उपन्यास पार्ट (3) : अगर तुम्हें एंकर बना भी दें तो इससे हमें क्या मिलेगा?

पार्ट 2 से आगे… इसी बीच प्रीति का बर्थ डे आ गया…एचआर डिपार्टमेंट की ओर से काफी धूमधाम से उसका बर्थ डे मनाया गया…न्यूज रूम को रंग-बिरंगे फूलों और बैलूनों से सजाया गया…ऐसा पहली बार हुआ था कि मैनेजमेंट की ओर से किसी स्टाफ का बर्थडे मनाया जा रहा हो…और वो भी इतने धूमधाम से…यहां तक कि दिव्या, खुशबू और जगजीत को भी ये सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था…जबकि इन्हें आहूजा का काफी ‘करीबी’ माना जाता था…

प्रीति भी काफी खुश नजर आ रही थी…उसने आज तक इतने धूमधाम से अपना बर्थडे नहीं मनाया था…जब वो केक काट रही थी तो कुलीग ने तालियां बजाकर ‘हैप्पी बर्थ डे टू यू प्रीति’ गाया…और बधाई दी…सक्सेना ने बर्थडे गिफ्ट के रूप में सैमसंग का महंगा एंड्रॉयड फोन दिया…तो आहूजा ने लेनेवो का लैपटॉप…नवीन ने उसे गिफ्ट के रूप में टाइटन की महंगी घड़ी दी…लेकिन नवीन से एक गलती हो गई…वो हड़बड़ी में लेडीज घड़ी की जगह जेंट्स घड़ी ले आया…प्रणब ने उसे पार्कर के पेन सेट दिए…तो वो काफी खुश हुई…लेकिन जब अंजना से उसे अपने हाथों से बुके ऐर बर्थ डे विश करने वाला कार्ड दिया…तो उसकी खुशी देखते ही बनती थी…चेहरे पर लाली छा गई…

तालियों की गड़गड़ाहट और साउंडबॉक्स पर फिल्मी गानों की धुन के बीच प्रीति ने चार-पांच पौंड का एक बड़ा-सा केक काटा…केक काटने के बाद प्रीति ने सबसे पहले अंजना को अपने हाथों से खिलाया…फिर वो नवीन, सक्सेना, आहूजा और दिव्या के पास केक लेकर गई…इसके बाद प्यून ने बाकी स्टाफ में केक बांट दिए…मैनेजमेंट की ओर से स्टाफ में कई तरह की मिठाईयां भी बांटी गईं…

आहूजा ने ऐलान किया- ‘अब तक का मुहूरत सही नहीं था…इसलिए मिस प्रीति को लॉन्च नहीं किया गया था…हमने पंडत से अच्छा-सा मुहुरत निकलवा लिया है…कल से वो एंकरिंग करेंगी…और…और खुशबू एसाइनमेंट का काम देखेगी… एसाइनमेंट में कोई सीनियर पर्सन नहीं है… इसलिए फॉरवार्ड प्लानिंग में काफी दिक्कत होती है… ऐसे में खुशबू जैसे सीनियर, इंटेलिजेंट और डेडिकेटेड स्टाफ की वहां सख्त ज़रूरत है’. उसने खुशबू के काम के प्रति समर्पण की जमकर तारीफ की…स्टाफ के लोग समझ नहीं पा रहे थे कि माजरा क्या है… किस ‘काम’ की चर्चा आम है यहां…

चैनल में तरह-तरह की बातें होने लगी…कुछ लोगों का कहना था कि शायद खुशबू की जिस्म की खुशबू से अब आहूजा का मन भर गया है…और अब उसे किसी कच्ची कली की तलाश है…इसलिए खुशबू को साइडलाइन किया गया है…एंकरिंग से हटाकर एसाइनमेंट में भेजा गया है…लगता है अब आहूजा की नजर नई नवेली प्रीति पर है…इसीलिए वो उसे सर आंखों पर बिठा रहा है…स्टाफ तर्क देते कि आहूजा के कहने पर ही तो दिव्या ने प्रीति का बर्थडे ऑर्गेनाइज किया होगा…स्साली अपने मन से तो की नहीं होगी…

चैनल में कई ऐसे लोग भी थे जो एक न्यूकमर को इतना तवज्जो दिए जाने से खुश नहीं थे…मसलन- राजकिशोर मिश्रा, आलोक रंजन और इकबाल खान…मिश्रा को प्रीति से पर्सनली कोई शिकायत नहीं थी…उसकी शिकायत जेंडर डिस्क्रिमिनेशन को लेकर थी…उसका कहना था कि-‘किसी न्यूकमर को इस तरह माथे पर बिठाना सही नहीं है…बाद में हगने लगता है…और वो भी महज इसलिए कि वो लड़की है…हम लोग रोज दस से बारह घंटे गदहे की तरह खटते हैं…लेकिन कोई नहीं पूछता…कभी इंक्रीमेंट नहीं हुआ…जितने पर ज्वॉयन किया था…आज भी उसी सैलरी पर चूतड़ घिस रहे हैं…लेकिन मेरे साथ जिन लड़कियों ने ज्वॉयन किया…उनमें से कईयों की सैलरी मुझसे दोगुनी हो गई है…फिर वो अफसोस जाहिर करता- ‘अब तक सुनता आया था कि समाज में लड़कियों को कदम-कदम पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है…लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा है…लड़के जेंडर डिस्क्रिनेशन के शिकार हो रहे हैं…वो भी सिर्फ इसलिए कि लड़कियों के पास जो ‘चीज’ होती है…वो लड़कों के पास नहीं होती’…

वो मैनेजमेंट पर जमकर अपनी भड़ास निकालता- ‘प्रीति के लिए मैनेजमेंट ने बर्थ-डे पार्टी ऑर्गेनाइज की…लेकिन हम लोगों को किसी ने आज तक गलती से भी हैप्पी बर्थ डे तक नहीं बोला…सिवाय नवीन सर के…गिफ्ट तो दूर की बात है…बर्थडे के दिन लीव भी मांगते हैं…तो नहीं मिलती…बहुत आग्रह करते हैं…तो दिव्या कहती है कि ठीक है थोड़ा बिफोर आ जाना…और शिफ्ट खत्म होने से एक घंटा पहले निकल जाना…लोग कम हैं…इसलिए लीव नहीं दे सकते…आखिर ये जेंडर डिस्क्रिनेशन क्यूं?…अगर भगवान ने हमारे साथ नाइंसाफी की…लड़का बना दिया…तो इसमें हमारा क्या कसूर?‘’…आलोक रंजन और इकबाल भी उसकी हां में हां मिलाते…बाकी स्टाफ भी मुस्कुराकर….चुप रहकर…गर्दन हिलाकर राजकिशोर की बातों पर रजामंदी की मुहर लगाते…

खुशबू को उम्मीद नहीं थी कि आहूजा उसके साथ ऐसा ‘धोखा’ करेगा…इस तरह से ‘यूज एंड थ्रो’ करेगा…सो, एंकरिंग से हटाये जाने पर उसने प्रीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया…सीधे आहूजा पर तो वार कर नहीं सकती थी…क्योंकि इससे नौकरी खतरे में पड़ सकती थी…सो, वो प्रीति के बारे में तरह-तरह की कहानियां सुनाने लगी…वो नंदिता और सारिका से कहती- ‘पता नहीं सक्सेना और आहूजा को इस लड़की में ऐसा क्या दिखा…जो दोनों दीवाना बना हुआ है…साली इतनी घमंडी है कि हम लोगों से हाथ तक नहीं मिलाती….जब बगल से गुजरती है तो उसकी बॉडी से मेल डियो का स्मेल आता है…इतनी घमंडी है कि जब कपड़े चेंज करती है…तो हम लोगों को भी बाहर निकाल देती है…पता नहीं साली लड़की है या लड़का?…अरे, लड़की-लड़की के बीच शर्म किस बात की?…हमारे पास भी वही ‘चीज’ है…जो तुम्हारे पास है…तुम जन्नत की हूर थोड़े ही हो…तुम्हारे पास कोई अलग से ‘अनमोल खजाना’ थोड़े ही है…जो इतना ऐंठती हो…

फिर वो भविष्यवाणी करती…’देखना इसका भी वही हश्र होगा…जो दीपिका का हुआ था…साली शुरू में खूब चहकती थी…एंकरिंग का मौका मिला…तो आसमान में उड़ने लगी थी…लेकिन सक्सेना और आहूजा ने उसे साल भर में नींबू की तरह ऐसे निचोड़ा कि बेचारी सूखकर कांटा हो गई…शुरू-शुरू में तो उसे भी खूब मजा आता था…लेकिन धीरे-धीरे वो इस दलदल में बुरी तरह फंस गई…और जब इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझा तो बेचारी ने सुसाइड कर लिया’…

मानसी और रिमझिम ने जब प्रीति को खुशबू के आरोपों के बारे में बताया…तो उसने ‘नो कमेंट’ कहकर बात टाल दी…फिर जब दोनों ने काफी कुरेदा…तो उसने कहा-‘खुशबू किस टाइप की लड़की है…लोग उसके बारे में क्या-क्या बोलते रहते हैं…तुम सब जानती ही हो?…अब मेरे इतने बुरे दिन आ गए कि खुशबू जैसी लड़कियों के आरोपों पर सफाई देते रहें?’…

अब प्रीति रोज दोपहर ढ़ाई बजे हाजिर हो जाती सिल्वर स्क्रीन प्रोग्राम लेकर…बॉलीवुड की खबरों और गॉसिप पेश करने का उसका खास अंदाज था…अपने लटके-झटके और दिलकश अदाओं से उसने दर्शकों का जीत लिया…सिल्वर स्क्रीन ने तीन-चार हफ्ते में ही तमाम दूसरे चैनलों के फिल्मी प्रोग्रामों को पटखनी दे दी…सिल्वर स्क्रीन के आगे सबकी चमक फीकी पड़ गई…’सिल्वर स्क्रीन’ महज कुछ ही हफ्ते में ही अपने टाइम स्लॉट में नंबर वन प्रोग्राम बन गया…प्रीति ‘स्टार एंकर’ बन गई…उसे राइवल चैनलों से भी जॉब के ऑफर आने लगे…अच्छे सैलरी पैकेज और पोस्ट के साथ…लेकिन उसने एसेप्ट नहीं किया…कोई उसे इस बारे में पूछता भी तो कहती-‘है कोई पर्सनल रिजन…आप नहीं समझेंगे’…

चैनल की टीआरपी बढ़ी तो मैनेजमेंट भी प्रीति से काफी खुश था…आहूजा और सक्सेना किसी-न–किसी बहाने अक्सर उसे अपने केबिन में बुलाते…प्रीति को उसके शानदार परफॉर्मेंस के लिए बधाई देते…फिर ‘सिल्वर स्क्रीन’ को नंबर वन प्रोग्राम बनाने की खुशी में तरह-तरह के तोहफे देते…कभी महंगा पेन सेट…कभी बुके…तो कभी गिफ्ट हैंपर…फिर दोनों इधर-उधर की बातें करने लगते…पर्सनल लाइफ के बारे में सवाल करते…फैमिली बैकग्राउंड के बारे में पूछते…हॉबीज के बारे में पूछते…पसंद-नापसंद के बारे में पूछते…

प्रीति को आहूजा और सक्सेना जो गिफ्ट देते…प्रीति उनमें से ज्यादातर चीजें अपने पास नहीं रखती…मानसी, सोनाली, रिमझिम और प्रणब को दे देती…या फिर प्यून और दाई को दे देती…प्रीति कहती कि वो एक लोअर मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करती है…और वो अपनी आदत खराब नहीं करना चाहती…इन महंगी चीजों की उसे कोई ज़रूरत नहीं है…लेकिन हां, पेन सेट वो किसी की नहीं देती…कहती-‘ये पेन ही तो हम जर्नलिस्ट की ताकत हैं…भले ही जमाना कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल, एसएमएस, फेसबुक और व्हाट्स अप का आ गया हो…लेकिन पेन से लिखने में जो बात है…वो किसी और में नहीं’…लेकिन एक बार जब अंजना ने उसे गिफ्ट में मिले पार्कर के पेन सेट की तारीफ की….तो प्रीति ने उसे पेन सेट दे दिया…अंजना ने मना भी किया…लेकिन प्रीति ने जबरन उसके पर्स में पेन सेट रख दिया..

