स्वाधीनता संघर्ष के दौरान गांधी ने पत्रकारिता का उपयोग एक हथियार के रूप में किया था

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूविवि के जनंसचार विभाग में महात्मा गांधी की जयंती की पूर्व संध्या पर ‘गांधी, पत्रकारिता एवं समाज’ विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्रों को महात्मा गांधी द्वारा लिखित ‘दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास’ पुस्तक भेंट की गयी। गोष्ठी में विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनोज मिश्र ने कहा कि पत्रकारिता, समाज सेवा एवं राजनीति करने वालों के लिए गांधी आदर्श है। पत्रकारिता के क्षेत्र में सच को उजागर करना पहली जिम्मेदारी है। इसकी शुरूआत स्वयं महात्मा गांधी ने की थी।

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गोष्ठी को सम्बोधित करते डाॅ. मनोज मिश्र

आज गांधी के विचारों को पूरा विश्व नमन कर रहा है। भारत को विश्व गुरू बनने के लिए गांधी दर्शन अपनाना होगा। इसी क्रम में डॉ. अवध बिहारी सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी ने भारत को स्वाधीन कराने में पत्रकारिता को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। गांधी जी सदैव यह चाहते थे कि समाचार पत्र आत्मनिर्भर बनें।

डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि गांधी ने देश के लोगों की नब्ज़ को पहचाना। समाज के उन लोगों को जोड़ा जो सबसे निचले पायदान पर खड़े थे। वह सदैव यह चाहते थे कि गांव आत्मनिर्भर बने अपनी जरूरतों के लिए शहरों की ओर न दौड़ें। आज चीनी वस्तुओं से मार्केट भरा पड़ा है। कुटीर उद्योग दम तोड़ रहे है ऐसे में आज फिर से सोचने की जरूरत है।

विभाग के प्राध्यापक डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने महात्मा गांधी द्वारा निकाले गये समाचार पत्र इंडियन ओपिनियन, यंग इंडिया, नवजीवन एवं हरिजन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थी मौजूद रहे।

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Comments on “स्वाधीनता संघर्ष के दौरान गांधी ने पत्रकारिता का उपयोग एक हथियार के रूप में किया था

  • धीरेन्द्र सिंह says:

    हमारे पूज्य डॉ.मनोज मिश्र सर,हम लोगो के लिए मनोज सर बेहद उम्दा लोक संस्कृति के संरक्षक और बेमिशाल वक्ता एवं मंच संचालक और समसामयिक विषयो पर सतत सक्रिय —मेरा नमन

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