गोरखपुर का गांधी : या तो मैं रहूंगा या विश्वविद्यालय का कुलपति रहेगा! (देखें वीडियो)

के. सत्येन्द्र-

गोरखपुर : चुनावी गुना गणित और उठापटक से दूर योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर में एक बुजुर्ग आमरण अनशन पर डटा है और अपने प्राण देने पर आमादा है। गोरखपुर विश्विद्यालय के कुलपति की तानाशाही और भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध डॉ संपूर्णानंद मल्ल पिछले 9 दिनों से आमरण अनशन पर हैं।

पुलिस प्रशासन के लाख मान मनव्वल के बाद भी आमरण अनशन पर डटे हुए डॉ संपूर्णानंद को प्रशासन ने इलाज के बहाने जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया है । संपूर्णानंद मल्ल का कहना है कि वो बिल्कुल स्वस्थ है और इलाज के बहाने उनके आंदोलन को कुचलने की साजिश की जा रही है।

डॉ सम्पूर्णा नंद मल्ल घोषित तौर पर न पुलिस अभिरक्षा में है और न ही न्यायिक अभिरक्षा में। फिर भी पुलिस जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में उनकी बराबर निगरानी में लगी हुई है। सूत्रों से मिली खबर के अनुसार डॉ सम्पूर्णा नंद के साथ ही कुलपति की तानाशाही और भ्रष्टचार के विरोध में सत्याग्रह करने और क्रांति की मशाल उठाने वाले गोरखपुर विश्विद्यालय के प्रोफेसर कमलेश ने अपनी क्रांति की मशाल को मूत्र में विसर्जित कर दिया है तथा बैकफुट पर आते हुए फिलहाल अपने सत्याग्रह को स्थगित कर दिया है।

प्रोफेसर कमलेश को उनका निलंबन वापस लिए जाने का उन्हें आश्वासन मिला है इसलिए कभी अपने सत्याग्रह के समर्थन में सड़क पर जन जन से विश्वविद्यालय की खातिर जनसमर्थन मांगने वाले प्रोफेसर कमलेश ने अचानक से यू टर्न ले लिया है। हो सकता है कि प्रोफेसर कमलेश ने अपने जीवन की खातिर व्यवस्था से समझौता कर अपना सत्याग्रह स्थगित कर दिया हो लेकिन बुजुर्ग सम्पूर्णा नंद मल्ल (गांधी ऑफ गोरखपुर) आज भी अपने आमरण अनशन पर अडिग है।

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