इंटरटेनमेंट डेस्क पर प्रणब एकमात्र मेल मेंबर था…आउटपुट के स्टाफ प्रणब से खूब हंसी-मजाक करते…कोई उसकी खुशकिस्मती पर रश्क करता- ‘साले ने क्या किस्मत पाई है…चारों तरफ गोपियां रहती है…और ये बीच में कन्हैया बना रहता है…काश, हम लोगों की भी ऐसी किस्मत होती…और अब तो एक नई लौंडिया भी आ गई है’. प्रणब इन सब बातों को हंसी में टाल जाता…लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में प्रीति के प्रति ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ बनने लगा…

एक दिन मजाक-मजाक में सक्सेना ने प्रीति से उसके ब्वॉयफ्रेंड के बारे में पूछा…तो प्रीति ने कहा-‘उसकी जिंदगी में कोई लड़का नहीं है…हां, एक लड़की जरूर है…जो उसके दिल के काफी करीब है’…इस पर सक्सेना ‘गुड जोक, गुड जोक’ कहकर हंसने लगा…उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान आ गई…दो-चार दिन बाद आहूजा ने भी प्रीति से यही सवाल पूछा…तो उसने ‘ना’ में जवाब दिया…लेकिन इतना जरूर कहा-‘ब्वॉयफ्रेंड तो नहीं पर एक गर्लफ्रेंड जरूर उसकी लाइफ में है…और वो भी इसी ऑफिस की…हालांकि मैंने अभी तक उससे अपनी मोहब्बत का इजहार नहीं किया है’. इस पर आहूजा ने प्रीति के सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ की…उसके चेहरे पर भी कुटिल मुस्कान आ गई…

अब तो सक्सेना और आहूजा के सिर पर प्रीति का ‘गॉडफादर’ बनने का भूत सवार हो गया…दोनों के बीच अघोषित कंपीटिशन शुरू हो गया…दोनों अपने-अपने तरीके से प्रीति को पटाने की कोशिश करते…प्रीति के सामने एक-दूसरे की जमकर बुराई करते…और खुद को प्रीति का ‘सच्चा हमदर्द’ बताते…प्रीति के कान इन सब बातों को सुनकर पक गए…लेकिन वो इन सब चीजों को बर्दाश्त करती रही…कभी-कभी उसका मन करता कि आहूजा और सक्सेना को थप्पड़ मारकर नौकरी को लात मार दे दे…लेकिन नौकरी छोड़ने का फैसला उतना आसान नहीं होता… बहुत-से लोगों को पेट की मजबूरी आत्मसम्मान को ताक पर रखने के लिए मजबूर कर देती है…प्रीति भी कुछ ऐसे ही बुरे दौर से गुजर रही थी…उसे न तो नौकरी करते बन रहा था न छोड़ते…

सक्सेना और आहूजा दोनों अपने-अपने तरीके से चाल चलते…सक्सेना अक्सर प्रीति को आगाह करता- ‘फिल्म और मॉडलिंग इंडस्ट्री की तरह मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी गंदगी है…यहां कदम-कदम पर भेड़ की खाल में भेड़िए भरे पड़े हैं…अब आहूजा को ही लो…इससे बड़ा कमीना मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखा है…उसने न जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी खराब की है…तुम पर भी उसकी बुरी नजर है…लेकिन मैंने साफ कर दिया है कि खबरदार जो प्रीति की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो…आंखें फोड़ दूंगा’…

फिर वो फिलॉसॉफिकल अंदाज में कहता- ‘लाइफ में जिस भी लाइन में जाओ…दिक्कत तो होती ही है…लेकिन अगर कोई ‘गॉडफादर’ हो…किसी की छत्रछाया रहे…किसी का वरदहस्त हासिल हो…तो किसी की हिम्मत नहीं पड़ती कि बुरी नजर डाले…मैं तुम्हारा गॉडफादर बनने के लिए तैयार हूं…लेकिन इसके लिए तुम्हें भी थोड़ा-सा ‘कॉम्प्रोमाइज’…फिर वो बीच में ही चुप हो जाता…प्रीति सक्सेना के कहने का मतलब खूब समझती थी…कि वो उससे क्या चाहता है…किस ‘कॉम्प्रोमाइज’ की बात कह रहा है…लेकिन वो चुप रह जाती…इससे सक्सेना की हिम्मत और बढ़ जाती…वो चुप्पी को अपने लिए ‘ग्रीन सिग्नल’ समझता…फिर वो सपनों की दुनिया में खो जाता…उसे लगता कि जल्द ही उसे ‘सील तोड़कर उद्घाटन करने’ का मौका मिलेगा…

फिर कभी आहूजा उसे बड़े प्यार से अपने केबिन में बुलाता…खुद रिवॉल्विंग चेयर से उठकर सोफे पर उसके बगल में जा बैठता…फिर उसका हाल-चाल पूछता…-‘कहीं कोई दिक्कत-विक्कत तो नहीं है…नवीन, सक्सेना वगैरह कोई परेशान तो नहीं कर रहा…’फिर वो इधर-उधर की बातें करने लगता…कभी वो सक्सेना को खूब भला-बुरा कहता- ‘सक्सेना जैसे दोगले चरित्र का आदमी मैंने लाइफ में कभी नहीं देखा…ऊपर से शराफत का चादर ओढ़े हुए है…और कंबल के नीचे से घी पीता रहता है…शुरू में मैंने उसे फ्री हैंड दे रखा था…तो उसने इसका गलत फायदा उठाते हुए कई लड़कियों की जिंदगी खराब कर दी…फिर मुझे पता चला तो मैंने उसे नौकरी से भी निकाल दिया था…बाद में उसने मेरे घर पर आकर पैर पकड़कर माफी मांगी…बीबी-बच्चों का वास्ता दिया…रोड पर आ जाने की बात कही…तो मेरा दिल पसीज गया…मैं बाहर से जितना कड़क, सख्त मिजाज और अकड़ू दिखता हूं…अंदर से वैसा हूं नहीं…मेरा मन बच्चों की तरह बिल्कुल कोमल और साफ है…इतने दिनों में आपने भी तो महसूस किया ही होगा’…

कभी वो प्रीति को सक्सेना से आगाह करता- ‘सक्सेना से बचके रहियो…उसकी बुरी नजर आप पर है…वो अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से आपको ‘अपने जाल’ में फंसाना चाहता है’…फिर वो कहता –‘आप नई आई हैं…इसलिए बता रहा हूं…मीडिया इंडस्ट्री में बगैर किसी ‘गॉडफादर’ के लंबे टैम तक टिकना मुश्किल है…फिमेल एंकर के लिए तो और भी ज्यादा मुश्किल…सक्सेना जैसे कमीने हर जगह भरे पड़े हैं…लेकिन…लेकिन आपने चिंता करने की ज़रूरत नहीं है…मैं हूं ना…वैसे भी मेरा आशीर्वाद हमेशा से आपके साथ रहा है…आपको पता नहीं होगा…सक्सेना आपको जॉब पर नहीं रखना चाहता था…मैंने उसे काफी डांटा कि इतनी टेलेंटेड और अच्छे संस्कारों वाली लड़की है…और तुम ऑडिशन-फॉडिशन में उलझाकर उसको परेशान कर रहे हो…ऑडिशन से एक दिन पहले ही मैंने दिव्या को बोलकर ऑफर लेटर तैयार करवाया था…ये सब आपको पता नहीं होगा…सक्सेना ने जान-बूझकर नहीं बताया होगा…लेकिन फिकर नॉट…त्वाडे वास्ते मैं हूं ना…लेकिन उसके बदले आपको भी टैम-टू-टैम मुझे ‘खुश’…फिर वो अचानक से चुप हो जाता…

आहूजा की बातें सुनकर प्रीति का खून खौल उठता…फिर भी वो चुप रह जाती…इससे आहूजा की हिम्मत और बढ़ जाती…उसे लगता कि प्रीति की चुप्पी उसकी रजामंदी का संकेत है…फिर वो सपनों की रंगीन दुनिया में खो जाता…सोचता की लड़की धीरे-धीरे लाइन पर आ रही है…और बहुत जल्द उसे नथउतराई का सौभाग्य प्राप्त होगा…फिर वो कल्पना लोक में खो जाता है कि प्रीति जब एक-एक करके अपने कपड़े उतारेगी…तो कितना रोमांचक और मजेदार सीन होगा…

इस सबके बीच एक बात आपने शायद गौर नहीं की होगी…सक्सेना अपनापन दिखाने के लिए प्रीति से तुम करके बात करता था…जबकि मालिक होने के बावजूद अपना बड़प्पन दिखाने के लिए आहूजा आप करके बात करता था…लेकिन दोनों का मकसद एक ही था…किसी भी तरह से चिड़िया को अपने जाल में फंसाना…

इसी बीच, चैनल का दूसरा साल पूरा हो गया…इसको लेकर महरौली के एक फॉर्म हाउस में शानदार पार्टी रखी गई… इस पार्टी ने प्रीति की परेशानी बढ़ा दी…कभी सक्सेना अपने हाथों से पैग बनाकर उसके पास पहुंच जाता…तो कभी आहूजा…लेकिन प्रीति ने दारू पीने से साफ मना कर दिया…उसका कहना था कि शराब बुरी चीज है…ये जिंदगी, घर-परिवार सबको तबाह कर देती है…इस पर ये लोग उसे बीयर पीने को कहते…समझाते-‘वाइन नहीं पीती हो…तो कोई बात नहीं…मत पीओ…लेकिन बीअर तो पी ही सकती हो…इसमें अल्कोहल नहीं होता’. फिर वो उससे बीयर पीने की जिद करते…इस पर प्रीति ने थोड़ी-बहुत बीयर अपने हलक के नीचे उतारी…लेकिन बीयर का टेस्ट भी उसे काफी कसैला लगा… कोल्ड ड्रिंक्स पीकर उसने मुंह का स्वाद ठीक किया…

