आइसोलेट करें अर्णव जैसे पत्रकार को जो खुद को खुदा मानते हैं!

क्षुब्द हूं और हैरान हूं। क्या यही पत्रकारिता होती है। हमने पत्रकारिता का धर्म यही समझा था कि लोगों तक और हमारे सत्ता तक लोगों का सच पहुंचे। लेकिन अर्णव गोस्वामी जैसे चंद तथाकथित (जी हां मैं अब इन्हें तथाकथित पत्रकार ही कहूंगा) पत्रकारों ने पत्रकारिता के मायने ही बदल दिए।

क्या यही पत्रकारिता है? अगर पत्रकारिता यही है तो मुझे अब घिन्न आती है ऐसे पेशे से, जो देशहित में, समाजहित में और लोगों के विश्वास के हित में न हो। पालघर की घटना के बाद जिस प्रकार से सोनिया गांधी पर अर्णव गोस्वामी की ओर से खबर को पेश कियागया, पहले ये तो बता दें कि आखिर सोनिया गांधी का पालघर से क्या लेना-देना है।

पालघर क्या सोनिया के कहने पर हुआ था। अर्णव गोस्वाती साबित करें कि कितना सही है सोनिया गांधी की सहभागिता। क्या अर्णव गोस्वामी के ऊपर सोनिया गांधी ने हमला करवाया था, अगर करवाया था तो साबित करें अर्णव गोस्वामी। चिल्लाने से झूठ सच नही हो जाता है। अर्णव गोस्वामी के डिबेट शो में चिल्ला-चिल्लाकर सवाल पूछना क्या ये पत्रकारिता है।

क्या उन्हें ऐसा करने से लोग देश का सबसे बड़ा पत्रकार मान लेंगे। आज पूरे देश में थू-थू हो रही है। सरकार भले ही इनके चैनल को मान्यता दे, लेकिन किसी भी चैनल को देखती तो देश की जनता ही है न। बहिष्कार करिए ऐसे चैनल और पत्रकार का जो सारा दिन चिल्लाकर हिंदू-मुस्लिम और कांग्रेस का राग अलापती हो। इसे देखना बंद कर दीजिए।

मैं देश के सभी लोगों से अपील करता हूं कि सही समय है ऐसे पत्रकार को आइसोलेट करने का जो खुद को खुदा मान बैठे हैं।

मदन कुमार
rajmadan29@gmail.com

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Comments on “आइसोलेट करें अर्णव जैसे पत्रकार को जो खुद को खुदा मानते हैं!

  • रविन्द्र कुमार मिश्र says:

    श्री मान आपको इतना भी सामान्य ज्ञान नही है कि सोनिया गांधी या किसी राजनीतिक व्यक्तित्व का देश मे घटित कोई घटना से लेना देना नही है तब आप निष्पक्ष राय कैसे रख सकते हैं।इतना बड़ा लेख लिख दिए। ऊंचे ओहदेदार होंगे या संपादक के विचारों के मातहत तभी आपकी राय रखी गई। 12 घन्टा तक पुलिसिया पूछताछ के बारे में आप भी वैसे ही चुप है जैसे पालघर की घटना पर सोनिया गांधी।

    रवींद्र मिश्र

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    • मदन कुमार says:

      महोदय, मेरी ये राय व्यक्तिगत है। रही बात सामान्य ज्ञान की तो आपने लेख फिर ठीक से पढ़ा नहीं है। अगर पढ़ते तो सामान्य ज्ञान की बातें न करते आप। मैने अर्णव गोस्वामी की बेहूदा पत्रकारिता को लेकर लिखा है, जो एक आम इंसान भी समझ सकता है कि वो किस तरह से पत्रकारिता के पेशे को शर्मसार कर रहे हैं। आशा करता हूं कि पहले आप अपने सामान्य ज्ञान को ठीक करेंग फिर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करें।

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