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क्या खूब मित्र वायरस मिला… गंगाजल की जय!

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यशवंत सिंह-

लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं बार बार हरिद्वार क्यों भाग जाता हूँ… इसके कई जवाब हैं… लेकिन एक जवाब तो अब आपके सामने है…

हरिद्वार मैं तबसे भाग भाग के जा रहा हूँ जब ये खबर आई भी नहीं थी। सुबह शाम एक एक घंटे गंगा में नहाना और गंगाजल को बोतल में ले जाकर उसी को पीना। ये हरिद्वार की मेरी दिनचर्या रहती है। इस खबर ने तो साबित कर दिया कि गंगा जीवनदायिनी हैं!

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