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18 सौ करोड़ का सन्दिग्ध ट्रांजेक्शंस : एचसीबीएल और सहारा के खातों में हो रहा था खेल !

लखनऊ : सहारा के लिए मनी लांड्रिंग के खेल में कथित तौर पर शामिल होने के कारण पाबंदियां झेल रहे एचसीबीएल पर पांच महीनों के दौरान 1847 करोड़ रुपये के सन्दिग्ध ट्रांजेक्शंस में भी शामिल होने का आरोप है। इन सर्कुलर (घुमावदार) ट्रांजेक्शंस के लिए सहारा ग्रुप की तमाम कम्पनियों के खातों के साथ-साथ एचसीबीएल के खाते का भी इस्तमाल किया गया। सहारा के साथ ऐसी ही गतिविधियों में शामिल होने के कारण अंततोगत्वा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का शिकंजा एचसीबीएल पर कस गया और बैंक का लाइसेंस रद् किए जाने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। 

लखनऊ : सहारा के लिए मनी लांड्रिंग के खेल में कथित तौर पर शामिल होने के कारण पाबंदियां झेल रहे एचसीबीएल पर पांच महीनों के दौरान 1847 करोड़ रुपये के सन्दिग्ध ट्रांजेक्शंस में भी शामिल होने का आरोप है। इन सर्कुलर (घुमावदार) ट्रांजेक्शंस के लिए सहारा ग्रुप की तमाम कम्पनियों के खातों के साथ-साथ एचसीबीएल के खाते का भी इस्तमाल किया गया। सहारा के साथ ऐसी ही गतिविधियों में शामिल होने के कारण अंततोगत्वा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का शिकंजा एचसीबीएल पर कस गया और बैंक का लाइसेंस रद् किए जाने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। 

शुक्रवार (1 मई) के अंक में कैनविज टाइम्स ने बताया था कि एचसीबीएल (हिन्दुस्तान को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड) पर आरबीआई द्वारा लगाई गई पाबंदी की असल वजह उसका कथित तौर पर सहारा के साथ मनी लांड्रिंग में शामिल होना है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे पांच महीनों में 1847 करोड़ रुपये के सर्कुलर (घुमावदार) ट्रांजेक्शंस में सहारा और एचसीबीएल शामिल रहे। आरबीआई के लखनऊ रीजनल ऑफिस ने पाया कि 11 मई 2012 से 27 सितम्बर 2012 के बीच कई ऐसे सन्दिग्ध ट्रांजेक्शंस किए गए जो मनी लांड्रिंग निरोध अधिनियम-2002 के मानकों के विपरीत थे। इसकी जानकारी आरबीआई को देना तो दूर, एचसीबीएल के बैंक एकाउंट का भी इस खेल में इस्तमाल होता रहा। 

कैसे होता रहा यह खेल 

आरबीआई की समीक्षा में पाया गया कि 11 मई 2012 को एचसीबीएल में स्थित सहारा इंडिया के एकाउंट से 80 करोड़ रुपये सहारा इंडिया कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन के एकाउंट में ट्रांसफर हुए, यह एकाउंट भी एचसीबीएल में ही था। उसी दिन यह 80 करोड़ रुपये कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन के एकाउंट से निकल कर एचसीबीएल में ही स्थित सहारा इंडिया मास कम्युनिकेशन के एकाउंट में पहुंच गए। कुछ ही देर बाद इस एकाउंट से 78.36 करोड़ रुपये एचसीबीएल में ही स्थित सहारा इंडिया हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के एकाउंट में पहुंच गए। 14 मई 2012 को इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के एकाउंट से 78 करोड़ रुपये वापिस सहारा इंडिया के एकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए। 

खेल यहीं नहीं रुका, 11 मई 2012 को ही सहारा इंडिया के एकाउंट से एक और ट्रांजेक्शन शुरू हुआ। यहां से 102.88 करोड़ रुपये भानुमती सिटी होम्स बाराबंकी प्राइवेट लिमिटेड के एचसीबीएल में ही स्थित एकाउंट में ट्रांसफर हुए। कुछ ही देर बाद यहां से निकलकर यह रकम सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के एकाउंट में गई और यहां से होते हुए 103 करोड़ रुपये वापिस सहारा इंडिया के एकाउंट में जमा हो गए।

सन्दिग्ध ट्रांजेक्शन का तीसरा खेल शुरू हुआ पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में स्थित एचसीबीएल के चालू खाते से। 5 जून 2012 को यहां से 564 करोड़ रुपये भानुमती सिटी होम्स के एकाउंट में गए, कुछ देर बाद भानुमती के एकाउंट से 440.94 करोड़ रुपये सहारा रियल स्टेट और 123.05 करोड़ रुपये सहारा इंडिया के एकाउंट में ट्रांसफर हो गए। उधर सहारा रियल स्टेट की ओर से भी 441 करोड़ रुपये सहारा इंडिया के एकाउंट में पहुंचे। अंततः 560 करोड़ रुपये एचसीबीएल में स्थित सहारा इंडिया के एकाउंट से आईएनजी विस्या बैंक में स्थित सहारा इंडिया के दूसरे एकाउंट में चले गए। 

26 सितम्बर 2012 को 700 करोड़ रुपये का सफर सहारा इंडिया कॉमर्शियल कॉर्पोरेशन के पीएनबी में स्थित चालू खाते से शुरू हुआ, जो इसी बैंक में स्थित एचसीबीएल के चालू खाते में पहुंचा। इसी दिन यहां से ये 700 करोड़ रुपये एचसीबीएल में स्थित सहारा प्राइम सिटी के एकाउंट में ट्रांसफर हो गए। कुछ देर बाद यहां से भी ये भारी भरकम रकम निकली और 74 पार्टनरशिप फर्म के एचसीबीएल स्थित खाते में पहुंची। कुछ पलों बाद इस फर्म के एकाउंट से यह रकम आरटीजीएस के जरिये सहारा इंडिया कॉमर्शियल एकाउंट के खाते में जमा हो गई। यानि एक ही दिन में इतनी बड़ी रकम जहां से चली थी वहीं वापिस पहुंचा दी गई। 

अगले दिन यानि 27 सितम्बर 2012 को पीएनबी स्थित सहारा क्यु शॉप यूनिक प्रोडक्ट रेंज लिमिटेड के एकाउंट से 400 करोड़ रुपये एचसीबीएल के एकाउंट में ट्रांसफर हुए। यहां से एचसीबीएल में स्थित 74 पार्टनरशिप फर्म के एकाउंट में जाने बाद वापिस, जहां से चले थे वहीं यानि सहारा क्यु शॉप के एकाउंट में वापिस पहुंच गए। 

लखनऊ के हिंदी दैनिक कैनविज टाइम्स के रिपोर्टर लेखक चंदन श्रीवास्तव से संपर्क : [email protected]

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