एक परेशानी और थी…जिसे देखो वही प्रीति के साथ डांस करना चाहता था…सक्सेना और आहूजा दोनों उसका हाथ पकड़कर जबरन डांस फ्लोर पर ले गए…जब दोनों उसकी कलाई पकड़कर डांस फ्लोर की ओर बढ़ रहे थे…तो उन्हें एहसास हुआ कि ये लड़की का नहीं बल्कि लड़के का हाथ है…लड़कियों के हाथ काफी कोमल और मुलायम होते हैं…लेकिन ये तो ‘सन्नी देओल टाइप ढ़ाई किलो का रफ एंड टफ’ हाथ है…लेकिन दोनों प्रीति के इस कदर दीवाने थे कि उन्हें लगा कि शायद दारू ज्यादा चढ़ गई है…इसलिए ऐसा लग रहा है…दोनों ने अपनी गर्दन झटकी…और प्रीति को डांस फ्लोर पर ले गए…प्रीति ने दोनों के साथ थोड़ा-बहुत कमर मटकाया…फिर ठीक से डांस नहीं आने का बहाना कर अंजना के पास आकर बैठ गई…

खुशबू और जगजीत ने भी पंजाबी गानों पर जमकर ठुमके लगाए…खुशबू की सेक्सी अदाओं और जगजीत से लटके-झटके ने पार्टी में रंग जमा दिया…फिर जब डांस फ्लोर पर भीड़ कम हुई…तो अंजना ने उसे अपने साथ डांस करने का आग्रह किया…तो प्रीति खुशी-खुशी राजी हो गई…दोनों ने बॉलीवुड के हिट गानों के साथ-साथ भोजपुरी गाने पर जमकर ठुमके लगाए…मानसी, सोनाली और रिमझिम ने भी उनका खूब साथ दिया…सब प्रीति और अंजना का डांस देखकर दंग रह गए…तब जाकर पता चला कि प्रीति कितना अच्छा डांस करती है…आहूजा-सक्सेना के सामने उसने डांस न आने का बहाना किया था…

प्रणब भी प्रीति के डांस करना चाहता था…लेकिन उसने अपनी भावनाओं पर काबू रखा…और सिगरेट के धुएं उड़ाकर अपने मन में उठ रही भावनाओं को दबाने की कोशिश की..उसे प्रीति से एकतरफा प्यार हो गया था…लेकिन अपने दब्बू स्वभाव और प्रीति की नाराजगी के डर से उसने कभी उससे अपने दिल की बात नहीं कही…और सिगरेट के धुंओं से अपना दिल जलाकर वो अपनी भावनाओं को दबाने की कोशिश करता…वो चाहकर भी प्रीति से अपने दिल की बात नहीं कह पा रहा था…कभी जुबान साथ नहीं देता..तो कभी प्रीति मौका नहीं देती…लड़खड़ाती जुबान से उसने एक-दो बार प्रीति से अपने दिल की बात कहने की कोशिश की…लेकिन शब्द गर्दन में ही अटक गए…

दोनों इंटरटेनमेंट डेस्क पर साथ काम करते थे…सीट भी आमने-सामने ही थी…काम करते वक्त अक्सर आंखें मिल जाती थी…खाना-पीना, चाय-कॉफी भी साथ होता था…लेकिन दिक्कत ये थी कि प्रणब प्रीति के जितना करीब जाने की कोशिश करता…प्रीति उससे उतनी ही दूर भागती…प्रणब इसके चलते अंदर से काफी परेशान रहता था…शिफ्ट खत्म होने पर उसने कई बार प्रीति को अपनी बाइक पर लिफ्ट देकर घर ड्रॉप करने का आग्रह किया…ताकि रास्ते में वो उससे अपने दिल की बात कह सके…लेकिन उसने बड़ी विनम्रता से इनकार कर दिया…कहा-‘ तुम परेशान मत होओ…मैं ड्रॉपिंग से चली जाऊंगी’…

प्रणब और अंजना में भी खूब पटती थी…सो, प्रणब ने इजहार-ए-मोहब्बत के लिए अंजना से मदद मांगी…एक दिन कैंटीन में साथ चाय पीते वक्त प्रणब ने अंजना से प्रीति को लेकर अपने मन में चल रही उथल-पुथल के बारे में बताया…इस पर अंजना ने पूछा भी-‘वो सीधे प्रीति से इस बारे में बात क्यूं नहीं करता? इस पर प्रणब ने कहा-‘उसे डर है कि ऐसा करने पर प्रीति कहीं उससे नाराज न हो जाए…और वो हमेशा के लिए उसे खो न दे…इसी के चलते वो प्रीति से अपने दिल की बात कहने से डरता है’…इस पर अंजना ने कहा- ‘वैसे तो मैं प्यार-मोहब्बत जैसी फालतू चीजों से दूर ही रहती हूं…फिर भी एक दोस्त और कुलीग होने के नाते प्रीति तक तुम्हारे दिल की बात पहुंचा दूंगी’…

अंजना ने जब प्रीति को प्रणब की फीलिंग्स के बारे में बताया…तो प्रीति ने हंसी में बात उड़ा दी…थोड़ी देर तो वो चुप रही…फिर उसने गंभीर होकर कहा- ‘मुझे इस बात का एहसास है कि प्रणब मुझे पसंद करता है…लेकिन मेरी अपनी कुछ पर्सनल मजबूरी है…इसलिए मैं प्रणब या किसी भी लड़के से दोस्ती नहीं बढ़ा सकती’…फिर उसने अंजना के हाथों को अपने हाथों में लेकर प्यार भरे लहजे में कहा- ‘तुम्हारी बात और है…तुम सेक्सी, सुंदर और समझदार लड़की हो…और फिर मेरी बॉस भी हो…बॉस को पटाना हमेशा फायदे का सौदा होता है…ऑफिस में काम भी ज्यादा नहीं करना पड़ता है…और समय-समय पर बढ़िया इंक्रीमेंट भी होता रहता है’…फिर उसने गंभीर होकर कहा-‘मुझे तुमसे प्यार हो गया है…चलो, दोनों भागकर शादी कर लेते हैं’…

इस पर अंजना इसे ‘अच्छा मजाक’ बताकर हंसने लगी…और कहा-‘तुम्हें जमाने का डर नहीं लगता…दो लड़कियां आपस में शादी करेगी…तो सोसायटी क्या कहेगी…तुमको पता भी है?’…फिर वो खिलखिलाकर हंसने लगी…जवाब में प्रीति बोली- ‘जब प्यार किया तो डरना क्या?…लड़का-लड़की राजी तो क्या करेगा काजी…तुम्हारे पापा से मैं बात करूंगा…ओ सॉरी करूंगी’…

फिर वो हंसते-हंसते कहती-‘बाहर से भले ही मैं लड़की हूं…लेकिन अंदर से तो मैं लड़का ही हूं…हम दोनों क्यूं शादी नहीं कर सकते?’…इस पर अंजना जोर-जोर से हंसने लगती…और प्रीति को ‘पूरा पागल’ बताती…इस पर प्रीति कहती- ‘तुम्हारे प्यार में मैं सचमुच पागल हो गया हूं…मेरा मतलब है हो गई हूं’…इस पर अंजना उसे प्यार से डांटती- ‘छोड़ो…बहुत हंसी-मजाक हुआ…अब काम करो…आहूजा सीसीटीवी से देख रहा होगा…साला अभी आकर सबके सामने हम लोगों को सुना देगा’…इस पर सभी काम में जुट जाते…

अच्छे दिन या तो चुनावी जुमले होते हैं…या फिर दिवास्वप्न…चुनाव के बाद जनता इसका बड़ी बेसब्री से इंतजार करती रहती है…लेकिन वो कभी नहीं आते…उसी तरह से छोटे और मंझोले चैनलों में ‘अच्छे दिन’ दिवास्वप्न जैसे ही होते हैं…साड्डा हक में भी यही हुआ…चिटफंड कंपनियों ने जिस तरह से लाखों निवेशकों के साथ धोखा किया…उससे लोगों का इन कंपनियों से मोहभंग होना शुरू हुआ…निवेशक बिदकने लगे तो चैनल की माली हालत भी बिगड़ने लगी…चैनल का नाम भले ही ‘साड्डा हक’ और टैगलाइन ‘एत्थे रख’ था…लेकिन इस चैनल में स्टाफ की सबसे ज्यादा हकमारी होती थी…आहूजा को अपनी ऐय्याशियों पर खर्च करने के लिए पैसे होते…लेकिन स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं होते…

आहूजा खुद को ‘नए जमाने का किंग’ समझता था…और उसी तरह का जीवन जीने की कोशिश करता…इंवेस्टर्स के जमा पैसे से वो जमकर ऐय्याशियां करता..निवेशकों और आम लोगों में अपना इंप्रेशन जमाने के लिए साल में एक-दो बार मुंबई से बॉलीवुड की नामचीन हीरोइनों और सिंगर्स को बुलाकर प्रोग्राम करवाता…अपने लिए हर तीन-चार महीने पर नई ऑडी, इनोवा या फॉरच्यूनर खरीदता…अक्सर चार्टर्ड प्लेन हायर कर कहीं आता-जाता…ताकि लोगों में रसूख बरकरार रहे…इन सब चीजों के लिए उसके पास पैसे होते…लेकिन स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं होते…न तो बकरीद और दुर्गापूजा में सैलरी मिली…और न ही दीपावली और छठ में…

बकरीद नजदीक आया तो इकबाल कई बार दिव्या से सैलरी मांगने गया…दिव्या आज-कल, आज-कल करती रही…लेकिन न तो वो आज कभी आया…और न ही वो कल…इससे आहत होकर इकबाल ने नवीन के सामने दिव्या के रवैये पर नाराजगी जताई…और रुंधे गले से कहा कि परसों बकरीद है लेकिन अभी तक उसे पैसे नहीं मिले…इस पर नवीन ने इकबाल को जबरन तीन हजार रुपए थमा दिए…इकबाल ने हालांकि काफी मना किया…वो नवीन से पैसे उधार लेना नहीं चाहता था…लेकिन नवीन नहीं माना…जबरन जेब में पैसे डालते हुए उसने कहा –‘कोई बात नहीं…कल अगर तुम्हें पैसे मिल जाएंगे…तो लौटा देना…अभी रख लो…कल को मान लो पैसे नहीं मिले तो?…दिव्या और आहूजा की बातों का कोई भरोसा है क्या?’…इकबाल ने कहा कि वो मैनेज कर लेगा…उधार मांगने का उसका मकसद नहीं था…वो तो उनसे बस मैनेजमेंट के रवैये के बारे में बता रहा था…लेकिन वही हुआ…जिसकी आशंका थी…बार-बार एचआर और एकाउंट का चक्कर काटने के बावजूद उसे पैसे नहीं मिले…ऐसे में नवीन का दिया पैसा ही काम आया…

इकबाल ने उन पैसों से बहुत कंजूसी से बकरीद मनाई…उसने ऑफिस से किसी को भी नहीं बुलाया…पर नवीन और राजकिशोर दोनों उसके घर बिन बुलाए मेहमान की तरह पहुंच ही गए… दोनों ने इकबाल और उसके पैरेंट्स को गले लगकर बकरीद की मुबारकबाद दी…और शाजिया को चॉकलेट्स, मिठाईयां और डॉल दिए…नवीन ने कहा-‘मैं अपनी फ्रेंड सायमा के घर से लौट रहा था…तभी याद आया कि तुम्हारा घर भी तो इसी रास्ते में है…इसलिए मुबारकबाद देने चला आया…और हां, कुछ खाऊंगा नहीं…क्योंकि सायमा ने इतना ठूंस-ठूंसकर खिलाया है…कि पेट फट रहा है’…

