सरकारी विज्ञापन को लेकर सोनिया गांधी के सुझाव पर आईएनएस ने बहाए घड़ियाली आंसू

रविंद्र अग्रवाल

वेजबोर्ड लागू करने को लेकर बेशर्मी और ढिठाई से बोला झूठ

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के केंद्र सरकार को सरकारी विज्ञापनों पर रोक के सुझाव पर तिलमिलाया अखबार मालिकों का संगठन आईएनएस घड़ियाली आंसू बहा रहा है। आईएनएस ने विपक्षी नेता के सुझाव के खिलाफ जारी बयान में बेशर्मी की हदें लांघते हुए ऐसा ना करने के पीछे प्रिंट मीडिया की विश्‍वसनीयता के अलावा वेजबोर्ड लागू होने का बेतुका और सरासर झूठा हवाला दिया है।

सच्‍चाई तो यह है कि आईएनएस से जुड़ा लगभग हर अखबार मालिक अपने कर्मचारियों को वेजबोर्ड की सिफारिशों के तहत वेतन दिए जाने के खिलाफ कोरोना वायरस की तरह हर उस कर्मचारी को शिकार बनाता जा रहा है या बना चुका है, जिसने भी मजीठिया वेजबोर्ड के तहत संशोधित वेतन की मांग की है।

लगभग किसी भी समाचारपत्र संस्‍थान ने वर्ष 2011 से अधिसूचित मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद लागू नहीं किया है। इस वेजबोर्ड को लागू करवाने की लड़ाई में शामिल हजारों अखबार कर्मचारियों को प्रताड़ित करके उनकी नौकरियां छिन ली गई हैं। वेजबोर्ड के तहत वेतन की रिकवरी से जुड़े हजारों विवाद सुप्रीम कोर्ट होते हुए अब श्रम न्‍यायालयों में लंबित चल रहे हैं।

इस सबके बावजूद आईएनएस ने जिस ढिठाई से अपने कर्मचारियों को वेजबोर्ड के तहत वेतन देने का हवाला देकर सोनिया गांधी के सरकारी विज्ञापन बंद किए जाने के सुझाव का विरोध किया है वो इनकी बेशर्मी से झूठ बोलने की आदत और धनलोलुपता को ही दर्शाता है।

न्‍यूजपेपर इम्‍पलाइज युनियन ऑफ इंडिया(एनईयूआई) का अध्‍यक्ष होने के नाते मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मांग/आग्रह करता हूं कि कारोना महामारी के इस संकट में सरकार सिर्फ उन्‍हीं सामाचारपत्र संस्‍थानों को सरकारी विज्ञापन जारी करे जो अपने बीओडी के माध्‍यम से प्रस्‍ताव पारित करके इस आशय का शपथपत्र देता है कि उसने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को केंद्र सरकार की 11.11.2011 की अधिसूचना और माननीय सुप्रीम कोर्ट के 07.02.2014 और 19.06.2017 के निर्णय के अनुसार सौ फीसदी लागू किया है और उसके किसी भी कर्मचारी का श्रम न्‍यायालय या किसी अन्‍य न्‍यायालय में वेजबोर्ड से जुड़ा का विवाद लंबित नहीं है।

साथ ही इस संस्‍थान के दावे की सत्‍यता के लिए राज्‍य और केंद्र स्‍तर पर श्रमजीवी पत्रकार और अखबार कर्मचारियों की युनियनों के सुझाव व आपत्‍तियां लेने के बाद ही इन अखबारों को सरकारी विज्ञापन जारी किए जाएं और वेजबोर्ड लागू ना करने वाले समाचारपत्र संस्‍थानों को सरकारी विज्ञापन देना पूरी तरह बंद किया जाए। ऐसी ही व्‍यवस्‍था राज्‍य सरकारों को भी करने के निर्देश जारी किए जाएं।

रविंद्र अग्रवाल

वरिष्‍ठ पत्रकार एवं अध्‍यक्ष, एनयूईआई

संपर्क- 9816103265

ईेमेल- ravi76agg@gmail.com

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