किसानों ने जी न्यूज, रिपब्लिक भारत के अलावा आजतक को भी गोदी मीडिया घोषित कर दिया

विजय शंकर सिंह-

चौथा खम्भा इतना बेबस कैसे हो गया है कि वह शाखामृगों के कूदने फांदने की जगह बन कर रह गया है?

संजय कुमार सिंह-

चौथे स्तंभ के नष्ट होने पर श्रद्धांजलि… नाम लेकर मीडिया से कहना कि मत करो कवर, तुम फर्जी हो – यह हमारे समाज का एक नया वाला फर्राजी हिस्सा है। बचपन में जब हम सुनते थे कि पुलिस वाले भ्रष्ट होते हैं, सरकारी बाबू भ्रष्ट होते हैं तो यह भी सुनते थे कि उसे दूर करने की कोशिश हो रही है। उसपर बात होती थी। राजीव गांधी ने कहा था कि केंद्र का भेजा एक रुपया जरूरत मंत तक पहुंचते हुए 15 पैसे रह जाता है। लोग जानते थे। जान गए। पर सब जगह ऐसा नहीं था। तकनीक से स्थिति सुधरी सुधारी जा सकती थी। पर भ्रष्टाचार का असली कारण तो राजनीति है। सुधारना उसे था और वही बिगड़ गई। नतीजा सामने है।

मीडिया पर लोगों को भरोसा था। नेताओं को भी था। आज के मीडिया मैनेजरों को भी था। मीडिया ने पेड न्यूज शुरू किया। उसका विरोध हुआ। पर मीडिया वाले नहीं माने। फिर आए राजनीति के “शक्तिमान”। उन्होंने सब ठीक करने का दावा किया। जितना खराब था उससे खराब बताया। और फिर भोली-लाचार जनता ने सत्ता सौंप दी तो पता चला – मौके का इंतजार कर रही दूसरी टीम थी। हालांकि लोग नहीं समझे। दोबारा मौका दिया। अब सब साफ है। सत्यमेव जयते। गुब्बारा फटता है नहीं तो पिचक जाता है।

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