लेकिन जब इकबाल ने कम से कम थोड़ी-सी सेवईयां चखने की जिद की…तो नवीन और राजकिशोर ने दो-चार चम्मच सेवईयां खा ही लीं…लेकिन थर्सडे होने का हवाला देकर नॉनवेज खाने से साफ मना कर दिया…हालांकि राजकिशोर को पता था कि नवीन सर झूठ बोल रहे हैं…न तो वो सायमा के घर गए थे…और न ही कहीं कुछ खाया था…वो तो ऑफिस से उनके साथ ही निकला था इकबाल के घर जाने के लिए…लौटते वक्त नवीन और राजकिशोर ने एक रेस्टोरेंट में छककर मटन-चावल खाया…इसके बाद नवीन ने राजकिशोर को उसके लॉज के पास ड्रॉप कर दिया…

जब दुर्गापूजा में सैलरी नहीं मिली…तो नंदिता सेनगुप्ता काफी नाराज हुई…‘हम बंगालियों के लिए इससे भी बड़ा कोई पर्व होता है क्या?…लेकिन देखो…तीन-तीन महीने की सैलरी बाकी है…और बार-बार मांगने पर भी नहीं मिल रही’…उसने खुशबू से कुछ पैसे उधार लिए…तब जाकर कोलकाता जाने के लिए भाड़े का इंतजाम हुआ…और वो खाली हाथ अपने पैरेंट्स के पास कोलकाता चली गई…वो अपने पैरेंट्स के लिए नए कपड़े खरीदकर ले जाना चाहती थी…लेकिन उसके सारे अरमान धरे के धरे रह गए…कोलकाता रवाना होते वक्त उसने रुंधे गले से सारिका और खुशबू से कहा-‘हो सकता है कि मैं अब इस चैनल में लौटूं ही न…कब तक घर से पैसे मंगाकर यहां काम करते रहेंगे…ऐसी नौकरी करने से क्या फायदा कि हर महीने घर से ही पैसे मंगाने पड़ें’… उसने खुशबू को भरोसा दिया-‘अगर मैं नहीं लौटी…तो भी फिक्र मत करना…अगले महीने पापा की सैलरी मिलने पर तुम्हारे एकाउंट में पैसे डाल देंगे’…

वहीं जब छठ नजदीक आया…तो राजकिशोर और आलोक रंजन ने दिव्या के केबिन में जाकर उसे खूब खरी-खोटी सुनाई…कहा- ‘आप लोगों ने चैनल को मजाक बना कर रखा है…तीन-तीन महीने की सैलरी बाकी है…और आप लोगों को कोई चिंता नहीं है…कि सैलरी देनी है…अगर चैनल चला नहीं सकते…तो शटर डाउन कीजिए…जब हाथी को खिला नहीं सकते…तो हाथी रखने का शौक ही क्यूं पालते हैं?’…इस पर दिव्या ने एक-दो दिन में सैलरी मिल जाने का भरोसा दिया…लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ…जब ‘खरना’ में दो दिन बाकी रह गए…तो राजकिशोर ने नवीन से कुछ पैसे उधार लिए…लीव एप्लीकेशन डाला…और लीव एप्रुव होने का इंतजार किए बगैर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस पकड़कर दरभंगा रवाना हो गया…

लेकिन छठ में दिल्ली से यूपी और बिहार आना आसान नहीं…राजकिशोर को जिंदगी में पहली बार ऐसा कड़वा अनुभव हुआ…जब वो आनंद विहार स्टेशन पहुंचा…तो वहां तिल रखने की जगह नहीं थी…जेनरल बॉगी के बाहर हजारों की भीड़ थी…ट्रेन में सीट ‘छापने’ के लिए धक्का-मुक्की हो रही थी…जी हां, बिहारी सीट पर कब्जा करने को ‘सीट छापना’ ही कहते हैं…भीड़ कंट्रोल करने के लिए पुलिस बार-बार डंडे चलाती…फिर भी आदत से मजबूर लोग नहीं मानते…राजकिशोर का स्लीपर में रिजर्वेशन था…रेलवे बीट कवर करने वाले रिपोर्टर को पकड़कर उसने रेल मिनिस्ट्री से अपना वेटिंग टिकट कंफर्म करवा लिया था…लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वो अपनी बॉगी तक नहीं पहुंच पा रहा था…गाजियाबाद गुजर जाने के बाद ही वो अपनी सीट पर पहुंच सका…

जब वो पहुंचा…तो देखा कि उसकी सीट पर चार मुस्तंडे पहले से बैठे हुए हैं…राजकिशोर से उनसे सीट खाली करने को कहा…तो वो उल्टा उससे ही झगड़ने लगा…कहा-‘आपकी सीट है…तो हम थोड़े ही न खाए जा रहे हैं?…आप भी बैठ जाइए…अब छठ है…तो घर तो जाएंगे ही…चाहे रिजर्वेशन मिले…या ना मिले’…इस पर राजकिशोर ने कहा-‘ये सीट उसकी है…और इसके लिए उसने रेलवे को पे किया है’…जबाव मिला-‘अगर आपने पैसे दिए हैं…तो हम भी डब्ल्यूटी (विदाउट टिकट) नहीं जा रहे हैं…हमारे पास भी वेटिंग टिकट है…और हां, रिजर्वेशन कराकर आपने ट्रेन खरीद नहीं ली है…आप भी बैठिए…हम लोग आपको भी एडजस्ट कर लेंगे…अरे, शंभुआ…तनी घिसको…इनको भी बैठने दो…इन्हीं की सीट है…बेचारे को छठ में घर जाना है…बुड़बक, थोड़ा-सा और खिसको…इनको भी एडजस्ट कर लो तनी’…

लेकिन राजकिशोर नहीं बैठा…राजकिशोर ने उन्हें जर्नलिस्ट होने और चैनल में काम करने का धौंस दिखाया…लेकिन उन लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा…कहा- ‘दिल्ली में तो साला हर तीसरा-चौथा आदमी जर्नलिस्टे है…कुकुरमुत्ते की तरह चैनल खुलते हैं…कुछ महीनों तक चैनल बरसाती मेंढक की तरह टें-टें करता रहता है…और साल-दो साल होते-होते एक दिन चैनल खुद टें बोल जाता है…कहीं आप भी उसी टाइप के किसी चैनल में तो नहीं…आप दीपक चौरसिया, पुण्य प्रसून वाजपेयी, रवीश कुमार होते तो हम आपको जरूर चिन्ह जाते..पर ऊ आप हैं नहीं…और अंजना ओम कश्यप…या श्वेता सिंह आप हो सकते नहीं…काहे कि आप लड़की नहीं है…अरे भोलबा…ई कहते हैं कि टीभी में काम करते हैं…कभी देखा है रे इनको टीभी पर…नहीं न?…आप कउन टीभी में काम करते हैं जी…जो कहीं देखैबो नहीं करता है’…

राजकिशोर के पास कोई चारा नहीं था…टीटीई भी दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था…राजकिशोर को लगा कि इन लोगों से उलझने से कोई फायदा नहीं…सीट भी नहीं मिलेगी…और हो सकता है उल्टे वो ही दो-चार थप्पड़ भी खा ले…सो, वो डर के मारे चुप बैठ गया…और एक सीट पर चार और लोगों के साथ उकड़ू बैठकर किसी तरह दरभंगा पहुंचा…

ट्रेन करीब दस घंटे लेट हो गई…मुगलसराय से बिहार की सीमा में घुसते ही एक्सप्रेस ट्रेन पैसेंजर बन गई…वो हर छोटे-बड़े स्टेशन पर रुकती…पैसेंजर या तो चेन खींच देते या वैक्यूम कर देते…ड्राइवर को मजबूरन ट्रेन रोकनी पड़ती…और लोग शान से उतरते…मानो ट्रेन रोककर उन्होंने कोई बड़ा काम किया हो…किला फतह कर लिया हो…बिहार में इस तरह की घटनाएं आम हैं…और लोग इसके आदी हो चुके हैं…लोग कहीं भी चेन पुलिंग कर या वैक्यूम कर ट्रेन रोक देते हैं…और शान से उतरते हैं…मानो युद्ध के मैदान में पाकिस्तानी सेना को हराकर लौटे हों…अक्सर सफर करने वाले मुसाफिरों को ये पता है…इसलिए जब कभी ऐसा होता है…तो उन्हें हैरानी नहीं होती…हां, अगर ऐसा नहीं होता है…तब हैरानी होती है…और वे साथी मुसाफिरों से बात करते हैं–‘ क्या बात है…आज कोई ‘भैकमो’ नहीं कर रहा…चेनो नहीं खींच रहा’…

लेकिन दरभंगा स्टेशन पर उतरते ही उसकी सारी थकान गायब हो गई…वो छठी मईया के गीत गुनगुनाने लगा…जब स्टेशन से बाहर निकला तो हर तरफ छठी मईया के गीत बज रहे थे…कहीं शारदा सिन्हा के छठ गीत बज रहे थे…तो कहीं नए मैथिली गायक-गायिकाओं के…राजकिशोर सोचने लगा…कितने सिंगर आए…और गए…लेकिन जो बात पान खाकर गाने वाली शारदा सिन्हा के लोकगीतों में है…वो किसी में नहीं है…छठ में सैलरी नहीं मिलने पर नवीन ने सार्वजनिक रूप से तो अपनी नाराजगी का इजहार नहीं किया…लेकिन इतना ज़रूर कहा-‘बिहारियों का सबसे बड़ा पर्व होता है छठ…और छठ में भी पैसे नहीं मिले…राजकिशोर नाराज होकर चला गया…पता नहीं कब लौटेगा…और नंदिता…वो तो शायद ही लौटे…सारिका और खुशबू को उसने बोला भी था…अच्छा चलो, कोई बात नहीं…हम क्या कर सकते हैं?…सक्सेना और आहूजा जाने…कि चैनल कैसे चलेगा?…हम समझाते हैं तो दोनों को समझ में नहीं आता है’…

कुछ दिनों बाद नया साल नजदीक आ गया…न्यू ईयर पर आहूजा अपनी नई सेक्रेटरी के साथ थाईलैंड चला गया…स्टाफ इंतजार करते रह गए…कि पैसे मिले तो नए साल का जश्न मनाएं…लेकिन वो जेनिफर के साथ न्यू ईयर सेलेब्रेट करने और रंगरेलियां मनाने थाईलैंड चला गया…पैसे के अभाव में स्टाफ के नए साल का जश्न फीका पड़ गया…लेकिन न तो सक्सेना को इसकी चिंता थी…और न ही आहूजा और दिव्या को इसकी कोई परवाह…सक्सेना भी 31 दिसंबर को शाम होते ही न्यू ईयर सेलेब्रेट करने कनॉट प्लेस के पास एक फाइवस्टार होटल में चला गया…

