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सिद्ध गुरुओं की कृपा, बिना प्रयास भी मिलती है!

यशवंत सिंह-

सिद्ध पुरुषों की आध्यात्मिक शक्तियों के बारे में तमाम किस्से हैं। चर्मकार होने के बावजूद चौदह्वीं शताब्दि में जन्मे महान संत रैदास को मुग़ल बादशाह बाबर भी सम्मान देता था। वह इतने चमत्कारी थे कि अपने तसले में ही काशी के सैकड़ों लोगों के सामने गंगा जी को प्रकट कर दिया था।

भारत में उसी तरह के सिद्ध पुरुषों की बहुत लम्बी सूची है, सभी की अचरज में डालने वाली दास्तानें हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनकी प्रतिभा और चमत्कारों का लोहा लोग उनके देह छोड़ने के बाद भी मानते हैं। ऐसे सिद्ध पुरुषों में साईं बाबा की ही तरह उत्तराखंड के कुमायूं मंडल के नैनीताल के पास कैंची धाम में रहनेवाले संत बाबा नीम करोली का नाम अमरीका, फ़्रांस, जर्मनी और इंग्लॅण्ड के साथ ही भारत, नेपाल, बांग्ला देश, भूटान और श्रीलंका में भी प्रसिद्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका यात्रा में उनके साथ भेंट होने पर फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग ने भी बताया था कि कभी वह बेरोजगार और आर्थिक बदहाली से परेशान थे, तब उनके गुरु तथा मार्गदर्शक विश्व की सबसे कामयाब एप्पल कम्पनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स ने उन्हें हिमालय में रहने वाले बाबा से मिलने की राय दी थी, लेकिन जब वह वहां पहुंचे तब तक उनका निधन हो चुका था, परन्तु वहां से लौटने पर उनकी किस्मत पलट गयी।

उल्लेखनीय है कि उस समय का बेरोजगार और फटेहाल लड़का आज अठारह लाख करोड़ डॉलर की कंपनी का मालिक है। दूसरी ओर नीम करोली बाबा को आध्यत्मिक गुरु मानने वाले उनके गुरु स्टीव जॉब्स की आर्थिक स्थिति उनकी मृत्यु होने पर करीब 48 लाख करोड़ डॉलर थी। इसी तरह हॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स को भी कुछ समस्याएं थी। उनकी भी कभी बाबा नीम करोली से भेंट नहीं हुई, तब तक उनकी देह पूरी हो चुकी थी। इन विश्व प्रसिद्ध हस्तियों के बयान संलग्न लिंक पर जाकर देखे-सुने जा सकते हैं। वीडिओ लिंक यहाँ है :

आप चाहें तो नीम करोली बाबा, स्टीव जॉब्स और मार्क ज़ुकरबर्ग के नाम लिख कर गूगल कर सकते हैं। एक प्रामाणिक वीडियो यहाँ इस लिंक में भी है :

हाँ तो, मुझे इस विषय पर लिखने का ध्यान इसलिए आया, क्योंकि मेरे गुरु भाई और मित्र मेरे एक परिचित और एक तरह से गुरु भाई अशोक कुमार शर्मा हैं। जो उत्तर प्रदेश सरकार से संयुक्त निदेशक सूचना तथा कई मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी के रूप में रिटायर हुए। लेकिन तब से आज तक निरंतर शासन, पुलिस और पैरा मिलेट्री के अधिकारियों को सॉफ्ट सिकिलिंग प्रसिक्षण देते हैं। पिछले तीन साल से म्युज़िक इंडस्ट्री में भजन लेखक के रूप में भी सक्रिय और सफल हैं। कई प्रख्यात संगीतकारों तथा गायको के लिए लिख रहे हैं। सात राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हैं। बहुत अच्छी और भलाई वाली छवि है। अब तक उनकी 68 पुस्तकें देश के प्रख्यात प्रकाशकों द्वारा छापी जा चुकी हैं। उनमें से 24 को बेस्ट सेलिंग पुस्तक माना गया है।

कल उन्होंने फेसबुक पर बाबा नीम करोली का नया चालीसा डाला। जिसे लिखने का उनसे प्रसिद्ध संगीतकार हिमेश रेशमिया के मुख्य सहयोगी प्रियेश वकील ने आग्रह किया था। उन्होंने मुझे बताया कि यह अवसर मिलने पर वह दंग ही रह गये थे। इस पर मैंने उनसे पूछा “ऐसा क्यों सोचते हैं?”

जवाब उन्हीं के शब्दों में सुनिए, “पिछले दिनों अपने बड़े साढू, साले और उनके परिवार के साथ सपत्नीक नैनीताल भ्रमण के दौरान, बिना किसी तैयारी के मैं कैंची धाम पहुँच गया। हमारा कार्यक्रम मंदिर में बाबा के तीर्थ के दर्शनों का बन भी गया था, लेकिन मंदिर के बाहर अपार भीड़ देखकर हम भीतर जाने का साहस नहीं कर पाए। लौटते समय दुखी होकर मैं यह प्रार्थना कर रहा था कि काश बाबा कभी आपके फिर दर्शन कर सकें, ऐसा सौभाग्य दीजिएगा। लौटने पर राजकमल प्रकाशन अशोक महेश्वरी ने यह कहा कि बाबा नीम करोली पर वह एक अच्छी पुस्तक प्रकाशित करना चाहते हैं औरआपके अधीन लेखनाधीन दोनों पुस्तकों को पूरा करके आप इस पुस्तक को भी पूरा कीजिए। इसके तुरंत बाद अगले ही दिन मेरे पास मुंबई से संगीतकार प्रियेश वकील का फोन आया और उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि कैंची धाम पर एक चालीसा तैयार किया जाए, जिसमें उनकी जीवनी का भी उल्लेख हो।कल वह चालीसा प्रियेश वकील द्वारा अपने चैनल पर लॉन्च कर दिया गया। कुछ ही देर में इसके काफी हिट्स हो गए और मैं इसे केवल संयोग नहीं मान सकता कि हॉलीवुड की एक कंपनी ने मुझसे बड़ी अजीब मांग की कि इस चालीसा को अंग्रेजी में तैयार कर दिया जाए। दूसरी ओर उत्तराखंड में गृह विभाग के सचिव रहे मंजुल जोशी इस ने मुझे यह बताया है कि वह इस चालीसा को कैंची धाम ट्रस्ट को भेज रहे हैं और एक फिल्म निर्माता जो कैंची धाम पर फिल्म बना रहे हैं, उससे भी आपका संपर्क कराएंगे। अब इतनी सारी बातों को कैसे संयोग माना जाए?”

क्या इस तरह की घटनाओं का लगातार होना यह सिद्ध नहीं करता है कि सिद्ध पुरुषों की अनुकंपा किसी को सच्चे हृदय से कुछ भी मांगने पर मिल जाती है। अब अशोक जी सपरिवार उस कैंची धाम के अतिथि बनेंगे, जहाँ से वह खाली हाथ और बिना पूजा अर्चना लौट आये थे।

और हाँ यह रहा, बाबा नीम करोली जी महाराज की जीवनी संग चालीसा प्रसिद्ध संगीतकार प्रियेश वकील के संगीत में बाबा नीम करोली चालीसा। लिंक :

आप भी बताइएगा कि आप लोगों में से कितने ऐसे हैं जिन्हें इस प्रकार के अनुभव जीवन में हुए? यह जानना बढ़िया अनुभव रहेगा कि क्या वाकई औरों के साथ भी कहीं किसी भी धाम पर जाने या ना पहुँच पाने पर ऐसा हुआ?

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