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सुख-दुख

प्लॉट, फ़्लैट, शॉप, ऑफ़िस बिल्डिंग में इन्वेस्ट करते वक्त ज़्यादातर लोग अपने क़रीबियों से राय नहीं लेते!

महक सिंह तरार-

हम चवन्नी खर्चने में अक़्ल लगायेंगे, बेशक रुपया कहीं डुबो दे !

एक सर्वे कहता है की, 76% भारतीयों अनुसार प्रॉपर्टीज़ में इन्वेस्टमेंट करना बिल्कुल सही है। वैसे भी, हम भारतीयों की 73% इन्वेस्टमेंट है भी प्रॉपर्टीज़ में ही। हमें समझने के लिये एक ओर सर्वे किया गया की हम कुछ ख़रीदते हुए क्या किसी की डिरेक्ट/इंडिरेक्ट सलाह मानते है। उसमें सामने आया की ऑनलाइन निर्णयों में 93% की राय अच्छे/बुरे रिव्यूज़ देखकर बदल जाती है। यहाँ तक की एक जैसे सुविधाओं/फ़ीचर वाले ख़रीद में भी अच्छे रिव्यू वाले प्रोडक्ट के लिये 15% ज़्यादा पैसे देने को 68% लोगो की सहमती थी।

हम आम मोबाइल, जूते, कार, बाइक, सिनेमा, रेस्टोरेंट इत्यादि कुछ हज़ार खर्चने में भी कई कई लोगो की राय अनुसार तय करते है।
मगर
मगर
मगर.….
…जब हम में से अधिकतर कोई प्लॉट, फ़्लैट, शॉप, ऑफ़िस बिल्डिंग में इन्वेस्ट करते है तो किसी दोस्त रिश्तेदार तक को नही पूछते/बताते। हमारे पास एक्स्ट्रा पैसा है, ये बात शायद हम अपने भाई, भाभी, ननद, ससुराल या दोस्तों से छुपाते है। अब रियल इस्टेट कोई दो चार लाख का मामला तो है नही, लाखों करोड़ों का मामला है, सारी उम्र की कमायी लगती है, मगर ऐसे में आप निर्णय के लिये किस पर निर्भर है !

ज़रा सोचिये? जी, आप निर्भर करते है प्रॉपर्टी एडवायजर पर। ओर प्रॉपर्टी अड्वाइज़र खुद किस पर निर्भर है? 99% बिल्डर द्वारा दी गयी झूठी सच्ची जानकारी पर। ओर कोई बिल्डर अपने माल को ख़राब बताता है या अपनी माली हालत का खुलासा करता है… सवाल ही नही उठता। ओर आपके प्रॉपर्टी अड्वाइज़र में फ़ीज़िबिलिटी अनालिसिस, कम्पैरटिव मार्केट अनालिसिस, बिल्डर की फ़ायनैन्शल वायअबिलिटी, टैक्स कॉम्प्लिकेशंज़ जानने समझने की क्षमता ही नही है। फ़ायनैन्शल अक्यूमेन तो कहने ही क्या…

विडम्बना ये की, अधिकतर लोग जो जीवन में किसी कैरियर में ना जा सके वे महंगी महंगी कुर्सी मेज़ बिछा कर डीलर बन कर बैठ गये। अब वो आपकी ज़िंदगी के सबसे बड़े दो तीन फ़ैसलों में से एक का निर्णय करते है।

इसी सेक्टर ने दुनिया में 90% अरबपति पैदा किये हैं।

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