आहूजा की कंपनी में पैसा लगाने वाले हजारों निवेशक डिपॉजिट मेच्योर होने पर अपने पैसे वापस मांग रहे थे…और कंपनी भुगतान करने में असमर्थ थी…इसलिए वो तरह-तरह के बहाने बनाकर भुगतान करने में आनाकानी कर रही थी…इससे निवेशकों का गुस्सा फूट पड़ा…कई जगहों पर निवेशकों ने आहूजा की चिटफंड कंपनी के ऑफिस में ताला जड़ दिया…एजेंट और कर्मचारियों की पिटाई की…उन्हें बंधक बना लिया…लेकिन आहूजा के निवेशकों के पैसे लौटाने की कोई चिंता नहीं थी…

जब आहूजा या उसके बेटे का बर्थडे होता…तो वो दिल्ली या गुड़गांव के किसी फाइव स्टार होटल में शानदार पार्टी देता…पार्टी में दिल्ली, वेस्टर्न यूपी, पंजाब-हरियाणा और हिमाचल के कई बड़े नेताओं और आला अफसरों को बुलाता…इसके लिए उसके पास पैसे थे…लेकिन दिन-रात बैल की तरह काम में जुते रहने वाले स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं थे…वो चैनल को अपने सेफगार्ड की तरह यूज तो करता…लेकिन सैलरी देते वक्त टालमटोल करता रहता…सैलरी लगातार लेट होती गई…जब स्टाफ सक्सेना से इसकी शिकायत करते…तो वो हालात पर चिंता जताता…लेकिन खुद कोई इनीशिएटिव लेने की जगह इस बारे में सबको एकजुट होकर आहूजा और दिव्या से बात करने को कहता…

एचआर मैनेजर दिव्या अरोड़ा भी काफी ‘दिव्य’ थी…कई स्टाफ उसे ‘दिव्या रोड़ा’ भी कहते…वो स्टाफ को ‘डबल क्रॉस’ करती…स्टाफ के सामने वो खुद को स्टाफ बताती और हमेशा उनके हितों की रक्षा करने की बात कहती…वहीं आहूजा के सामने भीगी बिल्ली बन जाती…स्टाफ के सामने स्टाफ की भाषा बोलती…तो मैनेजमेंट के सामने मैनेजमेंट की भाषा बोलने लगती…जब लोग सैलरी की देरी के बारे में बात करने दिव्या के पास जाते…तो वो आहूजा की मौजूदगी में आने को कहती…ताकि आहूजा पर मेंटल प्रेशर पड़े…कि जल्दी सैलरी देनी है…फिर वो भरोसा देती कि वो इस बारे में सर से बात करेगी…लेकिन कभी करती नहीं…

उसके पास भी पैंतरों की कमी नहीं थी…’सैलरी आज मिलेगी…कल मिलेगी’…कहकर वो स्टाफ को कई दिनों तक अपने आगे-पीछे उलझाये रखती…’बैंक का लिंक फेल हो गया है…इसलिए सैलरी आज एकाउंट में नहीं जा सकी…चिंता क्यूं करते हो…कल चली जाएगी…श्योर…हंड्रेड परसेंट नहीं…हंड्रेड टेन परसेंट’…इस तरह वो कई दिनों तक स्टाफ को अपने आगे-पीछे घुमाती…स्टाफ की मजबूरी थी कि वो दिव्या को ओवररूल कर सीधे आहूजा के पास नहीं जा सकते थे…और अगर चले भी जाते…तो इससे कोई फायदा होने वाला था नहीं…आहूजा वही करता…जो उसे ठीक लगता…या जैसा दिव्या उसे पट्टी पढ़ाती…आहूजा को पता था कि मार्केट में नौकरी की क्राइसिस है…ऐसे में लोग नौकरी छोड़कर जाएंगे नहीं…सो, वो स्टाफ की मजबूरियों का जमकर फायदा उठाता…

जब अगले दिन देर शाम तक एकाउंट में सैलरी नहीं आती…तो वो कुछ टेक्नीकल कारणों का हवाला देकर कल कैश बांटे जाने की बात कहती…लेकिन संयोग देखिए कि अगले दिन अचानक एकाउंटेंट की मां की तबीयत खराब हो जाती…वो लीव पर चला जाता…इस पर लोग उससे पूछते कि एकाउंटेट कब लौटेगा…तो वो स्टाफ पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाती…और कहती-‘बताइए कैसा जमाना आ गया है…किसी की मां मर रही है…और आप लोगों को अपनी सैलरी की चिंता है…इंसानियत और संवेदना नाम की कोई चीज नहीं बची है क्या?’…

स्टाफ न्यूज रूम में आते…और आहूजा-दिव्या के खिलाफ अपनी भड़ास निकालते…फिर हड़ताल की रणनीति बनाते…लेकिन रणनीति बनाने में ही एक-दो दिन गुजर जाते…स्टाफ समझ नहीं पाते कि आखिर ऐन सैलरी मिलने के वक्त ही क्यूं एकाउंटेंट की मां की तबीयत खराब हो जाती है…उन्हें इसके पीछे आहूजा और दिव्या की साजिश लगती…

स्टाफ में भी एकता नहीं थी…कुछ लोग न्यूज़ रूम में तो जमकर दिव्या और आहूजा के खिलाफ बोलते…लेकिन आहूजा के सामने उनकी घिग्घी बंध जाती…आहूजा भी स्टाफ की इन कमजोरियों को जानता था…ज्यादातर स्टाफ ग्रुप में तो साथ जाते…लेकिन आहूजा के चैंबर में उसकी नजरों से बचने के लिए पीछे खड़े रहते और कुछ भी बोलने से परहेज करते…ले-देकर राजकिशोर मिश्रा, आलोक रंजन और इकबाल खान ही आहूजा के सामने मुंह खोलने की हिम्मत करते…

कई स्टाफ न्यूज़रूम में आहूजा और दिव्या के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकालते…दूसरे लोगों के मुंह में उंगली देकर उन्हें दोनों के खिलाफ बोलने के लिए उकसाते…लेकिन पता चलता कि यही लोग आहूजा और दिव्या के लिए स्पाई का काम करते हैं…न्यूज़रूम की हर छोटी-से छोटी बात दोनों तक पहुंचाते हैं….कुछ लोगों को सैलरी बढ़ाने का लालच देकर उसने अपने पाले में कर रखा था…जो उसे व्हॉट्सअप कर ऑफिस की हर छोटी-बड़ी खबर देते…ये ‘जासूस’ संभावित हड़ताल के बारे में आहूजा को आगाह कर देते…आहूजा को जब लगता कि पानी सर के ऊपर से गुजर रहा है…और अब किसी भी वक्त हड़ताल हो सकती है…तो वो देर शाम अचानक से कैश सैलरी बंटवाने लगता…इवनिंग शिफ्ट के जो लोग उस वक्त ऑफिस में होते…वो एकाउंट में जाकर कैश ले लेते…लेकिन जो नहीं होते…जिनका वीकली ऑफ रहता…या जो लीव पर रहते…वो कैश सैलरी नहीं ले पाते…

मॉर्निंग और नाइट शिफ्ट के भी कई लोग सैलरी लेने के लिए भागे-भागे ऑफिस पहुंचते…उन्हें पता था कि आज मौका चूक गए…तो पता नहीं कितने दिनों बाद नंबर आए…लेकिन जो लोग किसी वजह से नहीं पहुंच पाते…उन्हें अगले दिन सैलरी दिए जाने का भरोसा दिया जाता…फिर वो अगला दिन कई दिनों तक नहीं आता…जिन लोगों की सैलरी बाकी होती…वो जब हड़ताल की रणनीति बनाते…तब जाकर उन्हें सैलरी मिलती…

सैलरी लगातार लेट होने से स्टाफ काफी परेशान रहते…जब स्टाफ आहूजा से बात करते…वो इस हालात के लिए मार्केटिंग टीम को जिम्मेवार ठहराता…कहता- ‘जब कहीं से पैसे आ ही नहीं रहे…तो वो कहां से लाकर दे?…अपना घर बेचकर दे’…इस पर अगर कोई विरोध करता…और कहता कि अगर मार्केटिंग टीम अपना काम ठीक से नहीं कर रही है…तो इसका खामियाजा हम क्यूं भुगतें?….तो अगले दिन से उसे तरह-तरह से प्रताड़ित करता…उसके काम में तरह-तरह की खामियां निकालता…और फ्लोर पर सबके सामने डांटता…राजकिशोर और आलोक रंजन को तो उसने कई बार फ्लोर पर सबके सामने डांटा…’सारा दिन नेतागिरी में लगे रहते हो…काम पर ध्यान नहीं रहता’…

जब आहूजा खुद नहीं आता…तो कभी सक्सेना…तो कभी दिव्या को भेज देता…और वो सबके सामने स्टाफ को जलील करता…मकसद वही…स्टाफ को बैकफुट पर रखो…वक्त-वेवक्त हड़काते रहो…ताकि उनका ध्यान दूसरी चीजों की तरफ डायवर्ट रहे…वो अपनी पूरी एनर्जी नौकरी बचाने में लगाएं…कोई सैलरी न मांगे…सैलरी में होने वाली देरी के खिलाफ आवाज न उठाए…एक बार जब स्टाफ ने अपनी परेशानियों से आहूजा को अवगत कराने की कोशिश की…तो उसने सहानुभूति जताने की जगह सबको डांटकर भगा दिया…कहा- ‘सभी चैनलों की हालत खराब है…हर जगह सैलरी लेट है…और क्या तुम लोग भिखारियों की तरह बार-बार सैलरी मांगने आ जाते हो’…

राजकिशोर, आलोक रंजन, इकबाल, अंजना और प्रीति ने आहूजा के इस लहजे का विरोध किया…और कहा- ‘भीख नहीं बल्कि सैलरी मांगने आए हैं…जो काम किया है…उसका पैसा मांग रहे हैं’…लेकिन अड़ियल आहूजा ने उनकी एक नहीं सुनी…कहा- ‘जिसको काम करना हो करो…नहीं काम करना है तो अभी रिजाइन कर दो…जब पैसे आएंगे…तभी सैलरी मिलेगी…हम अपना घर बेचकर थोड़े ही न देंगे’…आहूजा के इस रवैये से स्टाफ का आक्रोश और बढ़ गया…उनके सब्र का बांध टूट गया…सबने एक-दूसरे से व्हॉट्सअप पर बात कर हड़ताल की रणनीति बनाई…

अगले दिन दोपहर से हड़ताल शुरू हो गई….बुलेटिन जाना बंद हो गया…राजकिशोर ने साफ ऐलान कर दिया कि जब तक सैलरी नहीं मिलेगी…काम चालू नहीं होगा…सबने उसका समर्थन किया…उसका कहना था कि-‘आहूजा के पास महंगी गाड़ियां खरीदने और अपनी ऐय्याशियों पर लुटाने के लिए पैसे हैं…लेकिन हम लोगों को देने के लिए नहीं हैं…अगर मैनेजमेंट को हमारी परवाह नहीं है…हमारे जीने-मरने की चिंता नहीं है…तो हम ही क्यूं फिक्र करें…इसलिए जब तक सैलरी नहीं मिलेगी…काम चालू नहीं होगा’…

