत्रों ने कहा कि एक फ्लैट गोल मार्केट में डॉक्टर लेन में है। नोएडा के सेक्‍टर 4 में भी एक बिल्डिंग हैं, जिनमें कभी फोकस व हमार टीवी का संचालन होता था। इन संपत्तियों को जल्दी ही कुर्क किया जाएगा। उधर, ईडी ने पश्चिम बंगाल में बालूरघाट सांसद अर्पिता घोष को 13 फरवरी को पेश होने के लिए समन जारी किया गया है जबकि मतंग सिंह की सहयोगी ख्याति सदाना और रूपेंद्रनाथ सिंह को भी अगले हफ्ते बुलाया गया है।

सारदा घोटाला मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह शुक्रवार को बीमार होने की वजह से अलीपुर की अदालत में पेश नहीं हो पाए। सिंह को गुरुवार को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल से छुट्टी मिली और उन्हें जेल हिरासत में भेज दिया गया। उल्‍लेखनीय है कि मतंग सिंह को बचाने के प्रयास में गृह सचिव अनिल गोस्‍वामी को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ गई। 

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जिंदल के चैनल ‘फोकस’ ने राहुल गांधी को बीजेपी उपाध्यक्ष घोषित किया

लाइव इंडिया नामक न्यूज चैनल अपने मालिक के घर के पार्टी फंक्शन को लाइव प्रसारित करने के कारण बदनाम है तो फोकस नामक चैनल नवीन जिंदल के निजी खेल, समारोह, चुनाव आदि को दिन भर लाइव दिखाने के लिए कुख्यात हो चुका है. इसी जिंदल के फोकस नामक चैनल ने अब तो राहुल गांधी को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित कर दिया है. इतनी बड़ी गलती फोकस टीवी पर लाइव चली लेकिन किसी वरिष्ठ पत्रकार की नजर इस पर नहीं पड़ी.

लाखों रुपये सेलरी लेने वाले नामधारी पत्रकारों ने भी मान लिया है कि फोकस तो जिंदल के जिद पर चल रहा है इसलिए यहां पत्रकारिता करने या पढ़ने-लिखने से कोई मतलब नहीं है, सो जो कुछ चैनल पर चल दिख रहा है, उसे चलने दिखने दो. पर दर्शकों के पास कई आंख नाक कान होते हैं. भड़ास के पास कई दर्शकों ने मेल करके फोकस टीवी की गलती को मय तस्वीर भेजा है जिसे यहां प्रकाशित किया जा रहा है.

कहीं ऐसा तो नहीं कि आजकल टीवी चैनल वाले बीजेपी से इतने अधिक प्रभावित हैं कि चैनलों ने राहुल गांधी तक को भी बीजेपी का उपाध्यक्ष दिखाना शुरू कर दिया है. पिछले दिनों राहुल गांधी ने झारखंड में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था लेकिन कांग्रेसी सांसद रहे और इन दिनों परेशान घूम रहे नवीन जिंदल के चैनल फोकस टीवी ने राहुल गांधी का परिचय बीजेपी उपाध्यक्ष के रूप में करा दिया. अब सवाल ये है कि जिस पार्टी से नवीन जिंदल संबंध रखते हैं अगर उसी पार्टी के मालिक का नाम ही सही नहीं दिखा सकते हैं तो इस चैनल में काम करने वाले लोग किसी काम के नहीं हैं.

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इंडिया न्यूज, न्यूज नेशन यूपी यूटी, न्यूज24, सहारा समय समेत छह चैनल डीडी डीटीएच के फ्री डिश से डिलीट

एक बड़ी खबर दूरदर्शन की मुफ्त डीटीएच (डायरेक्ट टू होम) फ्री डिश से है. यहां से छह चैनलों को डिलीट कर दिया गया है जिनमें कई न्यूज चैनल भी शामिल हैं. हटाए गए न्यूज चैनलों के नाम न्यूज24, इंडिया न्यूज, सहारा समय, न्यूज नेशन यूपी यूटी हैं. इनके अलावा 9एक्स, जी स्माइल, ज्ञानदर्शन एक और ज्ञानदर्शन दो को भी हटा दिया गया है. इन्हें इसलिए हटाया गया क्योंकि इन्होंने अपना एनुअल कांट्रैक्ट रीन्यू नहीं कराया.

इन छह चैनलों की जगह छह नए चैनलों ने कांट्रैक्ट किया है जिसके बाद इन छह को फ्री डिश में शामिल किया गया है. इनमें कई न्यूज चैनल भी हैं. अब दूरदर्शन के फ्री डिश पर एबीपी न्यूज, इंडिया टीवी और फोकस न्यूज जैसे न्यूज चैनल भी दिखा करेंगे.  साथ ही सिनेमा टीवी, 9एक्सएम और महामूवीज को भी शामिल किया गया है. इन छह स्पेस के लिए नीलामी 28 अक्टूबर को कराई गई थी और नया बदलाव एक नवंबर से लागू हो गया है. अन्य उपलब्ध स्पेस को भरने के लिए अगली नीलामी 12 नवंबर को है. इसके लिए रिजर्व प्राइस 3.70 करोड़ रुपए है और नीलामी में शामिल होने की राशि डेढ़ करोड़ रुपए है.

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जिंदल और कांग्रेस की हार के बाद फोकस टीवी में छंटनी, संपादक रितेश लक्खी हटाए गए

नवीन जिंदल का दिवाला निकल गया है… ज़ी न्यूज़ को धूल चटाने के लिए नवीन जिंदल फोकस टीवी लेकर तो आये, लेकिन जिंदल के परिजनों के हारने और कांग्रेस का सूरज अस्त होने के बाद इस चैनल का दिवाला निकलने लगा है… चैनल में छंटनी हो रही है…. रीज़नल टीवी इतिहास में पहली बार इतनी जल्दी और सबसे बड़ी छंटनी हो रही है….. जिंदल का चैनल ‘फोकस हरियाणा’ फोकस नहीं कर पाया और मैनजमेंट एक साथ सौ  लोगों को निकाल रहा है…..

शुरुवात हो चुकी है और पहला नाम है संपादक रितेश लक्खी का…. मैनजमेंट ने फरमान सुना दिया है और रितेश लक्खी ने इस्तीफा  दे दिया है…. चुनाव खत्म हुए और चैनल बर्बाद हो गया, क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं आ पाई, और जिंदल कांग्रेस के सांसद हैं .
 

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