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यूपी में जंगलराज : फिर एक पत्रकार पर फर्जी मुकदमा लाद दिया, वो भी एक नहीं, तीन-तीन

हापुड़ से सूचना है कि एक न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर रवि गुप्ता पर कई फर्जी मुकदमें लाद दिए गए हैं. रवि पहले एएनआई में मेरठ दुष्यन्त त्यागी के साथ कैमरामैन हुआ करते थे. हापुड़ शिफ्ट होने के बाद उनके पास एक स्टिंग आया जिसके बारे में उन्होंने अपने टीम लीडर अखिलेश को बता दिया. आफिसियली वर्जन के साथ स्टोरी पास कर दी. तब रवि ने CMO अविनाश कुमार को स्टिंग की ऑडियो वीडियो क्लिप की कॉपी दी और उनका वर्जन लिया. 17 जून 2016 को FTP पर विजवल और मेल पर खबर भेज दी. बाकी डिटेल उन्होंने टीम लीडर को व्हाट्सएप्प पर सेंड कर दी.

हापुड़ से सूचना है कि एक न्यूज एजेंसी के रिपोर्टर रवि गुप्ता पर कई फर्जी मुकदमें लाद दिए गए हैं. रवि पहले एएनआई में मेरठ दुष्यन्त त्यागी के साथ कैमरामैन हुआ करते थे. हापुड़ शिफ्ट होने के बाद उनके पास एक स्टिंग आया जिसके बारे में उन्होंने अपने टीम लीडर अखिलेश को बता दिया. आफिसियली वर्जन के साथ स्टोरी पास कर दी. तब रवि ने CMO अविनाश कुमार को स्टिंग की ऑडियो वीडियो क्लिप की कॉपी दी और उनका वर्जन लिया. 17 जून 2016 को FTP पर विजवल और मेल पर खबर भेज दी. बाकी डिटेल उन्होंने टीम लीडर को व्हाट्सएप्प पर सेंड कर दी.

स्टिंग में दिखाया गया है कि बीएमएस डिग्री धारी डॉक्टर कपिल सिंभावली में अपनी पत्नी के साथ क्लीनिक पर बैठते हैं. दोनों डॉक्टरों की क्लीनिक पर NGO के लोग पहुंचते हैं और अपने साथ की महिला को 3 महीने से अधिक का ग़र्भवती बताकर ग़र्भपात करवाने को कहते हैं. डॉक्टर मना तो नहीं करते पर अपनी मजबूरी बताते हैं कि बच्चा 3 महीने से अधिक का हो गया है इसलिए ब्लीडिंग ज्यादा होगी पर आप का काम हो जायेगा, बस खर्च कुछ ज्यादा होगा. डाक्टर उन लोगों को निदान हॉस्पिटल डॉक्टर दीपशिखा के यहाँ रेफर कर देते हैं. वहाँ जाकर मरीज डॉक्टरों की बात फ़ोन पर करवाता है जिसमें डॉक्टर कपिल और डॉक्टर दीपशिखा गोयल आपस में बच्चे की हत्या की सुपारी की बात करने लगते हैं. कीमत तय होती है ₹6500 और डॉक्टर दीपशिखा गोयल ऑन कैमरा 6500₹ में 3 माह से अधिक का गर्भपात करने को तैयार हो जाती हैं. सच्चाई ये है कि जो महिला गई थी, वो गर्भवती नहीं थी. यह सब केवल डाक्टरों की अंधेरगर्दी उजागर करने के लिए किया गया था.

कुछ दिनों बाद थाना सिंभावली के अंतर्गत कुछ लोग डॉक्टरों का स्टिंग करते हुए पकड़े गए और पुलिस के सहयोग से डॉक्टरों ने उन पर फर्जी पत्रकार होने का मुकदमा दर्ज कर दिया. हालांकि उन्होंने अपना परिचय “सेव चाइल्ड सेव इंडिया” नामक NGO की तरफ से दिया था पर उनकी एक न सुनी गयी और फर्जी करार देकर उन्हें जेल भेज दिया गया. उसी FIR में रवि गुप्ता का भी नाम जोड़ दिया गया और मुकदमा दर्ज हुआ रंगदारी मांगने का.

रवि ने खबर भेजी 17 जून को और न्यूज़ ग्रुपों मे वीडियो वॉयरल हुआ 19 जून 12:30 am को. इन ग्रुपों में हापुड़ के अधिकारी भी थे. मामला सभी के संज्ञान में था. ऐसे में रवि पर फर्जी मुकदमा क्यों. न्यूज़ चलाई 17 जून को, मुकदमा हुआ 21 जून को. वो भी एक नहीं, तीन तीन. रवि गुप्ता का कहना है कि उन्होंने एक स्टिंग हापुड़ कोतवाली का कर लिया था और स्टोरी ANI मेरठ से पास हो गयी थी. मामला कुछ ऐसा था जगन्नाथ यात्रा निकल रही थी हापुड़ में और 3 मोबाइल चोर शक के आधार पर उठा कर कोतवाली पुलिस थाने लेकर आती है. sho का सारथी उन्हें पैंट से बांधने वाली बेल्ट से बेरहमी से मरता है. देख़ने में वो लड़का नाबालिग लग रहा था. तब DIG मेरठ ने मामले का संज्ञान लेकर आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया था. इसी खुन्नस में पुलिस ने तीन तीन मुकदमे डाल दिए. रवि का कहना है कि आखिर कब तक पत्रकारों पर झूठे मुकदमे होते रहेंगे. जब कोई पत्रकार सच्चाई उजागर करता है तो काले धंधे के लोग अपने पैसे और संबंध के बल पर पत्रकारों पर झूठा मुकदमा दर्ज करवा देते हैं.

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1 Comment

1 Comment

  1. ravigupta

    August 22, 2016 at 2:37 pm

    मै अपने साथियो से पुछना चाहता हु जब मे डॉक्टरों के क्लानिक पर गया और वहाँ से भागा तो पुलिस ने cctv फोटोज निकलवाई,और निकलवाई तो क्या मुझे वहाँ से भागते हुए देखा,और नहीं निकलवाई तो क्यों………….

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