लेकिन नवीन इससे सहमत नहीं था…उसने सैलरी नहीं मिलने पर चिंता तो जताई…लेकिन हड़ताल पर जाने का विरोध किया…उसका कहना था कि इस तरह से हड़ताल पर जाना सही नहीं है…पत्रकारों को ये शोभा नहीं देता…लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी…इस दौरान राजकिशोर और नवीन में तीखी बहस हुई…राजकिशोर ने तैश में आकर नवीन को खूब खरी-खोटी सुनाई…कहा-‘आप अपनी नौकरी बचाइए…आपको दूसरे जगह नौकरी नहीं मिलेगी…हम लोग जूनियर स्टाफ हैं…हमें कहीं भी बारह-पंद्रह हजार की नौकरी मिल जाएगी…आप आहूजा से डरिए…हम लोग क्यूं डरें?’…

राजकिशोर से इस उग्र तेवर से सभी भौंचक रह गए…इस पर कुमार नवीन ने नाराज होकर कहा- ‘ठीक है…तुम लोगों को जो करना है…करो…मेरा काम था समझाना…बाकी तुम लोगों की मर्जी…कल को कुछ होगा…तो मेरे पास नहीं आना’…राजकिशोर ने भी बगावती तेवर अपनाते हुए कहा- ‘ठीक है नहीं आएंगे…लेकिन काम तभी चालू होगा जब सैलरी मिलेगी…आपको…सक्सेना को…और आहूजा को…जो करना है कर ले…बस, बहुत हो गया…हम लोग किसी से नहीं डरने वाले…नौकरी करते हैं…कोई बंधुआ मजदूर नहीं हैं…कि पेट बांधकर काम करते रहेंगे…आपको तो मोटी रकम मिलती है…बैंक में लाखों रुपए जमा हैं…फादर एसबीआई में मैनेजर हैं…मदर गवर्नमेंट हाई स्कूल में टीचर हैं…फैमिली सपोर्ट है…इसलिए सैलरी मिले ना मिले…आपको कोई फर्क नहीं पड़ता…लेकिन जरा हम लोगों के बारे में सोचिए कि कैसे गुजारा होता है…आप नहीं समझेंगे…ऊ एगो कहावत है न…जाके पैर न फटी बिवाई…वो क्या जाने पीर पराई…जाइए, आप अकेले काम करिए…हम लोग तो नहीं करेंगे…चाहे कुछ भी हो जाए’…

थोड़ी देर बाद जब नवीन ने सक्सेना को हड़ताल के बारे में बताया…तो आश्चर्यजनक रूप से उसने भी हड़ताली कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया…दो दिनों तक हड़ताल रही…ब्लैक आउट रहा…एक भी बुलेटिन नहीं गया…पीसीआर वालों ने भी इस हड़ताल में शामिल होते हुए रिकॉर्डेड प्रोग्राम चलाने से मना कर दिया…जब सारे रास्ते बंद हो गए…तब जाकर आहूजा झुका…और स्टाफ को एक महीने की बकाया सैलरी दी…और काम शुरू हुआ…

चैनल का माहौल तनावपूर्ण होता जा रहा था…इसी बीच आहूजा चौतरफा मुश्किलों में घिर गया…ईडी ने आहूजा पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया…उस पर बेनामी संपत्ति रखने का आरोप था…आरोप के मुताबिक सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं और आला अफसरों की ब्लैक मनी उसने अपने बिजनेस में लगा रखी है…उसी पैसे से उसने हरियाणा, पंजाब और वेस्टर्न यूपी के कई शहरों में फोर स्टार और फाइव स्टार होटल खोल रखे हैं…इस पर कुछ दिनों के लिए आहूजा भूमिगत हो गया…सैलरी फिर लेट होने लगी…स्टाफ की नाराजगी फिर बढ़ने लगी…

फिर एक दिन अचानक जो कुछ हुआ…उसकी आशंका किसी को नहीं थी…खुद आहूजा को भी नहीं…पंजाब पुलिस ने करोड़ों के चिटफंड घोटाले के आरोप में आहूजा को अरेस्ट कर लिया…उस पर लाखों लोगों के करीब दो हजार करोड़ रुपए डकारने का आरोप था…एक बार आहूजा पर कानून का शिकंजा कसा…तो वो हर तरफ से मुश्किलों में घिर गया…ईडी और सेबी ने भी अपना शिकंजा कसा…इनकम टैक्स ने भी रेड मारी…छापेमारी में करोड़ों की अघोषित और बेनामी संपत्ति का पता चला…आईटी विभाग ने रेड कर उसका घर और चैंबर सील कर दिया…हालांकि न्यूज चैनल पर किसी ने भी हाथ नहीं डाला…

चैनल में कई तरह की चर्चाएं होने लगी…राजकिशोर और आलोक रंजन ने एक बड़ा खुलासा किया…’आहूजा सत्तारूढ़ दल के नेताओं और बड़े-बड़े अफसरों को कॉलगर्ल और चैनल की एंकर सप्लाई करता है..उन्हें टाइम टू टाइम अपने होटल में रंगरेलियां मनाने देता है…कुछ लोगों का उसने पॉर्न वीडियो भी बना रखा है…और समय-समय पर ब्लैकमेल करता है…इसी में कुछ लफड़ा हो गया है…इसलिए उसे जेल जाना पड़ा…ईडी का केस, चिटफंड घोटाला मामले में गिरफ्तारी, आईटी और सेल्स टैक्स का रेड सब उसी का नतीजा है’…

राजकिशोर की ये बात उस वक्त सही साबित हुई…जब उसके होटलों पर रेड के दौरान पुलिस को कई बड़े नेताओं, आला ब्यूरोक्रेट्स और बिल्डर्स के पॉर्न क्लिप मिले…साथ ही दर्जनों पॉर्न सीडी भी मिली…अगले ही दिन एक राइवल चैनल ने आहूजा को एक बिल्डर को ब्लैकमेल करते हुए दिखाया…’उसे अपने स्टाफ को दो महीने की सैलरी देनी है…साथ ही केबल ऑपरेटर का भी पेमेंट करना है…अगर उसने कल तक 20 लाख रुपए कैश नहीं दिए…तो वो परसों अपने चैनल पर क्लिप दिखा देगा’…तमाम स्टाफ हैरान थे…उसे राजकिशोर के दावों में सच्चाई नजर आई…लेकिन जब किसी ने उससे पूछा कि इतनी ऑथेंटिक खबर उसे कैसे सबसे पहले पता चल जाती है…तो उसने सोर्स का खुलासा करने से मना कर दिया…कहा- ‘मीडिया में कभी खबर के सोर्स के बारे में नहीं पूछा जाता…डॉक्टरों के लिए मूत्र और पत्रकारों के लिए सूत्र काफी अहम होता है’…

अब तक तो प्रीति इन आंदोलनों में उतनी ऐक्टिव नहीं थी…लेकिन जब उसे आहूजा के काले कारनामों के बारे में पता चला…तो वो गुस्से से बिफर उठी…उसने आहूजा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया…और धरने पर बैठ गईं…प्रीति ने शुरुआत की…तो अंजना, प्रणब, मानसी, सोनाली और रिमझिम भी उसके साथ धरने में शामिल हो गए…फिर तो कारवां बढ़ने लगा…राजकिशोर, आलोक रंजन और इकबाल भी साथ हो गए…इस बार हड़ताल का नेतृत्व प्रीति कर रही थी…

चैनल में कामकाज बंद हो गया…नवीन ने प्रीति को समझाने की भरसक कोशिश की…लेकिन उसने नवीन की एक नहीं सुनी…और ‘भीष्म पितामह’ की तरह सब कुछ देखकर भी चुप रहने के लिए उसे भी जमकर भला-बुरा कहा…कहा- ‘शुतुरमुर्ग की तरह हकीकत से मुंह चुराने से काम नहीं चलेगा…गलत बातों का मुंहतोड़ जवाब देना पड़ेगा…चाहे इसके लिए नौकरी से ही क्यूं न हाथ धोनी पड़े…लेकिन ये सब आप नहीं समझेंगे…अब आप भी मैनेजमेंट की भाषा बोलने लगे हैं’…प्रीति के तीखे तेवर देख नवीन वहां से गुस्से में पैर पटककर चला गया…

उधर, जब जेल में आहूजा को पता चला कि चैनल में फिर स्ट्राइक हो गया है…तो वो सक्सेना और नवीन पर जमकर बरसा…उसका कहना था कि ये सब सक्सेना और नवीन की साजिश है…सक्सेना और नवीन मिलकर एक नया चैनल लाने की तैयारी कर रहे हैं…और फाइनेंसर से भी उनकी डील हो गई है…इसलिए हमारे चैनल को डिस्टर्ब कर रहा है…आहूजा ने जेल से ही एकाउंटेट को फोन कर एक महीने की सैलरी क्लियर करने को कहा…सबको एक महीने की सैलरी मिली…और बाकी दो महीने की सैलरी भी जल्द दिए जाने का भरोसा दिया गया…दिव्या ने स्टाफ को समझाया-‘सर अभी जेल में हैं…जैसे ही बाहर आएंगे…एक हफ्ते के भीतर दोनों मंथ की सैलरी एकाउंट में चली जाएगी’…तब जाकर कामकाज शुरू हुआ…

काफी मशक्कत के बाद आहूजा को अंतरिम जमानत मिली…आहूजा ने नोटों की बोरी खोल दी…दिल्ली से महंगे और नामी-गिरामी वकीलों की पूरी फौज बुलाई गई…जो साम-दाम-दंड-भेद सबमें माहिर थे…शिकायतकर्ताओं पर दवाब डाले गए…केस के आईओ से लेकर डीसी, एसएसपी, सबको मैनेज किया गया…डीसी की बहू को एंकर बनाया गया…तो एसएसपी के बेटे को गुड़गांव के होटल में पार्टनरशिप मिली…मंत्री जी के करीबी पत्रकार को चंडीगढ़ में ब्यूरो चीफ बनाया गया…जज की वाइफ के एनजीओ को दस लाख का डोनेशन मिला…शिकायतकर्ताओं को भी पैसे के जोर पर खरीदा गया…कई शिकायतकर्ताओं ने केस वापस लेने की अर्जी दी…और केस आउट ऑफ कोर्ट सेटल करने की बात कही…तब जाकर उसे जमानत मिली…

जब वो जेल से रिहा हुआ…तो उसके चमचों ने उसका भव्य स्वागत किया…जैसे आहूजा कोई बड़ा काम करके निकला हो…उसकी रिहाई की खुशी में दिल्ली के एक फाइवस्टार होटल में शानदार पार्टी रखी गई…जिसमें कई आला नेताओं, अफसरों और बिजनेसमैन को बुलाया गया…आहूजा के पास पैसों की कोई कमी तो थी नहीं…सो, जमकर पार्टी हुई…पीने-पिलाने का दौर चला…शराब की नदियां बहाई गईं…लेकिन चैनल से किसी को इंवाइट नहीं किया गया…यहां तक कि सक्सेना को भी नहीं…

अगले दिन एचआर से एक मैसेज आया कि आहूजा ने कल दो बजे क्रांफ्रेंस हॉल में अर्जेंट मीटिंग बुलाई है…इसमें सभी स्टाफ का रहना ज़रूरी है…इस मीटिंग के एजेंडे को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया…लेकिन मीटिंग से दो घंटे पहले अचानक खबर आई कि सक्सेना और नवीन को टर्मिनेट कर दिया गया है…राजकिशोर और प्रीति ने नवीन को कई बार फोन भी लगाया…लेकिन फोन स्विच ऑफ था…दोनों ने व्हाट्सअप पर कई बार मैसेजेज भी किए…लेकिन नवीन ने कोई रिप्लाई नहीं किया…उधर, खुशबू ने भी सक्सेना को कई बार कॉल किया…लेकिन उसने भी फोन नहीं उठाया…

आहूजा ने मीटिंग में चैनल के कामकाज पर नाराजगी जताई…और कहा-‘चैनल के भीतर जो गंदगी थी…उसे हमने साफ कर दिया है…जो लोग चैनल को डिस्टर्ब कर रहे थे…उनके पिछवाड़े पर लात मारकर बाहर कर दिया है…आप लोग मन लगाकर काम कीजिए…मैं अब बाहर आ गया हूं…आगे से सब कुछ ठीक रहेगा’…

इस दौरान जब राजकिशोर और आलोक रंजन ने लेट सैलरी का मसला उठाया…तो आहूजा ने डांटकर चुप करा दिया…कहा-‘ये टैम इस टॉपिक पर बात करने का नहीं है…कुछ लोगों ने गलत-सलत आरोप लगाकर मुझे अंदर करवा दिया था…लेकिन सच्चाई की जीत हुई…अभी तो मैं बाहर आया हूं…जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा’…इस पर प्रीति और अंजना ने आहूजा को समझाने की कोशिश की…‘टाइम पर सैलरी नहीं मिलने से कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है’…तो आहूजा ने दोनों को डांट दिया…प्रीति से कहा- ‘पता चला है कि आजकल आप भी खूब नेतागिरी करने लगी हैं…हम आपको इतना मानते हैं…रोड से उठाकर जॉब दी…‘सिल्वर स्क्रीन’ तक पहुंचाया…और आपने उसका यही सिला दिया?‘…

इसके अगले दिन आहूजा ने मार्केटिंग टीम की बैठक बुलाई…और मार्केटिंग हेड को काफी हड़काया…आहूजा ने उन्हें एक महीने का वक्त दिया…नहीं तो अपने लिए नौकरी खोजने को कहा…आहूजा के काले कारनामों के चलते चैनल का रेप्युटेशन काफी खराब हो चुका था…सो, ज्यादा विज्ञापन मिलने का सवाल ही नहीं उठता था…मार्केटिंग हेड ने काफी कोशिश की…लेकिन टारगेट का फिफ्टी परसेंट भी पूरा नहीं हुआ…आखिरकार उसने इस्तीफा देकर दूसरा चैनल ज्वॉयन कर लिया…

चैनल में फिर सैलरी लेट हो गई…स्टाफ का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा था…इन लोगों ने कई बार दिव्या को अपनी परेशानियों से अवगत कराया…सक्सेना और आहूजा से भी गुहार लगाई…लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ…आखिर कब तक स्टाफ पेट बांधकर काम करते…उन्होंने फिर स्ट्राइक कर दी…न्यूज़ रूम में धरने पर बैठ गए…राजकिशोर, अंजना और प्रीति ने पूरे आंदोलन की अगुआई की…इस पर आहूजा ने चैनल बंद करने की धमकी दी…तो स्टाफ ने दो महीने की बकाया सैलरी और कंपनी ने नियम के मुताबिक एक महीने की एक्स्ट्रा सैलरी देने को कहा…

इस बीच राजकिशोर, अंजना और प्रीति ने लेबर कोर्ट में केस कर दिया…इससे आहूजा और बिफर गया…उसने मीटिंग बुलाकर चैनल का शटर डाउन करने का ऐलान कर दिया…इतने दिनों में उसे एहसास हो चुका था…कि चैनल खोलकर उसने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती की…ये काफी घाटे का सौदा है…इसलिए अब तक जो डूबा सो डूबा…आगे पैसे न डूबे…उसके लिए शटर डाउन करना जरूरी है…जब लोगों ने अपने पैसे मांगे…तो आहूजा ने कल एकाउंट में आकर चेक लेने को कहा…

तमाम स्टाफ खुश थे…और थोड़े उदास भी…खुश इसलिए कि काफी जद्दोजहद के बाद उन्हें उनके बकाया पैसे मिल रहे थे…और एक महीने की एक्सट्रा सैलरी भी मिल रही थी…ये स्टाफ की बड़ी जीत थी…लेकिन उन्हें इस बात का दुख था कि चैनल बंद हो रहा है…अब वो लोग एक-दूसरे से बिछड़ जाएंगे…पता नहीं फिर मुलाकात हो न हो…हालांकि मीडिया की दुनिया काफी छोटी होती है…वक्त के साथ वही लोग घुमा-फिराकर तमाम चैनलों में नजर आते हैं…लेकिन जो किसी वजह से बिछड़ जाते हैं…उनसे मुलाकात करना भी तो संभव नहीं हो पाता…

प्रणब भी काफी उदास था…वो समझ नहीं पा रहा था कि वो कैसे प्रीति से अपने दिल की बात कहे?…कैसे यकीन दिलाए कि वो उसे कितना चाहता है…और उसे अपना जीवन साथी बनाना चाहता है…कहीं वो नाराज हो गई तो?…उधर, अंजना भी उदास थी कि प्रीति अब उससे दूर हो जाएगी…अब वो किससे अपनी परेशानियां शेयर करेगी?…किससे अपना दुख-दर्द बांटकर मन का बोझ हल्का करेगी?…लेकिन प्रीति अजीबोगरीब कशमकश में थी…वो अंजना से जुदा होने की बात सोचकर ही कांप उठती थी…

अगले दिन सबने एकाउंट डिपार्टमेंट में जाकर चेक लिया…ऑफिस में गजब का माहौल था…स्टाफ की आंखों से कभी खुशी के आंसू निकलते थे…तो कभी गम के…खुशी इसलिए कि आहूजा के खिलाफ इन लोगों ने जो जंग छेड़ी थी…उसमें इनकी जीत हुई…बकाये सैलरी के साथ-साथ एक महीने की एक्सट्रा सैलरी मिली…गम इसलिए कि चैनल बंद हो गया…और वर्षों का साथ छूट रहा था…जिस चैनल के लिए दिन-रात एक कर दिया..खून पसीना बहाया…वो बंद हो गया…सभी स्टाफ काफी भावुक थे…विदा होते वक्त सबने एक-दूसरे से हाथ मिलाया…एक-दूसरे को गले लगाया…पीठ थपथपाई…और तमाम गिला-शिकवा भूलकर माफ करने को कहा…और सेल्फी ली….ग्रुप फोटो खिंचवाई…

फिर अचानक से जो कुछ हुआ…उस पर यकीन करना मुश्किल था…खुशबू ने प्रीति से माफी मांगी…और कहा- ‘ईष्या के चलते मैंने तुम्हारे बारे में काफी मनगढंत कहानियां सुनाईं थीं…जबकि मैंने तुम्हें कभी कुछ गलत करते नहीं देखा था’…प्रीति ने खुशबू को ‘इट्स ओके…कोई बात नहीं’…कहकर गले लगाकर उसे माफ कर दिया…

प्रणब ने भी प्रीति को अकेले में सॉरी बोला…और कहा– ‘मैं अपने इमोशंस पर काबू नहीं रख सका…इसलिए मैंने अंजना के जरिये अपने दिल की बात कहकर तुमको हर्ट किया…आई एम वेरी वेरी सॉरी फिर दिस’…इस पर प्रीति ने मुस्कुरा कर ‘इट्स ओके’ कहकर माफ कर दिया…

हर इंसान की अपनी फितरत होती है…आहूजा की भी थी…कुत्ते की दूम को बारह साल भी पाइप में घुसेड़कर रखो…फिर भी सीधा नहीं होता…जैसे ही बाहर निकलता है…फिर टेढ़ा हो जाता है…अपनी आदत के मुताबिक आहूजा एक बार फिर अपने कमीनेपन से बाज नहीं आया…जब लोगों ने बैंक में चेक जमा किया…तो वो बाउंस हो गया…प्रीति-अंजना-राजकिशोर का भी चेक बाउंस हो चुका था…सो, उन्होंने तमाम स्टाफ को गोलबंद किया…और पहुंच गया चैनल के दफ्तर…और भूख हड़ताल शुरू कर दी…

अगले ही दिन लेबर कमिश्नर खुद पत्रकारों से मिलने चले आए…और उन्होंने कर्मचारियों को 72 घंटे के भीतर उनका वाजिब हक दिलाने का भरोसा दिया…उन्होंने बताया कि गवर्नमेंट जॉब में आने से पहले मैंने भी दो-तीन साल तक दिल्ली-नोएडा के कई चैनलों में बतौर असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोड्यूसर काम किया है…सो, चैनल मालिकों के कमीनेपन से वो पूरी तरह से वाकिफ है…और वो स्टाफ को उनका वाजिब हक दिलाकर रहेगा…

कानून के मुताबिक जिनके जो भी पैसे और कंपेंशेसन बनते हैं…वो दिलाकर ही चैन की सांस लेगा…आहूजा को लग गया कि वो बुरी तरह से फंस गया है…और बचने का कोई रास्ता नहीं है…तो वो भागा-भागा ऑफिस आया…पैंतरेबाजी में तो वो माहिर था ही…उसने एक बार फिर पैंतरा बदला…उसने सबके सामने एकाउंटेंट को इस बात के लिए हड़काया कि-‘जो एकाउंट डेड है…तुमने उसका चेक इन लोगों को क्यों दे दिया?’…उसने तमाम स्टाफ से एकाउंट डिपार्टमेंट की गलती के लिए माफी मांगी…और कल कैश पेमेंट करने की बात कही…

लेकिन स्टाफ ने साफ कर दिया कि उन्हें आहूजा के वादों पर एतबार नहीं है…पहले भी वो लोग कई बार भरोसा कर ठगे जा चुके हैं…सो, वो लोग आज पैसे लिए बगैर यहां से नहीं जाएंगे…इस पर आहूजा ने उनसे दो-तीन घंटे का वक्त मांगा…और ये भी आग्रह किया कि कल चैनल की ओर से फेयरवेल पार्टी रखी गई है…आप लोग ज़रूर आना…कुछ घंटे बाद सबको दो-दो महीने की बकाया सैलरी और एक महीने की एक्सट्रा सैलरी मिल गई…सब अपने-अपने घर लौट गए…

अगले दिन पार्टी शुरू हुई…सबने जमकर खाया-पीया और मस्ती की…कुछ लोग शराब पीकर बेरोजगारी का गम भुलाने की कोशिश कर रहे थे…तो प्रणब एक कोने में गुमसुम खड़ा सिगरेट के धुएं उड़ाकर अपनी भावनाओं पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था…प्रीति से जुदाई का गम वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था…

चैनल के अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को शेयर करते हुए सक्सेना ने खुलासा किया-‘आहूजा के इशारे ने पर ही उसने हड़ताल का समर्थन किया था…ताकि स्टाफ उसे अपना शुभचिंतक समझें…और वो आहूजा को इनफॉर्मेशन दे सके…उसने खुलासा किया कि उसे टर्मिनेट नहीं किया गया था…बल्कि प्यून ने जो इनवेलप दिया था…उसमें शिमला टूर का टिकट था’…उसने इस धोखे के लिए सबसे माफी मांगी…

उधर, नवीन ने खुलासा किया-‘तमाम आंदोलनों का ‘मास्टरमाइंड’ वही था…लेकिन पद की मर्यादा से बंधे होने के चलते वो खुद हड़ताल की कमान नहीं संभाल सकता था…इसलिए उसने कभी राजकिशोर, आलोक रंजन और इकबाल भाई को…तो कभी प्रीति और अंजना को फ्रंट पर रखा…राजकिशोर, आलोक रंजन, इकबाल, अंजना और प्रीति ने वही किया…जो हमने उनसे कहा…राजकिशोर और प्रीति से मेरा झगड़ा…और फ्लोर सबके सामने मुझे जलील करना भी उसी रणनीति का हिस्सा था’…राजकिशोर और प्रीति दोनों ने इसका समर्थन किया…फिर उसने घाघ नेता की तरह मुस्कुराते हुए कहा-‘मुझे एहसास था कि सक्सेना जी क्यूं हमारा साथ दे रहे हैं…इसलिए मैंने कभी उनके सामने कोई चीज डिस्कस नहीं की…किसी को कोई सीधा निर्देश नहीं दिया…बल्कि हमेशा हड़ताल का विरोध किया…मुझे जो भी निर्देश देना रहता वो मैं राजकिशोर और प्रीति को फेसबुक या व्हाट्सएप्प पर मैसेज कर देता’…

फिर वो रहस्यमय तरीके से मुस्कुराया…और प्रीति के कंधे पर हाथ रखते हुए उसे माइक थमा दी…नवीन ने कहा- ‘मेरी बातों पर ज्यादा हैरान होने की जरूरत नहीं है…क्योंकि अब प्रीति जी जो खुलासा करेंगी…उस पर आपको यकीन नहीं होगा…आहूजा जी और सक्सेना जी खुद को बहुत बड़ा तीसमार खां समझते हैं…लेकिन प्रीति ने उन्हें ऐसा सबक सिखाया…कि ये लोग ताजिंदगी नहीं भूलेंगे…दोनों तय नहीं कर पाएंगे कि हंसे या रोएं’….

प्रीति ने सबसे पहले एक झूठ के लिए तमाम साथियों से माफी मांगी…फिर उसने प्रणब से अलग से माफी मांगी…और हंसते हुए कहा- ‘मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती…इसके पीछे की वजह का तुम्हें अभी पता चल जाएगा…फिर वो अंजना के पास गई…और उसकी हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा- ‘मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं…और शादी करना चाहता हूं’…इस पर अंजना चौंकी….तब प्रीति ने होठों पर से अपने लिपिस्टिक पोंछे…और विग हटाया…तो सब चौंक गए…अरे, ये क्या? प्रीति लड़की नहीं…लड़का है…इसके लंबे खूबसूरत बाल नहीं…बल्कि छोटे-छोटे बाल हैं…अंजना हैरान रह गई…बाकी लोगों को भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ…हॉल में खुसर-फुसर शुरू हो गई…

फिर प्रीति ने पूरी कहानी बयां की… उसका नाम प्रीति नहीं बल्कि प्रीतम चौधरी है…और वो बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है….एक बार वो यहां एंकरिंग के लिए ऑडिशन देने आया था…तो आहूजा और सक्सेना ने रिजेक्ट कर दिया था…कहा था-‘एंकर बनने का सपना देखते हो…लड़कों को कौन एंकर बनाता है?…और अगर तुम्हें एंकर बना भी दें…तो इससे हमें क्या मिलेगा?…तुम्हारे पास देने के लिए है ही क्या?’…

प्रीतम ने कहा-‘उसी दिन मैंने ठान लिया था कि सिर्फ एंकर ही बनूंगा…और वो भी इसी चैनल में…तब मैंने नवीन सर से मदद मांगी…नवीन सर मेरे भैया के फ्रेंड हैं…दोनों ने रामजस कॉलेज में साथ पढ़ाई की है…नवीन सर ने ही मुझे ये आयडिया दिया था कि लड़की बनकर सक्सेना और आहूजा को सबक सिखाओ…मैंने पहले काफी ड्रामा और थिएटर किया हुआ है…इसलिए मेरे लिए ऐसा करना बड़ी बात नहीं थी’…प्रीतम की बात पर नवीन ने भी मुस्कुरा कर हामी भरी…

प्रीतम ने कहा-‘वो युवा है…बाकी युवाओं की तरह अपने तरीके से जिंदगी जीना चाहता है…पढ़ाई पूरी हुई…तो देश के लिए कुछ करने का जज्बा उसके मन में था…सिविल सर्विसेज के लिए ट्राई किया…यूपीएससी और पीएससी की परीक्षा दी…कई बार पीटी और मेंस भी क्लियर किया…लेकिन फाइनली सेलेक्ट नहीं हुआ…कई मौकों पर रिजर्वेशन ने रास्ता रोक दिया…तो कई बार सिफारिशों ने…

समाज सेवा कर लोगों का भला कर सकता था…लेकिन समाज सेवा के नाम पर पहले से ही बहुत-से लोग अपनी-अपनी दुकान खोले बैठे हैं..एनजीओ खोलकर समाज सेवा करने की जगह अपना बैंक बैलेंस बढ़ाने में लगे हैं…राजनीति में जाकर देश की सेवा कर सकता था…लेकिन राजनीति की हालत तो आप जानते ही हैं…तौबा-तौबा…कितनी गंदगी है…कैसे सेवा के नाम पर नेता लोग मेवा खा रहे हैं…और आम लोगों को ठीक से दो वक्त की रोटी भी नहीं मिलती…फिर मुझे लगा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है…सो इसके जरिये देश और समाज की सेवा कर सकते हैं…लेकिन मुझे कहां पता था कि मीडिया में भी इतनी गंदगी फैली हुई है… हवस भरी निगाहें हर पल आपको घूरती रहती हैं…फिर टीआरपी ने तमाम चैनलों को अंधा और बहरा बना दिया है…और आम लोगों की आवाज इनके कानों तक नहीं पहुंच पाती’…

फिर उसने सक्सेना और आहूजा का नाम लिए बगैर कहा- ‘लानत है ऐसे लोगों पर…जो मीडिया इंडस्ट्री में आने वाली नई लड़कियों को बरगलाते हैं…उन्हें गार्जियन और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए… लेकिन वो उन्हें गलत रास्ते पर धकेलने की कोशिश करते हैं…गॉडफादर बनने का स्वांग कर यौन शोषण की साजिश रचते हैं…उन्हें हम कहना चाहते हैं कि अगर आप वाकई गॉडफादर बनना चाहते हैं…तो आपको ‘गॉड’ और ‘फादर’ दोनों बनना पड़ेगा’…फिर उसने लड़कियों को भी नसीहत दी-‘आप ऐसे लोगों से सावधान रहें…तात्कालिक फायदे के लिए मान-सम्मान से समझौता न करें…गलत रास्ते पर चलकर सफलता पाने की कोशिश न करें…खूब मन लगाकर काम करें…सफलता पाने के लिए कोई शॉर्टकट न अपनाएं…क्योंकि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता’…

लेकिन इस सबके बीच अंजना पता नहीं कब वहां से चली गई…वो प्रीति से नाराज थी…और जार-जार हो रही थी…वो प्रीति को अपना सबसे क्लोज फ्रेंड मानती थी…और उसने उसके साथ इतना बड़ा धोखा किया…लड़की बनकर मेरी फीलिंग्स, मेरे इमोशंस के साथ खेला…और कभी बताया तक नहीं…वो नवीन से भी नाराज थी…कि उसने भी कभी उसे इस बारे में हिंट नहीं किया…उसकी आंखों से गंगा-जमुना की धारा बह रही थी….उसे यकीन नहीं आ रहा था कि जिस प्रीति को वो अपना बेस्ट फ्रेंड मानती थी…उसने उसके साथ इतना बड़ा धोखा किया…फिर कॉलेज के जमाने से क्लासमेट होने के बावजूद नवीन ने भी उसे इस बारे में नहीं बताया…

प्रीतम उसके घर गया…तो उसने काफी देर तक घर का गेट नहीं खोला…प्रीतम ने बार-बार माफी मांगी…और कहा कि मैंने जो कुछ भी किया…वो मेरी मजबूरी थी…प्रीतम की प्यार भरी बातें सुनकर और बार-बार माफी मांगने से तो अंजना का दिल पसीज गया…उसने दरवाजा खोला…और प्रीतम को अपने सीने से लगाकर रोने लगी…प्रीतम उसे जितना चुप कराने की कोशिश करता…वो और ज्यादा रोने लगती…जब रो-रोकर अंजना का मन हल्का हुआ…तो उसने अपने हाथों से चाय बनाकर प्रीतम को पिलाई…

कुछ दिनों बाद दोनों ने छतरपुर मंदिर में शादी कर ली…शादी के वक्त प्रीतम और अंजना के परिवार वाले भी मौजूद थे…अंजना के पिता एक बिहारी लड़के से बेटी के शादी करने के फैसले से खुश नहीं थे…लेकिन अंजना की खुशियों की खातिर उन्होंने इस रिश्ते को कबूल कर लिया…शादी हुई…और सबने वर-वधू को सुखद दांपत्य जीवन के लिए बधाई दी…

अगले दिन रिसेप्शन था…रिसेप्शन में सक्सेना, नवीन, प्रणब, रिमझिम, मानसी समेत चैनल के कई स्टाफ को बुलाया गया…सभी आए और दोनों को शादी की मुबारकबाद दी…बुलाया तो आहूजा और दिव्या को भी गया था…लेकिन वे नहीं आए…बड़े लोग कहां छोटे लोगों के सुख-दुख में शामिल होते हैं…

कुछ दिनों बाद नवीन और सक्सेना एक नया चैनल लेकर आने वाले थे…दोनों ने अंजना और प्रीतम को चैनल से जुड़ने का ऑफर दिया..लेकिन दोनों ने माफी मांग ली…और कहा कि जिस गंदगी से इतनी मुश्किल से बाहर निकले हैं…उसमें दोबारा गोते लगाने की इच्छा नहीं है…जो भी थोड़ा-बहुत कमाते हैं…उसी में खुश हैं…कम से कम चैन-सुकून की जिंदगी तो जी रहे हैं.

समाप्त

‘गॉडफादर!’ नामक इस उपन्यास के लेखक अमर कुमार मिश्र मधुबनी, बिहार के रहने वाले हैं. उनसे संपर्क amar_mishra2@rediffmail.com के जरिए किया जा सकता है. इस उपन्यास का किसी भी चैनल और जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है…अगर कहीं कोई समानता नजर आती है तो वो महज एक संयोग है…

इसके पहले के पार्ट…

उपन्यास पार्ट (2) : तेरे पर भी उसकी बुरी नजर है…

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उपन्यास पार्ट (1) : नई माल देख उसके अंदर का मर्द जग गया

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